मेरी मालकीण और मेरा नसीब – 1 | Erotic Stories
Erotic Stories
Free Desi Indian Hindi Sex stories, Tamil sex stories

मेरी मालकीण और मेरा नसीब – 1

⏰ 1 min read

दिनभर सायकल पर बैठ कर हर जगह घुमा पर कुछ भी उधारी वसुल नही हुई. मै थोडासा डर गया. मेरी मालकीण आज मुझे बहुत ही गंदे तरीके से डाटेंगी ऐसा मुझे लगने लगा. मै अब मालकीण को क्या जवाब दु??? यह सोचते हुये मै दुकान के पास आ गया. तो दुकान मे शेटजी बैठे हुये थे. मुझे देखते ही चिल्लाके बोले,

शेटजी : “सुरेश कैसा हुआ आज का धंदा…?

मैने सायकल दीवार के पास लगाई.

मै : शेटजी सबके पास गया पर….

शेटजी : उधारी नही मिली, यही ना?

शेटजी और चिल्लाके और गुस्से से मुझे बोलने लगे. मै चुपचाप खडा था.

शेटजी : तोह फिर जा, जाके बतादे उसे.

मै डरते हुये अंदर गया. मालकीण ने मसाला पान खाके पलंग पर सुस्ताई से पडी हुई थी. मेरी मालकीण उमर से लगभग 35 से 37 साल की होगी. पर उनका चेहरा 17 ते 18 साल के लडकी जैसा रसीला था. शरीर मजबूत था. स्तनो का आकार बडा होने के कारण उनकी छाती एकदम भरी हुई लगती थी. कमर भी बडी और गोलमटोल थी. पर मालकीण बहुत ही गुस्सेल स्वभाव की थी.

पिछली बार मै जब उधारी वसुल करने गया था तब मेरे दोस्तो के साथ पत्तो से खेलने बैठा था. यह बात मालकीण को किसीने बताई थी. तब से मालकीण ने उसकी तेज नजर मुझ पर रखे हुये थी. मै मालकीण के पास जाते ही उन्होने मुझे देखा और कहा.

मालकीण : सुरेश मैने तुम्हे जो नाम दिये थे, क्या क्या हुआ उनका?

मै : मालकीण हर एक पास गया पर…..

मालकीण : अरे थोडीसी तो कुछ वसुल की या नही???

Also Read: Bhabi se liye maze….

मालकीण गुस्से मे मुझ पर बरस पडी और बोलने लगी.

मै : मालकीण, गुप्ताजी ने कहा है अगले हफ्ते दुंगा.

मालकीण : तोह फिर तू वैसे ही खाली हाथ आ गया…..

फिर मालकीण थोडी देर तक वैसे ही पडी रही, और फिर

मालकीण : सुरेश, तेरा आज का दिन तो खाली ही गया, एक भी काम हुआ नही तेरे हाथो से………..

मै नीचे गर्दन झुकाये वैसे ही खडा था. तभी,

मालकीण : अब एक काम कर.

और लेटे हुये ही मालकीण ने उनकी साडी एकदम से घुटनो के उपर तक ले ली. मालकीण के गोरेचिट्टे पाव नंगे हो गये.

मालकीण : सुरेश, मेरे पैर दबा, कम से कम दिन मे ईतना सा तो काम कर दे तेरे हाथो से……….

मुझे लग रहा था की, मालकीण मूझे बडी बडी गालिया देगी पर सिर्फ पाव दबाने को कह रही है सुनकर मै बहुत ही खुश हुआ. मै झट से जाके पलंग पर बैठ गया और मालकीण का एक पैर धिरे धिरे दबाने लगा. मालकीण आंखे बंद कर के चुपचाप पडी थी. मालकीण के गोरे गोरे पैर दबाते हुये मुझे धिरे धिरे मजा आने लगा. मेरा हाथ घुटनो के उपर तक जा रहा था. धिरे धिरे मालकीण को उनका इस तरह से पैर दबाना पसंद आने लगा. पैरोंका स्पर्श नरम नरम मुलायम सा था. पर कुछ तो अलग आकर्षण मुझे लगने लगा.

मालकीण के दोनो पाव मै बहुत देर तक दबा रहा था. मालकीण ने खुद की साडी फिर से और उपर लेली. गोरी गोरी झांघे नंगी हो गई. केले के पेड के जैसे उनकी झांघे देखकर मेरे मुह मै पाणी आने लगा.

मै : और दबाऊ?

मालकीण : अरे, दबा ना, और किसलिये इन्हे नंगा किया है.

मालकीण गुस्से मे बोली और मै झट से मालकीण का एक पैर दबाना शुरू कर दिया. मेरी पुरी जिंदगी मे मुझे ऐसा स्त्री-स्पर्श कभी नही मिला था की उतना स्त्री-स्पर्श मुझे आज मिल रहा था. मालकीण की गोरी गोरी झांघे बहुत ही आकर्षक दिख रही थी. उनका स्पर्श मन को बहुत ही सुखद लग रहा था. दोनो झांघो पर मेरे हाथ चल रहे थे और मालकीण धिरे धिरे आवाज मे सिसकारीया ले रही थी और मेरा भी शरीर गरम हो रहा है ऐसा लग रहा था. मेरे पॅंट मे हलचल शुरू हो रही है यह मात्र यकिन था. मेरा हाथ झांघो पर से बहुत उपर जा रहा था. मेरा हाथ और उपर लू ऐसा मेरे मन मे आ रहा था. इधर पॅंट मे मेरा लंड लंबा होके सावधान पोजिशन मे खडा हो चुका था. यह काम कभी भी रुकना नही चाहीये ऐसा मुझे लग रहा था. फिर थोडी देर बाद मालकीण पेट के बल लेट गई और झांघे फैलाके बोली.

मालकीण : सुरेश, थक तो नही गये ना?

मै : नही.

मालकीण : अब पुरे मन से दबा, तू जब तक थक नही जाता तब तक दबा.

और मै फिर से उनकी झांघे दबाने लगा.

This story मेरी मालकीण और मेरा नसीब – 1 appeared first on new sex story dot com

Leave a Comment