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मामा और भांजी की प्रेम कहानी : भाग ३

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जिया अपने मामा के साथ घर आई तो शाम के ०५:३० बजे होंगे और मैं समर के साथ ओरल सेक्स का मजा गोदाम में जमकर ली फिर सुस्ती के कारण रूम में आकर सो गई, मामा मेरी बुर को क्या देख लिए सब नाता रिश्ता भूल कर चोदने को तड़प उठे और मैं थकावट के कारण नींद के आगोश में आ गई। मुझे मालूम था की मामा मेरे साथ रात को शारीरिक संबंध जरूर बनायेगा तो वो गांव के पास का मार्केट चला गया, आज रात तो मां की नग्न बुर भी देखनी थी भले समर चुदाई को तैयार नहीं हुआ, वैसे भी नींद के आगोश में लेटी महिला के साथ यदि संभोग क्रिया किया जाए तो नींद खुलने के बाद तो उसे समझ में आ ही जायेगा और मैं गहरी निद्रा में थी की अचानक से मेरे बदन को हिलाते हुए कोई जगा रहा था ” उठ अभी सो लेगी तो रात को क्या घांस उखाड़ेगी ” मेरी आंख खुली तो मां खड़ी थी, मैं उठकर बैठी फिर बाथरूम की ओर गई, दरवाजा तो है लेकिन कुंडी नही और टॉयलेट सीट पर बैठकर मूतने लगी और जानबूझकर दरवाजा खुला ही छोड़ दी थी आखिर मेरी बुर को देखने वाला यहां है कौन, सिर्फ मामा समर और वो तो आज मेरी जैसी रण्डी को मुफ्त में ही चोदेगा। मैं वापस बरामदे पर आई तो एक दाई खाना बना रही थी और नानी मां से बातें कर रही थी, मैं वहीं पड़े कुर्सी पर बैठी तो मां पूछी ” तुम खाना कितने बजे खाएगी
( मैं बोली ) अभी तो आठ भी नही बजे हैं, मामा के साथ खाना खा लूंगी
( मां बोली ) मामा को परोसकर खिला देना फिर खुद खाना
( मैं बोली ) ठीक है उसकी चिंता मत कीजिए, वैसे भी मामा के साथ तो पहले भारत और अफ्रीका के क्रिकेट मैच देखूंगी ” मुझे तो मां के साथ ही सोना था इसलिए उनके दूध के ग्लास में नींद की गोली मिलाने का प्लान हम दोनो ने बना रखा था ताकि रात को आराम से मामा और भांजी सेक्स का लुफ्त उठा सकें, मैं अब मामा के कमरे में गई और टी वी ऑन करके न्यूज देखने लगी और ज्योंहि समर की आवाज मुझे सुनाई दी मैं उसके अंदर आने का इंतजार करने लगी, वो रूम में आए फिर अपने जींस के पॉकेट से एक व्हिस्की की बोतल निकाल एक अलमिरे में छुपा दिए साथ ही उन्होंने मुझे एक गर्भ निरोधक दवाई भी दी फिर मुझे देख बोले ” नींद की दवाई ये रखो, खाना जब खिलाओगी तभी
( मैं हंस दी ) सोच रखा है मामा जी ” रात के ०९:१५ बजे तक मां, नाना और नानी खाना खाकर सोने चले गए तो मैं मामा के रूम में बैठकर टी वी देख रही थी और मामा भी वहीं थे लेकिन वो कुर्सी पर बैठे हुए थे तो मैं पलंग पर थी, अचानक से मां आई और बोली ” तुम दोनो भी जल्दी ही खाना खाकर सो जाना
( मामा ) क्या दीदी तुम भी जिया को हमेशा डांटते रहती हो, कितने महीने बाद दोनो की मुलाकात हुई है, थोड़ी देर बात करेंगे फिर खाकर सो जायेंगे ” तो मां ” ठीक है और मैं अपने रूम का दरवाजा सटा दूंगी ” बोलते हुए चली गई, मामा और मैं दोनो एक दुसरे को देखकर हंसने लगे ” अब तो बहन गहरी निद्रा सोएगी फिर
( मैं समर की ओर देखी ) फिर उनके… का नजारा देखना है या डालने का भी मन है
( समर उठा और मेरे सामने आकर खड़ा हुआ, अचानक से हाथ बढ़ाकर चूची को पुचकार दिया ) आउच जरा धीरे ” और फिर मैं उठकर मामा के रूम का दरवाजा बंद कर दी तो समर कमरे में ही व्हिस्की और कोल्ड ड्रिंक्स रखा था साथ ही खुला छत भी हमलोगों के लिए था, मैं कुर्ती और लेगिंग्स में थी चूंकि वसंत ऋतु में गांव में थोड़ी ठंड तो रहती थी और अब समर मुझे देख मुस्कुराया फिर उसने कुर्ता उतार खूंटी में टांग दिया, मैं दरवाजा बंद कर वहीं पर खड़ी थी तो समर मेरी ओर आया फिर मुझे अपनी बाहों में लेकर चूमने लगा, मैं उसके पीठ पर हाथ फेरते हुए मस्त थी साथ ही उसके चौड़ी छाती से बूब्स रगड़ते हुए गाल चूमने लगी, फिर तो शांत माहौल में दो बेकरार आशिक इस कदर लिपट चुम्बन क्रिया करने लगे मानो मामा भांजी नही बल्कि पति पत्नी हों। मामा मेरे चूतड के मांसल हिस्से को पकड़कर दबाने लगा तो मैं उसके ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन दी, समर मेरे रसीले ओंठ को मुंह में लिए चूसने लगा तो उसका हाथ मेरे लेगिंग्स को कमर से नीचे करने लगा, आखिरकार लेगिंग्स चूतड से नीचे आ गई तो मैं समर के मुंह से ओंठ निकाल गाल चूम ली ” तुम जाकर देख आओ की तेरी बहन जागी है या सो गई ” समर रूम से निकला तो मैं बेड पर लेटकर चादर ओढ़ ली, मेरे अंदर मामा के साथ चुदाई को लेकर जो बेताबी थी वो मैं बता नहीं सकती और समर वापस आकर दरवाजा बंद किया ” तेरी मां तो नींद की आगोश में है
( मैं ) ठीक है समर पहले व्हिस्की पीने दो फिर देखना अपनी भांजी का जलवा ” तो समर दो ग्लास में व्हिस्की डाला फिर कोल्ड ड्रिंक्स, पहले बीयर तो कई बार पी चुकी थी लेकिन व्हिस्की सिर्फ एक बार फिर भी मुझे खास फर्क नही पड़ता। अब मामा मेरे बगल में बेड पर बैठ गया तो मैं उठकर बैठी फिर ग्लास लिए व्हिस्की पीने लगी ” लेकिन समर बिना सिगरेट के शराब मजा नही आता
( वो मेरे एक बूब्स को दबाने लगा ) उसके लिए छत पर जाना होगा तो आधे घंटे बाद चंद्रमा की रोशनी में ही तेरे इसका ( बुर को टटोला ) स्वाद चखूंगा ” मैं एक ग्लास व्हिस्की पीकर मस्त हो गई ” अब चलकर मां को देखा जाए ” तो समर मेरे हाथ से ग्लास लेकर जमीन पर रखा फिर मुझे बिस्तर पर लिटाकर मेरे ऊपर सवार हो गया, बिलकुल ही गंवार किस्म का आदमी था, मेरे कुर्ती को वो गले से बाहर कर मुझे नंगा कर दिया फिर मेरे चूची को पकड़ चूमने लगा तो मुझे भी लगा की मां की नग्न बुर देखकर मिलेगा ही क्या, बेहतर है की समर के साथ सेक्स का आनंद लिया जाए और वो मेरे चूची को मुंह में लिए चूसने लगा की मैं उसके पैजामा के नाडा को खोलकर उसे कमर से नीचे करने लगी, साले का लन्ड टाईट था जिसे मैं पकड़कर हिलाने लगी तो दो नग्न जिस्म बिस्तर पर लेटकर काम क्रिया का मजा ले रहे थे, मैं अब सिसकने लगी ” उह उई मां मेरी बुर खुजला रही है समर चाट दे ना
( समर चूची निकाल बोला ) वो सब शाम को हो चुका है बस चुदाई क्या समझी ” समर मेरे छाती से लेकर पेट तक को चूमने लगा साथ ही मेरे एक बूब्स को पकड़े दबाए जा रहा था, मेरे कमर तक चुम्बन दिया की मुझे तेज पिसाब लगी लेकिन यहां तो यही दिक्कत है की बाथरूम घर के पीछे की ओर है और ज्योंहि उसकी ओंठ मेरे जांघ को चूमने लगी मैं झट से उठ बैठी ” समर मैं बाथरूम से आती हूं उधर तो लाईट भी नही है
( वो बोला ) टॉर्च लेकर चली जाओ ” मैं सिर्फ कुर्ती को पहनी जोकि मेरे घुटनों तक आती थी और फिर टॉर्च लिए घर के पीछे बाथरूम में गई, टॉयलेट सीट पर बैठ मूतने लगी साथ ही टॉर्च जला रखी थी और फिर वहीं बुर को पानी से धोकर तौलिया से साफ की। जिया अब मामा के रूम में घुसने से पहले मां को देखने रूम घुसी तो वो खर्राटा भर रही थी, तभी मैं उनके साड़ी को कमर तक कर बुर देखने लगी, ४० साल की उम्र में भी बुर को चमका कर रखी थी जिसके ऊपर बार के निशान नही थे, उनको उसी तरह छोड़कर मामा के पास आई ” समर चल ना एक बार अपनी बहन की बुर देख ले
( समर असमंजस में था ) लेकिन कहीं मेरा मन उसके ऊपर चढ़ने का हुआ तब ” लेकिन फिर वो एक लुंगी पहन मेरे साथ रूम आया, मां चित लेटी हुई थी तो उसकी साड़ी कमर से ऊपर थी और समर बरामदे की रोशनी में ही उसकी बुर को देख मेरे कंधे में हाथ डाले ” चल जिया मेरा मन डोल रहा है साड़ी जगह पर करके अपने रूम चल ” और दोनों रूम आ गए…. to be continued.

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