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रेणु की प्यासी जवानी : भाग ४

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रेणु अपने गांव के पास के नहर के पास थी तो रघु मेरे साथ था और दोनो एक दूसरे के योनि / लिंग को चाटे और चूसे फिर मैं उठकर खड़ी हुई तो मेरे जिस्म पर स्कर्ट और ब्रा ही था, मेरी उफान लेती चुचियों को देखता हुआ रघु मस्त था तो मैं उसके लन्ड को देखते हुए बोली ” इंतजार करो अभी आई ” फिर थोड़ी दूरी पर बैठकर छर छर मूतने लगी, स्कर्ट तो बूर सहित जांघो को ढक रहा था तो मैं पेंटी और टॉप्स उतार चुकी थी, मैं अब रघु के पास बैठी फिर उसके लन्ड पकड़ बोली ” मैं घांस पर लेटती हूं, तुम उस दवाई को मेरे छेद में अंदर तक घुसा देना ” और फिर अपने पर्स से गर्भ निरोधक दवाई निकाली, उसको एक पिल्स दी तो वो मुझे देखने लगा और मैं लेट गई तो मेरा स्कर्ट थोड़ा सा ऊपर आ गया फिर रघु मेरे स्कर्ट को कमर तक कर जांघो को फैलाया, अपनी उंगली से बूर को पूरी तरह से फलकाया तो मैं बोली ” थोड़ा सा अंदर घुसा दो फिर उंगली से धकेल देना ” रघु उस दवाई को बूर में पेल दिया तो मैं अपने बूब्स को ब्रा पर से ही पकड़ कर सहलाने लगी तो वो समझदार की तरह मेरे ऊपर औंधा फिर मैं ब्रा के हुक को खोलकर चुचियों को नग्न कर दी तो रघु मेरे चूची को पकड़ चूमने लगा साथ ही मुंह में उसके अग्र भाग को लेकर चूसने लगा फिर पूरी तरह से मेरी बाई चूची को मुंह में लेकर चुभलाने लगा तो मेरे बूर की खुजली बढ़ने लगी, जांघ पर जांघ चढ़ाए आपस में रगड़ने लगी तो घांस पर लेटे चूची चुसवाने में मस्त थी और रघु मेरे दूसरे स्तन को पकड़ दबाने लगा फिर तो मैं सिसकने लगी ” ओह उह उई इतनी गुदगुदी, अब तो रस भी निकल गया, अब मेरी बूर का कुछ करो ” तो रघु झट से चूची को मुंह से निकाला फिर मेरी दोनो जांघो को फैलाकर बूर देखने लगा, मैं बोली ” रघु अब तुम निफिक्र होकर उसमें घूसाओ, वो दवाई हमदोनो के बीच जो संभोग होगा उससे मुझे सेफ रखेगी ” वो अपना मूसल लन्ड पकड़े घुटनो के बल बैठा तो मेरी किसी गैर मर्द के साथ ये पहली चुदाई थी, उसका मोटा काला लन्ड देखकर ही सहम गई थी लेकिन चुदाई का मजा ही अलग होता है। रघु मेरी बूर में सुपाड़ा को घुसाया फिर धीरे धीरे अपना लन्ड घुसाने लगा, मैं तो दोनो पैर हवा में उठाकर चूतड थोड़ा जमीन से ऊपर रखी थी और उसका लन्ड मेरे गुदाज कोमल अंग को चूभने लगा, अभी तक घुसाए जा रहा था तो लग रहा था मानो बूर ककड़ी की तरह फट जाएगी और फिर वो एक धक्का देकर पूरा लन्ड अंदर घुसाया तो मैं चिंख उठी ” उई मां फाड़ दिया कुत्ता आह कितना मोटा लन्ड है साला तुम्हारा ” और वो मेरे चूत में गपागप लन्ड पेलने लगा तो मैं जांघों को फैलाकर चुदाने में मस्त थी, रसीली बूर वो भी पिछले तीन महीने से लगातार चुदाई में संलिप्त फिर भी रघु का लन्ड मेरी चूत का भर्ता बना दिया तो वो धक्का देता हुआ मेरे एक बूब्स पकड़े पूछा ” बहुत दर्द हो रहा है मालकिन
( मैं ) चुपकर रेणु बोला कर, कुछ दर्द नही हो रहा, चोदने में लगे रहो ” और फिर रघु के लन्ड का धक्का सहते हुए बूर का रस धुंआ बन गया लेकिन अब मुझे चुदवाने का असली आनंद आने लगा, रघु तो तीन चार मिनट से बूर चुदाई कर रहा था और इतनी देर में तो मेरा पति का लौड़ा बूर में दम ही तोड़ देता था। मैं उसे इशारे से लेटने को बोली, वो मेरे ऊपर सवार हुआ और मैं उसके गाल चूमने लगी फिर उसके कमर पकड़ चूतड को ऊपर नीचे करना शुरू की तो वो चोदता हुआ गाल चूमने लगा साथ ही उसके छाती से बूब्स रगड़ खा रही थी, इस गर्मी में घांस पर लेटकर चुदने में जो आनंद आ रहा था वो कहां मखमली बिस्तर पर पति के साथ चुदाने में आया तो मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में लीन थी और रघु मेरे चेहरे चूमता तो गर्दन, उसके बदन के नीचे लेटकर चुदाते हुए सुखद अहसास मिल रहा था ” ओह आह रघु इसी तरह चोदो, तुम खेले हुए खिलाड़ी लगते हो, इतनी देर से तेरा लन्ड मेरी बूर में टिकी हुई है की मेरा पति भी तेरे सामने जीरो है
( वो चोदता हुआ बोला ) रेणु बेबी तुम दूसरी औरत हो जिसको मैं चोद रहा हूं ” और मैं चूतड स्थिर किए चुदवा रही थी ” रघु बूर लहर रही है जल्दी रस झड़ेगा तो चोदते रहो नही तो थोड़ी देर तक ब्रेक ” वो मेरे ऊपर से उतर गया, मेरे नग्न जिस्म पर स्कर्ट कमर पर थी तो उधर कोई भी इंसान अभी तक नही दिखा था और यकीनन रघु मुझे ऐसे वीरान जगह पर लाया जहां वो मस्ती में मुझे चोद सके। मैं अब उठकर बैठी तो रघु अपना पैजामा पहन मेरे से दूर चला गया, मैं अपने ब्रा पहनी फिर स्कर्ट से गुप्तांग को ढक ली लेकिन साला चार पांच मिनट तक चोदकर बूर लहरा दिया था तो जल्दी से चुदाई का अंत कर घर भी पहुंचना था, रघु उधर से आया फिर मैं घांस पर ही घुटनो और कोहनी के बल होकर उसके सामने गांड़ चमकाने लगी, बोली ” अब पीछे से घुसाओ और जल्दी से निपटा दो
( वो पैजामा खोला फिर मेरी गांड़ के सामने घुटने के बल हुआ ) जो कहो रेणु तुम्हारा गांड़ बहुत सेक्सी है
( मैं हंस दी ) अभी रघु असली खेत की जुताई करो, उधर तो कभी लन्ड घुसा ही नही है ” और मेरी जांघो को पूरी तरह से फैलाकर रघु अपना लन्ड अंदर घुसाया फिर धक्का देकर पूरा लन्ड अंदर कर चोदना शुरू किया, मैं अब अपने चूतड को हिलाना शुरू की तो रघु का धक्का बूर को दुबारा रसीला कर सकता था, मैं तो चुदाई के नशे में चूतड हिलाते हुए मसल लन्ड से चुदवा रही थी तो रघु चोदता हुआ मेरे बूब्स को भी दबाने लगा, उसका लन्ड बूर में मस्ती ला चुकी थी तो वो चोदता हुआ हांफने लगा ” ओह रेणु आज तुमको मन भर नही चोद सके, लन्ड तो ढीला होने पर ही है ” और मैं चूतड को स्प्रिंग की तरह हिलाते हुए मस्त हो गई, मेरी बूर में रघु के लन्ड ने वीर्यपात कराया तो बूर को शांति मिली फिर वो लन्ड निकाल लिया तो कुछ देर लेटी रही फिर बूर को पानी से धोकर कपड़ा पहनी और वापस घर चली गई।

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