रमा-रानी को भरपूर प्यार ! | Erotic Stories
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रमा-रानी को भरपूर प्यार !

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मेरा नाम रमाकांत है, मैं इस समय 16 साल का हूँ।  मैं अभी स्कूल  में ही पिछड़ रहा हूँ। यह कहानी मेरी आपबीती है। मेरी मॉम का नाम रमा-रानी है। मेरे पापा अब नहीं रहे। तीन वर्ष पहले एक सड़क दुर्घटना  में उनकी मृत्यु हो गई। घर मॉम सम्हालती है। घर में मैं, मेरी मॉम, और मेरी तीन बहिनें हैं।

मेरी मॉम बहुत सेक्सी और शौकीन तबीयत की है। उसका फिगर 38- 28- 38 का है। मेरे पापा भी बहुत सेक्सी तबीयत  व रंगीन  मिजाज के  थे। उनके विचार बहुत आधुनिक, सेक्स के मामले में बहुत उदार व खुल्ले थे। वे सेक्सी हंसी मज़ाक और व्यवहार बहुत करते थे। वे नग्नतावाद  ( natural nudity as a biological principle ) में श्रद्धा-विश्वास रखते थे। इसलिए  हम घर में या घर के बगीचे में व्यायाम करने के समय और रात को सोते वक्त नंगे रहते थे; मॉम-पापा तो रहते ही थे पर हम भाई-बहन भी नंगे रहने लगे थे। मेरे पापा अपनी दो सगी बहनों से भी नहीं चूकते थे, यहाँ तक कि मेरी मॉम भी उनके प्रभाव में आ पापा के बड़ी उम्र के दोस्तों के साथ सेक्स का खुल्ला खेल खेल लेती थी।

रात को हम सब एक बड़े बेड पर नंगे-नंगे ही सोते थे। मैं मेरी मॉम के पास और पापा मेरी छोटी बहनों के साथ, बल्कि बीच में। सोते वक्त पापा-मम्मी मदिरा पान भी करते थे। नग्नता का ये रिवाज अलबत्ता  उनके जाने के बाद बंद हो गया  पर सेक्सी बातचीत व व्यवहार का सिलसिला चालू रहा।

मेरी मॉम  स्कूल में टीचर है। हमारा घर स्कूल के पास ही है।  दिन के 1 बजे मॉम की,मेरी और मेरी छोटी बहनों की भी छुट्टी हो जाती है हालांकि मैं और दूसरी बहनें अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं।दिन से लेकर शाम तक हम बच्चों को पूरी स्वतंत्रता रहती है कि हम कहीं भी घूमें या मौज-मस्ती करे। अब जो मेरी तीन बहनें  हैं वो भी नटखट हैं । एक का नाम सीता, दूसरी का राधा और तीसरी का नाम ऊर्मि है। सीता 14 वर्ष, राधा 12 और ऊर्मि 10 की  है। दस की होते हुए भी ऊर्मि सबसे ज्यादा शैतान है। सीता और राधा  को ये पुराने जमाने के नाम पसंद नहीं इसलिए सीता ने अपना नाम पिंकी और राधा ने रिंकी रख लिया है। इन दोनों ने मेरा नाम भी रमाकांत के बजाय ‘लोलो’ रख दिया और ये मुझे  ‘लोलो’  कह कर ही पुकारती हैं। इन्होने मेरी मॉम का नाम भी रमा-रानी से ‘एलेक्सा’ कर रखा है जो मॉम को पसंद भी है। और मॉम मुझे भी ”मिस्टर लोलो ”  कहने लगी है।

अब जैसा कि पहले से हमारे घर में रिवाज चला आ रहा था हम बेड पर एकसाथ ही सोते हैं हालांकि अब नंगे हो कर नहीं सोते। शयनकक्ष में साथ सोने के तरीके में थोड़ा बदलाव किया गया है। मेरी तीन छोटी बहनों के लिए अब एक अलग शयनकक्ष बना दिया गया है ताकि जब मैं मॉम के पास सो रहा हूँ तो ये छोरियाँ डिस्टर्ब ना करे। रात रंगीन करने के मॉम के पास कई तरीके हैं। वो कई बार पूरी रात बाहर रहती है। पर ऐसा महीने में ट्टीन दिन और बहुत हुआ तो पाँच दिन। बाकी दिनों मॉम अपने शयनकक्ष में 10 बजे आ जाती है। मैं दस बजे से लेकर रात एक बजे तक अपनी छोटी बहनों के शयनकक्ष के बेड पर उनके साथ हमबिस्तर होता हूँ। रात एक बजे के बाद मॉम के बेड पर चला जाता हूँ। मॉम खुद ही आ मुझे चुपचाप ले जाती है॥ मेरी तीनों बहनें तब तक गहरी नींद में चली जाती हैं। सोने-सुलाने का यह तरीका और सिलसिला तीन वर्ष से चल रहा है।

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अब असली वाकया बयान करता हूँ। यह दो साल पहले की बात है, मैं उस समय 14 साल का था। ऐसे खुले सेक्स के वातावरण में रहने-पलने से मैं भी सुसभ्य बन चुका था। उस दिन रात दस बजे से ही मैं मॉम के शयनकक्ष में पहुँच उनसे गपशप, यहाँ तक कि चुहलबाजी भी कर रहा था। मॉम  बेड के किनारे पर बैठी हुई थी और उसने मुझे गोद में बैठा रखा था। मैं निकर पहने हुए था और हम दोनों सामने के बड़े टीवी पर कोई फिल्म देख रहे थे। फिल्म मां-बेटे के प्रेम संबंध को लेकर थी। फिल्म में एक मेरी उम्र का लड़का अपनी 38 वर्ष की मां से लू लू लव जैसी रस भरी बातें कर रहा था। फिल्म देखते मुझे भी मज़ा आ रहा था। मैं उस समय निकर पहने हुआ था और मेरी मॉम की हथेलियाँ प्यार से मेरे निकर की  ज़िप को सहला रही थी। मॉम ने अपनी जांघें और मैंने अपनी टांगें चौड़ी कर फैला रखी थी। मुझे मॉम की जांघों का स्वाद मिल रहा था। उस वक्त मॉम मुझे एक लोलिपॉप भी अपने हाथ से मुंह में डाल चुंसा रही थी।

फिल्म चल रही थी। हम दोनों देख रहे थे। फिर फिल्म में उस लड़के ने जो मेरी ही उम्र और कद काठी का था, अपनी उस  मां को बलात गिरा दिया, वो कोई बड़ा-सा सोफा था। यह कोई हिंदुस्तानी फिल्म ही थी। फिल्म में लड़के का नाम मुन्नू था। जैसे ही मां सोफ़े पर गिरी  और फिर पसरी तो मैंने देखा वो बगल से लेटी हुई थी, क्योंकि उसके नितंबों का किनारा मुझे दिख रहा था। मुन्नू का एक हाथ अपनी मां के नितंबों पर पड़ा और उसने अपनी मम्मी की गांड सहलानी और दबानी शुरू कर दी; मुंह से  मुंह और जीभ से जीभ लग चुम्माचाटी होने लगी; दोनों मां-बेटे की टांगें गुत्थमगुत्था हो गई थी। फिर मुन्नू ने जबर्दस्ती अपनी मां का लहंगा नीचे खिसकाया, भीतर साया या चड्डी नहीं थी जिससे उसे उसकी अम्मां की फुद्दी  की झलक नज़र आने लगी। यह देख मेरी सांसें ज़ोर से चलने लगी। मेरा लंड कड़कड़ा कर निकर के भीतर खड़ा हो गया। मैं मॉम कि गोद से निकल सीधा उनके सामने खड़ा हो गया, और भर्राए गले से बोला, ” मां , मां, मां !!!!!!”।

मॉम भी नशे में आ चुकी थी। उसने मुझे गोद में उठा अपने पेट से चिपका लिया और फिर बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने टीवी के पर्दे पर देखा मुन्नू अपनी मादरजात  मां की चूत में  करारा-कसा लौड़ा फिट कर उसे फुर्ती से चोद रहा था। फचक-फचक की रसीली आवाजें आ रही थी और उसकी मां सिसकारियाँ भर रही थी। वो चिल्लाये जा रही थी, ” शाबाश, बेटा; चोद, चोद, अपनी मां को चोद; राजा बेटा, शाबाश, तूने मेरी दूध की लाज रख ली। और चोद , चोद बेटा !!!!!”।

यह देख मैं भी अपनी मां, यानि मॉम पर झपट पड़ा, और उसे बेड पर गिरा दिया। मेरी मॉम मुन्नू की  मॉम से ज्यादा सेक्सी, ज्यादा गदराए बदन की, और मोटीताज़ी मांसल थी। मैं मॉम पर बुरी तरह चढ़ चुका था। मॉम ने तुरंत मेरा निकर खिसका, मुझे मादरजात नंगा कर मेरा लौड़ा कस कर पकड़ लिया। उसे ताज्जुब हुआ कि चौदह वर्ष की उम्र में ही मेरा लंड इतना मोटा और लंबूतरा कैसे हो गया! फिर मेरी हल्की-हल्की महीन झांटें भी थीं । मैंने मॉम की  जांघों को चौड़ा किया, और उनके मोटे-मोटे मम्मे गूंधने और रगड़ने लगा। मेरा मुंह उनकी मस्त-मस्तानी तीखी-नुकीली चूंचियों पर चिपक गया और मैं उन्हें चूँसने चटकारने  लगा।  मेरी प्यारी मॉम ने अपनी दोनों टांगें कस ली थी और उसके मुंह से भी सिसकारियाँ निकलने लगी। तीन थोक मॉम को चोदने के बाद मैं रुका। मुझे लगा अब मैं आगे कुछ नहीं कर पाऊँगा। मॉम यह समझ हंसी, और उसने मुझे किसी शीशी से कुछ पीने को दिया जिसे पीने के बाद मुझमें फिर से ताकत और फुर्ती आ गई।

मॉम मुस्करा कर बोली — देख बेटा, तू अभी  बच्चा है। जवान पट्ठा तब होगा जब तू अपनी मां को इतनी बार चोदेगा कि उसकी आँख से खुशी और आनंद के आँसू निकल जाय। बोल- चोदेगा, अपनी मां को, चोदेगा ना? मैं खुशी से बोला : ” हाँ मां! मुझे मादरचोद बना दो, मैं मादरचोद हूँ, मैं मां को चोदूंगा!! हाँ, हाँ!!”।

फिर मॉम ने मुझे कहा, ‘चल बेटा, पीछे लग!’ मैं मॉम की उठी हुई करारी-कसी गांड से सट गया। आह, क्या मस्त चौड़ी गदराई गांड थी मम्मी की। मेरा लंड कभी उसकी चूतड़ों के इस गोलक तो कभी उस गोलक फिर रहा था। मॉम खड़ी थी। फिर मॉम झुकी घुटनों के बल, वो अपनी चारों टँगूँ पर थी और सिर नीचा। मुझसे बोली– ‘मेरी गांड पर हाथ फिरा, दबा-दबा।”  मैं एकदम से मां की गांड को मुट्ठियों से गूंधने व नोंचने लगा, और फिर चाटने लगा। मैं गांड के मांस को चटकी में भरता  और चूँसता। मज़ा तो मुझे तब आया जब मैंने मां की गांड के छेद में अंगुली की और उसे फैला कर चूँसा बल्कि दाँत से काटा।

मेरा लौड़ा फूल गया था, मॉम मुझसे बोली ” अब बेटा! अपने लौड़े को मां की गांड की तरफ से निकाल, उसकी खुल्ली-नंगी चूत में पेल! ” मैंने अपने लंड की साइज देखी  8 इंच का बन गया था। फिर मैंने मां की चूत में अंगुली की, एकाएक, ज़ोर से और अंदर गहराई तक डाल के। मां चीख़ीं। मैंने दो-चार अंगुली और फंसा कर मां की चूत को चौड़ा किया; और गधे की  तरह उन पर झुक कर चोदने लगा। मां के झांटें थीं, मै साथ-साथ उनकी  झांटों के बाल भी खींच रहा था। पीछे से चोदने से मुझे मां  की चूत और गाँड दोनों का मज़ा मिल रहा था।

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