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दिपा के साथ एक रात

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दिपा और राहुल 2 दिन से रिश्ता नाता भुल्कर एक नये रिश्ते को निभा रहे थे, आखिर बुर और लंड़ का रिश्ता ही कुच्ह ऐसा होता है, ना रिश्ते याद रह्ते है ना उम्र का ख्याल होता है बस काम-वासना ही करने को जी करता है ! दिपा दिदी के साथ सुबह -2 एक दफ़े चुदाई का आनंद ले लिया था, ना वो मेरे पर ध्यान दे रही थी ना मेरा मन चोदने को हो रहा था, लेकिन शाम होते ही दोनो मजे को आतुर होने लगे ! मै बज़ार कि ओर निकला और दो बोत्तल बीयर लेकर घर आया, दिपा खाना बनाने मे लिन थी, मै रसोई घर मे घुसा और दिदी को पिछे से दबोच लिया, वो मुस्कुराते हुए पल्टी…… “क्या राहुल एक तो सुबह -2 बुर लह्ररा दिये और फिर से

(राहुल) वो नास्ता था, भुख अब लगी है खाना भी खाउंग़ा

(दिदी) खाना बनाने तो दो जानु

(राहुल) तब तक बीयर पीता हु. ”

दिदी साड़ी, साया, ब्लाउज पहन कर मस्त माल लग रही थी और उसके नितम्ब की गोलाई मेरे लंड़ को खड़ा कर चुकी थी, दिपा के चुत्तर पर अपना लंड़ रगड़ा था लेकिन मन गांड़ चोद्नने को हो रही थी ! मै बरमुड़ा पहन कर दिदी के पास वापस आया और एक ग्लास लेकर बालकोनी मे कुर्सी पर बैठ बियर पीने लगा, मेरा लंड़ कड़ा हो चुका था और चोदने को आतुर था ! पल भर बाद दिपा मेरे पास आकर बैठ गयी, मै एक बोतल बियर पीकर मस्त हो गया और दिदी अपना हाथ मेरे कंधे पर रखकर बोली……. ” खाना बन गया, चलो खाने

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(राहुल) पहले तुमको चोदुंग़ा फिर खाना

(दिपा) अरे पग्ले चोदने को ही तो बोल रही हू. ” और वो मेरे हाथ पकड़ क्रर अपने बेड़रूम लेती आई ! एक बेशर्म लड़्की की तरह मेरे सामने अपने कपड़े को खोलने लगी, दिपा के मख्मली जिस्म अब नग्न थे और मै उनको बेड़ पर बैठने को बोला! उनके सामने मेरा फ़ौलादी लंड़ था और दिदी लंड़ को पकड़ कर उसके सुपाड़ा को अपने ओंठ प्रर रगड़ने लगी ! वो मुझसे नज़र मिलाते हुए लंड़ को अपने मुह्न मे भर ली और मेरे कमर को थामे मुखमैथुन करने लगी, उसका चेहरा लाल हो चुका था और दिपा किसी रांड़ की तरह मेरा लंड़ चुभला रही थी, 2-4 मिनट के बाद वो मेरे लंड़ को जिभ से चाट रही थी ! फिर वो अपना जिभ मुख से बाहर कि और लंड़ के सुपाड़े को उसपर रगड़ने लगी, मेरे लंड़ का हाल खराब था और दिपा फिर से लंड़ चुसने लगी, अपने मुख का तेज झट्का मेरे लंड़ पर पड़ रहा था और वो पल भर बाद लंड़ छोड़ बाथरूम भागी !

बेड़ पर दिपा का इंतेज़ार कर रहा था, वो आकर बेड़ पर लेट गयी, मै उसके नितम्ब के निचे तकिआ ड़ाल दिया और उसके दोनो पैर को दो दिशा मे करके अपना चेहरा बुर पर झुकाया ! उसके चिकने चुत को चुमता हुआ अपना हाथ उसके चुचि पर लगाया और मसलने लगा, वो सिसक रही थी और बुर को उंग़ली की मदद से फ़ल्का दी, अब मेरा जिभ दिदी की बुर को कुरेदने लगा ! उसकी बुर को जिभ से चोदने का मजा ही कुच्ह अलग था और दिदी…… “अबे कुत्ते बुर को सिर्फ़ चाटना आता है या चोद भी सकते हो

(राहुल) साली तु तो हरामी जात है 3-4 बार चुद कर भोली बनती है ! “और मै दिदी के बुर पर लंड़ का सुपाड़ा रखा और धीरे से लंड़ बुर मे घुसाने लगा, दिदी की चुत कसी हुई थी, 2/3 लंड़ घुसने के बाद लगा कि बुर फ़ट जायेगी, तो दिदी की कमर को कसकर पकड़ा और जोर का धक्का बुर मे दिया, मेरा पुरा लंड़ दिपा के बुर मे था और वो दर्द से चिंख उठी…….. “अबे हरामी बुर का भर्ता निकाल कर ही रहेगा क्या

(राहुल) अबे कुत्तिआ पल भर पहले तो भुल गयी थी की मै तुम्हे चोदा हू, इसलिए याद दिला रहा हू. ” मेरा लंड़ दनादन बुर के अंदर बाहर हो रहा था, अब दिदी के बदन पर औंध कर चोदने लगा और वो अपने गदेदार गांड़ को उपर निचे करने लगी! दोनो चुदाई कि दुनिया मे खो गये थे और मेरा लंड़ बुर को रगड़ -2 कर लहरा रहा था, दिदि का स्तन मेरे सिने से रगड़ खा रही थी और दिदी मेरे गाल को चुमते हुए बदन पर नाखुन फ़ेर रही थी, 10 मिनट कि चुदाई के बाद दिपा भी हांफ़ने लगी और मै भी झरने को आतुर था लेकिन लंड़ अभी बुर को चोदने मे मस्गुल था, वो चिंखने लगी….. “अबे साले अब तो बुर को गिला कर आह्हह्हह लहर रहि है

(राहुल) ये ले मेरा विर्य पी ले बे रांड़. ” और बुर मे विर्यपात कराकर दिदी के बदन पर लेटा रहा. ” दिदी और मै नग्न हि सो गये !

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