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सुहागरात की यादें : भाग २

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रेणु नग्न अवस्था में बेड पर लेटी हुई थी तो हब्बी मेरे जांघों के बीच मुंह लगाए बुर को जीभ से चाटने में मस्त थे हालांकि बुर से रस निकल चुका था और मैं थोड़ी ढीली पड़ चुकी थी ” उफ ओह अब प्लीज चाटना छोड़ो ना
( वो चेहरा ऊपर किया ) रेणु अब तुम्हें मेरा लन्ड चूसना होगा
( मैं चेहरा फेर ली ) छीः उसको भी कहीं मुंह में लिया जाता है
( वो मेरे बगल में लेटा और मेरे एक बूब्स को चूमने लगा ) रेणु तुम कभी सेक्स कहानी पढ़ी हो की नही
( मैं बोली ) उहुं क्यों आप पढ़े हैं
( वो चूची को दबाने लगे ) हां लिंग चूसना काम क्रिया का एक हिस्सा है जैसे की तेरी बुर को मैं चाट लिया ” और मोहन तो मेरे स्तन को मुंह में लिए चूसना शुरु किया तो मैं अब झिझक छोड़ उनके जांघिया को कमर से नीचे कर दी और उनका लन्ड देख सहम गई, वो चूची चूसने में मस्त थे तो मैं उनके लन्ड जोकि फिलहाल सुस्त था फिर भी पूरी तरह से टाईट होने पर ६ इंच लंबा जरूर होगा, पहली बार तो लन्ड को अपने नग्न आंखों से देख रही थी और अब मोहन चूची मुंह से निकाला फिर उठकर टॉवल कमर से लपेट दरवाजा खोल बाहर चला गया, मैं समझ गई की कहां गया होगा और मैं अपने जिस्म पर चादर डालकर लेटी रही, कुछ देर बाद वो आया तो मैं बोली ” मुझे बाथरूम जाना है
( वो हंस कर बोला ) कमरे से निकलते ही बाई ओर है, फिलहाल तो बरामदे पर कोई नहीं है
( मैं बोली ) क्या नंगी चली जाऊं ” फिर मैं पेटोकोट को छाती के ऊपर से बांध ली और दरवाजा खोलकर इधर उधर देखी और झट से बाथरूम जाकर मूतने लगी, बुर को पानी से धोकर आई तो मोहन बिस्तर पर लेटा हुआ था और मैं दरवाजा बंद कर उसके करीब गई फिर बिस्तर पर ही उसके टॉवल को हटाकर लन्ड पकड़ हिलाने लगी तो मुझे अच्छा लग रहा था और मोहन लेटे हुए हाथ बढ़ाया फिर मेरी चूची पकड़े दबाने लगा ” क्या हिला रही हैं, मुंह में लेकर चूस तो ” मैं लन्ड को मुंह में लेने से झिझक रही थी फिर भी लगा की हब्बी जब मेरी योनि को चाट सकता है तो मैं उनके लन्ड मुंह में लेने से क्यों हिचकिचाऊं, सर झुकाई फिर लन्ड का चमड़ा नीचे कर सुपाड़ा को ओंठ पर रगड़ते हुए उनको देखने लगी और मेरा मुंह अनायास खुला फिर मैं उनके लन्ड को हजम कर चूसने लगी, मेरी मुंह में उनका लन्ड मुझे तो बेहद आनंद आ रहा था लेकिन तभी मेरे बूब्स को दबाते हुए वो बोले ” अब मुंह का झटका देकर मुखमैथुन कर ” ये मुखमैथुन शब्द मैं किसी के मुंह से सुनी थी लेकिन सही में आज इसका अर्थ जान ली फिर मैं लन्ड को मुंह से निकाली तो लन्ड थोड़ा टाईट हो चुकी थी और अब उनसे नजर मिलाते हुए लन्ड पर जीभ फेरना शुरू की तो मोहन, मेरे हब्बी जोकि मुझसे उम्र में ५ साल बड़े होंगे साथ ही लंबाई ५’१० इंच तो बदन हट्ठा कट्ठा और लन्ड तो चाटने में ही मैं समझ गई थी की आज बुर की झिल्ली फटते ही मैं दर्द महसूस करूंगी, रेणु अब पति का लन्ड मुंह में लिए चूसना शुरू की लेकिन इस बार मुंह का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी, मोहन तो सही में सेक्स का जानकार था और फिर मैं कुछ देर में ही लन्ड को मुंह से निकाली फिर उसके बगल में लेट एक चादर अपने नग्न जिस्म पर डाल ली तो मोहन मेरे गाल चूमते हुए चादर में हाथ डाले बूब्स दबाने लगा ” एक बात पूछूं रेणु
( मैं बोली ) हां पूछिए
( वो मेरे बूब्स को मसलते हुए बोला ) पहली बार तुम संभोग क्रिया करने जा रही हो तो क्या कंडोम लगाकर करूं या
( मैं तो चुप ही रही और वो बोले ) रहने दो एक बार में कोई पेट से थोड़ो ना हो जाती है ” मैं लेटी रही तो मेरे सामने मेरे हब्बी नंगे बैठे हुए थे और मेरे तन पर से चादर हटाकर मुझे नंगा कर दिए।
रेणु की जांघें तो सिमटी हुई थी और फिर वो मेरे दोनो जांघो को फैलाकर बुर पर हाथ फेरने लगे और ज्योंहि अपना लन्ड पकड़ बुर पर रखे मेरी तो सांस ही रुक चुकी थी, उसका लन्ड तो कड़ा और मोटा था तभी मोहन ने सुपाड़ा को बुर में पेला और धीरे धीरे लन्ड को अंदर करने लगा, मैं तो अब बुर के दर्द से कराह रही थी लेकिन इतने में मोहन थोड़ा सा लन्ड बाहर निकाल मेरे कमर पर हाथ रखा और जोर से बुर में लन्ड का धक्का दिया और रेणु तो दर्द से चिल्ला पड़ी ” ओह निकाल लो अपना लौड़ा मेरी बुर फट जाएगी ” लेकिन इस मोड़ पर कोई लड़का दर्द नहीं देखता बस मस्ती करने की सोचता है और वो धकाधक बुर चोदना शुरू किया तो मैं सेक्सी आवाजें निकाल रही थी ” उह आह ओह बुर में लन्ड तो खरंजे की तरह चुभने लगा डियर अब छोड़ दो ” तो मोहन मेरे बुर में लन्ड पेलता हुआ बूब्स दबाने लगा, बुर तो रसीली थी लेकिन उसकी चुदाई से जरूर ही कोई रस बुर से निकल रहा था शायद झिल्ली फटते ही खून निकली हो तो मोहन मेरे ऊपर लेटकर चोदता हुआ चेहरा चूमने लगा और मैं बुर में हो रही जलन से परेशान होकर बोली ” थोड़े देर के लिए लन्ड निकाल दो ना ” तो मोहन लन्ड को बुर से निकाल मेरे ऊपर से उठा और मेरी कमर हो या जांघें या योनि सबमें असहनीय पीड़ा हो रही थी, उठकर बैठी फिर l पेटीकोट को छाती के ऊपर से बांध कर पलंग से उतर गई, दरवाजा खिलकर बाथरूम गई फिर टॉयलेट सीट पर बैठकर मूतने लगी तो समझ में आया की थोड़ा खून भी बुर से निकला है और मैं बुर को धोकर वापस रूम आई फिर बेड पर लेट गई ” डियर आज बस इतना ही देखो ना मेरी इससे ( बुर की ओर इंगित की ) खून निकल गया
( मोहन मेरे गाल चूम लिया ) रेणु सुहागसेज पर तो ऐसा होता ही है, अब उसमें क्रीम लगाकर करूंगा ” मोहन आराम से मेरे बूब्स को पकड़ दबाना शुरू किया तो मैं भी उसके लन्ड को अंदर लेकर मजा करना चाहती थी, इतने में मोहन बेड पर से उतरा फिर एक क्रीम लेकर मेरे कमर के पास बैठा, आगे तो रेणु की चुदाई हुई और मजा भी आया, अगले भाग में।

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