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शीला की जवानी : भाग ८

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फ्रेंड्स
पिछले भाग ” शीला की जवानी : भाग ७ ” में आपने पढ़ा की कैसे मेरे देवर जी मेरे साथ प्यार करने लगे, छत पर मैं दो पैक व्हिस्की पीकर नशे में चूर हुई फिर बिस्तर पर तो नंगे ही लेट प्रेम को प्यार करने का आमंत्रण दी और वो मेरे बूब्स पकड़ मुंह में भर चूसने लगा तो उसका एक हाथ मेरी दूसरे बूब्स को दबाए जा रहा था और मैं उसके लन्ड को पकड़ इस कदर नीचे ऊपर करने लगी मानो गाय के थन से दूध निकाल रही हूं और प्रेम मेरी चूची चूसने में मस्त था तो मैं आहें भर रही थी ” उह उफ उई आराम से चूस प्रेम दांत मत लगाओ प्लीज आआआआह्हह्ह मेरी चूत
( देवर जी चूची मुंह से निकाल दिया फिर दूसरे चूची को पकड़ लिया ) इतनी जल्दी चूत को क्या ” मैं शर्म के मारे चेहरा फेर ली, देवर जी मेरी बाईं चूची मुंह में भर चूसने लगा तो मैं उसके पीठ पर हाथ फेरने लगी और तभी प्रेम का हाथ मेरी जांघो के बीच था, मेरी चूत के दरार में उंगली वो रगड़ने लगा तो मैं उसके जांघो के बीच हाथ लगाए लन्ड पकड़े हिलाने लगी और तभी देवर जी की उंगली मेरी चूत में थी और मैं कामुक हुए तेजी से सांस लेने लगी तो मेरा गोरा चेहरा लाल हो चुका था ” आह ओह उह प्रेम अब बूब्स छोड़ ना चूत को चाट प्लीज ” फिर भी प्रेम मेरी चूची चूसता रहा साथ ही मेरे चूत को उंगली से कुरेद रहा था, उसका १४-१५ सेंटीमीटर लम्बा लन्ड मेरे हाथ में था जिसे हिलाते हुए मैं चूसने को आतुर थी और फिर उसने मेरी चूची को मुंह से निकाला ” क्या भाभी आपके जैसी खेली खाई औरत इतनी जल्दी….
( मैं बोली ) तो फिर रात भर मेरी चूची को ही चूसो ” और देवर जी मेरे बूब्स को पकड़ उसके निप्पल को जीभ से चाटने लगे, काले रंग की निप्पल टाईट थी जिसे वो चाटने लगा और फिर मैं तो उम्र में ०७ साल छोटे लड़के के साथ बिस्तर पर संतुष्ट थी, मेरे पेट से लेकर कमर तक वो चूमने लगा साथ ही मेरे गाल पर हाथ फेर रहा था तो मैं उसके हाथ पकड़ अपने बूब्स पर लगाई जिसे वो दबाने लगा और फिर कमर तक चूमने के बाद देवर जी मेरी ओर देखे ” तकिया दीजियेगा
( मैं पास पड़े तकिया उठाकर उसको दे दी जिसे वो मेरी चूतड के नीचे लगाया तो मैं पूरी तरह से जांघो को फैला दी ) ले अब चाट चाट कर इसका रस निकाल दे फिर
( देवर जी मेरे जांघो पर हाथ फेरने लगे ) क्यों शीला बिना लन्ड चूसे चुदाई का मजा लेगी ” मैं सर हिलाकर हामी भर दी फिर देवर जी मेरी जांघो के बीच चेहरा लगाए और मेरी चूत पर चुम्बन देना शुरू किए तो मेरा पूरा बदन कामाग्नि के गिरफ्त में था, प्रेम मेरी चूत जिसकी फांकें मोटी थी उसको अलग कर जीभ से गुदाज अंग को चाटने लगा तो मैं आहें भरने लगी ” आह उह ओह आआआह्हह पूरा जीभ डालो ना डियर ” और मेरी चूत जोकि ढीली थी में उसका पूरा जीभ था जिसे वो नचाने लगा तो मेरी जान निकलने लगी ” आह ओह उह अब बस करो नहीं तो मुंह में ही मूत दूंगी ” प्रेम कुत्ते की तरह जीभ से लपलप चूत चाटने लगा और मैं रह रहकर चूतड को ऊपर की ओर उठाती, मुझे तो तेज मुतवास लगी थी और प्रेम अब मेरी चूत के फांकों को उंगलियों के बीच लेकर दबाने लगा ” आह ओह ये क्या कर रहे हो प्रेम तेरी श्वेता की चूत नहीं है
( देवर जी हंस दिए ) उसकी बात क्यों कर रही हैं आप ” और फिर मैं उनके हाथ हटाई फिर नंगे ही टॉप फ्लोर पर जाकर मूतने लगी, वापस आई और पानी का बोतल लिए बरामदे पर ही बूर को साफ की फिर बेड पर प्रेम के पास आई।
प्रेम लेटा हुआ था तो उसका लन्ड पूरी तरह से टाईट था जिसे मैं पकड़ चूमने लगी फिर सुपाड़ा को मुंह में भर चूसने लगी, प्रेम मेरे सीने से लटकते स्तन को पकड़ दबाने लगा चूंकि मैं लन्ड मुंह में लेते वक्त अपना जिस्म उसके चेहरे की ओर कर रखी थी तो देवर जी मेरे बूब्स को दबाते हुए मस्त थे और मैं मुंह खोल उसका लन्ड अंदर ली फिर चूसने लगी, प्रेम अपना दूसरा हाथ मेरी चूतड के दरार में डाल दिया और उंगली रगड़ते हुए गांड़ के छेद को फैलाया तो मैं लन्ड मुंह में भर चूस रही थी तभी मेरे दिमाग में आया की क्यों ना देवर जी के ऊपर ही सवार हो जाऊं और मैं लन्ड को मुंह से निकाल उनके बदन पर सवार हुई लेकिन चेहरा उनके लन्ड की ओर था, बिल्कुल ही डॉगी स्टाइल में थी तो मेरी फैली हुई जांघो के बीच प्रेम का चेहरा था और मैं अब पीछे मुड़कर बोली ” देवर जी दोनों एक ही साथ एक दूसरे के योनि /लन्ड को चूम चाटकर मजे करें
( प्रेम मेरे चूतड पर हाथ रख उसे थोड़ा और नीचे किया ) हां भौजी अब तो आपकी चूत चाटकर रस निकाल दूंगा ” और मैं व्हिस्की के नशे मे चूर हुए उसके लन्ड मुंह में लिए चूसने लगी तो एहसास हुआ की प्रेम मेरे चूत को चूम रहा है, मैं तो उसके २/३ लन्ड मुंह में भर चूस रही थी की देवर जी मेरी चूत को उंगली से फैलाकर जीभ से चाटने लगे, अब तो मेरी चूत रस भी आसानी से नहीं छोड़ती कारण की लंबे अरसे से शारीरिक संबंध बना रही हूं और उसका जीभ मेरी चूत को चाटने में मस्त था की मैं मुंह का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी, देवर और भाभी अपने संबंध को भूल हमबिस्तर हो रहे थे, अब मेरी गांड़ के मुहाने को फैलाकर प्रेम उसमें जीभ घुसाया और चाटना शुरु किया तो मैं मुखमैथुन करते हुए मस्त थी, मेरी चूत में खुजली होने लगी तो अब मेरे चूत की चुदाई शेष थी और मैं लन्ड मुंह से निकाल सिसकने लगी ” आह ओह उह उई आआहाह चाट साले अब तो रस निकलने पर है ” फिर चूत से रस निकल पड़ा जिसे प्रेम चाट रहा था और मैं उसके बदन पर से हटकर देखी तो उसके चेहरे पर बूर से रस निकल चेहरा को गीला कर चुकी थी, मैं उसका चेहरा देख हंस पड़ी तो देवर जी मुझे छोड़ रूम से निकल गए फिर मैं लेटकर उनका इंतजार करने लगी।
मैं अपने बदन पर चादर ओढ़े लेटी थी तभी देवर जी रूम में आए और वो कमर से टॉवल लपेटे थे, दरवाजा को बंद कर मेरे पास आए फिर मेरे बदन पर से चादर हटा दिए, मैं खुद ही जांघो को फैला दी तो प्रेम अपना टॉवेल हटाया फिर मेरे दोनों पैर को घुटने के बल मोड़ दिया, मैं समझ गई की मेरी चुदाई वो करेगा फिर प्रेम अपना लन्ड पकड़े चूत पर रगड़ने लगा तो मेरी फांकों के बीच लन्ड था और सुपाड़ा सहित थोड़ा लन्ड अंदर गया की वो आहिस्ते आहिस्ते मेरी चूत में लन्ड घुसाने लगा, उसका २/३ लन्ड चूत में था तभी प्रेम जोर से धक्का दिया और चोदने लगा तो मैं ” आह ओह उई बहुत मजा आ रहा है ” आहें भरने लगी और देवर जी तो मेरे चूत में धक्का देते हुए चुदाई करने लगे, मैं तो रसीली चूत में लन्ड पाकर मस्त थी और प्रेम तभी मेरे जिस्म पर लेटकर चोदने लगा तो मैं उसके चेहरे को चूमने लगी और फिर धक्का सहते हुए चूतड उछालना शुरू की तो देवर जी मेरी चूत चुदाई में मस्त थे, मेरे गुलाबी ओंठ को चूम बोले ” क्यों शीला कल रात गांड़ चुदवाना है
( मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में लीन थी ) कल नहीं आज रात देवर जी क्यों दुबारा आपका लन्ड खड़ा नहीं होगा ” ∆प्रेम चुदाई करता हुआ मस्त था तो मेरी रसीली चूत गर्म होने लगी थी फिर मैं चूतड स्थिर कर उसके गाल चूम ली तो प्रेम बूर से लन्ड निकाल बेड पर लेट गया और मैं अब उसके लन्ड पर बैठ चुदाई कराने को तैयार थी, शीला के लिए देवर जी हां या रामू सब गैर थे फिर भी बदन की आग बुझाने के लिए कुछ तो करना पड़ता और मैं प्रेम के लन्ड पकड़ बोली ” अब तेरे लन्ड पर बैठकर ही…. ” वो मेरे गाल चूम लिया, फिर मैं उठकर बैठी और देवर जी चित लेटे हुए थे और मैं उनके लन्ड के ऊपर चूत किए बैठ गई, मेरी दोनों जांघें फैली हुई थी तो चूतड को उसके लन्ड के ऊपर रखी थी और देवर जी मेरे कमर पकड़ बोले ” शीला अब लन्ड खुद से डालो और चुदाई कराओ
( मैं लन्ड पकड़े चूत में घुसाने लगी ) हां साले सब कुछ मैं ही करूं और तुम मजे लो ” मैं प्रेम के लन्ड चूत में घुसाने लगी और आधा लन्ड चूत में घुसते ही अपने गोल गद्देदार नितंब को नीचे की ओर करने लगी तो प्रेम नीचे से धक्का दिया और उसका लन्ड मेरी चूत में खसख्साता हुआ घुसा फिर मैं चूतड को ऊपर नीचे करते हुए चुदाने लगी तो प्रेम मेरी कमर में हाथ डाले नीचे से धक्का देने लगा और मेरी बूब्स दबाने लगा, मैं तो उसके लन्ड पर बैठ चुदाने लगी और अब प्रेम मेरे कमर को पकड़े नीचे से जोर का धक्का देने लगा तो मैं ” आह ओह उह उई आआआह्ह बूर में तो आग लगी है डियर
( प्रेम चोदता हुआ मस्त था ) सब बुझा दूंगा साली रण्डी तुझे तो चोद चोदकर रण्डी बना दूंगा ” और उसका लन्ड चूत में चुभने लगा तो मैं चूतड दुबारा ऊपर नीचे करते हुए मस्त थी, सम्भोग के चरम पर दोनों थे लेकिन बिना वीर्य स्खलित हुए इसका अंत नहीं होता और अब प्रेम भी चोदता हुआ हांफने लगा तो मैं भी ” आह ओह उह आआह्हह्हह बूर में तो आग लगी है प्रेम
( प्रेम चोदता हुआ बोला ) ये लो डार्लिंग आग बुझा लो ” और उसके लन्ड से वीर्य स्खलित होकर मेरी चूत को गीला कर दिया तो मैं उसके ऊपर लेट उसके गाल चूम ली ” क्या एक बार और ” फिर रात को मेरी गांड़ चुदाई हुई, इंतजार कीजिए।

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