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श्रुति और अपने दोस्तो के साथ होली 3

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तब मैं गुंजन के पास गए और बोले चलो सोफे पर चलते हैं

फिर गुंजन खड़ी हुई तो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी फिर सोफे के पास पहुंच कर उस पर कोई भी आराम से लेट गई।

फिर मैंने सोफे पर लेट कर लण्ड को सीधा ऊपर कर लिया।

तब मैंने गुंजन से कहा – लण्ड को चूत में डालो और आनंद के तरफ मुँह करके बैठो।

फिर मैंने कहा – अब लंड पर ऊपर नीचे उछलो!
तो गुज़र लंड पर उछलने लगी और तो गुज़र को मजा आने लगा और 5 मिनट में गुंजन ने पानी छोड़ दिया।

फिर श्रुति पुछी विक्रम इसमें नया क्या है?

फिर मैंने कहा बड़ी जल्दी है जानने की?

तब मैंने संदीप को इसारा कर के पास बुलाए और इसारे में संदीप को बोलें।

फिर मैंने गुंजन के बूब्स को पकड़ कर अपने तरफ पिछे लिटा लिए और उसको कसकर पकड़ लिया। और अपना आधा लण्ड गुंजन की चूत में रहने दिए और आधा बाहर निकाल दिए।

और संदीप को इसारा किए तो संदीप गुंजन की चूत के पास आकर चुत को सहलाने लगा।

फिर संदीप ने गुंजन की चूत में एक उंगली डाल दी।

मेरे के साथ एक उंगली के जाते ही गुंजन को मजा आने लगा।

फिर मैंने इसरा किया तो संदीप ने उंगली निकालकर अपने लंड़ को गुंजन की चूत से लगाया और धीरे – धीरे गुंजन की चूत में घुसाने लगा।

और गुंजन की चूत में पहले से ही मेरा लंड था।
और संदीप लंड जरा सा ही अंदर गया था कि गुंजन चिल्लाने लगी – मेरी चूत फट गई आआ… आहाह बचाओ कोई मुझे!

गुंजन उठने लगी मगर आनंद ने उसे पकड़ रखा था।
तब गुंजन हाथ मारने लगी।
तब मैंने कहा इसके हाथ पैर पकड़ो।

तब आदित्या, कुणाल, राजू, जोती, और निहारिका ने उसके हाथ पैर पकड़ लिए।

फिर गुंजन बोली – दो लौड़े एक साथ चूत में बहुत र्दद कर रहा है बाहर निकाल दो।
फिर मैंने कहा – तुम्हारे चुत बच्चा निकल सकता है तो दो लंड़ तो कुछ भी नहीं!

फिर गुंजन को पता चल गया कि चिल्लाने से कुछ नहीं होगा तो गुंजन चुप हो गई।
फिर संदीप ने एक झटके में अपना आधा लौड़ा अंदर कर दिया और दोनों लंड चुत में चला गया।

मेरे और संदीप के लंड एक साथ चुत में था।
फिर मैंने गुंजन को छोड़ दिए तो गुज़र के सीधा होते ही दोनों लंड उसकी चूत में पूरे घुस गए।

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तो गुज़र दर्द से चिल्लाई – मेरी चूत फट गईईई… ईई… आईई… मम्मी!
फिर मैंने गुंजन कि कमर को पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया और थोड़ी देर में दोनों लौड़े उसकी चूत में सेट हो गए।

तो गुज़र ख़ुद ही लंड पर उछल उछलकर मजे लेने लगी।
फिर मैंने आनंद को इसारा किया तो आनंद ने गुंजन को धक्का देकर आगे झुका कर अपने लंड को गुंजन की गांड में घुसा दिया।
तो गुंजन के आंखों से आंसू बहने लगे।
वो बोली – छोड़ दो… बहुत दर्द हो रहा है।

उधर आदित्या ने गुंजन के मुंह मे अपना लण्ड घुसा दिया और कुणाल और राजू ने उसके दोनों हाथ में अपने अपने लंड पकड़ा दिए।

फिर आनंद धीरे – धीरे अपना लंड़ उसकी गांड मे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

धीरे – धीरे गुंजन का दर्द ठीक हो गई और एक साथ 6 लंड के खूब मजे लेने लगी।

तब श्रुति बोली – यार, कितना मजा आ रहा है, छह – छह लंड़ से एक साथ चुद रही है। मुझे भी ऐसे चुदना है।

तो मैंने कहा – आज नहीं, फिर कभी!
फिर श्रुति गुंजन के पास आकर बूब्स पर चूंटी काटी और उससे पूछी – आज तक कितने लंड़ से चुदी हो?

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तो गुंजन बोली – गिनती नहीं है, शादी से पहले बहुत सारे लड़के ने चोदा था।

इतना सुनते ही श्रुति गुंजन के एक बूब्स मुँह में लेकर चूसने लगी।
श्रुति को देखा कर जोती भी उसकी दूसरे बूब्स ‌को मुँह में लेकर चूसने लगी।

उधर मैंने देखा आदित्या और आनंद ने अपनी जगह बदल ली।
और आदित्या गुंजन की गांड मार रहा था और आनंद गुंजन का मुँह चोद रहा था।

गुंजन की आंखें बंद थीं और उसे पता भी नहीं चल रहा था कि कौन किस छेद को चोद रहा है।
और निचे से मैं और संदीप गुंजन कि चुत को लगातार चुत को साथ चोद रहे थे।

साथ में 1.5 घंटे चोदने के बाद सब ने गुंजन को छोड़ दिया और तो गुंजन नीचे बिठ गई थक कर।

फिर मैंने चिल्ला कर कहा – तुम तीनों वाहा क्या कर रही हो, चलो यहां आओ। तो तीनों उठकर आ गईं।

फिर मैंने लंड को श्रुति के मुंह में, अब संदीप ने अपना लंड जोती के मुँह में, आनंद ने निहारिका के मुँह में, कुणाल ने गुंजन के मुँह में डाल कर चुसने के लिए बोले।

सब एक साथ लंड को चूसना शुरू कर दिया।
5 मिनट बाद सबने अपना लण्ड खुद पकड़ा और फिर मैंने सब लड़कियों को बोला – चलो सब अपना मुँह खोलो।

सबने अपना मुँह खोला और फिर सब लड़के अपनी मुठ मारने लगे।

सबसे पहले कुणाल का सफेद गाढ़ा पानी निकला तो उसने चारों के मुँह पर फेंका।
जब वो खाली हो गया तब वो जाकर सोफ़े पर बैठ गया।

फिर आनंद का पानी निकला और इस तरह हम सब ने अपना अपना सारा पानी सब मुँह पर निकाल दिया। सभी लड़कियों के मुँह पर सफेद गाढ़ा चिपचिपा पानी पड़ा था।

फिर मैंने कहा – जाओ तुम सब जाकर नहा लो।

गुंजन बड़ी मुश्किल से चल पा रही थी।

तब तक 8 बज चुके थे।
मैंने बोला – सब जाकर नहा लो, मगर आज कोई कपड़े नहीं पहनेगा।

फिर मैंने फोन उठाकर ख़ान आडर कर दिया।

फिर हम सब साथ में बारी बारी से बाथरूम में नहाने चले गए जिसके साथ जाने का मन था तो।

और नहाने के बाद सब नंगा ही बेड पर सो जा रहे थे नहाने के बाद करीब एक घंटे में ख़ान आ गया।

फिर हम सब नंगे ही बैठ गए खाने के लिए साथ।

और खाना खाने के बाद कुछ देर आराम करने के बाद।

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