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चाचा जी का प्यार : भाग २

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जिया तो अपने बिस्तर पर आराम से सोई हुई थी लेकिन कमरे का दरवाजा खुला छोड़ रखी थी ताकि चाचा जी मौका मिलते ही मेरे पास आ सकें, दिन में इलाहाबाद उनके साथ गई फिर थकान के मारे जल्दी ही नींद आ गई। मेरे अंकल रमेश की नजरें मेरे पर ही थी तो उन्हें मैं इशारों में अपनी चाहत भी बता चुकी थी, वो शादीशुदा थे तो उन्हें एक तीन साल की बेटी थी फिर भी मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाने को आतुर थे, ऑटोरिक्शा पर उन्होंने मुझे छूने की कोशिश की और बाद में मैं भी उनके साथ थोड़ा दोस्ताना रुख अख्तियार कर ली, मेरी नींद अचानक से टूटी तो कमरे में नाईट बल्ब ऑन था और मैं तो आंख खुलते ही सहम सी गई, मेरे बदन पर जो नाईटी था वो खुला हुआ था तो मैं नंगी थी और मैं देखी की रमेश चाचा मेरे बूब्स पकड़े दबाए जा रहे थे, मैं उठकर बैठी और उनका हाथ पकड़ बूब्स पर से हटाई ” आप तो हद कर दिए अंकल, तुरंत यहां से निकलिए वरना शोर मचा दूंगी
( मैं बेड पर पड़े चादर लेकर नंगे जिस्म को ढक ली ) सॉरी जिया ” और वो बेड पर से उदास होकर उठे तो मैं अब धीमे स्वर में बोली ” अंकल इधर देखो तो सही ” वो पीछे मुड़कर देखे तो मैं चादर हटाकर अपने नग्न बदन उन्हें दिखाने लगी और उंगलियों से इशारा कर उन्हें बुलाई तो वो मेरे पास आए फिर मैं बिस्तर के किनारे बैठे उनके पैजामा की डोरी को खोल दी, चढ्ढी तक वो नही पहने थे और उनका लन्ड देख मेरे मुंह में पानी आ गया और वो खुद ही अपना बनियान खोल नंगे हो गए। जिया तो कितने मर्दों का लौड़ा हजम कर मजा लूट चुकी थी तो चाचा का लन्ड देख क्या शर्माना, मैं झट से लन्ड पकड़ उन्हें बोली ” बाथरूम जाकर इसे साबुन से साफ कर आईए ” वो टॉवेल लपेटकर अटैच्ड बाथरूम चले गए तो मैं दीवार पर लगे घड़ी की ओर देखी, रात के ००:४० बजे थे तो घर के सारे लोग नींद की आगोश में थे और नितिन भैया चाचा भतीजी के प्यार देखकर भी क्या करते, वो तो खुद मेरी बुर का रसपान कर चुके हैं। रमेश उर्फ पप्पू चाचा रूम आए फिर मुझे देख मुस्कुराते हुए बेड पर बैठे तो मैं चादर को ओढ़कर अपने नग्न जिस्म को ढक रखी थी, मेरे सामने बैठकर मेरे बाहों को सहलाना शुरु किए तो मैं उनके टॉवेल को कमर से हटाई और उनका लन्ड पकड़ सहलाने लगी ” चाची को तो खूब मजा आता होगा इससे
( पप्पू मेरे तन पर से चादर हटाकर मेरे चूची को पकड़ दबाने लगा ) तुम्हारे पास भी तो बुर चूतड और चूचियां हैं कितनों को मजा दी हो
( मैं उनके चेहरे को चूम ली ) दर्जनों को दे चुकीं हूं डियर आखिर आजकल के हब्बी को अनुभवी पत्नी चाहिए ” और चाचा तो मेरे जवाब सुनकर हंस दिए।
जिया को बिस्तर पर लिटाकर अंकल उसको निहारने लगे फिर हाथ बढ़ाए चूची पकड़ दबाने लगे तो मैं उनको उंगलियों से इशारा कर अपने ऊपर लेटने को बोली, फिर वो मेरे चेहरे के ऊपर चेहरा किए गाल चूमने लगे तो बूब्स को मसले जा रहे थे और मैं उनके गाल चूमते हुए उनके पीठ सहलाने लगी, चाचा को क्या पता की उनकी भतीजी काम क्रिया में कितनी अनुभवी है और फिर अंकल ज्योंहि मेरे रसीले ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन देने लगे, मैं उनके गर्दन में हाथ डाले उनके मुंह में ही अपना ओंठ डाल दी तो मेरी गुलाबी रसीली ओंठ को वो चूसने लगे साथ ही मेरे बूब्स को दबाए जा रहे थे तो मैं कुछ देर में ही ओंठ मुंह से निकाल दी फिर अंकल तो मेरे गर्दन को चूमते हुए मुझे कामुकता के आगोश में ले जा रहे थे। जिया आराम से बिस्तर पर लेट जांघों को आपस में रगड़ रही थी और अंकल अब मेरे बूब्स को पकड़ मुंह में लिए और चूसने लगे तो मैं भी उन्हें छाती से लगाए चूची चुसवाने लगी, फिर क्या था जिया तो कामुक हो चुकी थी ” उह ओह आह अंकल अब नीचे खुजली हो रही है ” तो वो मेरे चूची मुंह से निकाल मेरे छाती से सपाट पेट तक को चूमने लगे, मैं बुर की खुजलाहट से परेशान थी और वो मेरे कमर तक चूमते हुए जांघों को सहलाने लगे ” उह आह उफ अब अंकल थोड़ा योनि मार्ग को प्यार कर दो
( अंकल चेहरा ऊपर किए फिर एक तकिया लेकर मेरी चूतड के नीचे लगाए ) जांघों को तो फैलाओ मेरी जान
( मैं जांघों को दो दिशा में किए बोली ) यही तो हर मर्द की कमजोरी होती है, भगवान ना बुर देते ना ही हम जैसी लड़कियों को कोई घूरता
( अंकल बुर में एक उंगली घुसाए और कुरेदने लगे ) क्या बेबी, बुर क्या चूतड और चुचियों की अहमियत कम तो नहीं ” और फिर मेरी बुर में उंगलियां करते हुए जांघ को चूमने लगा तो मैं अब बुर की गुदगुदी से मस्त हो रही थी और फिर अंकल मेरे बुर में उंगलियां करते हुए उसके ऊपरी हिस्से को जीभ से चाटने लगे तो मैं उनके एक हाथ जोकि पेट पर फिसल रहा था को पकड़ बूब्स पर लगाई और अंकल तो उंगली निकाल बुर में जीभ घुसाए चाटने लगे ” उई मां मेरी बुर जल्दी ही पनिया जाएगी, ओह आह चाट ना ” तो अंकल जीभ बुर से निकाल दिए और पूछे ” लन्ड चूसोगी या फिर घुसेड़ दूं
( मैं बोली ) अभी थोड़ा आपका लोलीपॉप टेस्ट करूं फिर ” तो अंकल बेड पर लेट गए और मैं बेड पर से उतरकर वाशरूम गई फिर फ्रेश होकर आई तो अंकल एक चादर अपने बदन पर ओढ़े लेटे हुए थे। मैं बेड पर उनके पास बैठी फिर चादर हटाकर उनको नग्न की तो मेरी नजर उनकी चौड़ी छाती पर थी, अंकल के ऊपर मैं सवार हुई फिर उनके चेहरे को चूमने लगी तो रमेश मेरे चूतड को सहलाने लगा और मैं उनके बदन पर फिसलते हुए छाती को चूम रही थी की अंकल मेरे गांड़ के दरार में उंगली रगड़ने लगे लेकिन जिया तो मर्दों को गर्म कर ही चुदाती थी, उनके कमर तक को चूमने के बाद उनके लन्ड को पकड़ चूमने लगी, गेहूंवा रंग का लन्ड जिसकी लंबाई तो पूर्णतः टाईट होने पर ही समझ सकती और उसे मुंह में भरकर चूसने लगी ताकि जल्दी से खड़ा हो जाए, मेरे अंकल मुझसे उम्र में १० साल बड़े होंगे तो उनका हट्ठा कट्ठा बदन मुझे उनके साथ सेक्स करने को आकर्षित किया था और अब लन्ड मुंह से निकाल उसे हिलाने लगी ” अंकल आप आंटी को कितने देर तक तंग करते हैं
( मैं अंकल के लन्ड को चाटने लगी ) तंग करते हैं मतलब, स्पष्ट बोलो
( मैं बोली ) कितनी देर तक इसे ( लन्ड की ओर इंगित करते हुए ) इसमें ( अपनी बुर की ओर इंगित करते हुए ) घुसा कर टिकते हैं ” अंकल कुछ नही बोले लेकिन जिया मुंह खोल लन्ड अंदर ली फिर चूसने लगी, लन्ड तो मुंह में टाईट होने लगा तो मुझे अब सर का झटका देते हुए मुखमैथुन करने में मजा आने लगा तो अंकल मेरे बूब्स को दबाते हुए ” उह ओह बेबी तुम तो पोर्न एक्ट्रेस की तरह लन्ड चूसती हो ” मैं उनको देख मुस्कुराई फिर लन्ड मुंह से निकाल दी, मेरे बुर में रस निकल चुका था तो मैं लेटकर टॉवेल से बुर साफ की फिर बोली ” क्या अंकल कंडोम रखे हो या मैं ही कुछ व्यवस्था दूं
( वो मेरे छाती पर चेहरा किए चूची को पकड़े ) तुम्हीं कुछ व्यवस्था दो ” फिर क्या था, मैं बेड पर से उठकर अपने वार्डरोब में जो गर्भ निरोधक दवाई रखी थीं उसे निकालकर वापस बेड पर आई और वो दवाई अंकल को देकर बोली ” इसे आप मेरी वेजिना में घुसाकर छोड़ दें
( अंकल हंसने लगे ) किस्में घुसाऊं
( मैं बोली ) मेरी बुर में अब समझे ” तो वो दवाई को रेपर से निकाले फिर बुर को उंगलियों से फैलाए और उसमे दवाई को उंगली की मदद से अन्दर कर दिए तो मैं उन्हें बोली ” अब थोड़े देर के बाद ” वो मुस्कुराए फिर मेरी जांघो को सहलाने लगे, अंकल मेरे बूब्स को पकड़ उसको मुंह में लिए और चूसने लगे तो मेरा हाथ उनके पीठ को सहलाने लगा, उनके मुंह में मेरी पूरी बूब्स थी तो वो चूसते हुए आगे की ओर खींचते ” उह ऐसे मत करो अंकल चूची चूसो ना तुम तो छाती से उसे अलग करने पर लगे हो ” तो चाचा आराम से चूची चूसे और मेरी बुर में गर्भ निरोधक दवाई पिघल चुके थे, अंकल ज्योंहि मेरे बूब्स मुंह से निकाले मैं उनको बोली ” अब उधर ( बुर की ओर इंगित की ) ध्यान दीजिए ” चुदाई तो अभी बाकी है अगले भाग में आप इसे पढ़िए।

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