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मामा और भांजी की प्रेम कहानी

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फ्रेंड्स,
मैं जिया प्रियदर्शी, उम्र २२ वर्ष, रंग गोरा तो कद ५ फीट ४ इंच साथ ही दोनो बूब्स गोल और संतरे समान साथ ही चिकनी जांघें तो बुर की फांकें थोड़ी मासंल और चूतड गोल गद्देदार, क्या ऐसी बायोडाटा देख लड़के मुझसे शादी करेंगे, जरूर लेकिन यदि साथ में ये लिख डाला की अब तक ग्यारह लड़कों या मर्द के संग सहवास कर चुकी हूं तो फिर! शादी तो नही हां मुझे कोठे पर बिठाकर रण्डी जरूर बना देगा, मेरा नानी घर गोरखपुर के पास है और वहां मैं गई हुई थी साथ में मां भी थी तो मेरे दो मामा जी हैं, एक जोकि बाहर रहते हैं और दूसरे वाले घर पर ही, छोटे मामा समर मुस्किल से २७ साल के होंगे और अभी तक उनकी शादी भी नही हुई है, दोनो नानी घर पहुंचे तो दोपहर १:३० बजे थे फिर फ्रेश होकर हमलोग खाना खाए और तभी घर में सिर्फ नाना और नानी जी ही थे। मैं एक कमरे में चादर ओढ़कर सो गई और फिर यात्रा की थकावट की वजह से नींद भी आ गई, शाम के चार बजे मेरी नींद खुली तो मैं उठकर बाथरूम गई फिर दरवाजा सटाकर मूतने लगी, उस बाथरूम के दरवाजा की कुंडी टूटी हुई थी और मैं टॉयलेट सीट पर टांगे फैलाई बैठी हुई मूत रही थी तभी अचानक से दरवाजा खुली, मैं तो डर से सीट पर बैठी रही लेकिन मेरे मामा समर मेरी बुर को देखते रहे ” ओह सॉरी दरवाजा पकड़ कर बैठती ” और वो मेरी बुर को घूर कर चले गए, मेरा बदन तो सिहर गया लेकिन जिस कदर मामा मेरी बुर को देखते रहे मैं समझ गई कि ये साला मेरे पर नजर डालेगा साथ ही मुझे रिझाने की कोशिश करेगा ताकि मेरी बुर के साथ मजा कर सके और मैं तो पहले से ही खेली खाई हुई लड़की, सोची की रात को सबके सोते ही मामा के साथ सेक्स कर लुंगी लेकिन आसानी से सब आइटम परोस दी तो वो मुझे चरित्रहीन समझेंगे! मैं अब आंगन में आकर बैठी तो मामा जी वहीं पर बैठे हुए थे, मुझे तिरछी नजरों से देखे तो मैं वहीं खटिया पर बैठ गई और नानी शायद चाय बना रही थी तो मां भी उधर ही थी, समर मेरी चुचियों को भूखे भेड़िए की तरह देख रहा था और मैं शर्म महसूस करते हुए सर झुकाए बैठी थी तभी मामा पूछे ” जिया तुम कितने साल बाद यहां आई हो
( मैं चेहरा ऊपर कर बोली ) जी मुस्किल से ८ – ९ महीने हुए होंगे क्यों मामा
( वो हंसकर बोले ) तो फिर चलो आम के बगीचे के पास एक नया गोदाम बनवाया हूं वही देखने
( मैं उनकी मंशा समझ चुकी थी ) क्या मामा गोदाम भी कोई देखने की चीज होती है क्या ” फिर मां और नानी दोनो आ गए और सब लोग साथ में चाय पी रहे थे, मेरी ओर देखते हुए नानी बोली ” बेटी अब जिया के लिए कोई अच्छा सा लड़का देखकर इसकी शादी क्यों नही करा देती, मैं शरमाने की बजाय हंस दी ” क्या नानी अभी तो मेरी उम्र खेलने कूदने की है क्यों इतनी जल्दी शादी के बंधन में बांधना चाहती हैं
( मामा बोले ) सो क्या तुम्हारी उम्र १० साल की है, बीस इक्कीस साल की हो चुकी हो
( मैं बोली ) तो पहले आप क्यों नही शादी करते ” फिर चाय का प्याला रखकर मैं रूम में गई तो पीछे से मां भी आई ” कितनी बेशर्म हो गई है, इस तरह से नानी से कोई मुंह लगाता है भला
( मैं चुप रही और मां बोली ) तुम समर के साथ जाकर घूम फिर लो
( मैं बोली ) ठीक है जैसी आपकी इच्छा ” फिर मैं अपने सलवार सूट को खोलकर टॉप्स और स्कर्ट पहन ली जोकि मेरे जिस्म के उभार को दर्शा रहे थे, फिर रूम से निकली तो मामा मेरे साथ घर से निकले, मुझे मालूम था की आम का बगीचा यहां से ५०० मीटर था जहां तक खेतों की पगडंडी पर ही चलकर जाना होता, वैसे भी बसंत ऋतु का समय था और दोनो आम के बगीचे की ओर चल दिए, पैर में सैंडल था लेकिन साधारण और खेतों का नजारा लेते हुए दोनो आगे बढ़ रहे थे की मामा अचानक से मेरे कमर में हाथ डाल दिए, मैं हाथ झटकते हुए बोली ” ये क्या मामा जवान भांजी के कमर में हाथ डाल दिए
( वो अपने ख्वाब को टूटते देखे ) सॉरी मुझे लगा की तुम्हारे कदम कहीं फिसल ना जाएं
( मैं समर की ओर देख बोली ) आपकी तो नजरें टिकी रहती है मुझ पर क्यों मामा
( वो शर्मिंदिगी महसूस कर रहे थे ) तुम दरवाजा को पकड़ बैठती तो फिर ” ये कहकर चुप हो गए, साला मेरी बुर को देखकर आंखों में बसा लिया है और फिर थोडी दूरी के बाद आम का बगीचा आया, वहां एक नया गोदाम भी दिखा और नाना जी के पास खेत तकरीबन ४० बीघा के आसपास था तो फसल रखने के लिए ही गोदाम बनवाए थे और मामा जी गोदाम का ताला खोले और मैं सहमती हुई अंदर कदम रखी, वहां अनाज की ढेरों बोरियां थी और मामा अचानक से मुझे पीछे से दबोच कर चूमने लगे ” क्या मामा तुम गोदाम दिखाने लाए हो या कुछ और, छोड़ो नही तो तेरी शिकायत करूंगी ” समर का लौड़ा मेरी चूतड में चुभ रहा था और वो मुझे छोड़ने की जगह मेरे चूची पर ही हाथ लगाकर मसलने लगा, मैं गर्म तो हो रही थी लेकिन दिखावटी गुस्सा करते हुए उनसे छूटने की कोशिश कर रही थी और वो मेरे दोनो चूची को पकड़ दबाए जा रहे थे, ऐसे ही मैं ढीली पड़ती जा रही थी उसपर से उनके ओंठ का प्यार गर्दन पर मुझे तरसा रहा था, मैं धीमे स्वर में बोली ” समर जरा आराम से दबाओ, वैसे भी तेरी भांजी भागे नही जा रही है ” और अब मैं उसके हाथ चूची पर से हटाकर पीछे मुड़ी, समर पैजामा और कुर्ता पहना हुआ था और उसके करीब खड़ी होकर मैं उसके गाल सहलाने लगी ” तू तो छुपा रुस्तम निकला, क्या गोदाम में बोरी पर लिटाकर अपनी भांजी का सील तोड़ेगा ” वो चुप था लेकिन उसका एक हाथ मेरे स्तन को दबाने लगा और जिया कामुकता वश उसके पैजामा के नाडा को पकड़ खोल दी तो समर मुझे देखता रहा और मैं झट से उसके चढ्ढी पर हाथ लगाकर लन्ड के उभार को पकड़ ली ” तू तो जानबूझकर बाथरूम का दरवाजा खोला था क्यों फिर दिखाऊं
( जिया उसके चढ्ढी को निचे कर लन्ड को देखने लगी ) वाह तेरा तो औजार मोटा है ” और उसे पकड़कर हिलाना शुरू की तो समर अब मेरे स्कर्ट के हुक को खोल दिया, सिर्फ पेंटी पहन मैं खड़ी थी और उसके लन्ड हिलाते हुए खुद से अपनी पेंटी खोल टांगे फैलाई ” ले देख तू तो साला शकुनी मामा है अपनी ही भांजी को नंगा देखता है ” वो असमंजस में था लेकिन मैं उसके गाल चूमते हुए उससे लिपट गई तो उसका हाथ मेरे चूतड को सहला रहा था ” जिया तभी मुझे तेज पिसाब लगी थी लेकिन तेरा वो देखकर ही मेरा मन डोल गया ” और फिर उस गोदाम के दरवाजा को बंद कर मामा मुझे अनाज की बोरियों के पीछे ले गए, वहां एक चौकी थी साथ ही गद्दा भी, मैं अब समर का मोटा लन्ड देख तड़प उठी थी और उसके कुर्ते को खोलते हुए खुद भी नंगी हो गई, चौकी पर मुझे लिटाया तो मैं बोली ” मामा जो करना है कर लो लेकिन वो करने नही दूंगी ” मैं नंगे लेटी हुई थी तो समर भी नंगा था, अब वो मेरे ऊपर सवार हुए मेरे चेहरे को चूमने लगा तो मैं उसके पीठ सहलाते हुए उसके बाल सहला रही थी। समर देखने में कुछ खास नहीं था लेकिन उसका कसरती बदन साथ ही गांव के मर्द की तरह मोटा लन्ड मुझे आकर्षित कर रहा था, जब दस जगह मुंह मारती ही हूं तो फिर ७ इंच लंबा और ढाई इंच मोटा लन्ड लेकर क्यों ना अपनी बुर को संतुष्ट कर लूं, अभी तो शाम के ४:३५ ही हुए थे फिर भी मामा को अभी तो चोदने नही दूंगी, हां रात को आराम से बुर चुदवाऊं यही सोचते हुए मस्त थी, मामा मेरे चेहरे को चूमते हुए ओंठ पर ओंठ रखा तो मैं उनके गर्दन को पकड़ चुम्बन दी ” मामा फ्रेंच किस्स का मजा लेंगे
( वो हंसते हुए बोले ) भांजी जो देगी प्यार से लूंगा ” और फिर मैं अपनी जीभ निकाल उनके ओंठ को चाटने लगी, वो मुंह खोले जीभ अंदर लिए फिर चूसने लगे और उनका मोटा लन्ड मेरे जांघो के बीच बुर को छुवन दे रहा था, उनके जीभ चूसते हुए उनके पीठ पर नाखून गड़ाने लगी फिर मैं जीभ निकाल कर बोली ” मामा अपनी भांजी को मौका तो दो फिर बताती हूं की शहर की लौंडिया कैसे मजा देती है ” और समर मेरे जिस्म पर से हटा फिर मैं उनको लेटने को बोली, गोदाम का एक खिड़की खुला था इसलिए अंदर रोशनी आ रही थी और अब मैं मामा के लन्ड को पकड़ हिलाने लगी ” तो मामा कितनी औरतों को इसका मजा मिला है
( मामा मेरे बूब्स पकड़ दबा रहे थे ) ये गांव है पगली यहां इधर उधर मुंह मारना कठिन है लेकिन क्या मेरी प्यारी भांजी अपना खेत जुताई करवा चुकी है
( मैं उनके लन्ड का चमड़ा नीचे कर चूमने लगी ) उहूँ सिर्फ ओरल सेक्स, चूमने चाटने चूसने का अनुभव है समर लेकिन फिलहाल उस मायने में कुंवारी हूं ” ये कहते हुए लन्ड के सुपाड़ा को चेहरे पर रगड़ने लगी, साले का मूसल लन्ड हफ्ता भर में दस बार अंदर नहीं ली तो बेकार, अब सुपाड़ा को मुंह में लिए चूसने लगी तो समर मेरी बूब्स को पकड़ दबा रहा था और मैं उनसे नजर मिलाते हुए लन्ड को मुंह में ले ली लेकिन आधा से अधिक लन्ड ली थी की सुपाड़ा गले तक पहुंच गया और जिया लन्ड चूसते हुए सर का झटका देने लगी, मामा का हाल खराब था और वो मेरी चूंची को मसलते हुए मेरे बाल को कसकर पकड़े हुए सिसक रहे थे ” उह ओह साली तो उम्र से अधिक जवान हो गई ” तो मैं मुखमैथुन करते हुए मस्त थी लेकिन मामा को शायद पहली बार ये मजा मिल रहा था इसलिए वो तड़प रहे थे, मैं कुछ देर में ही लन्ड को मुंह से निकाल दी फिर चेहरा ऊपर किए बोली ” समर किसी को प्लीज कुछ मत बताना, अब मेरी बुर चाट दे ” तो वो उठे और बोले ” उधर बाल्टी और लोटा है जाकर अच्छे से बुर को धो ले कहीं पिसाब की बदबू आई तो मेरा मुंह खराब हो जाएगा
( मैं उठते ही कमर पर हाथ रखी ) बहुत भाव खा रहे हो समर, बुर की मूत भी मैं कितनों को पिला चुकी हूं ” फिर बुर को पानी से धो ली और आकर चौकी पर लेट गई, वो साला बिना देर किए ही मेरे चूतड के नीचे हाथ लगाया और मैं जांघें फैलाकर उसे बुर चाटने का न्योता दी तो वो अब बुर के फांक को चूमने लगा, मैं उसके सामने टांगे फैलाई लेटी हुई बुर पर चुंबन का आनंद लेने लगी फिर वो अपनी उंगलियों की मदद से बुर फैलाया और जीभ से चाटना शुरु किया तो एक हाथ मेरे पेट पर रखा था, मैं उसका हाथ पकड़ अपनी चूची पर रखी और वो जोर जोर से चूची दबाने लगा, उसके लंबे जीभ मेरी बुर के अंदर तक जा रहे थे और मेरी बुर की खुजली चरम पर थी ” ओह उह उई मां बुर तो गुदगुदी से मरे जा रही है अरे मामा जरा फांकों को मुंह में लिए चूस तो सही ” अब बुर रसीली होने को थी तभी समर मुंह में फांकों को लिए चूसने लगे, मैं चिल्ला पड़ी ” उह निकल गया, चाट साले बुर का रस ओह मजा आ गया ” फिर मामा बुर को मुंह से निकाल जीभ घुसाए चाटने लगे तो मैं सुस्त लेटी रही, आगे बहुत कुछ हुआ… to be continued.

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