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शीला की जवानी : भाग ९

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फ्रेंड्स
मैं शीला यादव, उम्र ३२ वर्ष साथ ही गोरा बदन तो चौड़ी छाती और चूतड बिलकुल ही गोल और गुंबदाकार, अपने जिस्म पर अपने पति के अलावा किसी को हाथ लगाने का मौका नहीं दी लेकिन जब पति मेरे में दिलचस्पी नहीं दिखाने लगा तो मैं अकेली, तन्हा और प्यासी औरत की तरह हो गई लेकिन संयोग अच्छा था की मेरे देवर जी प्रेम हम लोगों के साथ रहने आ गए फिर दोनों के बीच जिस्मानी संबंध बने और पति के ऑफिस जाते ही, बेटा के स्कूल जाते ही हम दोनों एक दूसरे की बाहों में होते और अचानक मुझे ससुराल आना पड़ा तो मैं अपने देवर जी के साथ आई और वहां भी रात को सबके सोते ही दोनों शारीरिक संबंध बनाने लगे। मेरी सासु मां दो दिन में ही स्वस्थ हो गई तो मैं भी राहत महसूस की और एक शाम मैं अपनी ननद श्वेता, सासु मां के साथ बैठकर चाय पी रहे थे की तभी देवर जी आए फिर कुर्सी पर बैठ बोले ” क्यों भाभी एक प्याला चाय मिलेगा क्या
( मैं हंस दी ) जरूर देवर जी ” और मैं चाय का प्याला लिए किचन गई फिर उनके लिए चाय बनाने लगी, आज रात तो मुझे नौकर रामू के साथ मजा लेना था तो देवर जी को शक नही हो इसलिए कुछ बहाना बनाना होता, वैसे भी लड़की हो या औरत वो तो महावारी का बहाना बना सकती है और मैं चाय का प्याला लेकर किचन से निकलने वाली थी की प्रेम वहां आ गया और मैं ” देवर जी चाय ले लीजिए मैं जरा रूम से आई
( वो हंस दिया ) क्या हुआ भाभी, मैं किचन से निकलने लगी तो मेरा हाथ पकड़ लिया तो मैं धीरे से बोली ” देवर जी अभी जरूरी काम है छोड़िए ना ” फिर रूम आकर दरवाजा बंद की और बेड पर कुछ देर लेटी, थोड़ी देर बाद दरवाजा खोल बाहर निकली तो श्वेता उधर से आई ” क्या भाभी आपकी तबीयत ठीक तो है
( मैं बोली ) पीरियड आ गया है श्वेता थोड़ी देर आराम करती हूं फिर खाना…
( श्वेता मेरा हाथ पकड़ बोली ) जाकर आराम कीजिए भाभी खाना मैं बनाऊंगी और रामू भी आता होगा ” मैं रूम में आई फिर लेट गई तो थोड़ी देर बाद देवर जी अंदर आए और मैं बेड पर उठकर बैठ गई तो प्रेम मुझे देख मुस्कुराया ” समझ गया भाभी आखिर आपको क्या हुआ है
( मैं बोली ) अच्छा तो क्या हुआ
( वो बोला ) वही जो हरेक महीने आता है शायद ” मैं सर हिलाकर हामी भर दी और वो रूम से चला गया, मैं बेड पर लेटी रही फिर अपने पति और बेटा से भी बात की, रात के ०८:४५ बजे होंगे की मैं रूम से निकली फिर फ्रेश होने के लिए बाथरूम चली गई, वापस आई तो देखी की देवर जी, ननद और सासु मां खाना खा रही हैं तो रामू वहीं पर खड़ा है, मैं बोली ” रामू इधर सुनो
( वो बोला ) हां दीदी * ” और मेरे पास आया तो मैं बोली ” खाना मेरे रूम में ही लेते आओ ” फिर मैं अपने रूम चली आई और बेड पर लेटकर मोबाइल में कुछ देखने लगी, थोड़ी देर बाद रामू खाना लिए रूम मे आया तो मैं उसे बोली ” खाना को टेबल पर रख ढक दो और इधर सुनो
( वो आया ) सब लोग नींद में रहेंगे तो फिर ” वो मेरा इशारा समझ सर हिलाया और मैं दुबारा लेट गई तो कुछ देर बाद श्वेता मेरे रूम में आई ” क्या भाभी अधिक परेशानी हो रही है
( मैं बोली ) पहला दिन तो थोड़ा दर्द पेट में होता ही है, तुम जाकर आराम से सो जाओ
( श्वेता बोली ) हां भाभी आज रात तो कई दिन बाद इत्मीनान से रूम में सोऊंगी ” और वो चली गई तो मैं बेड पर लेट गई, आधे घंटे बाद मैं उठकर फ्रेश हुई फिर खाना खाई और बरामदे पर देखी की रामू तो अपने बेड पर लेटकर खर्राटे भर रहा है, मैं रूम में आई और बेड पर जाकर लेट गई अभी तो रात के १०:३० बजे थे और मुझे रामू के साथ सेक्स करना था।
मैं रूम का दरवाजा सटाकर छोड़ दी थी ताकि रामू अंदर आ सके और मैं कुछ देर में ही गहरी निंद्रा में सो गई फिर मेरी आंखें तब खुली जब मेरे कमर के पास बैठकर रामू मेरे साड़ी को खोल रहा था, नाईट बल्ब ऑन था तो रामू मेरे सीने पर से साड़ी हटाए कमर से उसे निकाल रहा था और मैं हंस दी ” क्या रामू तुम सो गए थे क्या ” लेकिन वो चुप रहा और मेरे बदन से साड़ी निकाल मुझे पेटीकोट और ब्लाउज में रहने दिया तो मैं उठकर बैठ गई, उसके गाल पर हाथ फेरते हुए उसके पैजामा की डोरी को खोलने लगी तो वो मेरे करीब होकर मेरे चेहरे को चूमने लगा और उसका हाथ मेरे पीठ पर था, मैं उसके पैजामा को कमर से निकाल दी तो रामू खुद नंगा हो गया फिर मेरे ब्लाउज की डोरी खोल मेरे ऊपरी भाग को नंगा कर दिया। मैं उसे बाहों मे लेकर उसके ओंठ पर चुम्बन देने लगी तो रामू मेरे पीठ सहलाते हुए मेरे रसीले ओंठ मुंह में भर चूसने लगा और उसका लन्ड मेरी कमर से चिपका हुआ था, रामू भले ही नौकर था लेकिन काफी साफ सफाई से रहता था और मेरे ओंठ छोड़ वो मेरे पेटीकोट के नाड़ा को खोल दिया, दोनों नंगे थे और मैं उसके ओंठ पर जीभ फेरने लगी तो वो मुंह खोल मेरे जीभ अंदर लिया फिर चूसने लगा और मैं उसके गोद में पैर फैलाए बैठी तो दोनों पैर उसके कमर से लपेट जीभ चुसवाने लगी, मेरे बदन में तो आग लगी हूई थी और रामू थोड़ी देर जीभ चूसा फिर मुझे बेड पर लिटा दिया। शिला तो नंगे अपने जिस्म को देख रही थी और रामू मेरे छाती के ऊपर चेहरा कर बूब्स पकड़े दबाने लगा ” इसको चूसता हूं दीदी
( मैं हंस दी ) अबे साले दीदी नहीं बीबी बोल ” और वो मेरे चूची को मुंह में लिए चूसने लगा साथ ही दूसरे चूची को पकड़ दबाने लगा, मेरी चूत तो खुजलाने लगी और मैं जांघ पर जांघ चढ़ाए चूत को रगड़ने लगी ” आह ओह उह उई आआआह्ह रामू चूस यार चूस मेरी चूची ” रामू मेरे चूची को मुंह से निकाल दिया फिर दूसरे चूची को पकड़ मुंह में भर लिया और चूसने लगा, मैं तो बेड पर चुदवाने को तड़प रही थी की वो मेरे जांघो पर हाथ फेरने लगा और मैं जांघो को फैलाई तो उसका हाथ मेरी चूत पर था, जिसकी फांकों के बीच उंगली डाल रगड़ने लगा और मैं तो कामुकता वश सिसकने लगी ” आह उई मां मर गई अब चोद दे रामू उह आआआह्हह मेरी चूत ” और रामू कुछ देर तक चूची को चूस चूसकर लाल कर दिया फिर मेरे छाती से लेकर पेट तक पर चुम्बन देने लगा, आगे क्या हुआ इंतजार कीजिए।

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