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पति, पत्नी और वो : भाग ५

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रानी तो शाम से तीन लन्ड हजम कर भी भूखी थी, बुर की गर्मी साली शांत होती ही नहीं उसको जितना प्यार मिले उसकी प्यास बढ़ती ही रहती है और अब तो राकेश मेरे चेहरे को चूमता हुआ चूची को पकड़े मसलने लगा जबकि चंदन मेरे कमर से जांघो को चूमने लगा, आज की रात मेरे जीवन की सबसे हसीन रात थी जहां मुझे गैर मर्दों के साथ शारीरिक संबंध बनाने का अवसर मिला वो भी हब्बी के सामने और उनकी इच्छा से, राकेश मेरा पति है या दल्ला मुझे क्या आप लोग ही तय कीजिए और फिर मेरे ओंठ पर ओंठ रख राकेश चूमने लगा तो उसके लन्ड को पकड़ मैं हिलाना शुरू की लेकिन चंदन तो मेरे नग्न मोटे जांघो को चूमता हुआ जांघो को फैलाया और बुर पर उंगली फेरने लगा, कसम से मेरे हब्बी से भी अधिक काम क्रिया में ये उस्ताद था और फिर मैं राकेश के ओंठ को जीभ से चाटना शुरू की तो वो मुंह खोलकर मेरा जीभ अंदर लिया फिर चूसने लगा लेकिन मेरी गोल मुलायम चूची को दबाए जा रहा था और मेरी बुर तो तीन तीन लौड़े से चूदाई कराकर लहर रही थी, अब चंदन मेरे जांघो को चूमकर बुर पर मुंह लगाया और अपने नाक को बुर के मुहाने पर रख सूंघने लगा तो मेरी सांसें तेज हो चुकी थी और आंखें बंद इतना ही नहीं बुर में गुदगुदी फिर से होने लगी तो चंदन बुर के ऊपरी हिस्सा को चूमने लगा और रानी ” ओह उह उई अब और नही चाटो डियर मेरी बुर तो तेरे लन्ड को पाने के लिए तड़प रही है ” राकेश मेरा जीभ निकाला फिर मेरी गर्दन को चूमने लगा, बूब्स को दबा दबाकर लाल कर दिया और निप्पल तो टाईट हो गए और अब मेरे छाती को चूमता हुआ बूब्स को पकड़ मुंह में लिया और चूसने लगा तो दूसरे बूब्स को पकड़ दबाए जा रहा था, चंदन मेरी बुर को फैलाया और उसमें जीभ घुसाए चाटना शुरु किया, जिस्म की सबसे कोमल अंग पर जीभ का नाचना मुझे उत्तेजना से भर दिया और मैं अपने पैर को बेड पर रगड़ने लगी, रह रहकर चूतड को ऊपर उठाने लगी ” उई मां मेरी बुर में तो आग लगी हुई है उह अब चोद ना चंदन
( राकेश चूची मुंह से निकाला ) अरे जानू चोदूंगा आराम से रह ना ” तो चंदन मेरे बुर में जीभ घुसाए जीभ को नचाने लगा और मेरी चूत तो शाम से चार बार रस छोड़ चुकी थी, मैं अब कामाग्नि की गिरफ्त में थी तो राकेश मेरे दाहिने चूची मुंह में लिए चूसने लगा और मेरे जिस्म को सहला रहा था। कुछ देर बाद चंदन बुर से जीभ निकाला तो राकेश चूची को और अब मैं टांगे फैलाई लेटी हुई चूदाई का इंतजार कर रही थी, चंदन मेरे बगल में बैठा तो पति देव मेरी दूसरी ओर बैठे हुए थे ” रानी पहले लन्ड चूस फिर चूदाई करूंगा ” मैं बेड पर उठकर बैठी और चंदन लेट गया तो मैं उसके ऊपर लेटी वो भी कोहनी और घुटनों के बल लेकिन अपना चेहरा उसके लन्ड की ओर की थी तो मेरा चूतड चंदन के चेहरा के ऊपर था, जांघें दो दिशा में फैली हुई तो बुर को उसके चेहरे के ऊपर कर रखी थी, अब मैं लन्ड को चूमने लगी तो चंदन मेरे चूतड को चूमने लगा और राकेश मेरे बूब्स को पकड़ दबाना शुरु किया, इस स्टाइल में दोनो एक दूसरे के योनि को चूमते और चाटते तो मैं चंदन के लन्ड के सुपाड़ा को ओंठ पर रगड़ने लगी और चंदन मेरे चूतड को किस्स कर रहा था, मेरे बुर को सहलाने लगा तो रानी मुंह खोल उसके पूरे लन्ड को अंदर ली फिर चूसने लगी तो चंदन मेरे गांड़ को जीभ से चाटने लगा, अब तो वो गांड़ के दरार में जीभ फेरने लगा तो बस एक दो इंच नीचे ही बुर रानी थी। मैं चंदन के लन्ड मुंह में लिए चुस्ती रही फिर उसे मुंह से निकालकर उसको जीभ से चाटने लगी तो चंदन अब बुर में जीभ घुसाया और चाटना शुरू किया, राकेश मेरे पीठ को चूमता हुआ बूब्स दबाए जा रहा था तो चंदन का ७ इंच लंबा दो इंच मोटा लन्ड जीभ से चाटते हुए मस्त थी और उसका पूरा जीभ मेरी बुर में था तो मैं अपने आपको रोक नही पाई और दुबारा उसका लन्ड मुंह में लेकर चूसने लगी, सर का झटका देते हुए मुखमैथुन का आनंद ले रही थी की चंदन बुर से जीभ निकाला फिर गांड़ में जीभ घुसाया तो मेरा पूरा बदन कामाग्नी में जल रहा था, मैं मुखमैथुन करते हुए गांड़ चटवा रही थी की चंदन मेरे चूतड को सहलाने लगा ” उठ साली अब चोदुगा ” और मुझे क्या चाहिए था।
मैं बेड पर चित लेट गई और चंदन मेरी चिकनी जांघो को फैलाकर लन्ड को बुर के मुहाने पर रगड़ने लगा, बेचारा पति क्या करता तो मैं बोली ” मूकदर्शक क्यों बनो हो इधर आओ ” वो मेरे चेहरे के पास बैठा तो मैं चंदन का लन्ड बुर में घुसते ही राहत महसूस कर रही थी लेकिन उसने धक्का देकर मेरी बुर का तार तार झंकृत कर दिया और मैं ” उई मां फाड़ दिया ” लेकिन इस मोड़ पर कोई नहीं रुकता, वो धकाधक चोदता हुआ मस्त था तो मैं अपने कोहनी के बल चेहरा ऊपर की फिर राकेश के लन्ड के सामने मुंह खोल दी और वो अपना लन्ड पकड़े मुंह में घुसाया फिर तो बुर में चंदन का लन्ड और मुंह में हब्बी का, मैं उसके कमर में हाथ डाले चेहरा को आगे पीछे करने लगी और मुखमैथुन करते हुए बुर चूदाई करवा रही थी, चंदन का मूसल लन्ड मेरी बुर में गर्मी पैदा कर चुकी थी तो मैं समझ गई की मेरी बुर जल्द ही रस छोड़ेगी और मैं कुछ पल में ही राकेश का लन्ड मुंह से निकालकर लेट गई तो चंदन मुझे चोदता हुआ मेरे ऊपर सवार हो गया। भारतीय नारी इस अंदाज में चुदवाना पसंद करती है तो मैं चंदन के लन्ड के धक्के से मस्त थी फिर उसके कमर पर हाथ रख चूतड उछालना शुरू की तो चंदन मेरे ओंठ चूमने लगा लेकिन बुर में जीभ हो या लन्ड का धक्का घर्षण पैदा करके उसे बुर की भट्टी बना चुकी थी और फिर बुर से रस फेंक दिया तो चंदन मेरे ऊपर से हटा और वाशरूम चला गया लेकिन यहां राकेश चोदने को तड़प रहा था।
रानी तो बिस्तर पर लेटी रही और राकेश मेरी जांघों को फैलाकर बुर में लन्ड घुसाने लगा, उसका लन्ड बुर आराम से हजम कर गई और वो बेदर्द बालमा की तरह मेरी बुर में लन्ड का धक्का देने लगा तो मैं पिछले तीन चार घंटो से सिर्फ सेक्स में मस्त थी, चंदन हो या राकेश या फिर राज, सबने मुझे एक एक बार चोदा मेरी गांड़ तक को नहीं बक्शा और अब दूसरे चरण में मेरी चूदाई हो रही थी, बुर तो शरीर का सबसे कोमल अंग होता है और उसमे एहसास भी खत्म हो चुका था फिर भी चूदाई का मजा ही अलग होता है। राकेश मेरे ऊपर लेटकर धक्का देने लगा और ओंठ चूमता हुआ बोला ” चूतड उछाल ना डार्लिंग
( मैं बोली ) कमर हो या जांघें बुर हो या चूचियां सबमें मस्ती छा चुकी है लेकिन मुझे कमर में दर्द हो रहा है, बस जल्दी से दोनो मुझे चोदकर मेरे पर रहम करो ” उधर से चंदन भी आया तो वो साला मेरे मुंह के पास बैठा फिर गाल सहलाने लगा और राकेश चोद चोदकर बुर का कचूमर निकाल चुका था तो मेरे जिस्म में काफी थकान हो रही थी, कुछ देर बाद राकेश चोदता हुआ हांफने लगा और मैं चूतड उछलने लगी और फिर मेरी बुर वीर्य से लबालब भरी पड़ी थी, वो मेरे जिस्म पर से उतरा तो मैं थकान के मारे लेटी हुई थी और चंदन बोला ” फ्रेश हो लो डार्लिंग
( मैं बोली ) अब प्लीज रहने दो बुर काफी लहर रही है
( चंदन बोला ) जानेमन तू सिर्फ बदन को पट करके लेटी रहना तेरी गांड़ चोद कर तृप्त कर दूंगा ” में उठकर वाशरूम गई फिर फ्रेश होकर वापस आई, रात के ११:३५ बजे थे तो मैं डाइनिंग हॉल नंगे गई फिर एक ड्रिंक्स बनाकर पीने लगी, आगे अगले भाग में।

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