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Widhwa Chudakkad Didi

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हैल्लो दोस्तों,

मुझे मीना दीदी कि चुदाई कि आज बड़ी याद आ रही है, उनकी चूत के रस से अपने लंड को भिगोने का मन कर रहा है इसलिए सोचा कि मीना दीदी की चूत ना सही लेकिन उनकी चुदाई कि कहानी आपके सामने पेश कर दूँ, कहानी पढ़कर आपका भी मन कर जाए मीना दीदी पर चढ़ने का..

मीना दीदी के बारे में तो आप मेरी पिछली कहानियो के ज़रिये जान चुके होंगे, वो मेरी मौसी कि लड़की है जो मुझसे 6 साल बड़ी है और विधवा है, शादी के 2 साल बाद ही पति कि डेथ हो गई थी और पति कि डेथ के बाद 2-3 साल तक उनको शारीरिक सुख नहीं मिल पाया और एक दिन शारीरिक सुख पाने के लिए उन्होंने मेरा सहारा लिया और अपनी चुदाई करवा कर अपनी हवस कि आग को शांत किया.

मीना दीदी सीधी सादी दिखने वाली एक खूबसूरत देसी महिला है, जिनके पास छाती पर कसे हुए रसीले आम कि तरह बोबे है, कटीली कमर, तीखे नयन नक्श, रसीले होंठ और मांसल जांघो के बीच झांटों से गिरी हुई एक कसी हुई लबाबदार चूत जिसको अब मैंने चोद चोद कर एक औरत बना दी है…

अब मैं कहानी पर आता हूँ..

ये बात तब कि है जब मीना दीदी का और मेरा प्यार का सिलसिला शुरू हो चूका था और मैं कई बार मीना दीदी को चोद चूका था.. हम इंतज़ार करते थे कि कब हमें मौका मिले और हम चुदाई का सुख ले सके..

हम व्हाट्सप्प पर सेक्स चैट करते और एक दूसरे को नंगी तस्वीरें भेजते…. मैं उनको सेक्स कि कहानियाँ और सविता भाभी के सेक्स कॉमिक्स भेजता जिससे उनकी चूत कि आग भड़क जाती, फिर हम पूरी तरह से चुदाई के मूड में सेक्स चैट करते और मैं मुठ मारता और मीना दीदी अपनी चूत को सहला कर और उसमे ऊँगली कर के अपनी हवस को शांत करती..

लेकिन ऐसा बहुत कम होता जब मीना दीदी मेरे घर आती रात रुकने, या फिर मैं उनके घर जाता,.. और मीना दीदी पर चढ़ना तभी पॉसिबल हो पाता, जब या तो वो मेरे घर आए या मैं उनके घर जाऊ..

लेकिन रोज तो हम ऐसा नहीं कर सकते थे.. इसलिए इंतज़ार करते, और जब भी मौका मिलता, हम लोग जमकर चुदाई करते..

लेकिन इस बार मीना दीदी को चोदे हुए काफी समय हो गया था… काम में व्यस्तता कि वजह से मीना दीदी से मुलाकात ही नहीं हो पाती थी.. इसलिए मैं उनकी चुदाई बहुत मिस करने लगा, और मीना दीदी भी चुदवाने के लिए तरस गई थी..

फिर एक दिन रात को मैं अपने काम से घर लौटा, और मेरी बाइक घर में चढाने लगा, तभी गाडी कि आवाज सुनकर मेरी मम्मी बाहर आई और मुझसे बोली – गाडी अंदर मत चढ़ा..

मैंने पूछा – क्यों ?

मम्मी – मौसी ने फ़ोन किया था, वो किसी फंक्शन मैं गए है और आज आ नहीं पाएंगे, और उनका लड़का भी साथ गया है…. मीना घर पर अकेली है..

तेरे भाई को बोला, लेकिन वो तो मना कर रहा है,, तो तू वहां चला जा, वहीं सो जाना, और खाना वहीं बनाया है मीना ने, तो वहीं खा लेना..

मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगे.. लेकिन मैं सीधे हाँ भी नहीं बोल सकता था, कही मम्मी को ये ना लगे कि मैं एक ही बार बोलने से मान कैसे गया..

मैंने मुँह बनाते हुए कहा – मैं नहीं जाऊँगा यार, मुझे नींद नहीं आती दूसरी जगह पर..

मम्मी बोले – तू भी मना कर रहा है, तेरा भाई भी मना कर रहा है, तो वो बेचारी अकेली कैसे सोएगी, मैंने मौसी को भी बोला है कि तू चला जाएगा.. तो चला जा ना.. आ जाएगी नींद वहां भी..

मैंने कहा – ठीक है यार, चला जाऊँगा..

और ये बोलकर मैंने बाइक स्टार्ट कि और सीधा मीना दीदी के घर जाकर रोकी..

मीना दीदी के घर का दरवाजा खटखटाया और मीना दीदी ने दरवाजा खोला और मैंने अपनी बाइक अंदर चढ़ा दी..

फिर दीदी से पूछा कि – कहाँ गए आपके घरवाले, तो दीदी ने बताया कि – वो किसी फंक्शन में गए है, उनका वापस आने का भी था लेकिन अँधेरा हो गया इसलिए वो वहीं रुक गए..

मैं – हाँ, मम्मी ने बताया था… उन्होंने भैया को भी बोला यहाँ आने को लेकिन उन्होंने मना कर दिया तो मुझे ही आना पड़ा..

दीदी – अच्छा हुआ उसने मना कर दिया, और फिर स्माइल देने लगी..

मैं पसीने से नहाया हुआ था इसलिए मैंने मीना दीदी से कहा कि मैं पहले नहा लेता हूँ फिर हम बात करते है, मैं घर से कोई शॉर्ट्स नहीं लेके आया हूँ, तो आपके भाई का शॉर्ट्स हो तो लेके आ जाओ..

फिर मैं नहाने चला गया और मीना दीदी अंदर रूम मैं चली गई…

मैं नहा कर निकला और मीना दीदी ने मुझे एक शॉर्ट्स पहनने को दिया लेकिन उसमे मैं जोकर लग रहा था..

मैंने कहा ये नहीं पहनूंगा यार, कोई ढंग का ला कर दो, तो वो बोली कि एक ही मिला है मुझे, दूसरा तो नहीं है.

मैंने कहा – मैं नहीं पहनूंगा ये.. अच्छा नहीं लगा रहा है..

तो वो बोली – पैंट में ही सो जाना..

मैं – यार पैंट मैं सोऊंगा कैसे, नींद नहीं आती है मुझे..

मीना दीदी – जब सोए तब खोल देना, ऐसे ही अंडरवियर में सो जाना..

मैं – अरे, अंडरवियर में कैसे सोऊंगा.. ?

मीना दीदी – वैसे भी तू सोने वाला कहाँ है, न खुद सोएगा ना मुझे सोने देगा, सिर्फ लेटना ही तो है, अंडरवियर भी खोल देना भले ही..

मैं (हँसते हुए) – नहीं यार, आप भी मुझे कंपनी दोगे तो ही ऐसा कर पाउँगा मैं..

मीना दीदी – बाद में देखते हैं, चल पहले खाना खा लेते है.

फिर हम दोनों खाना खाने लगे और खाना खा कर थोड़ी देर छत पर टहलने चले गए..

उनकी छत पर एक लोहे का पलंग लगा हुआ था जिस पर कोई बिस्तर नहीं था, और पलंग भी पुराने ज़माने का था जिस पर लोहे कि पट्टियाँ लगी हुई थी.. हम उस पर बैठ गए और बैठे बैठे बाते करने लगे.. छत कि लाइट हमने ऑफ कि हुई थी इसलिए वहाँ बिलकुल अँधेरा था…

हम इधर उधर कि बातें कर रहे थे, लेकिन मेरा मन तो कर रहा था कि मैं दीदी के बदन से खेलु, लेकिन मैंने कभी भी पहल नहीं कि थी, क्यों कि मीना दीदी मुझसे बड़ी है तो मेरे मन में ये डर भी है कि कहीं वो कुछ बोल ना दे या उनको चीप ना लगे इसलिए मैं इंतज़ार करता कि वो ही पहल करे…

बात करते करते हम सेक्स कि बाते करने लगे…

मीना दीदी – कितना समय हो गया है ना ?? हमें मिले हुए..

मैं – हाँ यार, आजकल आप व्यस्त रहते हो, आते ही नहीं हो घर पर, पहले तो जब भी मन करता आप आ जाते थे..

मीना दीदी – हाँ यार, स्कूल का काम बढ़ गया है, तो तेरे घर आने का टाइम नहीं मिल पाता है..

मैं – इसीलिए आज मैं आ गया हूँ, मौका अच्छा था आज.. और ये तो ऐसा हो गया कि जैसे घरवाले खुद हमको मिलाने मैं लगे हों.. जैसे आपकी मम्मी ने मेरी मम्मी को बोला हो कि मीना घर पर अकेली है तो आशीष को भेज देना मीना कि चुदाई करने के लिए, और मेरी मम्मी ने मुझे बोला हो कि मीना घर पर अकेली है तो तू चला जा मीना को चोदने..

और फिर हम दोनों हसने लगे और मीना दीदी बोली पागल है तू सच मैं, और ये बोलकर उन्होंने मेरा मुँह पकड़ा और मेरे होंठ चूम लिए

मैंने कहा – इस बार आपने इतने दिन कैसे निकाल लिए ? आपका मन नहीं हुआ सेक्स करने का ?

मीना दीदी – छोड़ ना अब ये बात.. अब तो मिल गए हैं ना हम, अब तु पूरी रात नहीं सोएगा, मैं खा जाउंगी तुझे..

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और ये कहकर उन्होंने मेरा मुँह पकड़ा और मेरे होंठ चूसने लगे.. मैं भी उनका साथ देने लगा और उनके होंठ चूमने लगा,.. चूमते चूमते मैंने मेरा हाथ उनके फिगर पर रख दिया और सहलाने लगा..

मीना दीदी ने लाल रंग का कुर्ता और सफ़ेद रंग का पजामा पहना हुआ था.. जिसमे वो एक दम हसीन और खूबसूरत लग रही थी..

अब मैं दोनों हाथों से मीना दीदी के दोनों बोबे दबाने लगा और उनके मुँह में अपनी जीभ डाल दी जिसको मीना दीदी चूसने लगी… हमने बहुत देर तक ऐसा ही किया जिससे हम दोनों ही गर्म हो गए..

फिर मैं मीना दीदी का कुर्ता खोलने लगा, तो वो बोली – यहां नहीं, नीचे चलते है, यहाँ तो इस पलंग कि पत्तियाँ चुभ रही है..

मैंने उनको लिपकिस किया और कहा – ठीक है, चलो..

और फिर हम दोनों नीचे चले गए,.

मीना दीदी ने मैन गेट को अंदर से लॉक किया और फिर बाथरूम में चली गई..

मैं रूम में जाकर पलंग पर बैठ गया और दीदी का इंतज़ार करने लगा..

मीना दीदी आई, तब उनके कपडे बदले हुए थे, अभी उन्होंने पेटीकोट और एक ढीला ढाला टीशर्ट डाला हुआ था..

उनके आते ही मैं उन से चिपकने लगा, लेकिन उन्होंने मुझे रोका और बोली, पहले बिस्तर बिछाने दे, हम पलंग पर नहीं सोएंगे, बाहर हॉल में कूलर चल रहा है वहाँ सोएंगे, यहाँ पर तो बहुत गर्मी लगती है..

फिर वो बाहर हॉल मैं बिस्तर करने लगी,, मैं अंदर पलंग पर ही बैठा बैठा मीना दीदी को देख रहा था..

जब वो बिस्तर बिछाने के लिए झुकी तो उनकी पैंटी का शेप पेटीकोट पर बना हुआ साफ़ दिखाई दे रहा था, जिसको देखकर मेरा मन बाग़ बाग़ हो गया था..

मीना दीदी ने बिस्तर बिछा दिए और हॉल कि लाइट ऑफ करके बिस्तर पर लेट गई और मुझे बोले कि – क्या हुआ ? वहीं बैठा रहेगा या यहाँ आके सोएगा ?

मैंने मेरे कपडे उतार कर वहीं पलंग पर रख दिए और चड्डी मैं ही बाहर हॉल में चला गया..

मीना दीदी सीधी होकर लेटी हुई थी तो में सीधा उनके ऊपर चढ़ गया और उनके होंठो को चूमने लगा..

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मीना दीदी ने अपने होंठ छुड़ाए और बोली – कपडे कहाँ गए तेरे ?

मैंने कहा – अंदर ही रख दिए, पैंट में नहीं सो पाउँगा इसलिए खोल दी, और मैं सोते समय शर्ट तो वैसे ही नहीं पहनता हूँ.. और आपने ही तो कहा था कि ऐसे ही अंडरवियर मैं सो जाना.. तो लो आ गया मैं.. और मैंने फिर से मीना के होंठ पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूमने लगा.. मीना दीदी के नाक से निकली गर्म आंहे मेरे चेहरे को छू रही थी जो मुझे उत्तेजित कर रही थी और मीना दीदी के मुँह का स्वाद तो एक दम लंड कड़क करने वाला था..

मीना दीदी मेरी कमर पर हाथ फेर रही थी और मुझे चूम रही थी.. और फिर मैंने भी उनके गालो पर, माथे पर, नाक पर आँखों पर गले मैं और कंधो पर चूमा और फिर उनके क्लीवेज पर अपनी जीभ से छूने लगा तभी मीना दीदी कसमसाने लगी और मेरे बाल पकड़ लिए और अपनी छाती पर मेरा मुँह दबा लिया..

मैंने मीना दीदी का टीशर्ट खोल दिया और फिर ब्रा भी खोल दी जिससे उनके बोबे आज़ाद हो गए.. आज बहुत दिनों बाद मीना दीदी के नंगे बोबे देखने को मिले तो मैंने दोनों बोबों को हाथों में भर लिया और उनको सहला कर चूमने और चाटने लगा.. जिससे मीना दीदी मदहोश होने लगी और अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ने लगी..

फिर मैंने उनके निप्पल को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.. उनके निप्पल बहुत ही स्वादिष्ट लग रहे थे.. मैं उनके बोबे दबा दबा कर निप्पल को चूस रहा था और उनके बोबे मसल मसल कर लाल कर दिए..

फिर मैंने उनकी नाभि पर चूमा और उसको जीभ से चाटने लगा.. इससे मीना दीदी को गुदगुदी हो रही थी इस लिए वो मुझे रोक रही थी…. तभी मैंने उनके पेटीकोट को जाँघों तक ऊपर चढ़ा दिया और उनकी जाँघों पर हाथ फेरकर उन्हें चूमने लगा…

मीना दीदी अब तक पूरी तरह से गरम हो गई थी और उनकी चूत इतनी गरम हो गई थी कि दूर दूर तक उसकी गर्मी का एहसास होने लग गया था..

जांघें चूमते चूमते मैंने उनका पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया..

मीना दीदी ने भूरे रंग कि पैंटी पहनी हुई थी, और जाँघों के बीच से वो गीली हो रही थी.. क्यों कि उनकी चूत पनिया रही थी..

मैंने उनकी पैंटी पर हाथ रखा और उनकी चूत को सहलाने लगा.. जिससे उनकी चूत का पानी मेरी उंगलियों पर लग गया जो बहुत चिकना था..

अब मैं एक हाथ से उनकी चूत सहला रहा था और एक हाथ से उनके बोबे दबा रहा था… मीना दीदी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और मछली के कैसे तड़प रही थी..

फिर मीना दीदी ने मेरी चड्डी में हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया जो पूरी तरह से कड़क हो रहा था और मीना दीदी का हाथ लगते हो उसमे से पानी कि एक बून्द निकल गई और लंड गीला हो गया..

मीना दीदी ने मेरे लंड को हिलाना शुरू कर दिया और मेरे लंड के सुपाडे पर ऊँगली फेर कर लंड के पानी को लंड पर मल रही थी…

जब उनकी उंगलियां मेरे लंड के पानी से चिकनी हो गई तो उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला और उँगलियाँ उनके मुँह में डाल कर चाटने लगी और फिर अपने होंठों पर उँगलियाँ घुमाने लगी..

उनके होंठ मेरे लंड के पानी से चिकने हो गए, और फिर वो जीभ से होंठ को चाटने लगी..

मीना दीदी को ये सब करते हुए देख मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया और मैंने मेरी चड्डी खोल कर लंड बाहर निकाला और मीना दीदी के होंठो के पास ले गया..

मीना दीदी ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और उसके सुपाडे पर किस्स करके उसको अपने होंठ पर मलने लगी.. मीना दीदी के होंठ मेरे लंड के पानी से चमकने लगे..

फिर उन्होंने मेरे लंड को हिला हिला कर अपने मुँह में ले लिया और उसको चूसने लगी..

वो पूरी तरह कामवासना में लीन हो गई और मेरे लंड को चूस कर जन्नत का मजा दे रही थी..

मैंने मीना दीदी के बाल पकड़ लिए और फिर अपनी गांड हिला हिला कर मीना दीदी के मुँह में लंड को अंदर बाहर करने लगा…

मीना दीदी के मुँह कि चिकनाई और गर्मी ने मेरे लंड को बहुत मजा दिया जिससे मैं उनके मुँह मैं ही झड़ गया… मेरा सारा माल उनके मुँह में ही छूट गया.. मीना दीदी जल्दी से उठी और बाथरूम कि तरफ भागी..

और मैं वही पर निढाल होकर लेट गया…

मेरे लंड से निकला कुछ माल तो मीना दीदी के गले में चला गया और बाकि बचा मीना दीदी ने बाथरूम में थूक दिया और फिर कुल्ला करके वापस हॉल में आ गई..

में लेटा हुआ था तो वो भी मेरे पास आकर लेट गई, और फिर हम बाते करने लगे..

बाते करते करते कुछ ही देर में मैं रिलैक्स हो गया था और उनके जिस्म को सहलाना शुरू कर दिया… और फिर उनके बोबे मसलने लगा..

फिर मीना दीदी ने अपनी पैंटी खोल दी और मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे लंड पर बैठ गई.. और अपनी गांड को मेरी चड्डी पर रगड़ने लगी और कुछ ही देर लगी मेरे लंड को फिर से ताव में आने में..

मीना दीदी ने मेरी चड्डी खोल दी और फिर अपना पेटीकोट भी खोल कर नंगी हो गई.. और मेरा लंड पकड़ कर सीधा किया और उसको अपनी चूत में लेते हुए उस पर बैठ गई..

मेरा लंड सरकता हुआ उनकी चूत में चला गया… मीना दीदी ने गांड को हिला कर अपनी चूत को एडजस्ट किया और मेरा लंड पूरा का पूरा अपनी चूत में ले लिया…

जब मेरा लंड उनकी चूत कि गहराइयों में उतरा, तो उनके मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकल गई.. और वो आँखे बंद करके कुछ सेकंड के लिए रुक गई..

और फिर शुरू हुआ चुदाई का सिलसिला..

वो धीरे धीरे अपनी गांड को हिला कर अपनी चूत चुदवा रही थी, और मैं उनके बोबे मसल रहा था…

दीदी को झांटो वाली चूत बहुत ही मजेदार चूत है.. मुझे उसे चोदने मैं बहुत मजा आ रहा था..

फिर दीदी नीचे उतरी और सीधी होकर पलंग पर लेट गई..

मैंने दीदी के पैर चौड़े किये और उनकी चूत को चूमने और चाटने लगा.. और दीदी भी मेरे साथ साथ अपनी चूत को मसल रही थी..

फिर मैंने उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया और उनके ऊपर लेट गया..

अब मैं उनके ऊपर लेटे लेटे उनकी चूत में लंड को अंदर बाहर कर के उनको चोद रहा था.. मीना दीदी अब तक झड़ चुकी थी…

दीदी तो मानो पागल ही हो रही थी… गांड को हिला हिला कर अपनी चूत चुदवा रही थी…

करीब आधा घंटा उनको चोदने के बाद मैं भी उनकी भोदी मैं भी झड़ गया और मैंने झटके लगाना बंद कर दिया..

मीना दीदी अभी भी अपनी गांड हिला कर मेरे लंड का माल अपनी चूत में ले रही थी… और फिर हम दोनों ऐसे ही सो गए..

मेरा लंड भी सिकुड़ कर उनकी चूत से बाहर आ गया.. और कुछ माल बिस्तर पर भी गिर गया…

थोड़ी देर आराम करने के बाद हमने फिर से चुदाई का कार्यक्रम शुरू कर दिया… बस फिर क्या था.. हम दोनों अकेले थे और अकेले होने का हमने पूरा फायदा उठाया..

मीना दीदी भी एक नंबर कि चुदक्कड़, जिसने शरीर कि गर्मी निकालने के लिए भाई का ही लंड ले लिया, और मैं भी एक नंबर का प्ले बॉय, जिसको सिर्फ चूत लेने से मतलब था चाहे वो बहन कि ही क्यों ना हो..

मैंने पूरी रात मीना दीदी कि चूत मारी और अलग अलग पोजीशन बना कर उनको चौदा… इतने समय से नहीं मिल सके थे इसलिए उस रात पूरी भड़ास निकाल ली.. और सुबह होते होते तो मीना दीदी कि चूत जलने लगी थी और मेरा लंड भी दर्द करने लगा था.. तो हम सो गए..

सुबह करीबन 11 बजे मुझे महसूस हुआ.. मीना दीदी मेरे लंड को हिला रही थी… जिससे मेरी नींद खुल गई..

फिर मीना दीदी ने लंड को किस्स करके उसको मुँह में ले लिया और फिर चूस कर लंड को खड़ा कर दिया..

मैंने उनको झट से नीचे पटक दिया और उनको लिपकिस करने लगा.. और लिपकिस करते करते ही मेरे लंड को उनकी चूत पर सेट करके चूत में पेल दिया…

और जोर जोर से झटके मार मार कर चोदने लगा और पागलो कि तरह उनके होंठ काटने लगा और उनके बोबे पर भी काट लिया.. आज भी मेरे काटने का निशान उनके बोबे पर है…

मीना दीदी समझ नहीं सकी कि अचानक मुझे क्या हो गया..

वो कुछ समझती उससे पहले ही उन पर हमला हो चूका था.. और मैंने उनकी भोदी में ही अपना माल छोड़ दिया…

उसके बाद हम उठ गए.. मुझे जॉब पर जाना था.. आलरेडी में लेट हो चूका था.. तो मैंने अपने कपडे पहने.. मीना दीदी ने भी अपने कपडे पहने.. फिर मैंने मुँह धोया और फ्रेश हुआ तब तक मीना दीदी ने चाय बना दी थी..

मैंने चाय पी ली और मीना दीदी को हग और किस्स किया और फिर वहां से निकल गया…

उस दिन वाली चुदाई मैं आज भी याद करता हूँ तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है…

The End

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