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Meri Jarurate – Part 1

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मेरा नाम तृप्ति है. में ३३ साल की हु। घर मई मेरे पति रघुवीर बेटा राजू रहते है। कहने को तो सुखी परिवार है. लेकिन मुश्किलें तब आयी. जब मेरे पति का बिज़नेस मई घाटा हो रहा था। मुश्किल से घर का गुजरा हो रहा था. ृप् दिन पति ने कहा ” तृप्ति उपर का कमरा हम क्यूना किराये पे दे. आज के तारीख पे इसका ३-४ हजार किराया आ जायेगा। और जो डिपाजिट मिलेगा उस से हम को बिज़नेस के लिए कुछ पैसे मिलेंगे। ” सुनके तो अच्छा लगा। एक तो घर खर्चे के लिए पैसे आजायेंगे ” .

मेरे पति ने कुछ अखबारों में इस्तिहार दे दिया. और कुछ जान पहचान के लोगो को बता दिया। कुछ लोग कमरा देख के गए भी। लेकिन किरायेदार नहीं मिला। एक दिन एक आदमी लगभग ६ ft लम्बा हटा कटा बेल बजता है. में दरवाजा खोलती हु. आदमी ” जी आपकी advt देखि ती अख़बार में। रूम के लिए….। ” में ” आप कमरा देख लीजिये फिर किराया और बाकि बाते मेरे पति से श्याम को करो ” . उस बन्दे ने सफ़ेद शर्ट और सफ़ेद कलर की पेंट पहनीथी। उसमे से उसके muscle दिख रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बॉडी बिल्डर हो. रूम देख ने के बाद बोला ” रूम तो बोहोत गन्दा है भाभी जी ” . में बोली हा, लेकिन साफ़ हो जायेगा ” . वो आदमी बोला ” मेरा नाम अब्दुल करीम है। में वापस ७ बजे आता हु ” . मेने सर हिलके हा बोला। पति आने के बाद मेने उनको सब बात बताई। करीब ७.३० के करीब वो आदमी आया। दरवाजा राजू ने खोला उसने मुझे अदब किया मेने भी जवाब में आदाब किया। फिर मेरे पति से हाथ मिलाया। बोला ” मेरा नाम अब्दुल है। में रामपुर का हु। में यहाँ बिज़नेस के सिलसिले में आया हु। मेरे घर में माँ, भाई और बड़ी बहन रहती है। मेने कहा ” आपकी शादी……. ” . शादी हुई थी लेकिन कूच वजह से तलाक हुआ है। मेने ” वो…… ” . पति ” ठीक है आपको कमरा पसंद आया ” . अब्दुल ” हा जी ” . ” सर सफाई ” . मेरे तरफ आंखे घुमा ली। में घूँघट सवारते हुए ” कोई बात नहीं आपके आने से पेहले कमरा साफ़ होगा ” . ” शुक्रिया, भाभीजी ” . अब्दुल. पति ” अब्दुल जी कब चाहिए कमरा ” . जी ” एक तारीख को ” . पिताजी ” किराया रहेगा ४००० और डिपाजिट १०००० ” . अब्दुल ” किराया कूच काम कर दे तो ” . पति सोचके ” ठीक है ३५००, अब और काम नहीं ” . अब्दुल ” ठीक है ” .

में ” कूच चाय पानी ” . अब्दुल ” शुक्रिया, अभी नहीं ” .

अब्दुल उठ के दरवाजे की और जाता है।

में उसके साथ चलती हु। पीचे पति फ़ोन पे बात कर रहे थे।

अचानक मेरा पल्लू सर से सरकता है अचानक कंधे से भी सरकता है।

अब्दुल अपनी ऐनक से मेरा बदन घूरता है।

ज्यादातर मेरे चूचियो को घूरता है. में उससे आंखे झुकाके दरवाजे तक जाती हु। अब्दुल जाते समय मुज़हे देख ते हुए ” भाभीजी परसो आता हु पेशगी लेके ” . में ” ठीक है ” .

दो दिन के बाद श्याम को ८ बजे अब्दुल बेल बजता है. में दरवाजा खोलती हु

उस समय पल्लू कंधे पे होता है। अब्दुल की नज़र मेरे बदन पे जाती है ” . में झट से पल्लू सर पे लेती हु। अब्दुल ” अदब ” ” . में भी उसे ” अदब करती हु।

दो दिन बाद अब्दुल ब्लैक कलर का शर्ट और पेंट पहन के करीब ८ बजे आता है। बिलकुल फिल्मी हीरो की तरह दिख रहा था। उसकी उम्र होगी ४०-४५ की होगी. आते ही मेरे पति उसको हात मिलाके बिठा ते है। राजू मेरा ८ साल का बेटा आ के अब्दुल को बोलता है ” हेलो चाचा ” , अब्दुल मुस्कुराके ” कैसे हो बेटा ” , फिर जेब मई से चॉकलेट निकल के देता है।

रघुवीर ” कैसे है अब्दुल जी ” . अब्दुल ” मई बढ़िया हु ” .

रघुवीर ” बोलिये ” .

अब्दुल जेब में से ३५०० निकलता है और बोलता है ” ये लीजिये पेशगी ” .

रघुवीर ” धन्यवाद, अब्दुलजी ” .

में चाय लेके आती हु। में चाय अब्दुल और पति को देती हु।

रघुवीर ” आज १९ तारीख है ३० तारीख को चाबी लेने।

अब्दुल ” जी बेहतर ” .

रघुवीर ” कूच बाते में बताऊ मास, मच्छी, शराब या अन्य कोई चीज़े आप बहार से खा के या पीके आसकते है पर यहाँ नहीं पका सकते. क्यों की मेरी पत्नी को अच्छी नहीं लगती। और हम लोग शाकाहारी है। ” अब्दुल थोड़ा घुसेल आवाज में ” पका नहीं सकता लेकिन बहार से ला सक्तु हु ना ” . में ” जी है ” . अब्दुल थोड़ा सोच के ” ठीक है ”

अब्दुल चाय का कप देते हुए ” शुक्रिया ” .

अब्दुल थोड़ा गुसे में था। पति ” बाकि आपको कोई भी परेशानी हो तो बता दीजिये, कोई मेहमान आते है तो और जगह न हो तो हमारे घर रुक सकते है ” . अब्दुल सर हिलाते हुए ” जी ” . अब्दुल बोलता है ” मुझे आप २८ को चाबी डोगे तो मेहरबानी होगी, क्यों की २९ और ३० को मेरी मीटिंग है ” . पति मान जाते है। में अंदर से चाबी लेक अब्दुल को देते हुए ” आप कभी भी आसकते हो ” . अब्दुल चाबी लेके मुस्कराके ” थैंक यू भाभी ” . अब्दुल ” चलो भाई साहब अब इजाजत दीजिये ” .

अब्दुल पति को नमस्कार करता है। उतने में उनको फ़ोन आता है. अब्दुल मेरे पास आके ” खुदा हफ़ीज़ भाभीजी ” . में भी उसको ” खुदा हफ़ीज़ बोलती हु ” .

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अचानक से मेरे चुत में खुजली होती है। मन ही मन में अब्दुल की पर्सनालिटी आकर्षित करती है। रात को अपने पति के पास जाके सीने सर रख के सोते हुए। जी आज बड़ा मन हो रहा है। पति ” किस चीज़ का ” . लंड पे हाथ रख के ” चुदने का ” . पायजामा से उनका लंड निकल के हिलना सुरु कर देती हु। हम दो नो पैशनेट होके किस करना सुरु करते है। उनका लंड पूरा तन जाता है। और अचानक पानी छोड़ देता है। मुज़हे इतना गुसा आता है। की पति को मारनी की इच्छा हो रही थी। पति ” क्या करू छूट ही जाता है। कल वापस करते है ” . में ” कल कल सुन के में पक गयी, अपना इलाज क्यों नहीं करते ” . उठ के में किचन में जाती हु। एक लम्बा खीरा दीखता है उसे लेके चुस्ती हु जैसे कोई लंड हो। अच्छे से हाथ घूमती हु। फिर उपर करके चड्डी निकलती हु और खीरा अंदर बहार करती हु। जोर जोर से आहे भरना सुरु करती हु ” वो fuck, fuck me hard baby ” . ” चोद मेरे राजा और जोर से चोद ” . मेरी आवाजे सुनके पति किचन में आते है ” ये क्या कर रही हो ” . में हस्ते हुए ” दिख नहीं रहा खीरे से चुद रही हु, चुप चाप मज़ा लो ” . फिर आगे मूड के पीछे से चुत देखते हुए ” देखो पति देव ये लंड है किसी और का ये मेरी चुत है देखो कैसे चोदहता है ” . जोर जोर से खीरा अंदर बाहर करके पति को चिड़ा रही थी। पति मेरो तो रांड बोलके चले जाते है।

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अलग अलग पोजीशन में खीरे के साथ संतुष्ट होके पति के पास आके सो जाती हु.

२८ तारीख को सबेरे ८ बजे बेल बजती है। अब्दुल सामने आ के ” भाभी जी मेने सामान लाया है ” . में ” ठीक है ” . में और मेरे पति दोनो अब्दुल की मदत करते है सामान उतार ने में। १० बजे पति ऑफिस चले जाते है। में घर के काम निपटाके अब्दुल के कमरे की तरफ जाती हु। अब्दुल अभी भी सामान लगा रहा था। मेने अब्दुल को चाय दी। अब्दुल मुस्कुराके ” शुक्रिया ” .

शाम को अब्दुल घर आता है। पति उसको पूछते है ” लग गया सामान ” . अब्दुल ” हां जी बही साहब ” . कूच बाते करके चला जाता है। रात को करीब १० बजे अब्दुल छत पे खड़ा था। मुझे अजीब लगा। में उसके पास गयी तो वो सिगरेट पि रहा था। मुझे देख के चौक गया। बोला ” वो भाभी जी…….. ” . में सिगरेट तो पि सकता हु ना ” . में मुस्कुराके जी ” है ” . अब्दुल ” आप सोइ नहीं ” . मुझे रात को नींद नहीं आती जल्दी ” .

अब्दुल ” वो ” . और भाई साहब ” .

में ” वो तो घोड़े बेच के कब के सो गए ” .

मेरा चेहरा देख के अब्दुल शांत होता है पति देव ये लंड है किसी और का ये मेरी चुत है देखो कैसे चोदहता है ” . जोर जोर से खीरा अंदर बाहर करके पति को चिड़ा रही थी। पति मेरो तो रांड बोलके चले जाते है।

अलग अलग पोजीशन में खीरे के साथ संतुष्ट होके पति के पास आके सो जाती हु.

२८ तारीख को सबेरे ८ बजे बेल बजती है। अब्दुल सामने आ के ” भाभी जी मेने सामान लाया है ” . में ” ठीक है ” . में और मेरे पति दोनो अब्दुल की मदत करते है सामान उतार ने में। १० बजे पति ऑफिस चले जाते है। में घर के काम निपटाके अब्दुल के कमरे की तरफ जाती हु। अब्दुल अभी भी सामान लगा रहा था। मेने अब्दुल को चाय दी। अब्दुल मुस्कुराके ” शुक्रिया ” .

शाम को अब्दुल घर आता है। पति उसको पूछते है ” लग गया सामान ” . अब्दुल ” हां जी बही साहब ” . कूच बाते करके चला जाता है। रात को करीब १० बजे अब्दुल छत पे खड़ा था। मुझे अजीब लगा। में उसके पास गयी तो वो सिगरेट पि रहा था। मुझे देख के चौक गया। बोला ” वो भाभी जी…….. ” . में सिगरेट तो पि सकता हु ना ” . में मुस्कुराके जी ” है ” . अब्दुल ” आप सोइ नहीं ” . मुझे रात को नींद नहीं आती जल्दी ” .

अब्दुल ” वो ” . और भाई साहब ” .

में ” वो तो घोड़े बेच के कब के सो गए ” .

मेरा चेहरा देख के अब्दुल शांत होता है

में ” आप बताओ, क्यों हुआ आप का तलाक़? ”

अब्दुल कश लेते हुए ” अरे, क्या बताऊ भाभी, यू समजलो की वो मेरे लिए थी ही नहीं ” .

में ” अपनी कहानी कुछ एक जैसी है ”

अबुल ” हम्म्म ” .

अब्दुल अपनी सिगेरट मेरो को देते हुए ” लो भाभी एक कश मारलो अच्छी नींद आएगी ” .

में ” मुझे आदत नहीं है ” .

अब्दुल ” एक कश लेके तो देखो ”

में ” नहीं बाबा ” .

फिर सिगेरट हाथ में लेके कूच होगा तो नहीं। अब्दुल ” कूच नहीं ” . में सिगेरट का कश लिया। धुआँ अंदर तक लिया। थोड़ा खासी आया लेकिन रिलैक्स लगा. मेने २-३ कश लगाए। फिर सोने चली गयी.

दूसरे दीन नास्ता देने अब्दुल के रूम की तरफ जाने लगी। पल्लू सर पे लेके दरवाजा खटा ती हुए. में ” भाई साहब ” . ”

अब्दुल नींद में ” अंदर आओ ” .

अब्दुल सिर्फ फ्रेंचीा में सोया था।

उसका गठीला बदन। देख के मन में हलचल होने लगी। अब्दुल सोते वक्त सीधा होता है। उसका लंड देख के मन हिल रहा था। मेरा हाथ धीरे धीरे बूब्स से निचे चुत की तरफ आता है। साडी के उप्पर से चुत सहलाते हुए में खड़ी थी। अब्दुल की नींद अचानक् से खुलती है ” अब्दुल ” भाभी आप ” , में आंखे जुकाते हुए। अब्दुल साइड में पड़ा हुआ टॉवल लपेट ते हुए ” माफ़ करना वो अकेले में सोते समय……… ”

में ” कोई बात नहीं, नास्ता रखा है कर लीजिये ” . में नीचे आके घर का काम काज पूरा किया ” .

रात में खाना खाने के बाद में सोने जा रही थी तब देखा की अब्दुल की बाथरूम की और कूच हिल रहा है। में तुरंत पानी के टंकी से अब्दुल के कमरे की तरफ गयी. टॉयलेट का लाइट जल रही थी। मेने देखा की टॉयलेट की खिड़की ओपन थी। झाके देखा तो आंखे फटी रह गयी। अब्दुल अपना ११ इंच का लंड हिलाते हुए दिखा. लंड पूरा तना हुआ। आगे से कट्टा हुआ बोहोत सुन्दर दिख रहा था। अब्दुल जोर जोर से हिलाके मुठ मर रहा था। करीब २० मिनट बाद उसने पानी छोड़ा.

में वह से निकल के सोने चली गयी। दूसरे दिन पति जल्दी ( ८ बजे ) ऑफिस चले गए। राजू को ८.१५ का स्कूल बस में छोड़ ने गयी. फिर घर आ के नहाया. फिर एक शरारत आयी. में ब्लाऊज़ और पेटीकोट पहन के छत पे आयी तुलसी को पानी देने। उसके ठीक ऊपर अब्दुल के रूम की खिड़की थी अब्दुल अंडरवियर में खड़े होक मुझे ताड़ रहा था में तुलसी को पानी देकर अंदर चली गयी।

घर आते ही कुछ अजीब लगा में अपने आप को कोसने लगी.

कहानी का अगला पार्ट पढ़ना मत भूलना…

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