तीनों कामुक बहनें कुलवधू व नव विवाहिता के लिये सिद्ध अंगवस्त्र पहनने अपने घर के श्रृगार कक्ष में चली गईं, अपनी-अपनी बिटियाओं को छोड़ कर – तीन थीं: एक ७ की, दूसरी १३ की, तीसरी १७ वर्ष की. दो को मैंने अगल-बगल बिठा लिया. तीसरी सबसे बड़ी मेरे सामने खड़ी थी. यह थी पिंकी, उम्र १७ वर्ष. वह जींस व टी-शर्ट में थी. उसके अंगों के उभार साफ दिख रहे थे, मैंने देखा उसके जींस की ज़िप आधी खुली थी. मैंने उसके सिरके बालों को सहलाया, एक हाथ से उसकी कमसिन कमर दबोची, और शर्ट के ऊपर से उसके मम्मों को टटोलते हुए पूछा – ” गुड़िया, तुम्हें कोंकणा आंटी के करतब / फिल्म कला का पता है? ” वह चहकते हुए बोली – ” मालूम है, अच्छा काम कराती है वो! ” मेरे दाईं और कोंकणा की लाडली बिटिया रम्मो बैठी थी. वह १३ साल की ही थी पर समझदार थी. उससे पूछा, ” गुड़िया-मुन्नी, तुझे क्या अपनी मम्मी के सही काम का पता है? वह मुस्कराते हुए बोली – ” अंकल, मैंने तीन बार छिप-छिप कर देखा, वो आप से जो करवाती है, और अंकल जो काम आप सच में करते हो, वो देखा मैंने – मुन्नी-मुन्नी छोरियों के साथ, आप नंगे हो कर. जो करते हो!!! ” मैंने पूछा – ” तो क्या यह काम तुम्हें बुरा लगा? ” वह बोली – ” अंकल, बुरा तो नहीं लगा, शायद कुछ अच्छा लगा था…, पर यह बात आप मम्मी से मत कहना? ”
यहाँ यह बात बताना मैं अपना धरम समझता हूँ कि इन बच्चियों तक से कोंकणा देवी का काम छुपा नहीं रहा. एक बात और मैंने ईमानदारी से महसूस की कि कोंकणा, कादम्बरी व शर्मिला की बच्चियां तक इस कामकला के बारे में जान चुकी थीं. नग्न कामकला देख बच्चियों का कामुक होना स्वाभाविक था. यह तो साफ़ है कि आज खुद इनकी मातारानियाँ इन्हें उचित सेक्स शिक्षा देने के लिए इनके सामने मुझसे अपनी चूत/गांड रगड़वाने को उतावली हैं, तो फिर इन नन्ही मुनियों से हम कामुक पुरुष परहेज क्यों करें?
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मेरे दाईं ओर कोंकणा की बेटी ( रम्मो ) और बाईं ओर उसकी छोटी बहन शर्मिला की छोरी ( निक्की ) बैठी हुई थी., सोफे पर. मैंने उनसे बातें करते हुए अपनी टांगें फैला कर चौड़ी कर दीं, सच कहूँ तो बात आगे बढ़ाने के लिए मेरा एक हाथ रम्मो ( १३ ) के स्कर्ट के भीतर जा उसकी पेंटी पर टिक गया था, मैंने चतुराई से पहले उसकी गांड में अपनी अंगुल रगड़ी. उसने इस पर मीठी सिसकारी भरी तो मैंने निक्की ( ७ ) की गांड में भी अंगुली फंसा दी. कुछ भी कहो, दोनों बच्चियां होनहार थीं इसलिए उन्हों ने अपनी इच्छा से अपने अपने हाथ मेरी पेंट की ज़िप पर खुद-बा-खुद रख दिये थे..
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