रेखा की नदी किनारे पेलाई | Erotic Stories
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रेखा की नदी किनारे पेलाई

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हेलो दोस्तो,

आज राहुल मल्होत्रा आपलॉगो को एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा है, जोकि हफ्ता भर पहले का है। मेरे छोटे चाचा की बड़ी बेटी रेखा कानपुर में रहकर अपने स्नातक कि डिग्री के खातिर पढ़ाई कर रही थी और साथ ही कोचिंग में भी उसने दाखिला लिया था, लेकिन एक और क्लासेस कभी कभार हुआ करता था जिसमें वो मेरे संग काम कला की पढ़ाई करती थी। भगवान ने औरत हो या मर्द, दोनों को काम कला के खातिर कुछ खास अंग दिए है, लेकिन मेरा मानना है कि लड़की के बाल से पैर तक की नाखून काम क्रिया के लिए बने है। लड़की की चूची हों या चूत या फिर चुतर सब सेक्स के लिए जरूरी है तो मर्दों या लड़कों के पास सिर्फ लंड ही होता है जोकि लड़कियों को संतुष्ट करने के काम आता है। मै अपनी चचेरी बहन रेखा को कई महीनों से चोद रहा था तो वो भी अपने जवानी का आनंद उठा रही थी, एक शाम रेखा मुझे फोन की और नाराज़गी ज़ाहिर की…… ” क्या राहुल आजकल मिलने नहीं आते हो, क्या बात है?

(राहुल) कुछ खास नहीं, थोड़ा ब्यस्त था बोलो कब मिलना है

(रेखा) कल सुबह मेरे हॉस्टल आ जाना । ” मै अगले सुबह कॉलेज के बहाने निकला और सीधे रेखा की हॉस्टल की ओर चल दिया, वहां पहुंचा तो वो हॉस्टल से बाहर नहीं निकली थी, फोन किया तो वो बाहर आई और हम दोनों मौज मस्ती के खातिर वहां से निकल पड़े । रेखा स्कर्ट और टॉप्स पहन रखी थी, मेरे कंधे और कमर पर हाथ लगाकर बाईक पर मुझसे चिपके बैठी हुई थी तो मुझे उसके चूची का एहसास पीठ पर हो रहा था।

रेखा विजय नगर चौराहे के पास बाईक से उतरी और एक मेडिसिन शॉप गई तो मै वाईन शॉप में जाकर बियर खरीदा, फिर दोनों उसी नदी के किनारे की ओर चल पड़े जहां हम दोनों कई बार सेक्स का आनंद उठा चुके थे । दिल्ली कानपुर हाईवे से थोड़ा अन्दर की ओर कच्चे रास्ते पर मै बाईक चला रहा था, दोनों बाईक से उतरे और ज़मीन पर बैठ गए । अब मै बियर की बोतल को डिक्की से निकाला और बियर पीने लगा तो रेखा मेरे गाल को सहलाते हुए बोली….. “क्या राहुल मुझे बियर पीने को नहीं मिलेगा

(राहुल) क्यों नहीं, ये पकड़ो देखता हूं शायद डिक्की में गलास भी हो। ” फिर मै डिक्की से दो ग्लास निकाला और दोनों बियर पीने लगे तो मै सिगरेट भी सुलगाया, रेखा एक ग्लास बियर पीकर झूमने लगी तो मै उसके स्तन पर हाथ लगाकर चूची मसलने लगा, वो मेरे जींस के चैन को खोलकर लंड बाहर करने लगी तो मै अब बियर की बोतल खाली कर चुका था…… “ओह रेखा, जींस को ही निकाल दो ना, क्या तुम सिर्फ चैन खोलने पर लगी हुई हो । ” तो रेखा मेरे जींस को खोलने लगी जबकि मै उसके गर्दन के पीछे हाथ लगाकर उसके गोरे चेहरे को चूमने लगा, उसके रसीले ओंठो को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा तो रेखा मेरे जींस को कमर से नीचे करके कच्छा पर से लंड के उभार को सहलाने लगी, मै उसके ओंठ को चूसता रहा तो रेखा मेरे मुंह में अपना जीभ घूसाकार चुसवा रही थी। मेरा जींस खुल चुका था और रेखा मेरे से लिपटकर मेरे गोद में बैठी थी, उसके दोनों पैर दो दिशा में मेरे कमर को जकड़े हुए थी तो उसके बूब्स मेरे छाती से रगड़ खाने लगे, उसका स्कर्ट मै कमर तक करके गान्ड सहलाने लगा, रेखा की पेंटी बुर के इलाके को ढक रही थी और साथ ही गान्ड के दरार को बांकी का हिस्सा नंगा था, गान्ड की सतह पर हथेली रगड़ने लगा तो वो जीभ निकाल ली।

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रेखा अब मेरे गोद से उतरकर कमर के पास बैठी और कच्छा को खोलने लगी, मेरा मूसल लंड फनफाना रहा था तो रेखा झुककर लंड को थामी और उसको चूमने लगी, लंड का चमड़ा छीलकर उसपर अपने ओंठो का प्यार दे रही थी, फिर वो सुपाड़ा को अपने चेहरे और ओंठ पर रगड़ते हुए मुंह में लंड ले ली। मै ज़मीन पर पैर सीधा करके बैठा था तो वो लंड को चूसने लगी लेकिन उसका स्तन टॉप्स में ही नीचे की ओर लटक रहा था, तो मै टॉप्स को गर्दन तक किया और ब्रा को खोलकर नग्न चूची को मसलने लगा, दोनों हाथ में मानो दो रसीले आम हो तो रेखा अपने मुंह का झटका लन्ड पर देने लगी और कुछ देर बाद वो लंड पर जीभ फेरते हुए मस्त थी। अब मै रेखा को ज़मीन पर लिटा दिया और टॉप्स को गर्दन तक करके स्तन पर झुका और चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा तो वो सिसकने लगी…. “ओह आह राहुल बुर में कितनी खुजली हो रही है, अब चोदो ना. ” तभी मै दूसरी चूची को चूसता हुआ मस्त था । रेखा के सपाट पेट से कमर तक को चूमा और फिर उठकर पास में ही मूतने लगा, रेखा घांस पर बैठी हुई थी, मेरा निचला हिस्सा नंगा था तो वो टॉप्स को ठीक करके बिल्कुल ही अपने तन को ढक रखी थी। मै उसके स्कर्ट पर हाथ लगाकर उसे कमर तक किया और पेंटी को खोलकर उसे हाथ में दिया…… “पर्स में रख लो रानी अब सिर्फ नीचे का ही काम है

(वो पेंटी पर्स में रखते हुए मुस्कुराई) लो जैसा तूने बोला वैसा की अब बोलो

(बुर को सहलाने लगा) अब जरा कोहनी और घुटने के बल ही जाओ । “रेखा ज़मीन पर कुत्तिया की तरह होकर अपने दोनों टांग को दो दिशा मै कर दी, उसके स्कर्ट को कमर तक करके मै अब चूतड़ को चूमने लगा और गान्ड के दरार में जीभ फेरता हुआ बुर को उंगली से कुरेदने लगा, वो सिसकने लगी तो मै अब बुर को जीभ से चाटने लगा, पिछले ६ महीने से चुदाई का मजा ले रही थी तो उसके बुर में निखार आ चुका था, मै अपना जीभ बुर में पेलकर बुर को चाटने लगा तो वो “ओह आह राहुल अब प्लीज़ मुझे चोदो आह. ” बोलनी लगी तो मै उसके गान्ड के सामने घुटने के बल होकर लंड को बुर से सटाया, धीरे धीरे सुपाड़ा सहित आधा लंड चूत में पेलकर कमर थामा और तेज झटका देकर चुदाई शुरू कर दिया तो वो चिल्ला उठी….. “उई मां बुर फ़ाड़ देगा क्या, पता नहीं कितने बुर का रस पिलाकर लंड को मोटा कर लिया है, तो मै गपागप लंड बुर में पेलता हुआ बोला….. “अबे साली तू अपने से मतलब रख समझी कि नहीं, वैसे तू औरों से नहीं चुड़वाती हो इसकी क्या गायरांटी । ” मेरा लंड तेजी से बुर को चोद रहा था तो रेखा अपने चुतर को आगे पीछे करते हुए चुदाई का मजा ले रही थी। कुछ देर बाद रेखा बोली….. “ओह राहुल और तेज चोदो ना मेरी बुर रस फेंकने वाली है । “तो मै चुदाई की गति को बढ़ाया और उसकी बुर रस फेंक दी तो मै लंड बुर से निकालकर जीभ से बुर को चाटने लगा, रेखा और मेरे बीच काम क्रिया तकरीबन आधे घंटे से चल रहा था लेकिन वो अब जाकर रस छोड़ी थी, निश्चित रूप से इसके परिपक्वता को दर्शा रही थी । मै बुर को चाटना छोड़ा तो रेखा पास मै ही बैठकर मूतने लगी, उसके बाद वो मेरे करीब आकर बोली….. “पर्स में एक टैबलेट है उसको निकाल लो, मै पर्स खोलकर गर्भ निरोधक दवाई निकाला, तो वो घांस पर ही लेट गई और बोली….. “टैबलेट को अंदर डाल दो

(राहुल) किसके अंदर जानू

(रेखा शरमाने लगी) जिसके अंदर अपना लंड डाले थे, बुर में डालो

(मै उंगली की मदद से टैबलेट को बुर में घुसाने लगा) लेकिन इस दवाई का क्या काम

(रेखा) कहीं तेरे साथ मजा लेने में पेट से हो गई ना तो । ” मै टैबलेट को बुर के अंदर घुसाया और फिर रेखा के जांघों के बीच बैठकर लंड को बुर में पेला, फिर तेज धक्का दे कर पूरा लंड पेल दिया और चोदने लगा, पल भर बाद उसके बदन पर सवार होकर चोदने लगा तो वो मेरे ओंठ को चूमने लगी, ५-७ मिनट का दूसरा राउंड पूरा हुआ कि मेरा लन्ड गरम होकर बुर में ही वीर्यपात करा दिया, थोड़े देर तक वहीं आराम किए और फिर घर की ओर चल पड़े ।

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