सलोनी के नाना ने मॉम को वो रगड़ा ! | Erotic Stories
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सलोनी के नाना ने मॉम को वो रगड़ा !

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हम लोग रोमिला रानी के परिवार में गए थे। रोमिला के छोटे सुपुत्र कृष्णकांत का विवाह समारोह हाल ही में हुआ था। वहां रिश्तेदारों की भारी भीड़ थी। मॉम ने मुझे ये बताया की रोमिला का घर-परिवार भी हमारी तरह कमोबेशी सेक्सी है। इससे मुझे उत्सुकता हुई कि मैं जानूं की वहाँ कौन कितने पानी में है। क्या रोमिला आंटी ‘सेक्सी’ है? क्या रोमिला के पति उमाकांत जी ने अपनी बेटी को कभी चोदा ? रहस्य क्या है? वहां अगर मेरी नजर पाँच तीन-एजर लड़कियों पर पड़ी तो मैंने यह भी देखा कि कुछ पट्ठे लड़कों की नजर पिंकी, रिंकी, और ऊर्मि पर गड़ी हुई है। वहाँ सलोनी आंटी ने मॉम से लंबी मुलाक़ात की। सलोनी के दादा 58 वर्ष के थे और नाना 62 के। सलोनी का एक मामा 38 का था तो दूसरा 35 का। उन दोनों की नजर भी मेरी मॉम के सेक्स पर थी। सलोनी के दादा भी, मैंने देखा उर्मि को टुकुर-टुकुर ताक रहे थे। सारा माहौल सेक्सी था।

सलोनी आंटी ने मेरी मॉम को किस तरह पटाया कि वो उसके नाना से हमबिस्तर होने तयार हो गई। कुछ तो बात है। क्या मेरे दिवंगत पापा सलोनी से सेक्स-संभोग करते थे, या उन्होने किया? मुझे लगा शायद उन्होने किया ही होगा। उस दिन नई अम्मां की चुदाई मैंने की तो वो सेक्सी मां मेरी मॉम ने ढूँढी, यही मुझे पता था पर बाद में जाना कि वो सलोनी आंटी ने ढूँढी। उस रात जब मैं नई अम्मां रानी को चोद चुका तो दूसरे दिन मॉम ने मुझसे पूछा—- ‘ बता, तेरी नई मां से तुझे चुदाई-सुख मिला? मैं परम प्रसन्नता से मुस्कराया। तो मॉम खिली और मुझसे कहा– ‘तू सलोनी आंटी को चोदेगा? ‘ इस वक्त मैंने मॉम से पूछा कि उसने सलोनी के नाना को क्यों पसंद कर लिया? इस पर मॉम ने हँसते हुए कहा– ‘ देख बेटा, कुछ बड़ी उम्र के दादा-नाना लोग लड़की चोदने का गुरुमंत्र जानते हैं। सलोनी के नाना और दादा साधारण पुरुष नहीं है बल्कि महान महापुरुष हैं। उस रात मैं सलोनी के नाना से चुदी तो सलोनी भी खुद अपने दादा जी से चुद रही थी। इन दोनों ( दादा-नाना )_ की सेहत बहुत कड़क पहलवानों जैसी है, ये ऐसे नुस्के जानते है जिससे वे जल्दी नहीं झड़ते। सलोनी के दादा-नाना पर तो जवान लड़कियां भी मरती हैं।

फिर मॉम बोली: ‘ तू जानता है, सलोनी के नाना भोमप्रताप जी ने मुझे कैसे-कैसे रगड़ा??’ मैं उत्सुकता से बोला: ‘ हां, मॉम ”। मॉम बोली, देख मैं 38 साल की, वो मेरी बाप की उम्र के। जब मैं उनके सुनसान कमरे में पहुंची तो उन्होंने घुसते ही मुझको दबोच लिया। पहला हमला उन्होने मेरे मुंह पर किया, मेरे ओठ मर्दाना ताकत से दबा दिये। वो कमरा एक बड़े फ्लेट का हिस्सा था। दबोचे-दबोचे ही उन्होंने मुझे घसीटा और एक टॉइलेट में ले आए। टॉइलेट बहुत बड़ी थी। मैं उनके चंगुल से निकलने के लिए हाथपैर मार रही थी पर मेरी चली नहीं। उनकी गिरफ्त कसाई की तरह थी। उन्होंने वासना के जोश में मेरा गला पकड़ लिया था। मैंने अपनी टांगों से, एक टांग से उनकी तरफ लात उछाली, इस पर वो हँसे। फिर उन्होने मुझे फर्श पर गिरा दिया। मैं दो सेकंड के लिए गिरफ्त से छूटी तो टॉइलेट से भागने लगी, पर दरवाजा बंद था, वो कोई ऑटोमैटिक लॉक था।। पीछे मुड़ी तो उन्होने मेरी साड़ी में हाथ डाल दिया था। फिर साड़ी यों खींची कि वो फट गई, मेरे बदन से अलग हो गई और मैं एक झीने पेटीकोट में रह गई। उन्होने मुझे दे धक्का दुबारा जमीन पर गिराया, नंगा फर्श था, और वो मेरे पर चढ़ गए। अब वो मेरे गालों पर झापड़ रसीद करने लगे। उनमें एक दुष्ट जैसा बल आ गया था। यह सब टॉइलेट में हुआ; टॉइलेट बहुत बड़ा था। कम से कम दो चारपाई आ सके इतनी तो उसमें खाली जगह थी। साड़ी उतारने के बाद उन्होने मेरा ब्लाउज नोंचा। मेरी उनसे लड़ने-भिड़ने की ताकत खत्म सी हो गई थी। उन्होंने मेरा ब्लाउज फाड़ा, और ब्रा उतार फेंक दी। मेरे मम्मों के कबूतरों को वो दोनों हाथों से मसलने-मरोड़ने लगे, आटे की तरह गूंधने लगे। वे मुट्ठी भर-भर कर ताल ठोंक रहे थे। मम्मों पर भी झापड़ बरसा रहे थे। फिर वो मेरे पर भैंसे की तरह चढ़ गए, उनका मोटा और लंबूतरा लौड़ा मेरी चुत में सरकने लगा। मैं एकदम निढाल थी और कोई हरकत नहीं कर रही थी, हिलने की ताकत तक खत्म हो गई थी। तब उन्होने मुझे छोड़ दिया। मैं उनकी तरफ दीन भाव से देख रही थी। फिर उन्होने टॉइलेट में बनी स्पेशल अलमारी से कोई शर्बत जैसी चीज मुझे पिलाई, शायद कोई दवा थी। उससे मेरी थकान उतर गई, फिर नशा -सा आने लगा। फिर ताकत भी आई, और मैं बहकने लगी। दवा के असर से मुझमें कामज्वाला दहकने लगी। वे मुस्कराइए और मुझे आँख मारी।

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मैंने बुड्ढे नाना का कसैला बदन देखा। उनका पेट कुछ आगे आया हुआ था, और जांघे विशाल थी; मांसपेशियों की मछलियाँ चमचमा रही थीं। छाती पर बाल थे। लौड़े के इर्दगिर्द भी झांटें थीं। उनकी हड्डियाँ मजबूत थी। कामज्वाला के कारण मैं भी खुलकर अश्लील बोलने लगी। शायद वो यही चाहते थे। वे सांड की तरह अपनी दोनों जांघों को चौड़ा कर खड़े हो गए और मुझसे गंदी जुबान में बोले—” बेटी, एक काम कर!! फिर उन्होंने आँखों से, हावभाव, व इशारों से मुझे कुछ समझाया। मैं लेटी -लेटी ही फर्श पर फिसलते हुए उनकी दोनों टांगों के बीच आ उनके नंगेपन के दर्शन किए। उनकी गाँड़ बहुत भारी थी; उनके अंडकोश बड़े-बड़े थे जो उनकी हरकत के कारण हिल रहे थे। उनका लंड विकराल था, लंड का टोपा लाल बूंद था। वासना से मैंने उनकी गाँड सहलाना शुरू किया। मेरी नाजुक अंगुलियाँ उनकी गाँड के छेद से सरकते हुए उनके मोटे अंडकोश तक आती-जाती रही। फिर मैंने उनका लंड पकड़ लिया और उसे रंडी की तरह चूँसने लगी। मैंने उनका अंडकोश भी मुंह मे भरा।

अब उन्होने मुझे खड़ी किया और मेरी गाँड के पीछे चिपट गए। बहुत अश्लीलता से बोले’ ” ” बेटी, तुझे मर्द से गाँड मरवाना पसंद है? बोल, मज़ा आ जाएगा!” मैं बोली: ” आप औरत की गाँड भी मारते हैं?” उन्होने जवाब फेंका: ” मैंने तो कच्ची-कमसिन लड़कियों की भी गाँड मारी है, बिलकुल मासूम, तुम तो फिर भी खेली खाई हो”। तब मैंने अपनी गाँड खुद अपने हाथों से चौड़ी की और बोली ; ” हां, पापा, अपनी बेटी की गाँड मारो!!” मॉम हँसते हुए बोली, ” इस तरह के बाँके मर्द से, भले ही 62 का हो अपनी गांड मरवाने का मज़ा ही कुछ और है!!!” मैंने भी रस लेकर पूछा, ” फिर क्या बुड्ढे ने तेरी गां ड मारी?? ” मॉम हँसते हुए बोली, ” हां, मुन्ना! बुड्ढे ने मेरी गांड के दोनों गोलक धर खींचे और दबाये, फिर मेरी पूरी गांड को चाटा, गांड के छेद में थूक मला, फिर कई-कई बार अंगुल घुसेड़ी; तब जाकर लौड़ा ठरकाया। पता नहीं कैसे उसने ताकत लगा पूरा लौड़ा मेरी गांड की मांस में पेल दिया, यहाँ तक कि उनका अंडकोश भी मुझे मेरी गांड के छेद के नजदीक चुभने लगा।

गां ड मारने के बाद बुड्ढे ने मुझे जमीन पर पीठ के बल लिटाया और देखते-देखते वो मेरे मुंह पर आ गया। कुछ इस तरह कि उसकी गांड का छेद मेरे ओठों से चिपक गया। फिर उसने कहा कि मैं अपनी जीभ निकाल कर उसकी गांड का छेद चाटूँ और अपनी जीभ उस पर रगड़ूँ। यह काम भी मैंने इस तरह किया जैसे मुझे इसमें अद्भुत मज़ा आ रहा हो। इसके बाद उसने मेरे मुंह में अपना पूरा अंडकोश उतार दिया; मेरी जीभ और हलक उसके आँड के मांस व खुरदरी झांट से सट कर लसलसा रही थी ” मॉम बोली, ” बेटा, लंड तो उसने बहुत बाद में मेरे मुंह में भरा। ‘ मुझे उसका लंड चूँसते हुए काफी मशक्कत करनी पड़ी, हर थोड़ी देर बाद मैं थूकती। फिर मुझे खांसी आने लगी। ”

बिलकुल आखिर में उसने मेरी चूत पेली। उस समय रात के दो बज गए थे। अब वो मुझे वहाँ ले गया जहां लेवेतरी, टट्टी जाने की कमोड थी। वो उस पर भद्दी तरह से बैठ गया। उसने मुझे लिटा दिया, और फिर मेरे पर उकड़ूँ चढ़ मेरी चूत इंद्रिय पर छर्र-छर्र पेशाब किया। उसके बाद वो प्लास्टिक का एक मजबूत तिनका लाया और उससे मेरी चुत को छेड़ा। उसका लौड़ा बहुत FAT था, वो बड़ी मुश्किल से मेरी फुद्दी में घुसा। उसने मुझे सिखाया कि नीचे लेटे हुए मर्द पर औरत चढ़ कर कैसे उसका लंड अपनी चुत में घुसाती है, घिस्सा लगाती है, और नीचे की तरफ से ऊपर उछल-उछल कर रगड़पट्टी करती है। उसने बुरी तरह से मेरी चूत को मथा, इतना कि उसकी चूलें हिल गई और गर्भाशय तक उसका लौड़ा चोट मारने लगा। ”

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