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मामा और भांजी की प्रेम कहानी : भाग ८

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फ्रेंड्स
जिया अपने नानी घर मां के साथ घूमने आई थी तो संयोगवश बाथरूम की टूटी हुई कुंडी के कारण मामा समर की नजर मेरी जांघो के बीच पड़ गई लेकिन वो इतने निकृष्ट इंसान होंगे ख्वाब में भी नहीं सोची थी, भांजी तो तभी शौच कर रही थी लेकिन समर तो भूखे भेड़िए की तरह मेरी नग्न बुर को देखता रहा और उसका परिणाम यही हुआ की मामा और भांजी तन और मन से इतने करीब हो गए की सेक्स उनको सामाजिक स्वीकृति लगने लगी, घर के अंदर हो या खेत खलिहान में यदि रिश्तों में शारीरिक संबंध बनता है ( सिवाय पति और पत्नी के ) तो वो पाप है, जघन्य कृत्य है लेकिन इस सच्चाई को सब जानते हैं कि मर्द और औरतें आपस में एक दूसरे की ओर आकर्षित होती हैं और कभी कभार तो संबंध नाम के ही रह जाते हैं तो एक नए संबंध का जन्म होता है जोकि अनैतिक और अस्वीकार्य होता है। मामा समर २५ वर्ष का अविवाहित लड़का था जिसके साथ मैं बिस्तर गर्म कर ली तो यकीनन यहां हम दोनो ही इस संबंध के बारे में जानते हैं और कुछ दिनों के लिए ही सही एक दूसरे के पूरक बन रहे हैं, अपना जिस्म काम की अग्नि में जलने दें और मामा हस्तमैथुन का सहारा लेकर रहें तो ये मेरे उपस्थिति में संभव नहीं है और दोपहर में चूदाई कराने के बाद उस रात मैं मां के साथ आराम से सोई फिर अगले सुबह उठकर फ्रेश हुई और चाय पी ही रही थी की मामा अपने रूम में थे, उनके रूम की ओर ही मेरा चेहरा था तो दरवाजा पर लगा पर्दा थोड़ा हटा हुआ था, मैं बरामदे पर बैठकर चाय पीते हुए देखी की समर का लूंगी नीचे सरक गया है तो वो झुककर लूंगी उठाते तब तक तो उनका लौड़ा मुझे सुबह का नमस्कार कह चुका था, भला कौन जवान लड़की होगी जोकि ७-८ इंच लंबा और ढाई इंच मोटा लन्ड देखकर चुदवाने को नही तड़पेगी और मैं तो वैसे भी चुदासी किस्म की लौंडिया हूं जिसे सप्ताह में एक चूदाई चाहिए साथ ही मैं लाइफ एंजॉय करने में विश्वास करती हूं ना की रिश्ता नाता निभाने में, चाय पीकर कप को रखी फिर उठकर देखी तो मां स्नान करने गई थी और मैं मामा के रूम आई फिर उनको देख धीरे से बोली ” आपका लूंगी तो खुल गया था मामा, सुबह सुबह दर्शन करा दिए
( समर हंस दिया ) जिया मेरा मन नहीं है मुझसे गलती हुई लेकिन तुम्हारी रजामंदी से ही सब कुछ हुआ, अब अपने मन से सब कुछ निकाल दो
( मैं समझ गई की ये साला भाव खा रहा है ) कोई बात नही मामा, मुझे कोई दिक्कत नही और वैसे भी रोज रोज एक ही भोजन मुझे पसंद नही ” कहते हुए रूम से निकल गई, बरामदे पर कुर्सी पर बैठ न्यूज पेपर लिए पढ़ने लगी तभी मां बोली ” जाकर स्नान कर लो फिर नाश्ता कर लेना
( मैं बोली ) ठीक है जाती हूं ” और अपने बैग से एक गुलाबी रंग की टॉप्स और ब्लैक रंग की लेगिंग्स निकाली, यहां का स्नानागार तो ऐसा ही था की यदि तेज हवा चली तो खंबे में बंधा पर्दा उड़ने लगेगा और फिर आपकी नग्न खूबसूरत जिस्म कोई देख भी सकता है, वैसे घर के पीछे काफी दूरी तक बागान ही था और मैं स्नान करने गई फिर वहीं रस्सी के टंगनी पर कपड़ा रखी फिर पर्दा को ठीक कर अपने नाईटी को उतार नंगी हो गई, पहले से ही बाल्टी में पानी था और मैं साबुन को फर्श पर रखकर बैठी फिर तन पर पानी डालने लगी, जिस्म को भिंगोकर साबुन उठाई फिर चेहरे से लेकर छाती तक साबुन लगाई और ज्योंहि अपने पेट से कमर तक साबुन लगा रही थी की मुझे किसी के अंदर आने का आहट हुआ, चूंकि मेरा चेहरा विपरीत दिशा में था और मेरे पीठ से लेकर गांड़ तक स्नानागार के द्वार की ओर, मेरे जिस्म का अगला हिस्सा झागयुक्त था और मैं पीछे मुड़कर देखी तो मामा वहां खड़ा होकर मुझे देख रहा था, मैं धीरे से बोली ” चल यहां से खिसक नही तो शोर मचा दूंगी
( समर जिद्दी इंसान की तरह खड़ा रहा ) शोर मचाएगी तो क्या होगा, तेरी मां नानी जान जाएगी और फिर
( मैं झटपट बदन पर पानी डालकर स्नान कर रही थी ) आराम से बदन को साफ करो फिर घूमने चलेंगे ” वो चला गया तो मैं स्नान करके शरीर को तौलिया से पोंछी फिर कपड़े पहनकर बरामदे पर आई, मां नाश्ता बनाने में लगी हुई थी तो मामा मेरे सामने से कुछ कपड़ा हाथ में लिए स्नान करने गया लेकिन बोलते हुए ” शाम को या दोपहर को प्लान बना लेना फिर साथ घूमने जाएंगे ” और मैं समझ गई की समर आज दिन में ही मुझे लगा तो यही मैं भी चाहती थी।
सुबह के ११ बजे होंगे और मैं आंगन में मां और नानी के साथ बैठकर बातें कर रही थी, समर उधर से जींस और टीशर्ट पहने निकला तो मां उससे पूछी ” किधर जा रहा है भाई
( समर ) थोड़ा काम है गोदाम से अनाज की बोरियों ट्रेक्टर पर लोड करवाकर मंडी में भेजना है, क्यों दीदी
( मां मेरी ओर देखी ) जा मामा के साथ जाकर घूम आ ” मैं असमंजस में थी फिर उठी और मामा के साथ निकल गई, वो घर से बाईक बाहर किए तो मैं टॉप्स और लेगिंग्स में थी, दोनो चुप थे तो बाईक स्टार्ट होते ही उसके पीछे बैठी लेकिन दोनो टांगें दो दिशा में किए साथ ही दूरी बनाए हुए। गांव से बाहर निकलते ही पूछी ” मामा उस दिन तो गोदाम खेतों की पगडंडियों पर चलकर गए थे
( मामा बोले ) आज दूसरे रास्ते से ले जा रहा हूं ” और फिर मैं उनसे चिपककर बैठ गई, अपना एक हाथ उनके कमर में डाल दी तो अपनी गोल मुलायम चुचियों को उनके पीठ से रगड़ने लगी तो मामा मेरे प्यार को समझते हुए बोले ” तुम्हे तभी चिढ़ा रहा था बेबी
( मैं उनके गाल चूम ली ) लेकिन मैं तो सच ही बोली, एक ही भोजन रोज करना मुझे पसंद नहीं तो क्या गोदाम पर काम करनेवाला कोई मजदूर मेरे साथ
( समर गुस्से में पीछे की ओर देखा ) तेरा दिमाग खराब है क्या ” और थोड़ी देर बाद गोदाम पर पहुंचे तो वहां पहले से ही एक ट्रेक्टर पर बोरियां लादी जा रही थी, मुझे एक मजदूर ने लाकर कुर्सी दिया तो मैं उस पर बैठ गई और मामा बोरियां लोड कराने में व्यस्त थे। मैं चुपचाप बैठी हुई बोर हो रही थी लेकिन कुछ पल बाद मामा मेरे पास आए और पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ बोले ” और आधा घंटा का काम है
( मैं चुप थी ) क्या हुआ बेबी, कोई प्रोब्लम
( मैं बोली ) हां बीयर पीने की इच्छा हो रही हैं
( वो बोले ) ठीक है वो भी आ जायेगा ” फिर मामा उठकर चले गए, मैं बैठी हुई मोबाइल में न्यूज पढ़ने लगी और कुछ देर बाद अनाज की बोरियों से लदा ट्रेक्टर निकल गया, मामा मेरे करीब आकर बैठे तो सारे मजदूर भी चले गए सिवाय एक के जोकि रैयत था, मामा उसे बुलाकर ५०० रू का नोट दिए फिर वो मामा की बाईक लेकर चला गया। समर बोला ” अभी तो ट्रेक्टर में अनाज की बोरियों को लोड होने में दो घंटा लगेगा क्या समझी
( मैं समझते हुए शर्मिंदिगी महसूस कर रही थी, सर झुकाए बोली ) हां समर तब तो दो घंटे तक दोनो बीयर पियेंगे ” और कुछ देर के बाद वो रैयत आया फिर बाईक लगाकर मामा को चाभी दिया साथ ही एक पोलीबेग, वो फिर चला गया तो मामा बोले ” गोदाम के अंदर तेरे लिए सब व्यवस्था करवा दिया हूं, चलो अंदर ” दोनो उठे फिर अंदर गए तो देखी की अभी भी अनाज की बोरियां पड़ी हुई है और समर अंदर आते ही दरवाजा बंद कर दिया तो बोरियों के पीछे पड़े लकड़ी की चौकी पर एक बिछावन और तकिया भी था। समर बैठकर पोलीबेग से बीयर की बोतल निकाला तो मैं ग्लास पकड़े बैठी हुई थी और फिर दोनो बिछावन पर बैठे बीयर पीने लगे तो समर सिगरेट पीने लगा, एक ग्लास बीयर झट से पीकर दुबारा बीयर डालने लगी तो समर खड़ा होकर जींस और टीशर्ट उतार दिया, लेकिन वो बॉक्सर पहन रखा था तो मैं दूसरा ग्लास बीयर पीते हुए बोली ” मैं खुद ही कपड़ा उतारूं या तुम ” तो मामा बीयर की बोतल लिए पीने लगे और उनकी नजर मेरी छाती पर थी, इशारे से बोले की मैं ही कपड़ा उतार दूंगा। समर के लन्ड के उभार पर निगाहें टिकाए हुए मैं बीयर पी ली और अब मामा मेरे सामने बैठा हुआ मेरे टॉप्स को पकड़ गले से बाहर कर दिया और फिर जिया सिर्फ ब्रा और पैंटी में बैठी हुई थी, आगे…. अगले भाग में।

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