बॉलीवुड मसाला-ड्रामा ! | Erotic Stories
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बॉलीवुड मसाला-ड्रामा !

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जिस तरह फिल्मी लाइन में ‘ डबल ‘ [ हमशक्ल ] होते हैं, उस तरह से मैं अमर अभिनेत्री की ‘डबल’ नहीं थी, फिर भी मेरा नाम मीनाकुमारी था। सच कहूँ तो मैं असल अभिनेत्री मीनाकुमारी से ज्यादा खूबसूरत थी; सबसे बड़ी बात ये थी की मैं सेक्सी बहुत थी। फिर मेरा चेहरा खास किस्म का था। मेक-अप से इसे अदलने-बदलने पर यह कई बॉलीवुड अभिनेत्रियों की शक्ल ले लेता था। मैं जिमनास्ट भी थी, खास कर मैं अपने तन-बदन को बहुत लचीला कर सकती थी। मेरी आँखें ” मीन ” अर्थात मछली जैसी तीखी और संकेत भरी होती थीं:नशीली, मद-कसीली। मैं अश्लील नृत्य बहुत समझदारी के साथ कर लेती थी, अक्सर भद्दे इशारों के साथ। मैं एक आर्केस्ट्रा ग्रुप के साथ कई साल रही। मेरी मां भी नर्तकी थी, पापा नहीं थे पर उनकी जगह एक रिश्ते के ‘ अंकल’ थे, जो उस आर्केस्ट्रा ग्रुप से जुड़े हुए थे। मुझे नाच-कूद से अभिनय ( एक्टिंग ) की लाइन में लाने में उन अंकल जी का हाथ था। शुरू में मैंने नौटंकी – अभिनय किया। फिर बंबई के कई स्टूडियों की बी-ग्रेड व सी-ग्रेड की फिल्मों में भी उतरी। होते होते मैं सेक्स बम और पटाखा हो गई। शान से रहने लगी।

तभी कुछ प्रोड्यूसरों की नजर मुझ पर फिसली। ये प्रोड्यूसर शौकीन तबीयत के थे, और कुछ अलग तरह की सेक्सी फिल्में उतारना चाहते थे; दर असल कुछ खास सेठ यह फाइनेंस कर रहे थे जो चाहते थे कि कुछ छंटी हुई बॉलीवुड एक्ट्रेसेज की मैं भूमिका करूं क्योंकि ऐसा काम केवल मैं ही कर सकती थी। एक मार्केट था जिसमें लोग बॉलीवुड की अभिनेत्रियों की अश्लील अदाकारी के मज़े लेना चाहते थे। प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोन, विद्या बालन, करीना कपूर, कटरीना कैफ, मलाइका, विपाशा बसु, आदि-आदि की भूमिका मुझे देने के प्रस्ताव आने लगे। मैं पुणे ( पूना ) की हूँ।

पिछले दिनों एक ठगनचंद सेठ आए, उम्र लगभग 52 वर्ष। बताया कि मुंबई में उनके तीन स्टुडियो हैं, और वे खुद भी अच्छे फिल्म प्रोड्यूसर हैं। वे मेरे ताऊ जी की उम्र के थे। मैं उनको पहले से जानती थी। मुझसे बोले– ‘ तुम्हारी सरीखी होनहार छोकरी को बी और सी ग्रेड की चालू फिल्मों में काम करना शोभा नहीं देता। मैं अच्छी-अच्छी ”ए ”- ग्रेड की फिल्में बनाता हूँ। उसमें तुम्हें उतारना चाहता हूँ। ‘ फिर रुक कर बोले–‘ मेरी पिछली फिल्म में मैंने कंगना रणौत को फ़ुल नंगी किया है। ‘ बोले– ‘ तुम्हारा काम भी देखा है, तुम कई-कई फिल्मों में अधनंगी हुई हो: कई बार कमर से नीचे, और बहुत बार पेट से ऊपर ! मैं तुम्हें अपनी वयस्क ( एडल्ट ) ” ए ”- ग्रेड फिल्म में पूरी नंगी दिखाऊँगा; इसके अच्छे दाम मिलेंगे। ‘ यह सुन मैं भी चहकी और उन्हें उम्दा किस्म की मदिरा परोसी, वो गटागट पी गए, और मैंने भी पी। उनकी तबीयत देख मैंने अपने सीने के उभार ऊंचे-नीचे कर उचकाए और टांगें फैला बैठ गई। मुझे बूढ़े-खूसट प्रोड्यूसरों को खुश करने का अनुभव था।

वे बकते जा रहे थे। बोले– ‘ मैं धार्मिक और ऐतिहासिक फिल्में भी बनाता हूँ, इन फिल्मों में भी मैं दो-चार नंगे दृश्य डाल ही देता हूँ। मैं स्पोर्ट्स फिल्में भी बनाता हूँ। ‘ यह कह उन्होंने मुझे अपनी अंगुली में पहनी हुई नग -जड़ित सोने की अंगूठी भेंट की। मैं खड़ी हो गई और इस अदा से चली जिससे सेठ मेरे चूतड़, जांघों की दरार, और मम्मों की मचक को अच्छी तरह से देख लें। मैं मिठास से मुस्कराई और सेठ से सट कर बैठ गई। वे बोले — ‘ कम से कम तीन साल तुम्हें सिर्फ और सिर्फ मेरी फिल्मों में ही काम करना है; करोड़ों कमा लोगी’। इसमें शक नहीं कि वो तेजस्वी धनी थे और ऊंचे दर्जे के शौकीन। इसलिए मैंने करार कर लिया। वे मुझे अपने स्टुडियो ले गए और एक दृश्य के बारे में समझाया। सात मिनट के इस दृश्य में अभिनेता गोविंदा फ़ुल पेंट पहने माधुरी दीक्षित के नितंबों से सट-सट चिपक-चिपक अश्लील डांस करता है और माधुरी दीक्षित मज़े से मुस्करा-मुस्करा कभी आगे तो कभी पीछे सरकती है। इस दृश्य में ये दोनों पूरे कपड़े पहने होते है पर चेहरे के भाव बड़े अश्लील हो जाते हैं। यह कला है।

सेठ ने कहा– ‘अभी इस दृश्य की नकल या पेरोडी करनी है। इस दृश्य को तीन चरणों में फिल्माना है। पहले में पूरे कपड़े, दूसरे में आधे-अधूरे वस्त्र, और तीसरे चरण में सब वस्त्र उतार, मादरजात नंगी हो कर कला दिखाना है। हर दृश्य में तुम्हारी शक्ल तीन प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्रियों से मिला करेगी। एकदम नहीं पर उनसे मिलती-जुलती शक्ल या चेहरा-मोहरा होगा। ‘ सेठ आगे बोला– ‘ मेरे ध्यान में तुम्हें विद्या बालन, पुरानी ऐतिहासिक अभिनेत्री मीनाकुमारी, और मलाइका अरोड़ा का वेश या चेहरा धरण करना है; एकदम हमशक्ल भी नहीं पर सजेस्टिव– प्रतीकात्मक, जिससे कि किसी को एतराज भी ना हो और मज़ा आ जाए। ‘ ” मेरे ख्याल से तुम ये कर लोगी ‘!

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मैंने पूछा — ‘ ऐसे अति अश्लील दृश्य में मेरे पीछे लगने वाले अभिनेता किस-किस शक्ल के होंगे?’ सेठ बोला— ‘ विद्या बालन के पीछे नसीरुद्दीन शाह लगेगा, मीनाकुमारी के पीछे मोटा-ताज़ा प्रेम आहूजा, और मलाइका के पीछे जवान -ताज़ा शक्ति कपूर। ‘ सेठ बोला– ‘ मर्द के चेहरे की तुम फिक्र ना करो, वो मैं सम्हाल लूँगा!’ तुम अपना कर्म-धर्म निबाहो, बेटी!’

सबसे पहले मेरे पीछे नसीरुद्दीन शाह की शक्ल से मिलने वाला अभिनेता मर्द लगा। उसकी कद-काठी बिलकुल शुरू में आए नसीरुद्दीन शाह जैसी थी पर मुंह या चेहरा बिलकुल वैसा न था, अलावा वो मोटा या भारी बदन का भी था। लेकिन मुझे इन सबसे कोई मतलब नहीं था। रिहर्सल के लिए वो मेरे पीछे लगा तो बहुत ज्यादा मेरी गांड से चिपक रहा था। मैं कपड़ों के भीतर से उसके तने लंड को महसूस कर रही थी। पीछे से जब वह धक्का मारता तब मैं चिहुँक कर ”आह, आह” करती। सेठ को उसका काम पूरा ठीक-ठीक नहीं लगा, इसलिए उसे काम समझाने के मकसद से वो भी मेरे पीछे लगा, वो अर्थात सेठ खुद। सेठ का बदन ज्यादा भारी था, जांघें चौड़ी -चौड़ी और पेट कुछ आगे आया हुआ। सेठ ने नसीरुद्दीन शक्ल के मर्द से कहा– ‘ देख, इधर देख। पीछे लग कर तुझे इस छोकरी की नाभि ( belly button ) में अंगुली गड़ानी है; ऐसे!!!”

यह कह सेठ ने कठोरता से मेरी नंगी नाभि में कड़क अंगुली घप-घप की। सेठ का लंड भी सच्ची में काफी मोटा, फूला-फूला था। अगली बार उस मर्द अभिनेता ने वैसा ही किया जैसा सेठ ने कहा या किया। इस पहले वाले दृश्य में मर्द अभिनेता ने फुल पेंट पहन रखी थी और मैंने साड़ी, जो उत्तेजक ढंग से मेरे जिस्म से कस कर बंधी हुई थी। साड़ी में मेरे लोचदार अंगों की लकीरें साफ दिख रही थी। अगले दृश्य में मैंने स्कर्ट-टॉप्स और उसने निकर ( हाफ पेंट ) व टी-शर्ट पहन ली थी। यह दृश्य ज्यादा उत्तेजक था। मर्द अभिनेता के हाथ की अंगुलियाँ न केवल मेरी नाभि की गहराई में बल्कि मेरे पेट की चमड़ी पर भी घुसुड़-फुसुड़ फिसल रही थी, और वो मेरे गालों को भी चूमे जा रहा था, उसका थूक बाहर आ रहा था। इस बार वह मेरी गाँड से ज्यादा-ज्यादा चिपक रहा था। सेठ खुश हुआ और उस मर्द अभिनेता के कान में कुछ फुसफुसाया। तब उसने अपने निकर की ज़िप खोल दी और उसका नंगा लंड मेरे स्कर्ट पर इधर-उधर डोलने लगा बल्कि गड़ने लगा। मैं इस अर्धनग्न अवस्था में उससे ज्यादा से ज्यादा चिपके जा रही थी और आगे-पीछे हो हिल रही थी जैसे कि मैं झूला झूल रही हूँ। इसी दृश्य की तीसरी स्टेज में हम दोनों को पूरा नंगा होना था। यह दृश्य ज्यादा कामोत्तेजक था। पहले वो मादरजात नंगा हुआ फिर मैं। उसने मुझे अपना नंगा लंड व अंडकोश दिखाये। अंडकोश के गिर्द हल्की-हल्की झांटें थीं। फिर मैनें भी नग्नावस्था में अपनी टांगें चौड़ी की, मर्द अभिनेता मेरी खुली-फैली जांघों के बीच उकड़ूँ बैठ मेरी चू त निरखने लगा। मेरी चूत पावरोटी सी फूली हुई थी। फिर मैंने उसे घूम कर अपनी गाँड भी दिखाई। दर असल इस आखिरी दृश्य में उसे खुल्लमखुल्ला मेरी गाँड मारनी थी। मुझे कोई एतराज नहीं था क्योंकि करार था और फिर इस लाइन में ये सब चलता भी है। मुझे तगड़ा पैसा अपनी कसी -कड़क गाँड मरवाने के लिए ही मिल रहा था। यही कला होती है।

यह दृश्य ज्यादा ही अश्लीलता से फिल्माया गया। जब मर्द अभिनेता मुझ पर पीछे से सवार हो मेरी गाँड मार रहा था तब सेठ ने मेरी फुद्दी में अपनी दो अंगुलियाँ फंसा दी, यह बताने के लिए कि मर्द अभनेता को भी मेरी फुद्दी में अंगुलियाँ गड़ानी है। गो कि बाद में उसने यही किया। उसने पूरे आध घंटे मेरी नंगी गाँड मारी। जब वह फारिग हो गया तो सेठ भी नंगा हो मेरी गाँड से भिड़ गया और उसने भी आधा घंटा मेरी गाँड मारी।

इन तीन दृश्यों में मैंने विद्या बालन का रूप रच कर चहचहाते हुए अपनी गाँड मरवाई।

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