Erotic Stories
Free Desi Indian Hindi Sex stories, Tamil sex stories

Meri Suhagraat…

⏰ 1 min read

कैसे है आप लोग?

मैं पहली बार इस साइट पर कुछ लिखने जा रही हूँ, इससे पहले मैंने कभी कोई कहानी नहीं लिखी है इसलिए मुझे कोई आइडिया नहीं है कि कहानी किस तरह लिखी जाती है.. मैं पूरी कोशिश करुँगी मेरे जीवन कि कहानी को बेहतरीन तरीके से आपके सामने पेश कर सकूँ..

सबसे पहले मैं अपना परिचय देती हूँ..

मेरा नाम मिनाक्षी है और सभी प्यार से मुझे मीना बुलाते है.. मेरी उम्र 35 साल है और मैंने स्नातकोत्तर कि पढाई कर ली है और मेरी शादी भी हो चुकी है और शादी के कुछ ही सालों में मेरे पति कि मौत भी हो गई और मैं विधवा हो कर रह गई..

अब मैं मेरे पीहर मैं अपनी मम्मी के पास रहती हूँ और मेरा छोटा भाई भी हमारे साथ ही रहता है.. 2 छोटी बहनो कि शादी हो गई है और वो उनके ससुराल मैं रहती है..

में कहानी को थोड़ा पीछे ले जाती हूँ… ताकि आपको मेरे बारे में अच्छे से बता सकूँ..

बचपन में मैं पढ़ाकू लड़की थी, पढाई मैं ज्यादा ध्यान रहता था, इसलिए मेरे रिजल्ट भी बहुत अच्छे आते थे.. 10वीं कक्षा मैं थी जब एक लड़का मुझे पसंद करने लगा था.. उसकी बातो से ही मुझे लगता था कि वो मुझसे प्यार करता है, लेकिन मैं इस सब से डरती थी इसलिए मैंने कभी बात को आगे बढ़ाने कि नहीं सोची…

2 साल बीत गए, हम दोनों 12वीं कक्षा में आ गए.. फिर एक दिन उस लड़के ने हिम्मत दिखा कर मुझे प्रोपोज़ कर दिया और मैंने भी ना नाकारा करते हुए लास्ट में हाँ कर दी, क्यों कि मुझे भी वो पसंद था..

हमारा प्यार पुराने ज़माने वाला था जहां प्यार सिर्फ दिल से किया जाता था जिस्म से नहीं.. ना कॉल ना चैट ना सोशल मीडिया, क्यों कि उस समय मोबाइल फ़ोन रखना आम बात नहीं थी.. तो हम सिर्फ स्कूल मैं ही मिलते थे और मौका मिलने पर कुछ प्यार भरी बाते कर लिया करते थे..

फिर एक दिन पता चला कि मेरे दादाजी ने मेरी शादी तय कर दी, और इस वजह से मेरी 12वीं कक्षा भी आधे में छुड़वा दी.. दुःख तो मुझे काफी हुआ था लेकिन उस समय कम उम्र में शादी करवा देना आम बात थी और और शादी से पहले होने वाले पति को देखना भी अपशकुन माना जाता था इसलिए पता भी नहीं था कि वो कैसे दिखते है..

प्यार व्यार सब पीछे छूट गया और में शादी करके अपने ससुराल चली गई.. और यहाँ से मेरी ज़िंदगी का एक नया सफर शुरू हो गया..

17 साल कि थी जब मैं शादी करके ससुराल गई.. कोई आइडिया नहीं था कि वहाँ पर कैसे क्या होगा.. पति का चेहरा भी शादी के मंडप में देख पाई… अब बस रीती रिवाज निभाते हुए आगे बढ़ रही थी..

वहाँ जाकर सारी रस्मे पूरी कि और फिर रात का समय आया.. मेरा खाना मेरे रूम मैं भिजवा दिया.. हम दोनों ने खाना खा लिया और मेरे पति बाहर चले गए…. और कुछ देर बाद वापस आए.. मैं डरी सहमी सी शादी का जोड़ा पहने पलंग पर मुँह झुकाए बैठी थी.. शादी कि थकान कि वजह से नींद आ रही थी लेकिन घरवालों ने सिखाया था कि जब तक पति ना सोये तु भी मत सोना.. तो बस इंतज़ार कर रही थी..

वो आए और मेरे बगल में बैठ गए, मुझे गबराइ हुई देख कर मुझसे बाते करने लगे और मुझे कम्फर्ट देने लगे.. उनसे बाते करके लगा कि वो एक अच्छे इंसान है.. और मेरी झिझक थोड़ी कम हो गई, अब मैं उनसे अच्छे से बात कर रही थी..

बात करते करते उन्होंने मेरे हाथ पर हाथ रखा और सहलाने लग गए.. फिर उनका हाथ मेरी बाजुओं से होते हुए ऊपर कि ओर बढ़ा ओर मेरा मुँह पकड़ कर मेरे होंठो पर एक किस्स कर दिया..

मेरा मुँह शर्म से लाल हो गया… क्यों कि मेरी ज़िंदगी में पहली बार कोई लड़का मेरे इतना करीब आया..

उन्होंने मुझे अपने करीब खींच लिया और मेरे होठो पर अपने होंठ रख कर चूमने लगे.. जिससे मेरी धड़कने बढ़ने लग गई.. मुझे अच्छा लग रहा था या अजीब लग रहा था वो मैं भी नहीं समझ सकी बस कुछ अलग सा एहसास हो रहा था..

उन्होंने मेरी साडी को मेरे सिर ओर कंधो से नीचे गिरा दी ओर फिर मेरी छाती पर अपनी उंगलिया फेरने लगे और साथ ही मेरे चेहरे और गले में चूमने लगे.. अब मुझे अच्छा लग रहा था और मैं भी उनके बालों मैं अपनी उंगलिया फेरने लगी…

उन्होंने एक हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर रख दिया और मेरे बोबे को सहलाने लगे और मेरे गले मैं और छाती पर चूम रहे थे..

अब मैं आपको मेरे शरीर के बारे मैं बताती हूँ

17 साल कि उम्र थी तो मेरे अंग पूरी तरह से नहीं पके थे, शरीर भी पतला दुबला है, फिगर 30-28-32 का रहा होगा, ब्रा पहनना भी हाल ही में शुरू किया था, वो भी जब घर से बाहर निकलती थी, वर्ना घर मैं तो ब्रा भी नहीं पहनती थी.. लम्बे और काले बाल कमर तक आते थे ओर बड़ी बड़ी गोल गोल आँखे, होंठ भी कटिले शेप मैं एक दम भरे हुए थे.. ज्यादातर सलवार सूट ही पहनती थी.. बोबे ज्यादा बड़े तो नहीं थे लेकिन कसे हुए ओर उभरे हुए थे.. चुत भी कमसिन थी, बंद गुलाब कि तरह जिस पर झांट उगी हुई थी जो शादी से पहले ही सहेली के कहने पर शेव कि थी इससे पहले कभी मैंने झांट के बाल नहीं हटाए थे…

अब फिर से कहानी पर आती हूँ…

उन्होंने मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्लाउज खोल दिया.. फिर ब्रा के हुक भी खोल दिए और ब्रा को खोल दिया..

मुझे शर्म आने लग गई.. मैंने पहले किसी लड़के को अपने स्तन नहीं दिखाए थे, तो मैंने अपने हाथ से स्तनों को ढक दिया..

उन्होंने मेरे हाथ हटा कर मेरे स्तन पर अपने हाथ रख दिए.. जैसे ही उनका हाथ मेरे स्तनों पर लगा मेरे शरीर मैं एक मादक सी लहर दौड़ गई और मेरे रोंगटे खड़े हो गए..

उन्होंने मुझे पलंग पर लेटा दिया.. फिर उन्होंने अपनी शर्ट और बनियान खोल दी और मेरे पास लेट गए.. मेरे बूब्स को सहलाने लगे और मेरे होंठों को चूमना शुरू किया…

अब तक तो मैं भी गर्म हो गई थी, और मैं भी उनके होंठों को चूमने लग गई.. मुझे एहसास हुआ कि मेरी पैंटी मैं कुछ गर्म गर्म सा प्रतीत हो रहा था लेकिन मैंने उस और ध्यान नहीं दिया… मेरी चुत से गर्म गर्म पानी बाहर आ रहा था जिससे मेरी पैंटी भीग गई थी इसका पता मुझे बाद में चला था..

काफी समय तक वो मेरे बूब्स को टटोल रहे थे, उनको दबा रहे थे चूम रहे थे… जिससे मुझे दर्द भी हो रहा था लेकिन मैं उन्हें रोक ना सकी क्यों कि वो दर्द मुझे अच्छा लग रहा था..

मेरे पेटीकोट में अटकी साडी उन्होंने पूरी खोल दी और पेटीकोट को ऊपर चढ़ा कर मेरी जाँघों को सहलाने लगे और साथ ही मेरे पेट पर नाभि पर चूम रहे थे.. उनके हाथ धीरे धीरे ऊपर कि तरफ बढ़ रहे थे…

फिर उन्होंने पेटीकोट को पूरा ऊपर कर दिया और मेरी पैंटी को चूमने लगे… और चूमते चूमते पैंटी निकाल दी.. और पेटीकोट भी ऊपर करके पूरा खोल दिया..

Also Read: How I Lost My Virginity To My Aunt

मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी.. मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं किसी मर्द के सामने नंगी पड़ी हूँ. मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा भी दिन आएगा…

This content appeared first on new sex story .com

वो मेरी चुत पर अपनी उंगलिया फेरने लगे… मेरी चुत गीली हुई पड़ी थी.. मुझे उनका स्पर्श अच्छा लग रहा था और मैं तड़प रही थी… पता नहीं ये सब कहाँ जाकर रुकने वाला था..

तभी उन्होंने अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दी और मेरी नज़र उनके लंड पर पड़ी… जिसको देखकर मेरी आँखे फटी कि फटी रह गई…

इतना बड़ा और एक दम तन्नाया हुआ.. पता नहीं वो क्या करने वाले थे..

मैंने ना कभी पोर्न देखी और ना कभी इस बारे मैं कुछ पढ़ा था.. हां सहेलियों से सुना जरूर था सेक्स के बारे मैं लेकिन पता नहीं था कि कैसे होता है.. इसलिए मैं थोड़ी सहमी हुई थी..

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखा और लंड हिलाने को बोला और मैंने वैसा ही किया..

फिर वो मेरे ऊपर लेट गए और मेरे होंठो को चूसने लगे.. उनका लंड मेरी चुत से टकरा रहा था… ओर वो अपनी गांड हिला कर मेरी चुत पर रगड़ रहे थे जिससे मैं काफी उत्तेजित हो रही थी..

फिर उन्होंने अपना लंड अपने हाथ मैं पकड़ा और मेरी चुत के छेद पर टिका दिया.. और एक झटका मारा…

आआअह्ह्ह्ह… मेरे मुँह से जोर कि चीख निकल गई और मैंने उन्हें धक्का दे दिया… वो एक तरफ जा गिरे और मैं रोने लगी….

वो बोले मीना थोड़ा सा दर्द तो सहना पड़ेगा.. आज हमारी सुहागरात है लेकिन मैं रो रही थी और मैंने मना कर दिया मुझे नहीं मनानी है सुहागरात..

उन्होंने बहुत समझाया लेकिन मेरा दर्द इतना था कि मैं मानने को तैयार ही ना थी.. और लास्ट मैं उन्होंने हार मान कर मेरी बात मान ली और वो सो गए.. और मैंने भी कपडे पहन लिए और मैं भी सो गई…

1 हफ्ते तक मैंने उन्हें पास नहीं आने दिया.. वो फर्श पर बिस्तर बिछा कर सोते थे और मैं पलंग पर सोती थी..

1 हफ्ते तक ऐसा ही चलता रहा.. हमारे बीच कुछ नहीं हो रहा था इसलिए मेरे पति थोड़े उखड़े उखड़े से रहने लग गए..

मुझे मेरी गलती पता थी लेकिन डर भी था.. तो मैंने उनके साथ सोना शुरू कर दिया.. वो मेरे साथ सब कुछ करते, मुझे नंगी कर के मेरे शरीर से खेलते थे और फिर बाथरूम जाकर मुठ मार कर अपनी आग शांत करते थे…

कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा लेकिन कहीं ना कहीं कमी रह रही थी जिससे मेरे पति बहुत ही उदास रहने लगे और उनकी उदासी उनके चेहरे से दिखती है..

फिर एक दिन मैं छत पर कपडे सुखाने गई, मेरी ननद पहले से ही छत पर थी और कुछ काम कर रही थी.. मैंने भी कपडे सूखा लिए और दीदी से बात करने लग गई..

दीदी ने पूछा – भाभी, आपके और भैया के बीच लड़ाई हुई है क्या? वो इतने परेशान क्यों रहते है?

मैंने कहा – नहीं दीदी, ऐसा कुछ नहीं हुआ है.. पता नहीं क्यों परेशान रहते है.. मुझसे भी सीधे मुँह बात नहीं करते है..

दीदी – आपके बीच सब सही चल रहा है ना?

मैंने कहा – हां दीदी सब कुछ सही है… ( मैं मन ही मन सोच रही थी कि अब सब को पता चलने लग गया है कि वो परेशान है, बात आगे बढे इससे पहले ही सब ठीक करना होगा )

उसी दिन शाम को वो घर आए और जब सोने का समय हुआ तो उन्होंने मेरे साथ रोमांस करना शुरू किया.. मेरे सारे कपडे उतार दिए और नंगी करके मेरे जिस्म को सहलाने चूमने लगे और कुछ देर बाद उठ कर बाथरूम जाने लगे..

मैंने उनका हाथ पकड़ कर रोक लिया..

उन्होंने पूछा – क्या हुआ?

मैंने कहा – बाथरूम मत जाओ आज..

वो बोले – नहीं जाऊँगा तो सो भी नहीं पाउँगा, जब तक निकलूंगा नहीं.. ( वो समझ रहे थे कि मैं उनको मुठ मारने के लिए भी मना कर रही हु )

मैंने कहा – निकाल लेना, पर बाथरूम मैं नहीं…

वो बोले – बाथरूम मैं नहीं तो फिर कहाँ?

मैंने अपनी चुत कि तरफ इशारा किया और बोली – इसके अंदर..

वो खुश हो गए… और मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होंठ चूमने लग गए.. उनका लंड मेरी चुत पर टकरा कर रगड़ खा रहा था.. मुझे डर भी लगने लगा कि मैं दर्द सह पाऊँगी या नहीं.. मुझे करना ही होगा.. वगैरह वगैरह…

वो अपना लंड पकड़ कर मेरी चुत पर रगड़ने लगे.. मेरी चुत पहले से ही गीली हो रही थी..

उन्होंने धीरे धीरे अपना मोटा लंड मेरी छोटी सी चुत के छेद में डालना शुरू किया.. वो पूरा ध्यान रख रहे थे कि कहीं मुझे दर्द ज्यादा ना हो…

जब उन्होंने देखा कि मैं कम्फर्टेबल हूँ तो उन्होंने एक जोर का झटका मारा और लंड को अंदर धकेल दिया…. मेरे मुँह से दर्द के कारण चींख निकल गई..

वो वहीं रुक गए और लंड को अंदर ही रहने दिया.. और मेरे गालों और गले मैं चूमने लग गए..

थोड़ी देर में मेरा दर्द कम हुआ और उन्होंने लंड को धीरे से बाहर निकाल दिया और चुत पर रगड़ने लगे.. और फिर से एक जोर का झटका मारा और लंड को अंदर पेल दिया.. ये झटका पहले वाले से तेज था इस बार लंड आधे से भी ज्यादा घुस गया और मेरी चुत कि सील को तोड़ दिया जिससे मेरी जान निकल गई और चुत से खून बाहर आने लग गया.. मैंने रोना शुरू कर दिया..

वो कुछ देर मेरे ऊपर ही लेटे रहे और मेरे बदन को सहला कर मुझे पुचकारने लगे… मेरी आँखे आंसुओ से भीग गई थी.. उन्होंने आंसू साफ़ किये और मुझे चूमने लगे.. थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड को हिलाना शुरू कर दिया और चुत मैं धीरे धीरे झटके मारने लगे.. मुझे काफी दर्द हो रहा था लेकिन सहना तो था ही.. इसलिए मैं कराहती रही और दर्द को नज़रअंदाज़ करने कि कोशिश करती रही… थोड़ी देर झटके झेलने के बाद मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी कराह सिसकारियों मैं तब्दील हो गई.. शायद मुझे अच्छा लगने लगा था…

वो लगातार मुझे पेलते रहे और उससे जो दर्द हो रहा था वो मुझे अच्छा लग रहा था.. और थोड़ी देर मैं वो एक दम से रुक गए.. तभी मेरी चुत मैं एक गरम गरम लावा महसूस हुआ जो मेरे पति के लंड से निकला था… और मुझे काफी अच्छा महसूस हुआ..

मेरे पति वहीं बेड पर बेहाल होकर लेट गए.. और मैं भी..

फिर मैं उठी और बाथरूम चली गई.. अपने आप को साफ़ किया… जाँघों पर और चुत पर खून लगा था वो साफ़ किया.. और वापस रूम मैं आ गई.. और कपडे पहन लिए..

मेरे पति भी उठे और वाशरूम चले गए.. और मैंने बेडशीट भी चेंज कर ली..

फिर हम सो गए.. और रात को मेरे पति कि नींद खुली और फिर से हमने सेक्स किया…

इस तरह मैंने मेरी सुहागरात मनाई…..

The End

This story Meri Suhagraat… appeared first on dirtysextales.com