छोटी चाची बबीता | Erotic Stories
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छोटी चाची बबीता

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हेलो मित्रो,

मै आप लोगो को एक रोमांटिक कहानी सुनाने जा रहा हूं, जोकि मेरे यानी राहुल मल्होत्रा और मेरी छोटी चाची बबीता के बीच हुई थी।मेरी छोटी मौसी बबीता उन्नाव से कानपुर आती ही रहती थी और एक बार संयोग बस बबीता मेरे पापा और मम्मी की गैर हाजिरी में कानपुर आई, मै अकेले ही घर पर था और मेरे लिए नौकरानी खाना बना देती थी या फिर मै बाहर जाकर खाना खा लेता था।मौसी बबीता के आने की खबर मुझे मम्मी ने फोन कर के दी तो मै बेहद खुश हुआ।शाम के ०५:०० बजे बबीता घर आई तो मैंने उनके लिए एक कप चाय बनाया और दोनों साथ ही चाय पीने लगे, सोफ़ा पर एक दूरी बनाए दोनों बैठे थे तो मै पूछा…. “कितने दिन का ट्रीप है

(बबीता मुस्कुराते हुए बोली) अपनी दीदी से मिलकर ही जाऊंगी

(राहुल) आप स्नान करके फ्रेश हो जाइए, मै बाज़ार से कुछ लेकर आता हूं

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(बबीता सोफ़ा पर से उठते हुए बोली) शरीर में काफी थकावट है हो सके तो एक दो बोतल बियर की लेते आना. ” मै बाज़ार की ओर चल दिया और कुछ सामान खरीदने के बाद दो बोतल बियर लिया, फिर वापस घर आ गया ।

चाची बबीता स्नान करके गाऊन पहन रखी थी और मै दरवाजा बंद करके डायनिंग हाल में बैठा, टेबल पर बियर की बोतल रखा, फिर किचन से ग्लास लेता आया, चाची सोफ़ा पर बैठकर मुस्कुराने लगी…… “राहुल खाना का क्या करना है ?

(मै उसके करीब बैठा) आप को थकावट है, खाना ऑर्डर कर देते है

(बबीता मेरी ओर खिसकर मेरे कंधे पर बाहें रखी) ठीक है जैसा तुम ठीक समझी. ” और फिर दोनों बियर पीना शुरू कर दिए, दो दो ग्लास बियर पीने के बाद बबीता मेरे ओंठ और गाल को चूमने लगी, उसको मै अपने जांघ पर बिठाकर पीठ सहलाने लगा तो बबीता बियर के नशे में मस्त थी, वो मेरे ओंठ को चूसते हुए अपना जीभ मेरे मुंह में डाल दी तो मै उसके गर्दन के पीछे हाथ लगाकर उसका जीभ चूसने लगा, उसकी एक चूची मेरे छाती से दब रही थी तो ३०-३१ साल की मदमस्त माल मेरे से लिपटकर जीभ चुसवा रही थी, कुछ देर बाद वो जीभ को निकाल ली तो मै उसके गोलाई को मसलने लगा और बबीता मेरे जिंस को खोलने लगी, मेरे बदन पर पल भर बाद सिर्फ एक कच्छा था तो वो अब बेशर्म औरत की तरह मेरे सामने खड़ी हो गई, मै उसके गाऊन को कमर की ओर करने लगा तो वो खुद ही गाऊन को उतारकर अपने खूबसूरत जिस्म का नुमाइश करने लगी, चाची एक पेंटी से अपने चूत को ढक रखी थी, अब मै उनको अपनी ओर किया और सोफ़ा पर बैठे हुए उनके कमर की चूमने लगा जबकि मेरा हाथ उसके गान्ड को सहला रहा था, फिर उनके मोटे जांघों को चूमने लगा और अंत में उसके सामने खड़ा हुआ, अब उनके चूची को मसलता हुआ गाल और ओंठ चूमने लगा, फिर अपना चेहरा उनके सीने से लगाकर चूची चूसता हुआ दूसरा स्तन मसलने लगा, वो सिसकने लगी…. “ओह आह युम राहुल तेजी से चूची चूस ना आह मेरी बुर में कितनी खुजली हो रही है. ” मै उसके दोनों स्तन को चूसा और फिर चाची को सोफ़ा के किनारे बिठाया, उसके दोनों जांघ दो दिशा मै थे तो मै पेंटी के डोरी को खोला और बुर दर्शन करने लगा, शायद वो बुर को हाल में ही बार से मुक्त की थी, उनके गुलाबी चूत को चूमता हुआ चूची मसलने लगा, तो वो साली उंगली की मदद से बुर फ़लका दी, मेरा जीभ बुर के अंदर घुसकर चाटने लगा और वो तड़पने लगी…. “ऊई आह ओह राहुल बुर अब चोद दो ना, वैसे भी लंड बुर में गए २-३ हफ्ते हो चुके है. ” तो मै बुर के दोनों फांक को मुंह में लेकर छुभलाने लगा और कुछ देर तक बुर चूसकर बाथरूम गया ।

बबीता चुदाई को तड़पने लगी, मै उसे लेकर अपने बेडरूम आया और फिर उसे बिस्तर पर सुला दिया, वो टांग फैलाए लेती थी तो मै घुटने के बल उनके जांघों के बीच बैठे और लंड को थामकर उसकी चूत में पेलने लगे, धीरे धीरे आधा लंड बुर के अंदर था तो आगे का रास्ता जाम था, मै उनके कमर को थामकर जोर का धक्का बुर में दे दिया तो वो चींख़ पड़ी….. “उई मां कितना मोटा और कड़ा लंड है तेरा, मेरी तो बुर ही फट जायेगी. ” सही मै चाची की बुर का लौच सिकुड़ चुका था, शायद वो महीने भर से नहीं चुदाई थी, खैर मेरा मूसल लंड अब पूरे गति और ताकत के साथ बुर चुदाई कर रहा था, पल भर बाद मै बबीता के बदन पर सवार हो गया और ओंठ चूमते हुए चोदने लगा….. “जबतक तेरी दीदी नहीं आ जाती तुझे चोदता ही रहूंगा. ” वो अब अपने गान्ड को ऊपर नीचे करने लगी…. “और लंड की जुगाड करो ना

(राहुल) मेरा एक दोस्त है याकूब उससे चूदोगी, वो तेरी दीदी को भी चोदता है. ” तभी मै उसे चोदता रहा और उसकी बुर पनीया गई तो मै अब झुककर बुर को चाटने लगा, अपने जीभ को बुर में डालकर बुर को चाटने लगा, फिर दोनों फ्रेश हुए और अबकी बार चाची बेड पर कुतिया की तरह हो गई।मै उसके गान्ड के सामने बैठा था, अपना लन्ड थामे उनके बुर में पेलने लगा कि और धीरे धीरे पूरा लंड बुर में डालकर कमर थामे चोदने लगा, बबीता अपने चूतड़ को हिलाने लगी और दोनों चुदाई की दुनिया में खो चुके थे, मेरा कमर उसके गान्ड से टकरा रही थी और मेरा लंड बुर को अब आग कि भट्टी बना चुका था, वो अपने चूतड़ को हिलाते हुए हांफने लगी तो मै चाची को १०-१२ मिनट से चोद चोद कर हांफने लगा, मेरा लंड भी गरम हो चुका था लेकिन अभी रस झाड़ने मै वक़्त था।चाची बबीता अपने नितम्ब को हिलाते हुए….. “अरे मादरचोद कब बुर की आग बुझाएगा. ” और मै चोदता हुआ उनके सीने से झूलते स्तन को मसलने लगा, फिर मै चिल्ला पड़ा….. “ले बे रण्डी बुर को रस पीला आह मेरा गिरा. ” और मेरा लंड वीर्य का तेज धार बुर में छोड़ दिया, दोनों शांत पड़ गए और बेड पर ही आराम करते रहे ।

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