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माँ की काम भावनाओ की पूर्ति भाग – 3

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इस अंक में पढ़ेंगे कैसे माँ और अंकल के खुले आम चुदाई का मजा उठाया।…

हमने तय किया था की हम चंदेल चौराहा के यहाँ जो रिसोर्ट है वहा जायेंगे। हमने साथ में स्विमिंग के कपडे भी लिए थे। वहा उतरने के बाद हम थोड़ा बगीचे में घूमे। अंकल के कहने पर मेने अपने मोबाइल में माँ और अंकल की रोमांटिक तस्वीरें ली। दोनों खुल के मस्ती कर रहे थे। फिर हमने करीब १ बजे रिसोर्ट में खाना खाया। फिर कुछ देर आराम किया। फिर रिसोर्ट के बाहर एक छोटासा वॉटरफॉल था वो देखने गए। वो वॉटरफॉल एक दम अंदर झाड़ियों में था। एक दम सुन सान कोई आवाज नहीं। अंकल ने कहा ” बेटा कपडे चेंज करो। ” में एक शॉर्ट पहन के आगया अंकल भी फ्रेंची टाइप स्विमिंग शॉर्ट पहन के आगये। में और अंकल पानी में स्विमिंग कर रहे थे। में ” माँ तुम भी आओ ” माँ ” ना बाबा कोई आगया तो? ” अंकल हस्ते हुए ” डरो मत ये जगह किसी को पता नहीं ये. तो कोई आता नहीं है। माँ ” लेकिन मेरे पास स्विमिंग सूट तो है नहीं ” . अंकल सोचते हुए ” ब्रा पेंटी है न एक्स्ट्रा? ” माँ ” हां ” अंकल ” उसमे ही आजाओ ” . माँ ” मुझे तो बोहोत डर लग रहा है ” . अंकल ” अरे में हु ना कुछ नहीं होगा ” माँ एक पेड़ के पीछे जाके अपनी पेंट उतारी फिर अपना टी-शर्ट उत्तारी फिर अपना बदन छुपाते हुए बाहर आयी। माँ के आधे से ज्यादा बूब्स ब्रा के बाहर थे। गोरी गोरी जाँघे देख के मेरा लंड खड़ा हुआ। माँ किनारे पे आके पानी के अंदर आयी अंकल ने उनको सहारा दिया। में दूसरे किनारे स्विम कर रहा था। धीरे से मेने उन दोनों को देखा तो वो एक दूसरे को स्मूच कर रहे थे। माँ की पीठ मेरे बाजू थी। अंकल माँ की पीठ और गांड सेहला रहे थे। फिर दोनों एक दूसरे पे पानी फेकना। एक दूसरे नो पकड़ना शुरू किया। फिर हम वॉटरफॉल के यहाँ पे गए। पानी के धार में भीगते हुए मजा आ रहा था। मेने देखा अंकल के मसल के उप्पर से पानी की बुँदे मस्त दिख रही थी। अंकल मनो हीरो के तरह दिख रहे थे। अंकल ने माँ को खींच के वॉटरफॉल के अंदर ले लिया। पानी के बूंदो से माँ के निप्पल ब्रा के उप्पर दिख रहे थे। माँ का बदन कातिलाना लग रहा था। फिर अंकल माँ को वॉटरफॉल के यहाँ जो छोटी गुफा थी वहा लेके गए। में जान गया अंकल गुफा में माँ की ठुकाई करने वाले है। में पानी में स्विमिंग का मजा ले रहा था। अचानक गुफा से आवाजे आने लगी ” अह्हह्ह्ह्ह उईईईईई वोओओओओओओ धीरे धीरे करो। ” . में समज गया माँ और अंकल की चुदाई शुरू होगई। थोड़ी देर बाद माँ की आवाज आयी ” पवन अंदर आ ” . में गुफा के अंदर गया तो देखा दोनों पुरे नंगे थे। उन दोनों के कपडे पास के पत्थर पे थे। माँ को अंकल ने एक बड़े पत्थर पर बिठा के चोद रहे थे। में आने के बाद अंकल माँ के चूत में से लंड बहार निकालते है। माँ की चूत पूरी तरह से लाल हुई थी। में आँख झुकाते हुए ” जी माँ ” . माँ ” कहा गया था? ” . में ” वो में स्विमिंग कर रहा था? ” माँ चिलाते हुए ” तुझे बिलकुल फिक्र नहीं है तेरी माँ और अब्बू यहाँ चुदाई कर रहे है। में जाके उनकी मदत करनई चाहिए ” . मे भ्रमित होके ” कोनसी मदत? ” माँ ” तेरे अब्बू के पीछे खड़ा होजा, और उनकी पीठ सेहला उनकी पीठ पे मछर और मखिया तंग कर रही है उसकी वजह से बेचारे तेरी माँ को ठीक से चोद नहीं पा रहे ” में ” ठीक है माँ ” में अब्बू की पीठ सहलाता हु ” अंकल ” कुसुम चल पहले मेरे लंड को उठा ” . माँ घुटनो पर बैठ के अंकल का लंड चूस रही थी और हिला रही थी बीच बीच में अंकल के गोटे भी चूस रही थी। फिर अंकल लंड पूरा तन गया। अंकल फिर माँ को उठा के पत्थर पे बिठाते है। फिर एक उंगली मुँह में डालके चूत में डालते है। फिर एक दो बार ऊँगली चूत के अंदर डाली। माँ की तो ” आह्हः ” निकल गयी फिर अंकल ने लंड पे थूक लगा के लंड माँ की चूत में पेल दिया। में अंकल की पीठ सेहला रहा था। मेरी नज़र उनकी चुदाई पर थी। १० मिनट बाद। अंकल ने माँ को उठाया और पत्थर पे टिका के खड़ा किया फिर माँ एक टांग उठाके लंड पेल दिया। वहा माँ ” अह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ रहीम मेरे मालिक ऐसे चोदते रहो अपनी बेगम को ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह काश में विधवा हो जाऊ और दिन रात तू मेरी चूत चोदता रहे ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बड़ा जालिम लंड है तेरा ” ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह काश में विधवा हो जाऊ और दिन रात तू मेरी चूत चोदता रहे ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बड़ा जालिम लंड है तेरा ” फिर अंकल माँ को पत्थर से उठाके खड़ा करते है और एक टांग उठाके वापस पेल देते है। माँ ” अह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ उईईईईई बड़ा मज़ा आ रहा है आउउउउउउउउउ ” फिर कुछ देर बाद माँ के पैर दर्द करने लगे। फिर माँ ने कहा ” बेटा उस झाड़ी के पीछे खुली जगह है वहा पर चटाई बिछा के अब में लेट के चुदवागी। में घास, पत्थर और कांटे हटाके वो जगह साफ़ करके चटाई डालके माँ और अंकल को बुलाया। दोनों नंगे ही वहा पर आते है। फिर अंकल माँ को लिटा कर पेलने लगते है। कुछ देर बाद अंकल गुर्राते हुए अपना वीर्य माँ के चूत के उप्पर गिराते है। माँ टॉवल से अपनी चूत और अंकल का लंड साफ़ करती है। फिर दोनों कपडे पहन के रिसोर्ट में आते है। फिर हम लोग चाय पीके। वापसी के बस में बैठ के घर के लिए निकलते है। करीब ८ बजे घर पोहच गए। में अपने घर निकल आया। माँ अंकल के घर गयी थी। दिनभर के घूम फिरने से थकान हुई थी। में उप्पर छत पे आया। अंकल के हॉल की खिड़की खुली थी। मेने देखा माँ और अंकल इनरवेअर में थे मतलब अंकल फ्रेंची में थे और माँ ब्रा और पेंटी में। अचानक मेने देखा दूर से रहीम अंकल के अब्बू सुलेमान चाचा चलके आ रहे थे। मेने माँ को फ़ोन घुमाया। माँ हड़बड़ी में पेंट पहनी और टीशर्ट पहनी। और उप्पर छत से घर में आयी। पेण्ट की चैन भी नहीं लगाई थी। उप्पर आके अंकल के अब्बू को गालिया देना शुरू किया ” साला बूढ़ा, कमबखत बिना बना बताये टपक पड़ा, मेरी जिंदगी में कोई ख़ुशी है ही नहीं ” . फिर माँ रोने लगी। माँ ने फिर मेरे लिए खाना बनाया। खुद भूके ही छत पर खड़े रहके अंकल के घर को देख रही थी। करीब ११ बजे में माँ को सोने बुलाने गया पर माँ ने इंकार किया। अचानक अंकल के छत पे कोई आया। अंधेरे में माँ को ठीक से दिखा नहीं। फिर हलकी सी रौशनी में माँ को समज में आया ये तो अंकल के पिताजी है।

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अगले अंक में जानेगे कैसे माँ ने अंकल के अब्बू को भी जाल में फसाया…

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