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मामा और भांजी की प्रेम कहानी : भाग ७

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जिया नदी किनारे अपने मामा समर के साथ थी तो अब मेरे मामा जोकि मेरे सामने नंगे खड़े थे का हथौड़ा सा लन्ड देख मेरे मुंह में पानी आ गया और मैं उनसे लिपटकर उनके गाल चूमने लगी तो मेरी बूब्स उनकी छाती पर थी और मैं मामा के कान के पास फुसफुसाई ” समर नदी में साथ स्नान किया जाए
( समर मेरे चूतड को सहलाने लगा ) जो हुकुम मेरी जान, जरा टी शर्ट तो उतार दूं ” और फिर मैंने समर के कमर में हाथ डाल उसके साथ नंगे नदी की ओर जाने लगे तो नदी में पैर पड़ते ही मैं थोड़ी घबड़ाई लेकिन समर मेरी कमर में हाथ डाले थे, बोले ” घबडाने की कोई जरूरत नहीं बेबी पहाड़ी नदी है, ना ज्यादा गहरी है और ना फिसलन
( नदी में कमर तक जब डूब गया तो मैं रुक गई ) समर मुझे तैरना नहीं आता लेकिन जल क्रीड़ा पसंद है ” नदी में मैं समर से लिपटी हुई थी तो उसके ओंठ को चूमते हुए लन्ड का एहसास नाभी के पास पा रही थी, आखिर मामा छह फुट लंबा तो मैं ५ फीट ४ इंच लंबी और फिर पानी की बहती धारा में बुर की गुदगुदी बढ़ने लगी तो समर मेरे रसीले ओंठ मुंह में लिए चूसने लगा और मेरा हाथ उसके पीठ से लेकर चूतड तक फिसल रहा था। समर मेरे ओंठ छोड़ा तो मैं उनकी छाती से बूब्स रगड़ते हुए जीभ निकाल उसके मुंह में डाल दी तो वो मेरे गर्दन में हाथ डाले जीभ चूसने लगा और मुझे तो नदी में मामा के साथ सेक्स करने में मजा आ रहा था, समर के मुंह में मेरी जीभ तो उसका एक हाथ मेरी चूतड पर और वो फिर जीभ निकाल दिया, मेरी तो बुर खुजला रही थी और मैं उसके छाती पर सर रखकर बोली ” समर एक बार और बीयर पिया जाए फिर ना यहीं पर तुम मुझे पेलना ” दोनो नदी से बाहर निकले तो कमर से पैर तक भींगा हुआ था और समर अपने डिक्की से एक तोलिया निकाल मुझे थमाया तो मैं अपने भींगे जिस्म को पोंछने लगी, उसी से मामा भी शरीर को पोंछे फिर मैं उस तोलिया को कमर से लपेट ली।
नदी के किनारे बैठी हुई बीयर की ग्लास ली फिर मामा को बोली ” एक सिगरेट देना जरा बहुत ठंड लग रही है ” फिर सिगरेट फूंकते हुए बीयर पी रही थी, कमर से घुटने तक को तो तोलिया ढक रखा था लेकिन मेरे कमर से ऊपर तो सब कुछ नंगा ही था और बीयर पीते हुए मैं समर के करीब गई जिसका लन्ड से लेकर पूरा बदन नंगा ही था, उसको सिगरेट थमाई फिर लन्ड थामकर पूछी ” तेरी रेणु दीदी यहां पर किसी गैर मर्द के साथ मजा ले रही थी शादी से पहले की बात है क्या
( समर बोला ) नही मुस्किल से चार साल पहले की बात है, तू अब बातें बंद कर और थोड़ा चूस भी दे रानी ” फिर मैं उनके सामने घुटने के बल बैठी और लन्ड को चूमने लगी तो समर का भी दोनो हाथ फ्री था, मेरे जुल्फों को सहलाने लगा तो जिया अब जल्दी में थी और मुंह खोल लन्ड को अंदर ली फिर सर का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी तो मामा खड़े खड़े ” ओह डार्लिंग चूस साली चूस और तेज ” लेकिन सुबह से तो चुम्बन और चूसने में ही तो दोनो व्यस्त थे, फिर मेरी बुर रस से गीली हो गई तो लन्ड मुंह से निकाल बोली ” मेरी बुर से रस निकल चुकी है प्लीज अब मुझे चोद दो ” और मैं उनके बाईक के सीट पर हाथ रख अपने पिछले भाग को उचकाई तो तोलिया मामा हटा दिए और मेरी जांघो को फैलाकर चूतड को सहलाने लगे, मैं पीछे मुड़कर देखी तो समर मेरी जांघो को पूरी तरह से फैलाया और मैं तो किसी चौपाया जानवर की तरह खड़ी थी और समर लन्ड पकड़े मेरी चूतड के नीचे यानी बुर में घुसाने लगा, सुपाड़ा तो उनका गोल और काफी मोटा था और आधा लन्ड आराम से बुर में गई तो मैं बाईक के सीट पर दोनो कोहनी रख झुकी और मामा मेरी कमर पकड़े धक्का दे मारा तो मैं सिसक उठी ” उह फाड़ना मत साले तेरी बहन की नही है ” और मामा का लन्ड मेरी बुर में तेजी से फिसल रहा था, कल दोपहर नानी घर पहुंघी हूं और तभी से अब तक सिर्फ और सिर्फ सेक्स का आनंद ही ले रही हूं तो मेरा मामा मेरे सीने से लगे स्तन को पकड़ दबाने लगा और अब मेरी बुर आराम से लन्ड का झटका खाते हुए चुदवाने में लीन थी, मैं अब नशे और चूदाई में झूमते हुए चूतड को हिलाना शुरू की तो समर चोदता हुआ मस्त था। गांव के बाहरी हिस्से में नदी और प्राकृतिक छटा के बीच मैं नग्न अवस्था में हुए समर के लौड़े से चूदवा रही थी और कमर को स्प्रिंग की तरह हिलाने में लगी हुई थी की बुर का रस सूखकर गर्म कर चुका था और मैं मामा को बोली ” डियर यहां पर तुम क्या और लड़कियों को लाते हो
( मामा का लन्ड गपागप अंदर बाहर हो रहा था ) क्या बोलूं जिया, वही खेत मे काम करनेवाली औरत को बहला फुसलाकर लाता हूं और ५० -१०० रू देकर चोद देता हूं ” मैं अब चूतड को स्थिर रखी थी तो मामा भी आराम से चोद रहा था, साले का लन्ड पिछले १० १२ मिनटों से चूदाई कर रहा था लेकिन दम तोड़ने का नाम ले ही नहीं रहा था और मैं बुर की गर्मी से परेशान होकर वीर्यपात की कामना करने लगी ” उई मां बुर में कब तक टिकेगा तेरा लौड़ा
( समर चोदता हुआ हांफने लगा ) अभी चार मिनट और ” साला दोनो पैर पर जांघें फैलाई खड़ी थी तो शरीर को किसी जानवर की तरह रखे उसके मोटे लन्ड का धक्का सहते हुए थक चुकी थी, अब मैं अपने चूतड को आगे कर उसके लन्ड को बुर से निकाल दी ” साला बुर तो आग की भट्टी बन चुकी है ” मैं जमीन पर बैठी तो समर भी थोड़ी दूरी पर जाकर मूतने लगा, मैं एक सिगरेट फूंकते हुए बुर की लहर से परेशान थी और तभी समर मेरे सामने आकर खड़ा हो गया ” इसको एक बार चूस दो रानी
( मैं मुंह फेर ली ) उहूं, जितनी देर चोदोगे मैं सहन कर लूंगी, क्या यहीं पर डॉगी स्टाइल में हो जाऊं ” फिर मैं जमीन पर ही कोहनी और घुटने के बल हो गई तो समर मेरी चूतड के सामने बैठा फिर वो मेरी जांघो को फैलाकर चूतड पर चुम्बन देने लगा तो मैं बोली ” जल्दी से खेल खत्म कर फिर घर भी जाना है ” और समर का लन्ड अंदर घुसने लगा, मेरी बुर तो जल्दी से रस चाहती थी और मामा जोर से एक धक्का देकर चोदता हुआ मेरे पीठ सहलाने लगा, मैं थकान महसूस कर रही थी लेकिन संभोग क्रिया करते वक्त यदि सिर्फ टांगे चिहारे लन्ड घुसवा लें तो खाक मजा आयेगा, इसमें तो दोनो को संतुष्ट करने की इच्छा और क्षमता होनी चाहिए, जिया अब अपने कमर हिलाते हुए चूदाई में मस्त थी तो मामा भी धक्का देता हुआ मस्त था और मेरी बुर से रस जल्द ही निकलता इसलिए खुश भी थी की साला जितनी देर चोदे मेरी बुर तो कम से कम गीली रहेगी और समर अब चोदता हुआ हांफने लगा ” ओह जिया अब टिक नही पाऊंगी रात को फिर से
( मैं बोली ) दो दिन तक तो सूंघने तक नहीं दूंगी आह मेरा झड़ा ” और इतने में मेरी बुर से रस निकला तो समर का लन्ड भी वीर्य की धार छोड़ शांत पड़ गया, मैं स्थिर रही फिर समर लन्ड को बुर से निकाला तो मैं भी बुर को पानी से साफ की, कुछ देर तो दोनो नंगे थे फिर कपड़ा पहने और मैं समर के जांघ पर सर रख लेटी रही और दोपहर के १:०० बजे घर में थी।

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