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ट्रेन का सफर : सहयात्री बना हमसफर (भाग २)

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रीडर्स,
मेरी लिखी कहानी पढ़कर आपलोगों को मजा तो आ रहा होगा, वैसे प्यार करने की चीज है और लड़ाई देखने की, प्यार चाहे भावनात्मक हो या बिस्तर तक सीमित हो उसका आनंद वही जानता / जानती है जिसने कभी अपने जीवन में इसे अजमाया है, शादीशुदा महिला अपने जीवन को पति तक सीमित रखती हैं लेकिन जो महिलाएं पति के अलावा गैर मर्दों के साथ सेक्स करती है उसे चरम आनंद प्राप्त होता है, कल्पना में किसी मर्द को याद करते रहना और घुटन भरी जिंदगी जीना ये दीपा के स्वभाव में नहीं है बल्कि मैं शारीरिक संबंध बनाते वक्त सिर्फ सुरक्षित संभोग का ध्यान रखती हूं। राजधानी के प्रथम वातानुकूलित के कोच में सिर्फ दो यात्री और फिर मेरा खूबसूरत बदन के साथ फिगर किसी मर्द / लड़के को आकर्षित करने लिए काफी है, मेरे साथ राज स्तनपान करता हुआ मुझे काम की आग में झोंक रहा था तो उसका लन्ड मेरे चूत के मुहाने पर ठोकर मार रहा था और मैं बुर से लेकर पूरे जिस्म में हो रहे गर्मी से मस्त तो थी लेकिन अब अपनी योनि चूसना चटवाना चाहती थी, उसके बाल को कसकर पकड़े छाती से लगाए राज को दूध पिला रही थी ” उफ ओह अब रहम करो कितना दूध पियोगे जान अब जरा योनि भी चाट दो ” वो मेरी चूची चूसकर लाल कर दिया तो स्तन के निप्पल टाईट हो चुके थे, मेरे जिस्म पर चुम्बन देता हुआ कमर तक पहुंचा फिर मैं बोली ” अब जरा हटो वाशरूम से आती हूं ” फिर मैं अपने बदन पर कुर्ती और लेगिंग्स डाल पर्स लिए निकली, वाशरूम घुसी तो फ्रेश हुई फिर वापस अपने कूप में, ट्रेन की रफ्तार तेज थी तो अभी इलाहाबाद भी नहीं पहुंचे थे और मैं कूप का दरवाजा लगा दी लेकिन फिर राज फ्रेश होने चला गया। मैं अपने बदन पर से कुर्ती और लेगिंग्स उतार दी फिर एक नाईट गाऊन बैग से निकालकर बदन पर डाल ली, वो वापस आया तो मुझे देखता हुआ बोला ” तुम बहुत सेक्सी और हॉट हो
( मैं उसके सामने खड़ी हुई फिर नाईट गाऊन की डोरी खोल दी ) अब कैसी लग रही हूं डियर ” और मैं कपड़े उतारकर बर्थ के किनारे पर बैठी तो मैने जानबूझकर अपने पीठ को बर्थ के दीवार से सटा रखा थी साथ ही जांघें फैलाकर बोली ” अब जरा मेरी वेजिना का स्वाद ले ” तो मेरे गोल गद्देदार चूतड के नीचे वो तकिया डाला फिर मैं थोड़ा आगे खिसकी, अब राज नंगा होकर घुटनो के बल फर्श पर बैठा, मेरे जांघो को सहलाता हुआ मुंह को बुर के सामने किया और उसपर ओंठ सटाए चुम्बन देने लगा लेकिन साला मेरे दोनो जांघो को कसकर पकड़े हुआ था, उसके चुम्बन से मैं तड़प उठी ” ओह राज तुम तो खेले खिलाड़ी लगते हो उह अब जीभ घुसाओ ना ” फिर वो खुद ही उंगलियों की मदद से बुर फैलाया तो पिछले ७ साल की चुदाई से बुर का ढीला होना तय था लेकिन मैं अपने चूत को टाईट रखने के लिए उस पर क्रीम भी लगाती थी लेकिन क्या फर्क पड़ता, अब मेरी बुर में उसका लम्बा सा जीभ घुसा तो मेरे बदन में बिजली की करेंट प्रवाहित होने लगी ” उह ओह तुम और अंदर जीभ घुसाओ नाक को मुहाने से सटाकर कुत्ते की तरह चाटते रहो ” तो वो मेरे बूब्स को पकड़ मसलने लगा और मैं सिसकियां भर रही थी लेकिन राज बुर चट्टा की तरह जीभ को अंदर नचाए जा रहा था, काफी अरसे बाद कोई मिला था जोकि दीपा की दिल और बिल ( चूत ) को जीत चुका था लेकिन अभी तो पटना की दूरी काफी थी तो संभोग सुख पाने में भी समय था ” उई मां अब और नही राज प्लीज जीभ नहीं अब मेरी बुर को चूसो तो
( वो जीभ बुर से निकाला और चेहरा उठाकर मुझे देखा ) डार्लिंग चिंता मत करो, राज पूरी रात तुम्हारे जिस्म पर राज करेगा ” फिर वो उंगलियों की मदद से बुर के मोटे फांकों को सटाया और ओंठो के बीच लेकर चूसने लगा, औरत के जिस्म की सबसे कोमल अंग मर्द के मुंह में हो तो बदन कैसे कामाग्नि में जल उठता है वो कोई औरत ही जानती है और वो मेरी बुर चूसे जा रहा था तो मैं उसके बाल को पकड़े सर को चूत की ओर धंसा रही थी ” अब और नही डियर तुम फिर से जीत गए अब मेरी योनि से रज निवृत होगा, चूसकर मुझे भी मुखमैथुन का मौका दो ” और मेरी चूत रस से गीली हो गई, वो रस पीकर उठा तो साले का लन्ड ६ – ७ इंच लंबा और डेढ़ इंच मोटा लगा, मैं अपने चेहरे के सामने लन्ड देख अपने को रोक नहीं पाई और आगे खिसकते हुए लन्ड को थाम उसको चूमने लगी, मजा क्या ओर्गास्म का चरम था जबकि दोनो ओरल सेक्स में लीन थे और मैं लन्ड के हरेक इंच पर चुम्बन देते हुए मस्त हो रही थी ” अब चूस साली रण्डी, आर्मी वाली की बीबी तो दिल खोलकर चूत चुदाती है
( मैं हंस दी ) हां डियर तुम मुझे रात भर चोदना मैं मना नहीं करूंगी ” फिर मुंह खोल उसके सुपाड़ा को अंदर ली और चूसने लगी तो मैं अपना चेहरा आगे करते हुए राज के लन्ड को अंदर कर रही थी तो वो मेरे सर के पीछे हाथ लगाकर मुंह में पूरा लन्ड पेल दिया, सुपाड़ा गले तक जाकर फंस गई तो मैं अब अपनी असली रूप दिखाना शुरू की। दीपा उसके कमर में हाथ लगाए चेहरा को हिलाते हुए चूसने लगी तो २/३ लन्ड मेरे मुंह में था और मुझे इसके लन्ड को चूसकर विर्यपान करना था, चेहरा को हिलाते हुए मुखमैथुन का आनंद ले रही थी तो राज अपना एक पैर बर्थ पर रखे मेरे बाल सहला रहा था ” उह ओह आह दीदी तुम एक नंबर की चुदक्कड औरत हो अब चूसना छोड़ो तो चोदूं
( मैं लन्ड मुंह से निकाली ) अब इलाहाबाद पहुंचने पर हैं तो चूसकर वीर्य का स्वाद लेने दो फिर मुगलसराय से चुदाई शुरू करना ” और उसके लन्ड पर जीभ फेरते हुए चाटने में लगी हुई थी तो राज का हाल खराब था, अब उसके लन्ड को दुबारा मुंह में लेकर चूसने लगी तो राज मेरे सर के पीछे हाथ लगाया और एक पैर बर्थ पर रख लन्ड का धक्का मुंह में देने लगा, दीपा अंबाला कैंट में तीन चार प्लेबॉय के साथ हमबिस्तर हुई थी तो सेक्स का लंबा अनुभव और कला मुझमें विद्यमान थी और मैं सर का झटका देते हुए लन्ड चूस रही थी और वो भी खड़े खड़े मेरे मुंह को चोदने मे लीन था और तभी ट्रेन रुकी और इलाहाबाद हमलोग पहुंच चुके थे, राज अब मेरी मुंह को चोदता हुआ हांफने लगा ” उह ओह आह बेबी अब झाड़ दूंगा, मुंह में लेना है तो ठीक नही तो चूस चूसकर वीर्य का स्वाद लो ” ये सुनते ही मैं और गति में लन्ड को चूसने लगी और मुझे विर्यपान की आदत सी थी, कुछ देर में ही मेरे मुंह में वीर्य का फव्वारा निकल पड़ा तो मैं बेझिझक विर्येपान कर ली फिर मुंह से लन्ड निकाल उसके सुपाड़ा पर लगे वीर्य को चाट ली, राज अपने कपड़े को जल्दी में पहना तो मैं भी नाईट गाऊन पहन ली, कारण की कोई गेट को नॉक कर रहा था और मैं अपनी मुंह की चिपचिपाहट को दूर करने के लिए पानी पी ली फिर लेट गई लेकिन कूप में तीसरा यात्री, अब तो कबाब में हड्डी लेकिन दोनो संभोग भी किए, अगले भाग का इंतज़ार कीजिए।

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