लंडखोर लड़कियां | Erotic Stories
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लंडखोर लड़कियां

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हिमांशु सोलह का, विपिन चौदह का, और नवीन बारह साल का। तीनों जिगरी दोस्त और तीनों बिगड़े हुए भी। वे बिगड़ते क्यों नहीं ? जब उनके मां-बाप खुद शराब पीते हों, नंगी फिल्में देखते हों, और छुपे-छुपे व्यभिचार करते हों तो संतान बिगड़ेगी ही। इन तीनों लौंडों से लोहा लेने के लिए या इन्हें टक्कर मारने के लिए तीन लंडखोर लड़कियां भी मैदान मार रही। सुमिता चौदह साल की, नमिता बारह साल की, और सुशि तो सिर्फ दस साल की लेकिन वे इनसे कम नहीं बल्कि आगे। लड़कों के बाप बिगड़े हुए थे तो इन लड़कियों की माताएँ महा-बिगड़ैल थीं। सुमिता की माता रानी अपने सगे भाई से लगी हुई थी और वह अपनी बेटी को चला कर अपने भाई से चुदवा चुकी है, क्योंकि मामा-भान्जी की जोड़ी बनती है! नमिता को उसके सगे बाप ने रगड़ मारा और उसकी मॉम ने इस नेक काम में अपने खसम की मदद की। सुशि को उसके दादा लेकर सोते हैं आजकल, कुछ किया हो तो पता नहीं। लेकिन एक बात पक्की है, वो ये कि इन तीन लड़कियों का गैंग है।

कल की बात है। जब हिमांशु- विपिन- नवीन का दोस्त दल स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रहा था सुमिता ने एक गैन्द इस तरह उछाली कि वो सीधे हिमांशु के निकर की ज़िप से टकराई। हिमांशु ने देखा कि इसके बाद नमिता और सुशि दोनों अजीब तरह से हँस रही है। उसे ताव आ गया, उसने वही गैन्द उठा कर सुमिता के मम्मों की ओर फेंकी मगर वह बिगड़ कर नमिता के गुप्तांग से जा भिड़ी। देखते-देखते सुमिता व नमिता हिमांशु और विपिन से जा भिड़ीं और गुत्थमगुत्था हो गया। जब सुमिता ने जोश में आकार हिमांशु की निकर को नीचे सरका दिया और नमिता ने विपिन के निकर को तो इन लड़कों ने भी दोनों लड़कियों के स्कर्ट हलके कर नीचे खींच दिये। यह खेल एक बगीचे के भीतर हुआ जो इस समय सुनसान था।

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बात सिर्फ इतनी नहीं हुई, वह बढ़ी जब सुमिता ने ताना मारा कि इन लड़कों के लंड इतने कमजोर हैं कि पेशाब करते हुए भी ढीले और लटके हुए रहते हैं। इस बात पर दो बड़े लड़कों को ताव आ गया और उन्होंने  अपना खुल्ला लंड इन छोकरियों को दिखा मारा। इसके साथ ही सुनसान बगीचे में नंगा-नंगी खेल शुरू हो गया। पहली प्रतियोगिता यह हुई कि कौन छोरा या कौन छोरी तगड़ा या ज्यादा पेशाब कर सकता या कर सकती है। तीनों लड़कियां सीधे=सीधे अपनी चूत नंगी कर पेशाब करने लगीं, छर्र-छर्र; सामने से तीनों लड़के भी पेशाब करने लगे। दोनों दलों के पेशाब आमने-सामने मिल कर, एक – धार होकर गंगा बहाने लगे। कोई शरम नहीं। हिमांशु ने सुमिता की नंगी चूत देखी तो देखता रह गया। विपिन का ध्यान नमिता की चूत पर गया। और तो और नवीन की नजरें भी सुशि की छोटी-सी चूत पर पड़ी। तीनों लड़के भले ही ज्यादा उम्र के ना हों पर उनके लंड उनकी उम्र से काफी बड़े थे।

देखते-देखते तीनों लड़के अपनी-अपनी जोड़ी बना चोदा-चोदी का खेल खेलने लगे। हिमांशु- सुमिता, विपिन- नमिता, और नवीन-सुशि की जोड़ी बन गई। नवीन बारह साल का था और सुशि दस की पर क्या बात थी की उसका लंड मर्द के लंड के माफिक खड़ा हो गया, जरूर वो शराब या मादक द्रव्य पीता या खाता होगा। चूमाचाटी की चसकियाँ चलने लगीं। नमिता बारह की थी उस पर चौदह साल का विपिन चढ़ा हुआ था और पेल रहा था। लेकिन सुमिता जो सिर्फ चौदह साल की ही थी उसने हिमांशु कू हिला कर रख दिया। वो छपक करते अपने से दो साल बड़े हिमांशु पर चढ़ गई और उसे ऊपर से अपनी गाँड उछल-उछल रगड़ने लगी। उसने ये क्रियाकर्म अपनी मां से सीखा होगा।

जब यह सब कर तीनों लड़कियां फारिग होकर जाने लगीं तो मैंने उनका पीछा किया और थोड़ा एकांत मिलते ही मैंने उनसे कहा कि मैंने वो सब देख लिया है और वीडियो बना लिया है, मैं वो हेडमास्टर साहब को दिखा दूंगा; यह सुन वो दर गईं और घबरा गईं, बोली, नहीं, अंकल प्लीज़, ऐसा मत करना! 1 मैंने मुस्कराते हुए कहा — ठीक है, किसी को कुछ नहीं कहूँगा, मगर इस 42-साल के अंकल को भी तो अपना मस्त माल दो। तीनों झिझकने लगीं पर मैंने आगे बढ़ दोनोंकों पकड़ नंगी किया, फिर खुद मादरजात नंगा हुआ और इन कन्याओं का कच्चा माल अपने लंड से रगड़ने लगा। इसे कहते हैं किस्मत!

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