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जिया की कामुक गाथा : भाग ४

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पिछले भाग में आपने पढ़ा की कैसे देर रात मैं और मौसेरे भैया शारीरिक संबंध बनाने में मस्त थे की मां हम दोनों को पकड़ी फिर खुद भी दोनों के साथ शामिल हो गई, उनके बड़े बड़े बूब्स साथ ही मोटे चिकने जांघ और उसके बीच में चूत, साली की चूत पूरी तरह से ढीली पड़ चुकी थी और अब मैं बुर में दवाई के असर का एहसास की तो विनय अपना लन्ड पकड़े मेरी जांघो के बीच बैठा फिर बुर में घुसाने लगा तो मां मेरे बदन को सहला रही थी ” कितने दिनों से ये सब चल रहा है जिया
( विनय बुर में लन्ड घुसाया फिर जोर का धक्का दे मारा ) उई उई फट गई कितना मोटा तेरा सामान है ” लन्ड से दर्द कम हो रहा था तो मस्ती अधिक लेकिन मॉम को बताना जरूरी था की मैं चुदाई में नई हूं सो उसके धक्के से चिल्लाने लगी ” ओह इफ उफ विनय निकाल लो ना तेरा गधा सा मोटा लन्ड मेरी बुर फाड़ देगा
( मां हंस दी ) निकाल इसकी बुर से मेरी गांड़ में डाल, साली मेरे सामने नखड़ा कर रही है ” तो मैं विनय से चुदवाने लगी और मां मेरे बदन को सहला रही थी तो मेरे हाथ में उनकी चूची थी जिसे दबाते हुए मैं मस्त थी और फिर विनय मेरे जिस्म पर लेटकर धकाधक चुदाई करने लगा तो मेरी नंगी मां मूकदर्शक बने सब कुछ देख रही थी।
जिया की बुर तो दवाई से चिपचिपा हो चुका था लेकिन विनय का मोटा लन्ड मेरी बुर का हाल खराब कर चुका था और मैं उसके कमर पकड़ चूतड को ऊपर नीचे करने लगी तो मॉम बोली ” वाह साली तू तो अनुभवी चुदक्कड लग रही है ” में चुप रही और विनय मेरे चेहरे को चूमते हुए दे दनादन लन्ड को बुर में पेल रहा था, मैं चुदाई के आनंद में खो चुकी थी ” उह ओह आह विनय थोड़ा ब्रेक चाहिए ” तो वो मेरे ऊपर से उतर गया और मैं उठकर एक टॉवेल छाती से बांध ली फिर वाशरूम चली गई, मूतने के बाद फ्रेश होकर वापस आई तो मेरी नंगी मां मस्ती में अपने भतीजे को लिटाकर उसका लन्ड चूस रही थी, मैं विनय के चेहरे के पास बैठी और रेणु मुखमैथुन करते हुए उसके बदन सहला रही थी तो विनय मेरे बूब्स पर हाथ लगाकर दबाने लगा और मैं उसके चेहरे को सहलाने लगी ” मुंह पर बैठूं चाटोगे ” वो मुस्कुराकर हामी भर दिया तो मैं विनय के चेहरे के ऊपर जांघें फैलाई बैठ गई, मेरी बुर उसके मुंह के सामने था तो दोनों पैर के सहारे मैं बैठी हुई उसे चूत चाटने का मौका दी और वो मेरे बुर को फैलाया फिर चेहरा को थोड़ा ऊपर कर जीभ बुर में घुसा दिया और चाटने लगा, पीछे मुड़कर देखी तो मां उसके लन्ड को मुंह से निकाल जीभ से चाटने में मस्त थी और मैं उनको देख बोली ” उस पर बैठकर चुदाऊंगी तो तुम देखना
( रेणु बोली ) तुम अपना कौमार्य भंग करवा चुकी हो मुझे पता ही नही था
( विनय बुर में जीभ घुमाने लगा ) आह उह उई मेरा झड़ जाएगा ” और मेरी बुर से रस निकल उसके चेहरे पर भी गिरने लगा तो मैं उसके चेहरे के ऊपर से उठकर बेड पर बैठ गई तो मां बोली ” अब मुझे चोद विनय बुर खुजलाने लगी
( विनय उठकर बैठ गया ) दोनों को बारी बारी से चोदूंगा ” तो मैं और मेरी मां दोनों टांगे चिहारे बिस्तर पर लेट गई और विनय अब मेरी मां की बुर को सहलाने लगा तो मैं समझ गई की उसकी चुदाई होने वाली है लेकिन विनय तो रेणु की बुर चाटना चाहता था तो मैं बोली ” डियर मुझे डॉगी स्टाइल में करो ना और मां की मैं चाट दूंगी ” फिर मां टांगे चिहारे लेटी थी तो मैं उनके जांघो के बीच चेहरा किए घुटनों के बल हुई और मां की लालिमा लिए बुर को चूमने लगी, तभी मेरी चूत में लन्ड घुसने का एहसास हुआ और मैं मां की दोनों फांकों को चूम चूम कर बुर फैलाई, उसमें जीभ घुसाए चाटने लगी और इतने में विनय धक्का देकर चोदना शुरू किया ” उह आराम से साले तेरी मौसी की बुर नही है ” और रेणु की ढीली चूत में जीभ घुसाए चाटने लगी तो बुर में उसका मुसल लन्ड अन्दर बाहर हो रहा था। मैं मां की बुर में अब उंगली डालकर रगड़ने लगी तो मेरे ओंठ उनके मोटे चिकने जांघो को चूम रहे थे साथ ही उनकी बड़ी बड़ी बूब्स को पकड़े मैं दबाए जा रही थी तो विनय चुदाई में मस्त था, अब अपने चूतड को हिलाते हुए चुदाई का आनंद लेने लगी तो मां सिसक रही थी ” उह ओह अबे साली रण्डी मेरी बुर को उंगली नहीं लन्ड चाहिए
( मैं बोली ) तो आपको क्या दिक्कत, दर्जनों आशिक हैं तेरे
( विनय चोदता हुआ बोला ) हां मौसी आप भी इधर उधर मुंह मारती हैं क्या ” मां तो बुर में उंगली के रगड़ से तड़प रही थी तो मैं अपने चूत की गर्मी से परेशान थी और अब आहें भरने लगी ” विनय अब मुझे थोड़ा रेस्ट चाहिए ” तो विनय बिना देर किए मेरी बुर से लन्ड निकाल वाशरूम चला गया।
मैं मॉम की बुर छोड़ उनके बगल में लेट गई और उनके चूची को दबाते हुए पूछी ” मॉम मैं कभी कभार मजे लेती हूं लेकिन आपने मेरी चोरी पकड़ ली
( मां मुस्कुराई ) जवानी का आलम है बेटी जब मैं इस उम्र में चुदाने को तड़पती हूं तो फिर तुम्हारा हाल क्या होगा सब समझ सकती हूं ” विनय रूम में आया फिर मॉम के जांघो को फैलाकर बुर सहलाने लगा और उसका लन्ड देख मुझे फिर से चुदाने का मन किया लेकिन यहां तो मेरी बुर उसके लन्ड के धक्के से लहर रही थी, एक बार चोदा तो बुर को ठंडक मिली लेकिन दूसरी बार में मां ही आ गई, विनय अपना लन्ड पकड़े मौसी की बुर में घुसाने लगा फिर जोर से धक्का देता हुआ धकाधक चुदाई करने लगा तो रेणु मस्त थी ” उह आह कितने दिनों के बाद किसी गबरू जवान का लन्ड मिला है अब तुझे हर सप्ताह मुझे चोदना होगा
( विनय अपनी मौसी के जिस्म पर सवार होकर ओंठ चूम लिया ) चिंता मत करो मौसी मैं क्या मेरे कितने दोस्त तेरी उम्र की औरत को चोदना पसंद करते हैं
( मैं बोली ) अच्छा यानी की मेरी जैसी लौंडिया का कोई मोल नहीं
( मां चूतड उछाल उछाल कर चुदाने लगी ) है लेकिन अनुभवी औरतें अधिक मजा देती हैं ” तो मॉम और विनय के रति क्रीड़ा को देखते हुए मैं अपने बूब्स खुद से दबाने लगी और मॉम चूतड उछालती हुई बोली ” ओह मेरी बुर बहुत जल्दी गीली हो गई ” तो भी विनय उनकी चुदाई करता रहा लेकिन मॉम उसको बदन पर से उठने बोली फिर वाशरूम चली गई तो मैं विनय को देख आंख मारी और वो मेरी जांघो के बीच लन्ड पकड़े बैठ गया, मेरी बुर के दरार में सुपाड़ा रगड़ता हुआ लन्ड को अंदर घुसाया फिर अंदर चांपने लगा तो बुर मानो ककड़ी की तरह चरक रही थी फिर भी आराम से दर्द सहते हुए चुदाने लगी, मां रूम में आई और बोली ” वाह साली मेरा निवाला तू ही छीन ली चुदवा फिर पेट से होगी तब समझना
( मैं मुस्कुराई ) गर्भनिरोधक दवाई का प्रयोग कर चुदवाती हूं ” और विनय मेरे ऊपर सवार हुए चुदाई कर रहा था तो मैं उसके चेहरे को चूमने लगी, मेरी हाथ उसके पीठ से लेकर कमर तक को सहला रही थी और अब बुर गर्म होकर झड़ने पर था, मैं पूरे तन में हो रही सिहरन से मस्त थी ” आह विनय और तेज मेरा झड़ गया ” फिर तो बुर रसीली हो गई लेकिन अब सच पूछो तो चुदाई करवाने की इच्छा नहीं थी, विनय मेरे बदन पर से उठा और अपनी मौसी के जांघ सहलाते हुए बोला ” मौसी अब तू घुटनों के बल हो जा फिर चोदूंगा
( मैं वाशरूम जाने लगी ) गर्भनिरोधक दवाई डाल देना पता चला कि इस उम्र में पेट से हो गई ” और मैं फ्रेश होकर वापस आई फिर नाईट गाऊन पहन किचन चली गई, डाइनिंग हॉल में बैठ खाना खाने की सोची फिर लगा की मां की चुदाई देखते हुए खाना खाऊं, रूम में आई तो रेणु कमर हिलाते हुए चुदाने में लीन थी और विनय उनकी गांड़ के पास बैठ चुदाई करने में मस्त था तो मां अब चूतड को स्प्रिंग की तरह हिलाते हुए मस्त थी ” , ओह आह और तेज चोद चोदकर बुर फाड़ दे विनय ” फिर विनय अनायास ही लन्ड को बुर से निकाल दिया तो मॉम नंगे ही वाशरूम चली गई, मैं खाना खाकर हाथ मुंह धोई फिर बेड पर आकर लेट गई तो रेणु अब चित लेटकर बोली ” विनय अब शुरू हो जाओ
( विनय का लन्ड तो टाईट था और वो मॉम के बुर के अंदर लन्ड पेल दिया ) ज्यादे देर तक नहीं टिकुंगा मौसी
( मॉम हंस दी ) तू पहले ही जिया को एक बार चोद चुका था, है ना ” विनय कुछ बोला नहीं लेकिन चोदता हुआ उनके ऊपर सवार हो गया फिर मॉम के रसीले ओंठ चूमने लगा तो रेणु अपने ढलती जवानी का जलवा दिखाने लगी, उसके कमर पर हाथ रख चूतड उछालना शुरू की तो विनय चोदता हुआ हांफने लगा, मैं तो मां की कामुकता से हैरान थी और वो चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में मस्त थी ” तेज चोद साले तेरे सारे दोस्तों का लन्ड हजम कर जाऊंगी बस एक बार उन लोगों से मिलवा दे
( मैं मां को बोली ) लगता है आजकल पापा के दोस्त आपको घांस नहीं डालते
( रेणु चुदाते हुए बोली ) उहुँ, एक ही स्वाद ले लेकर बोरियत महसूस करने लगी हूं ” और फिर विनय का लन्ड वीर्य स्खलित कर दिया तो वो रेणु पर लेटा रहा फिर मैं करवट फेरकर सो गई, दोनों फ्रेश होने गए फिर मॉम और विनय दोनों ही मेरे रूम से निकल गए और मैं थकान के मारे नींद में सो गई, आगे क्या हुआ अगले भाग में…

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