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चाचा जी का प्यार : भाग ३

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फ्रेंड्स
जिया तो २२ साल की उम्र में ही ना जाने कितनों को अपनी पिया बना चुकीं है लेकिन कुछ घंटों के लिए ही, मेरे छोटे अंकल घर आए हुए थे तो उनके साथ कुछ काम से निकली लेकिन उनकी मंशा तो ऑटो में ही समझ चुकीं थीं, आखिर वो भी तो मर्द ही हैं जिन्हें अपनी बीबी से शायद ऊबन हो चुकी हो और अपनी जवान भतीजी को गंदी नजरों से वो तो देखे फिर मैं कुछ देर तो सोच में पड़ गई और फिर मैं भी अंकल से अनाप शनाप बातें करने लगी तो देर रात मुझे नींद में ही अंकल ने निर्वस्त्र कर क्या क्या किया, मुझे तो नही पता लेकिन जब मेरी नींद खुली तो मेरे जिस्म पर से नाईटी गायब थी और अंकल मेरे बदन को चूमने में लगे हुए थे साथ ही मेरी बूब्स को पकड़ दबाए जा रहे थे। मेरी चाहत तो अंकल से चुदवाने को थी लेकिन थोड़ा दिखावटी नखड़ा और गुस्सा नही करती तो शायद वो मुझे चरित्रहीन समझ लेते, फिलहाल तो मेरी बुर में गर्भ निरोधक दवाई घुसाकर अंकल अपना लन्ड गपागप अंदर बाहर किए जा रहे थे तो मैं योनि मार्ग में हो रहे घर्षण से मस्त थी, मेरे ऊपर जब वो सवार होकर दनादन चोदने लगे तो मैं उनके गाल चूमने लगी फिर उनके कमर पर हाथ रख चूतड ऊपर नीचे करते हुए बुर चुदाई का आनंद ले रही थी, मेरे गोल मुलायम बूब्स उसके छाती से रगड़ खा रहे थे तो मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में लीन थी ” उह ओह आह बहुत मजा आ रहा है अंकल और तेज चोदो ना
( वो मेरे ओंठ चूमते हुए बोले ) आराम से चुदाई का मजा लो तब तो देर तक बुर में टिककर लन्ड उसे ठंडा करेगा ” मैं चूतड स्थिर कर चुदाने लगी तो बुर आग की भट्टी बन चुकी थी और मैं फिर से चूतड उछालना शुरू की तो अंकल का मुसल लन्ड मेरी बुर का हाल खराब कर चुका था और मैं उनके गाल चूमने लगी ” उह उई बुर तो गर्मी से परेशान है प्लीज
( अंकल मेरे ओंठ चूमने लगे ) अभी रेस्ट नही पहले तेरी बुर रसीली हो जाए फिर ” और उनका लन्ड तो बुर में खरंजा की तरह चुभने लगा, जिया अब चूतड को तेजी से उछालने लगी और ” उफ ओह आह अब मेरे बुर से रस निकला ” तो मेरी बुर से रस निकल पड़ा और मैं सुस्त पड़ गई, अंकल लन्ड को बुर से निकाले फिर वाशरूम चले गए तो मैं अपने जिस्म पर चादर ओढ़कर लेटी रही। अंकल वाशरूम से बाहर आए तो मैं बेड पर से उठकर फ्रेश होने गई फिर वापस बेड पर आई।
रात के ०१:२० बजे थे तो मध्यरात्रि के वक्त घर के सभी सदस्य नींद की आगोश में थे और मैं अब बेड पर डॉगी स्टाइल में हुई, घुटनो और कोहनी के बल हुए पीछे मुड़कर देखी तो अंकल अपना लन्ड पकड़े मेरे जांघों को फैलाए फिर सुपाड़ा को बुर में घुसाए, रसीली बुर में लन्ड आराम से घुस गया और फिर उन्होंने मेरी कमर पकड़ तेज धक्का मारा ” उई मां मर गई आराम से चोद ना
( अंकल का लन्ड धकाधक मेरी बुर चोद रहा था ) तू जरूर साल दो साल से चुदवाने में लगी है नही तो मेरा लौड़ा इतने आराम से हजम नही कर पाती ” मैं चुप रही सिर्फ अपने चूतड को हिलाना शुरू की और अंकल मेरे सीने से लगे बूब्स को पकड़ दबाने में मस्त थे, जिया तो कितनों का लन्ड चख चुकी थी और मेरे भैया नितिन तक मुझे चोदे थे तो मामा भी मुझे अपने लन्ड का स्वाद चखा चुके थे और अभी तो मैं अंकल का लन्ड बुर में लिए चूतड को स्प्रिंग की तरह हिलाते हुए चुदाई में मस्त थी, अंकल तो पिछले ८-९ मिनटों से बुर को चोदे जा रहे थे और मैं अपने बुर में लन्ड का रगड़ा पाकर मस्त थी ” ओह उह उई अंकल थोड़ा तेज चोदो ना तेरी भतीजी तो दस घाट का पानी पीकर मस्त है
( अंकल चोदते हुए बोले ) वही तो डार्लिंग मुझे तेरे बुर को देख ही समझ में आ गया की इसकी सील तो पहले से ही टूटी हुई है ” और मैं चूतड हिला रही थी तो अंकल अब चोदते हुए हांफने लगे ” उह ओह बुर तो तेरी नशीली हैं अब तो हफ्ता भर रुकूंगा
( मैं बोली ) और उधर मेरी आंटी को कोई चोद दिया तो
( अंकल हंसने लगे ) उसको सेक्स में रुचि कहां है और ऐसा करेगी तो क्या घटेगा ” और वो अब चोदने के अंतिम पड़ाव पर थे तो मैं भी कमर हिलाते हुए मस्त थी तभी वो बोले ” आह अब और नही टिकेगा बेबी, मेरा निकला ” तो मेरी बुर में वीर्य स्खलित हुआ और मैं कुछ देर स्थिर रही फिर अंकल लन्ड बुर से निकाल वाशरूम चले गए तो मैं बेड पर लेटी रही, वो फ्रेश होकर आए और अपना कपड़ा पहनकर चले गए तो मैं फ्रेश होकर नाईटी पहन ली फिर सो गई।

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