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चाचा जी का प्यार

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फ्रेंड्स
जिया, उम्र २२ वर्ष तो बदन छरहरा साथ ही लंबाई ५’५ इंच तो दोनों बूब्स मुलायम और शेप में साथ ही ३२-२४-३६ का फिगर लेकिन अफसोस की डेढ़ साल पहले ही अपने कुंवारेपन को तोड़ दी, मेरे कॉलेज के एक बॉय फ्रेंड ने मुझे काम क्रिया करने को मजबूर किया या ये मेरी इच्छा थी तो फिर दर्जनों के साथ अभी तक शारीरिक संबंध बना चुकी हूं लेकिन अब मुफ्त में ये कमसिन जवानी किसी को नहीं देती, मेरे जिस्म अब बिकाऊ हो चुके थे तो कई लड़के पैसे पर मेरे साथ मस्ती कर चूके थे। मेरे चाचा जी गांव में ही रहते हैं और खेती बाड़ी करके जीवन यापन करते हैं तो उनकी उम्र ३२ साल के करीब होगी और उनकी शादी हो चुकी है तो एक बच्चा भी उन्हें है, रमेश चाचा महीने में इलाहाबाद जरूर आते थे तो कभी चाची भी साथ आती थी तो कभी वो अकेले, एक दिन वो हमारे घर आए तो शाम को सबलोग साथ में ही बैठकर चाय की चुस्की ले रहें थे और फिर मैं टॉप्स स्कर्ट पहने उनके सामने कुर्सी पर बैठे चाय पी रही थी, उनकी नजरें बार बार मेरे वक्षस्थल पर जाती तो मैं उनके इशारे को समझ रही थी लेकिन उस वक्त तो पापा, मम्मी, भैया सब लोग वहीं बैठे थे इसलिए मैं चाहकर भी रमेश चाचा से बातें नही कर सकती थी और थोड़ी देर के बाद पापा और भैया ऑफिस जाने की तैयारी करने लगे तो मां किचन चली गई। मैं चाचा के हाथ से कप ले ली फिर किचन में जाकर कप रख दी तो मां बोली ” चाचा को कुछ काम है तो तुम आज कॉलेज की जगह चाचा के साथ ही चली जाना
( मैं पूछी ) लेकिन काम क्या है
( मां बोली ) चाचा से पूछ लो ” मैं किचन से बाहर निकली तो चाचा जी डाइनिंग हॉल में थे और टी वी पर न्यूज देख रहे थे, मैं उनके सामने खड़ी हुई और पूछी ” अंकल आपको क्या क्या काम है
( वो मुझे गंदे नजर से देखते हुए बोले ) हां थोड़ा टाइल्स के दुकान जाना है साथ ही हार्डवेयर दुकान भी
( मैं बोली ) ठीक है तो स्नान करके नाश्ता कीजिए फिर मैं भी आपके साथ चलूंगी ” तो मैं जाकर स्नान की फिर मैं और चाचा जी साथ में ही नाश्ता करने लगे, मैं स्कर्ट और टॉप्स की जगह जींस और टीशर्ट पहन रखी थी तो चाचा की नजरों की भाषा को समझते हुए सोच रही थी की देखूं की वो क्या करते हैं, उनकी ओर से क्या पहल होती है फिर दोनो घर से निकले और एक ऑटोरिक्शा बुक कर इलाहाबाद के लिए निकल पड़े, वैसे भी नैनी से १७-१८ किलोमीटर की दूरी थी तो वहां फिर मार्केट भी जाना था, मुझे भी एक किताब खरीदनी थी सोची की चलो इसी बहाने मेरा भी काम हो जायेगा। ऑटो पर दोनों थोड़ी दूरी बनाए बैठे थे तो थोड़ी देर बाद मुझे एहसास हुआ की चाचा का हाथ सीट के पिछले हिस्से पर है जोकि रह रहकर मेरे कंधे को स्पर्श कर रहा है, उनकी मंशा साफ थी लेकिन खुशी खुशी यदि अपना बदन उन्हे सौप देती तो फिर उन्हें लगता की मैं चरित्रहीन हूं और वो मेरी ओर खिसके तो उनकी जांघ मेरी जांघ से सट रही थी, मैं एक बार उनकी ओर गुस्से भरी नजरों से देखी तो चाचा जी मुझसे दूरी बना लिए और फिर दोनो में बातें भी होने लगी ” जिया तुम किस कॉलेज में पढ़ रही हो
( मैं बोली ) नैनी में कॉलेज है वहीं फिलहाल ग्रेजुएशन कर रही हूं
( वो बोले ) देखते ही देखते तुम जवान हो गई
( मैं उनको दुबारा गुस्से भरी नजरों से देखी ) अंकल आप भी क्या अनाप शनाप बोले जा रहे हैं ” और फिर दोनो चुपचाप बैठे हुए इलाहाबाद जा रहे थे।
रमेश चाचा का रंग सांवला था तो उनका बदन गठीला साथ ही लंबाई ६ फीट के आसपास और मैं सोची की चुप्पी तोडी जाए ” अंकल आप कितने दिन यहां रुकेंगे
( वो मेरी ओर देखते हुए बोले ) दो दिन दरअसल तुम्हारी आंटी अकेले बोरियत महसूस करेगी तो जल्दी ही जाना होगा
( मैं हंस दी ) ओह आंटी से कुछ ज्यादा ही आपको प्यार है तब तो दो दिन अकेले भी रहना आपके लिए मुश्किल है
( अंकल थोड़ा झेंप गए ) ऐसा नहीं है जब तेरी शादी होगी ना तब तुम्हें समझ में आएगा
( मैं मुंहफट होकर बोली ) तो मेरे लिए लड़का देखिएगा तब ना
( वो मेरे जांघ पर एक थप्पड़ मारे ) देख रहा हूं जब ढंग का कोई मिलेगा तब तो ” और फिर दोनो टाइल्स की दुकान जाकर टाइल्स की खरीददारी किए, सामान उसका ट्रांसपोर्ट ही गांव पहुंचा देता और फिर दोनो वहां से निकले तो अंकल पूछे ” चलो कुछ खाया जाए ” और दोनो एक कॉफी शॉप घुसे और आमने सामने की कुर्सी पर बैठकर मसाला डोसा और कॉफी का ऑर्डर किए तो अंकल पूछे ” कॉलेज में पढ़ती हो कोई बॉय फ्रेंड है की नहीं
( मैं मुस्कुराई ) कई दीवाने हैं मेरे लेकिन मैं किसी को करीब फटकने नहीं देती, सबकी नजर कहां होती है मुझे समझ है ” वो कुछ नही बोले फिर मैं मसाला डोसा खाने लगी लेकिन अंकल तो मेरी बूब्स पर नजरें गड़ाए हुए थे और मैं उनके मंशा से वाकिफ थी, कॉफी आते ही मैं पहले तो जाकर वाशबेसिन में हाथ धोई फिर उनके सामने बैठकर कॉफी पीने लगी ” अंकल एक बात पूछूं
( वो बोले ) जरूर
( मैं बोली ) क्या है की सुबह से ही आपकी नजरें मेरे पर कुछ ज्यादा ही टिकी हुई है, क्या बात है
( वो अचंभित हो गए ) जिया तुम्हारा दिमाग तो ठीक है
( मैं हंस दी ) उहुँ दिमाग तो आपने खराब कर ही दिया अंकल बाकी आपका इरादा ठीक नही लग रहा ” वो चुप रहे और दोनो वापस घर लौट गए, दिन में खाना खाकर मैं अपने रूम आराम करने चली गई फिर शाम को चाचा और मैं बरामदे पर बैठकर बातें करने लगे, मां थोड़े देर में वहां आई ” जिया जाकर चाय बनाओ
( मैं उठकर किचन की ओर गई ) ठीक है मॉम ” और शाम भी बातों बातों में गुजर गई।
रात को सारे लोग एक ही साथ खाना खाए फिर मैं अपने रूम चली गई, चाचा की नजरें मेरे पर टिकी हुई थी और मुझे मालूम था की रात को ये मेरे रूम आ सकते हैं, इसलिए सिर्फ दरवाजा को सटाया और उनकी ओर मुस्कुराते हुए देखी तो रूम में आकर मैं अपना ड्रेस बदली, सिर्फ एक नाईटी पहन ली और कमरे की बत्ती बंद कर बिस्तर पर लेट गई लेकिन हाथ में मोबाइल था जिसमें मैं गाना लगाकर सुनने लगी और कान में इयर फोन लगा रखी थी, रात के १०:३० बजे थे तो चाचा जी यकीनन नितिन भैया के रूम में ही सोते और फिर मैं थकावट की वजह से नींद के आगोश में आ गई, लेकिन आगे जो हुआ वो कल्पना से परे था, अगले भाग में।

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