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दिपा दिदि का मुत्रपान

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राहुल को अब बुर की भुख सी लग चुकि थी, अपनी बड़ी बहन के साथ सम्भोग सुख लेने के बाद मेरा ध्यान औरतो पर ही लगा रह्ता था ! इस बिच अपनी चचेरी बहन के साथ काम वासना का आनंद लिया था लेकिन चुदाई का सुख नही ले पाया था ! मेरी छोटी चाची एक हफ़्ते कानपुर मे रुकी थी और मेरे साथ 2-4 बार चुदाई का आनंद ली थी ! मेरी बड़ी दिदि दिपा आने वाली है ये खबर सुनकर काफ़ी खुशी हुई, लेकिन जिजा भी साथ आने वाले है ये थोड़ी निराश करने वाली खबर थी ! दिदी और जिजा दोनो घर पहुंचे, फ़िर हमलोग साथ मे काफ़ी बातचित किये, दिदी हमको घुर-2 के देखा करती थी ! एक शाम वो मुझे अकेले मे मिली और बोली….. ” राहुल जिजा कल सवेरे की गाड़ी से देल्ही जायेंग़े तब तक इंतजार करो

(राहुल) जरुर दिदी. ”

अगले दिन मै कालेज गया लेकिन ध्यान दिपा पर ही लगी हुई थी, शाम को घर वापस आया तो दिपा लाल रंग़ के गाउन मे सुंदर लग रही थी ! मै अपना कपड़ा बद्ला फ़िर लेट गया, थोड़ी देर के बाद दिपा मेरे कमरे मे आई और दरवाजा बंद कर दी ! मै हड़्बड़ा कर बेड़ पर उठा और बोला…… “दिदी ये क्या कर रही हो

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(राहुल) भोले मत बनो, मम्मी पापा बाजार निकले तो मै सोची लेकिन तुम कह्ते हो तो जाती हू. ” वो उठ्कर जाने लगी तो मै उसको कसकर पकड़ लिया और अपने बिस्तर पर ले आया ! दिपा बिस्तर पर बैठी और मै उसके सामने खड़ा हो गया, दिदि मेरे बरमुड़ा को कमर से निचे खिंच दी और मेरा लंड़ उनके मुह्न के सामने था! मुझसे नज़र मिलाते हुए वो मेरे लंड़ को पकड़ी और अपने मुह्न मे घुसा ली, मेरा खड़ा लंड़ उनके मुह्न मे था और वो मुह्न मे भरकर चुसने लगी, अब मेरा लंड़ पुरी तरह से खड़ा हो गया और वो उसपर अपना जिभ फ़ेरने लगी ! मै दिपा के चुत को चोदना चाह्ता था और वो फ़िर से मुखमैथुन करने लगी, अपने मुख का झट्का लंड़ पर देते हुए झांट मे उंग़ली घुमा रही थी, पल भर बाद दिपा लंड़ को अपने मुख से बाहर कर दी!

मै अब बिस्तर पर आ गया, दिदी के गाउन को उनके बदन से निकाल फ़ेंका, वो सिर्फ़ चाड़्ही मे बैठी हुए थी ! उनको बेड़ पर सुलाकर उनके जिस्म पर ओंधा और गाल पर चुमबन देने लगा, वो मेरे पिठ पर अपने हाथ फ़ेर रही थी, दिपा के गाल को चुमता हुआ अपने सिने से उसके चुची को रगड़ने लगा और दिपा तड़्प रही थी ! पल भर बाद दिदी के चुची को मुह्न मे भरकर चुसता हुआ दुसरा चुची मसलने लगा और वो सिसकने लगी…… “हाय रे मेरी बुर कितनी खुज्ली हो रही है. ” मै दिपा के दुसरे चुची को चुभलाने लगा तो वो मेरे बदन को खरोंचने लगी ! अब मै उनके कमर को चुम रहा था और उनके चिकने जाण्घ पर हाथ फ़ेरने लगा, अब मै दिपा के चध्ही को खोलकर बुर का दिदार करने लगा ! लगभग 2 महीने बाद दिपा कि बुर को निहार रहा था, एक तकिआ दिदी के चुत्तर के निचे ड़ाला और उनके दोनो जङ्हा के बिच अपना चेहरा झुकाया, उनकी चिकनी मांसल बुर लाल थी और बिन बार के सुंदर दिख रही थी ! मै दिपा कि बुर पर चुम्बन देने लगा तो वो अपने चुत्तर को उचकाने लगी, उनके बुर से सुगंध आ रहा था और मैने दिपा को बोला…. ” जानु उङ्ली की मदद से अपने बुर का मुख तो जरा खोलो. ” दिपा बुर को फ़लका दी तो मेरा जिभ उसके अंदर जाकर स्वाद लेने लगा ! दिदी की शादी के 2 साल हो चुके थे और वो चुदाई का भरपुर आनंद ले रही थी, इस्लिये उनकी बुर का हिस्सा धिला पड़ चुका था और अंदरुनी मार्ग भी काफ़ि खुल चुकी थी और ऐसे ही चुत को चाट्ने मै मजा भी आता है ! मेरा 2/3 जिभ दिदि की बुर को चोद रहा था और मेरा हाथ उनके मोटे जङ्हा को कसकर पकड़ा था, वो चिंखने लगी…… “अबे कुत्ते सिर्फ़ बुर चाट्ने मे हि वक़्त जाया करेगा या अपने लंड़ से चुदाई भी करेगा

(राहुल) फ़िल्हाल दिदि तेरे बुर की मुत पिउंग़ा

(दिदि) तो चल ना बाथरूम पिलाती हू अपनी मुत. ” पल भर बुर चुसा और दोनो बाथरूम चले आये ! अब दिदि खड़ी थी तो मै घुट्ने के बल बैठ्कर दिपा के दोनो रान को अपने मुह्न मे लिया और चुसने लगा और वो चिंख पड़ी….. ” ले बे कुत्ते पी मेरी बुर की मुत आह निकला. ” और दिदि कि बुर से पिसाब कि तेज धार मेरे मुह्न मे गिरने लगी और मै मुतपान करके मस्त हो गया !

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