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सावन के महीने में भैया बने सैयां : भाग ४

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फ्रेंड्स
औरत जब गैर मर्दों के साथ हमबिस्तर होने लगे तो समझो की उसे एक नही कई लोगों के लन्ड से ही संतुष्टि मिलेगी, तीन बार विवेक भैया के साथ संभोग की तो मेरी बेशर्मी चरम पर थी और मैं छत पर खुले आसमान के नीचे ही चुदाने के बाद नीचे आई फिर दोनों भाई और बहन वाशरूम एक साथ घुसे, मेरी पेंटी तो भैया के रूम में ही रह गई थी इसलिए झट से नाईट गाउन उतार डाली फिर खुद विवेक के शॉर्ट्स को खोल उसे भी नंगा कर दी। दो जवान जिस्म झरने के नीचे खड़े थे तो भैया झरना ऑन करके मुझे बाहों में ले लिए फिर मेरी गांड़ के दरार में उंगली फेरते हुए ओंठ चूम लिए तो मैं चुदाई कराके थकान महसूस कर रही थी, विवेक मेरे पीठ सहलाते हुए गाल चूम रहा था तो दोनों झरने के पानी से भीग रहे थे और तभी मैं उनके गर्दन में हाथ डाले उनके ओंठ को मुंह में लिए चूसने लगी तो विवेक मेरी चूतड की ओर से बुर में उंगली घुसाए रगड़ने लगा, अंदर तो वीर्य पड़ी हुई थी और चिपचिपा लग रहा था तभी विवेक मेरे मुंह से ओंठ निकाल पुछा ” क्यों तेरी खुजली कभी मिटती है की नही
( मैं उनसे थोड़ी दूरी बनाए उनके छाती को सहलाने लगी ) उहूँ, कम से कम दो बार तो अंदर चाहिए ही ” और मैं विवेक के साथ भींगे हुए अब झरना बंद की फिर बॉडी वाश ली तो दोनों एक दूसरे के बदन पर लगाने लगे और मैं तो उसकी चौड़ी छाती से लेकर कमर तक लगा रही थी तो भैया मेरे गर्दन से बूब्स तक बॉडी वाश लगाते हुए बूब्स पुचकार रहे थे और फिर मेरे सामने वो बैठकर मेरे मोटे चिकने जांघो पर बॉडी वाश लगाने लगे तो मैं टांगे चिहारे बुर दिखाने लगी और विवेक मेरे बुर के ऊपरी भाग पर लगाकर झाग पैदा कर दिए तो मेरे गर्दन से लेकर पैर तक सिर्फ बॉडी वाश की झाग थी और तभी मेरी बुर में उंगली करते हुए उसे साफ करने लगे और मुझे देख बोले ” जरा अपना पिछवाड़ा तो दिखा दे रानी ” मैं मुड़ गई फिर वो मेरे चूतड सहित जांघ के पिछले हिस्से में बॉडी वाश लगाने लगे लेकिन साले की उंगली मेरी बुर में ही थी तो बुर को कुरेदते हुए मेरे चूतड को सहला रहे थे और मैं पीछे मुड़कर बोली ” क्या भैया फिर से चोदोगे
( वो हंस दिए ) क्यों नही बस एक घण्टे इंतजार कर फिर देखना मेरे लन्ड का जोश ” और वो उठकर खड़े हुए तो मैं अब उनके सामने घुटनो के बल बैठी फिर उनके जांघ से लेकर लन्ड तक बॉडी वाश लगाई, दोनों का बदन अब झागयुक्त था तो मैं उनके सामने खड़ी हुई और विवेक मुझे बाहों में लिए ओंठ चूम लिए साथ ही मेरे चूतड को सहलाते हुए झरना ऑन कर दिए, अब रिमझिम विवेक के संग स्नान करने लगी तो उनसे लिपटे स्नान करने का मजा ही अलग था और कुछ देर तक तो दोनों एक दूसरे के बदन को रगड़ रगड़ कर साफ किए फिर दोनों स्नान कर एक दूसरे जा बदन टॉवल से पोंछने लगे, मुझे तो नंगे ही वाशरूम से रूम तक जाना था तो भैया एक बाथ टॉवल मुझे थमाए जिसे मैं छाती से लपेट ली फिर वो अपना शॉर्ट्स पहनकर बाहर निकले तो मैं भी पीछे से निकली।
विवेक सीधे अपने रूम चले गए तो मैं अपने रूम में जाकर एक नाइटी ली फिर उसे पहन कर बेड पर लेट गई, दरवाजा खुला ही रहने दी ताकि विवेक की अगर काम इच्छा जागी तो वो आकर मेरे साथ मजे ले सके लेकिन मैं जल्द ही थकान की वजह से नींद के आगोश में चली गई फिर तो मेरी नींद सुबह के वक्त खुली वो भी तेजी से पिसाब लगी थी, मैं वाशरूम जाकर मूतने लगी फिर बुर को धोकर रूम आई तो अभी सुबह के ३:३० बजे थे और मेरी नींद पूरी तो नही हुई थी लेकिन अब खुल चुकी थी। मैं इस दुविधा में थी की विवेक के रूम में जाकर उसे छेड़ा जाए की नही फिर मैं उसके रूम गई संयोगवश दरवाजा खुला था और रूम में नाईट बल्ब ऑन थी, विवेक नींद में था लेकिन उसके शॉर्ट्स पर से ही लन्ड का उभार स्पष्ट था फिर क्या था, मैं बेझिझक उसके पैर के पास बैठी और शॉर्ट्स को नीचे करते हुए लन्ड को हाथ में पकड़ी, उसका लन्ड लंबा और मोटा था कारण की अंडकोष का आकार ही बड़ा था और मैं सुस्त पड़े लन्ड को पकड़ हिलाने लगी फिर भी भैया नींद में ही थे और अब लन्ड थोड़ा टाईट हो चुका था तो मैं मुंह में लन्ड लेकर चूसने लगी, मुझे तो बहुत मजा आ रहा था साथ ही विवेक की नींद भी खुलने पर थी और मैं लन्ड चूसते हुए उसके टाईट होने का एहसास मुंह में पा रही थी तभी उसकी आंखे खुली और वो झट से उठकर बैठा ” ओह रिमझिम तुम तो मुझे नींद में भी नही छोड़ती ” फिर विवेक मेरे नाइटी पर से ही बूब्स पकड़े दबाने लगा और मैं बेशर्म की तरह अपने नाइटी उतार नंगी हो गई, बिस्तर पर चित लेटी तो विवेक मेरे चेहरे को चूमने लगा साथ ही बूब्स की गोलाई को सहलाता हुआ ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन दिया ” तुझे कितने लौंडे की जरूरत है बताना फिर तुझे ग्रुप सेक्स का मजा दूंगी
( मैं बोली ) पहले एक बार चुदाई कर दो फिर आगे का प्लान बनाना ” तो विवेक मेरे चेहरे को चूमता हुआ बूब्स को पकड़ मुंह में लिया फिर चूसने लगा तो मैं मस्त थी और विवेक के लन्ड को पकड़ सहलाने लगी, विवेक जल्दबाजी में था और वो अब मेरे सपाट पेट से लेकर कमर तक को चूमने लगा लेकिन मेरे बूब्स दबाना नही छोड़ा, मैं तो उससे चुदवाने को तरस रही थी तो विवेक मेरे जांघो को फैलाकर बुर को सहलाने लगा ” क्यों सिर्फ शॉर्टकट से काम चलेगा या फिर
( मैं बोली ) सिर्फ उसको ठंडा कर दो ” विवेक मेरी बुर को फैलाया फिर उसमें जीभ घुसाए चाटना शुरु किया, भैया बुर चाटने के आदि थे तो मैं इनसे बुर चटवाकर मस्त थी और वो जीभ से मेरी गुदाज बुर को चाटते हुए मुझे कामुक कर दिए फिर लन्ड पकड़े बुर में घुसाने लगे।
मैं दोनों जांघो को फैलाकर लेटी थी तो भैया लन्ड बुर में घुसाते हुए मेरे कमर थाम रखे थे फिर उन्होंने जोर का धक्का दे मारा तो मैं चिंहुक उठी ” उई मां मर गई फाड़ दिया मेरी बुर को ” और भैया तो धकाधक चोदते हुए मेरे ऊपर सवार होकर मेरे ओंठ चूमने लगे, मैं भैया के कमर में हाथ लगाए चूतड को उपर नीचे करने लगी तो बुर में लन्ड का रगड़ा मज़ा दे रहा था और मैं उनके गाल चूमते हुए ” आह और तेज प्लीज जोर जोर से चोदो ना तेरी रखैल हूं मैं ” बोलने लगी तो विवेक अब पूरे गति से मेरी बुर को चोदने लगा और मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने लगी, कुछ देर तक लन्ड का धक्का बुर में पड़ा होगा की बुर से रस निकलने लगा और मैं सुस्त पड़ गई, वैसे भी दो दिनों में चौथी चुदाई करवा रही थी और अब विवेक मेरे बुर से लन्ड निकाला फिर मुझे डॉगी स्टाइल में कर दिया, मैं कोहनी और घुटनों के बल हुई चुदाई को तड़प रही थी की विवेक अपना मूसल लन्ड बुर में घुसाया फिर दे दनादन चोदता हुआ मुझे बोला ” कल रात तेरी गांड़ चोदूंगा तू शीला से गांड़ की मालिश करवा लेना
( मैं चूतड हिलाने लगी ) मैं तेरे से गांड़ मालिश करवाऊंगी ना की कामवाली से ” फिर क्या था, विवेक का हरेक धक्का मेरी बुर को मजा दे रहा था तो मैं चूतड को स्प्रिंग की तरह हिलाते हुए मस्त थी और वो मेरे सीने से लगे चूची को पकड़ दबाने लगा तो मुझे भी अब वीर्य बुर को शांत करने के लिए चाहिए था लेकिन भैया का लन्ड देर तक बुर में टिकता था इसलिए मुझे तो उनसे चुदाने में काफी मजा आता था, दोनों संभोग क्रिया करते हुए हांफने लगे तो विवेक अब बोला ” डार्लिंग बस अब नहीं रुकेगा ये लो बुर को पिलाओ ” और वीर्य स्खलित होकर बुर को गीला कर दिया, दोनों कुछ देर बाद अलग होकर अपने अपने रूम में चले गए और फिर गहरी निद्रा में चले गए।

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