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श्रुति और अपने दोस्तो के साथ होली 2

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जब मैं, श्रुति और आदित्या 6 बजे घर पहुंचे। तो

हम लोग फ्लैट के अंदर गए तो देखें कि सब लोग सोफे पर सो रहे थे और सब गीले कपड़े कपड़े में सो रहे थे।

आदित्या सीधा जोती के पास गया और उसकी बूब्स को दबाने लगा।

और श्रुति एक सोफ़े पर लेट गई।

तो मैंने कहा देखो श्रुति, जोती और निहारिका गीले कपड़े में हैं तो उनके कपड़े बदल देने चाहिए और तुम आकर सो रही हो।

तो श्रुति बोली – मैं तो सिर्फ आराम कर रही हू।

तब मैंने कहा – आदित्या चल इनके कपड़े बदल वर्ना इनको ठंड लगेगी।
तब आदित्या ने जोती और निहारिका को बहुत उठाने की कोशिश की मगर वो दोनों नहीं उठीं।

उनको उठाने के चक्कर में संदिप, आनंद, कुणाल राजू और गुंजन सब उठ गए।

फिर आदित्या ने कहा – विक्रम इनको सोने दो और इनके कपड़े यहीं बदल देते हैं।

फिर आदित्या जोती के पास बैठ गया और आनंद साक्षी के पास।
आदित्या ने जोती की टी – शर्ट उतारने की कोशिश की मगर गीली होने की वजह से नहीं उतरी।

फिर आदिल ने टी – शर्ट फाड़ दी और उसकी देखा देखी आनंद ने निहारिका की टी – शर्ट फाड़ दी। तो जोती और निहारिका ऊपर से नंगी हो गई।
तो मैंने कहा – यार टी – शर्ट फाड़ने की क्या जरूरत थी… और पता नहीं इनके साइज़ कि टी – शट मेरे पास है कि नहीं और नहीं हुआ तो इनको ठंड लग जाएगी।

फिर आदित्या बोला – उसका भी इलाज अभी कर देते हैं।
ये बोलकर आदित्या जोती की बूब्स को दबाने लगा और उसके निप्पल को रगड़ने लगा।

तो आनंद भी निहारिका की बूब्स को दबाने और रगड़ने लगा।

तो जोती और निहारिका के मुँह से हल्की कराहने की आवाज आने लगी।

तो आदित्या ने जोती की शॉर्ट्स भी खींच कर निकाल दी और इसी तरह आनंद ने निहारिका की शॉर्ट्स निकाल दिया।
तो दोनों पूरी तरह से नंगी हो गए।

तो आनंद ने निहारिका की बूब्स को मुँह में लेकर चूसने लगा।
उधर आदित्या ने अपना मुँह जोती की चूत पर लगा दिया और उसकी चुत चूसने लगा।

फिर सब कुछ देख कर संदीप श्रुति के पास जाकर खडा हो गया तो श्रुति संदीप को देखकर खुश हो गई।

तो संदीप ने श्रुति की बूब्स को एकदम दबा दी।
तो श्रुति चिल्लाकर मुझे आवाज दी तो मैंने बोला कि उसे भी तो मजे लेने दो।

तो श्रुति मेरे बात को सुनकर चुप हो गई।

तो संदीप ने श्रुति को खड़े होने को कहा तो श्रुति खड़ी हो गई फिर संदीप ने श्रुति को हाथ ऊपर करने को कहा।
तो श्रुति मेरे तरफ़ देखी तो मैंने मुस्करा दिया तो श्रुति चुपचाप अपने हाथ ऊपर कर ली।

तो संदीप ने श्रुति की टी – शर्ट को उतार दिया और श्रुति को ऊपर से पूरा नंगी कर दिया।

तभी गुंजन सब देख कर शर्मा गई और जाने लगी तो मैंने पुछा – कहाँ जा रही है? तुम वापस आ जाओ। और तुम भी सोफ़े के पास खड़ी रहो और सब देखो।
तो गुंजन वहीं खड़ी हो गई।

तभी संदीप ने श्रुति की बूब्स को दबा कर कहा – चलो शॉर्ट्स उतारो अब

तो फिर श्रुति मेरे तरफ़ देखी तो मैंने कहा – निकाल दे, नहीं तो मैं संदीप को फाड़ने के लिये कह दूँगा।

उधर आदित्या अपने कपड़े उतार रहा था और आनंद पूरा नंगा निहारिका की चूत रगड़ रहा था.

फिर मैं और राजू गुंजन के पीछे खड़े हो गए

तो गुंजन बहुत डरी हुई लग रही थी.

तो मैंने कहा – चल हाथ ऊपर कर!
फिर गुंजन चुपचाप हाथ ऊपर कर ली।

तो राजू ने गुंजन की कुर्ता उतार दिया
तो गुंजन ऊपर से परी नंगी हो गई।

फिर गुंजन बोली – विक्रम मुझे छोड़ दो तो मैंने कहा तुम अपने पति से भी तो चुदती है।

तो। गुंजन चुपचाप खड़ी रही।
तब मैंने गुंजन को कहा – चल अब नंगी हो जा और हमारे भी कपड़े उतार

तभी आनंद ने कहा – यार ये जोती और निहारिका तो कोई रेस्पांस ही नहीं दे रही. यार इनको जगाओ.
आदित्या बोला – यार पानी मारेंगे तो उठ जाएगी।

फिर आदिल ने अपना लण्ड जोती के मुँह की तरफ किया और उस पर पेशाब करने लगा।

इसी तरह आनंद भी निहारिका के मुँह पर पेशाब करने लगा।
हम सब हंसने लगे. तभी मूत की धार लगने से जोती जाग गई और उसने जैसे ही मुँह खोला आदित्या ने अपना लण्ड जोती के मुँह में ठूंस दिया और जोती ऊपर बैठ गया।

और आदित्या ने जोती के हाथ को पकड़ लिया।
और आदित्या ने जोती के मुँह में पेशाब करने लगा तो जोती सारा पेशाब पि गई

उधर निहारिका की भी आँख खुल गई मगर उसने मुँह नहीं खोली तो आनंद उसके मुँह पर पेशाब करने लगा।

जब उसका पेशाब करना बंद हो गया।

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तभी मैंने देखा कि कुणाल नंगा होकर जोती के पास आनंद के साथ खड़ा हो गया.

उधर संदीप ने श्रुति को कहा – चलो मेरा लण्ड चूसो।

उधर मैं और राजू गुंजन को पकड़ लिया और उसे नीचे बिठा कर

मैंने अपना लण्ड गुंजन के मुँह में डाल दिया और गुंजन से बोले – चूस इसे.
तो गुंजन मेरे लण्ड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

उधर जोती भी आदित्या के लंड को चूस रही थी।

निहारिका भी आनंद के लौड़े को चूस रही थी और कुणाल के लंड को एक हाथ से पकड़ कर आगे पीछे कर रही थी।
निहारिका कभी आनंद के लंड को मुँह में लेती तो कभी कुणाल के लंड़ को।

और श्रुति संदीप के लंड को भ चूस रही थी।

तभी राजू ने गुंजन के बाल पकड़े और उसका मुँह अपनी तरफ घुमाया और अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया।

तो गुंजन मेरे लंड को हाथ से रगड़ रही थी और राजू का लण्ड चूस रही थी।

तभी मैंने देखा आनंद ने निहारिका के सिर पकड़ रखा था और उसका मुँह जोर जोर से चोद रहा था और कुणाल निहारिका की बूब्स को पागलों की तरह मसल रहा था।
कभी वो उसकी बूब्स दबाता और कभी उसके निप्पल खींच रहा था।

निहारिका की आँखों से पानी आ रहा था पर फिर भी आनंद निहारिका के मुँह में चोदे जा रहा था।

थोड़ी देर में आनंद ने अपना पानी निहारिका के मुँह में छोड़ दिया और अपना लंड उसके मुँह से नहीं निकाला।

फिर आनंद बोला – अगर एक बूंद भी बाहर गिरी तो जमीन से चटवाऊंगा।
तब आनंद ने अपना लंड़ बाहर निकाला।

उधर आदित्या जोती की बूब्स चूस रहा था और तभी उसने जोती के निप्पल को दांत से पकड़ कर खींचा तो वो चिल्लाई – मेरी निप्पल उखाड़ देगा क्या… आह्ह।

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तब आदित्या ने उसे बोला – अभी तो तेरी चूत और गांड फाड़नी है।

राजू ने जोती को लिटा दिया और संदीप ने जोती के मुँह में अपना लण्ड डाल दिया।
और राजू ने जोती की चूत में उंगली डाली और बोला – चुत पूरा पानी छोड़ रही है।

तब राजू ने अपना लंड जोती की चूत पर रखा और एक झटके में आधे से ज्यादा लंड जोती की चूत में घुसा दिया।

मैंने देखा कि साक्षी की आँखों से आंसू आ गये पर वो चिल्ला नहीं पाई क्योंकि उसके मुँह में संदीप का लंड था।

इधर मैंने और आदित्या ने गुंजन का बुरा हाल कर रखे थे।

गुंजन को कुतिया बनाकर मैं उसकी चूत को चोद रहे थे। और आदित्या ने उसके मुँह में लण्ड दे डाल रहा था।
और मैंने गुंजन के चूतड़ों पर बहुत सारे चांटे मारे जा रहे थे।
तो गुंजन के चूतड़ बिल्कुल लाल हो गए थे मगर गुंजन कुछ नहीं बोल रही थी।

आनंद श्रुति का मुँह चोद रहा था। और आनंद श्रुति के सिर पकड़ा और पूरा का पूरा लौड़ा उसके मुँह में ठूंस दिया।

तो श्रुति को साँस लेने में दिक्कत होने लगी।
तो श्रुति आनंद को हाथ से मारने लगी।

तब आनंद ने अपना लंड़ श्रुति के मुँह से निकाला और हंसने लगा।

फिर आनंद ने श्रुति को खड़ा किया और दीवार के साथ सटा दिया। और आनंद ने श्रुति के दोनों हाथों को ऊपर करके अपने एक हाथ से श्रुति को पकड़ लिया।

और आनंद अपने दूसरे हाथ से श्रुति की चूत को दबाने लगा। और अपने दो उंगली को श्रुति की चूत में डाल दीं और अपना मुँह नीचे कर के श्रुति के एक बूब्स को चूसने लगा।

कुछ देर बूब्स से खेलने के बाद आनंद ने श्रुति के एक टांग को ऊपर उठाया और अपना लण्ड श्रुति की चूत में डाल दिया।

और उधर कुणाल निहारिका की चूत चोद रहा था।

फिर मैंने गुंजन को छोड़कर निहारिका के पास गए और अपने लंड को निहारिका के मुँह में डाल दिए और निहारिका के बूब्स और निप्पल को बार बार खींच रहे थे।

और आदित्या गुंजन की चूत चोद रहा था।

उधर संदीप और राजू ने भी अपनी जगह बदल ली।

अब राजू जोती को चोद रहा था और संदीप अपना लण्ड जोती के मुँह में डाल दिया था।

उधर आनंद के गर्दन में श्रुति दोनों हाथ डाले खड़ी थी।
तभी आनंद ने श्रुति की दूसरी टांग भी उठाई और तो श्रुति आनंद के कमर पर दोनों टांगें लपेट ली।

तो आनंद ने अपने दोनों हाथों के सपोर्ट से श्रुति को उठा लिया।
और आनंद अपना लंड श्रुति की चूत में सीधा घुसा रहा था लंड घुसते ही श्रुति आनंद के लंड पर उछलने लगी।

उधर मैंने देखा आदित्या लेट गया और उसने गुंजन को ऊपर लेकर उसकी चूत में लंड़ डाल दिया।
और मैं गुंजन के पीछे खड़े हो गए।
तो गुंजन आदित्या के लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी।

आदित्या ने गुंजन बूब्स को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और एक निप्पल दांतों के नीचे दबा लिया।
तो गुंजन आदित्या के उपर झुकी थी और तो मुझे गुंजन की गांड का छेद दिख रहा था।

तो मैंने अपना लंड गुंजन के गांड के छेद पर रखकर एकदम से घुसा दिए और गुंजन के गांड को चोदने लगे।
तो गुज़र चीखते हुए चुदने लगी।

उधर संदीप लेट गया और जोती अपने मुँह को घुमाकर संदीप के लण्ड पर बैठ गई।

जैसे ही जोती घूमकर संदीप के लण्ड पर बैठने लगी राजू ने जोती के मुँह को खींचकर अपने लंड़ को डाल दिया।

उधर संदीप ने अपना लंड सेट किया और जोती को नीचे खींचकर उस पर बिठा दिया।

और जोती उस पर बैठी तो जोर से चिल्लाई – … मेरी गांड फाड़ दी।

सब ये सुनकर हंसने लगे।

तब संदीप ने जोती की गांड को चोदना शुरू कर दिया। और संदीप ने जोती के बाल को खींचकर अपने ऊपर लिटा लिया।

तो जोती फिर चिल्लाई – क्या कर रहा है?
फिर भी संदीप ने जोती को ऐसे ही पकड़े रखा।

तब राजू ने अपना लंड़ जोती कि चूत में डाल दिया।
तो जोती चिल्लाई – मार दिया।
शायद जोती दो लण्ड एक साथ कभी नहीं लि थी।

उधर आदित्या अभी भी गुंजन को कुतिया बनाकर चोद रहा था।
तभी उसने अपना लंड़ गुंजन की चूत से निकाला और उसकी गांड में डाल दिया।
वो चिल्लाई – मर गई!
और वो सीधा होने लगी।

मगर आदित्या ने उसकी दोनों बूब्स पकड़ के नीचे खींच लिया तो वो सीधा नहीं हो पाई।
और आदित्या उसकी गांड चोदने लगा।

फिर आनंद ने अपना लण्ड श्रुति के चूत से निकाल लिया। उसने अपना लण्ड कुछ सीधा किया और श्रुति को बोला – अब बैठ।
तो श्रुति जैसे ही बैठी उसका लंड श्रुति के गांड में घुस गया।

तो उसका लंड़ आराम से श्रुति के गांड़ में चली गई क्योंकि श्रुति कि गांड़ तो पहले ही हम चोद दिए थे तो गांड में घुस गया

फिर आनंद – श्रुति को ऊपर – नीचे उछल रहा था।

उधर 4 लडकियों की गांड लंडों से भारी हुई थी और साथ में 2 लड़की के चुत और गांड़ दोनों में ही लंड थे सब लड़कियांओ का पानी निकल चुका था मगर लड़के अभी भी सब लड़कियों को चोदे जा रहे थे।

फिर मैंने चिल्ला कर – सब को रुक जाने को कहां, आज कुछ नया करते हैं।

फिर सबने लड़कियों को छोड़ दिया।

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