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Jawani Ko Loota – Part 1

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ये कहाणी मेरे सच्ची घटना पर आधारित है.. कुछ आठ महिने पहले कि यह कहाणी है

हमारे घर मे कुल चार लोक है, मै, मेरी दीदी और हमारे मम्मी पापा.. हमारा गाव मे और इंदोर मे घर है.. मेरे मम्मी और पापा तो गाव मे रहते है अक्सर हि कभी कभार उनका इंदोर मे आणा जाणा होता था. मै और मेरी दीदी इंदोर मे पढाई के लिये रहते है.. मेरी दीदी का नाम पूजा है और उनकी कि उमर 23 साल है और वो दिखने मे किसी अप्सरा से कम् नही है.. उनके चुछे और मम्मे किसी ने देख लिये तो वो तो मन हि मन मे चोद् ने कि इच्छा रखता है…

जैसे कि मैने आपसे बताया हम मतलब दीदी और मे पढाई के लिये इंदोर रहते है. हमारा घर ऐसे इलाके मे आखरी था जहाँ से झोपडपट्टी का इलाका चालू होता. घर और झोपडपट्टी के बीच मे थोडी जगह थी जहाँ लोग पेशाब् करणे आते रहते थे पर जब दीदी और मै इंदोर आये तो लोग वहा कम हि आणे लगे कुछ लोगो को मालूम था कुछ को नही कि हम रहणे के लिये आये है.. घर आखिर मे होणे के कारण से मेरे दीदी कि रूम कि खिडकी ऊस खुली जगाह् कि और ओपन होती थी और घर मे पीछे से दाखिल् होणे का दरवाजा भी वही था..

एक दिन कि बात है एक बुडा आदमी जिसकी उमर कुछ 65 साल कि होगी वो पेशब् करणे के लिये ऊस खाली जगाह् पे आया उसने पॅन्ट का झिप नीचे किया और अपना लंड बाहर निकाला उसके सोये हुये लन्ड का साईझ 8 इंच था काला नाग जैसा.. जब वो आदमी पेशाब् कर रहा था तो दीदी खिडकी मे हि खडी थी तो ऊस आदमी के लन्ड कि और देखे जा रही थी मै तभी दीदी के कमरे मै बैठा था मुझे समज मे नहि आया कि वो क्या देख रही है.. मै तुरंत बाहर आया और देखा तो वो आदमी पेशाब् कर रहा था.. उसका पेशाब् होणे के बावजूद वो लंड हिला रहा था शायद उसको मालूम था कि दीदी उपर से खिडकी से देख रही थी.. जैसे मैने उसे देखा तो वो चला गया.. पर मुझे मालूम हो गया था वो आसानि से पिछा नही छोदेगा..

दुसरे दिन कि बात है.. मै दुकान मे कुछ सामान्.. न लाने के लिये गया तो वो आदमी चौक मे बैठा हुआ था तो मैने दुकानदार से ऊस आदमी के बारमे पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम् नदीम है और एक नंबर का नशेडी और् बेकार इन्सान है… इलाके के कुछ लड़को से ऐसा भी मालूम हुआ अगर नदीम ने एक बार ठाम लिया कि किसी लडकी कि चुदाई करणी है तो वो चुदाई कर के हि छोड देता है..

तिसरे दिन मै और दीदी एक कामवाली बाई कि तलाश मे घर से बाहर झोपडपट्टी आये दोपहर का समय था एक ला दो लोग हि दिखाई दिये जैसे जैसे हम आगे गये वैसे हि हमे एक झोपडी का दरवाजा बंद दिखा तो हमने आवाज लगाइ तो एक आदमी ने दरवाजा खोला.. दरवाजा खुलते हि मै शॉक हो गया वो तो नदीम कि झोपडपट्टी थी..

नदीम : धन्यभाग् हमारे जो आप हमारे घर पधारे

मै : जि हम यहा एक कामवाली बाई तलाश कर रहे थे
नदीम : आओ अंदर आ के बैठ जाओ बाई का पता तो मै देता हू

दीदी : जि नही हमे आप बता दे डिजिये हम जाकर मिल लेंगे

नदीम : जबतक आप अंदर नही आते मै नही बता सकता

मै : दीदी चलो वैसे भी हमे बोहोत देर हुई है बाई तलाश करते करते अंदर बैठ ते है और चले जाते है

दीदी ने हा कर दि और हम झोपडपट्टी मे अंदर गये.. वैसे हि नदीम ने एक हाथ दीदी के कँधे पर रखा और दीदी कि बूब्स जोर से दबा दिये मै पीछे था तो मुझे मालूम हो गया फिर भी मैने दीदी से पूछा क्या हुआ तो दीदी बोली मछ्छ्हर् ने काट लिया.. बोहोत बेकार सी जगह थी नदीम तो टॉवेल पे था उसने एक खटिया दाली तो हम ऊसपे बैठ गये और नदीम एक लकडी के स्टूल पे बैठ गया। मैने पूछा जि अब पत्ता दे डीजीए तो नदीम ने पत्ता दे दिया और बोला कि उसके घर जाओ थोडी दुरी पर है तब तक मै ‘ तेरी दीदी को दुसरे बाई का पता देता हूँ। मै ने हा भर दियि और जैसे हि मे बाहर जा ने के लिये निकाला दीदी कुछ केह पाती नदीम बोला..

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आते वक्त नुक्कद् कि दुकान से थंडा और दूध ले आणा और जल्दी आ जाणा..

मुझे मालूम था क्या होणे वाला है.. मै बाहर जाकार झोपडपट्टी के पीछे वाले हिस्से मे आ गया और छेद मे से देखणे लगा…

नदीम अब स्टूल पर से उठ कर दीदी कि बाजू मे बैठ गया… नदीम ने एक हात दीदी कि थाई ( Jangh ) पर् रख दिया.. वैसे हि दीदी खडी हो गयी.. और बोली क्या कर रहे हे आप… वैसे हि नदीम ने दीदी का एक हात पकड़ा और उसके गोद मे जकड़ लिया.. दीदी zatpatane लगी और केहने लगी मुझे छोड do दीदी कि gand नदीम के लंड पर थी और दीदी ये साफ महसूस कर रही थी..

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नदीम : साली कुतिया रोज तो मेरा लंड देखती है फिर भी तडप रही है.. ये तड़प आज मीटा के रहुंगा… ‘ तेरी चुत अच्छे से pelunga

दीदी : ऐसा मत करो.. मै काहि मुह दिखाने लायक नही रहुंगी

नदीम दीदी को दबाये जा रहा था.. और एक हाथ दीदी कि थाई Jangh बूब्स दबा रहा था.. और कभी सलवार तो कभी कमिज् मे हाथ घुसने कि कोशिश कर रहा था.. दीदी चिल्ला रहि थी.. तो नदीम ने एक हाथ से दीदी का मुह बंद कर दिया और दुसरे हाथ से दीदी के सलवार का नाडा खोल दिय.. जिससे दीदी का पॅन्ट नीचे आ गया अब दीदी सिर्फ पॅंटी मे नदीम के लंड के उपर थी..

नदीम ने एक हात दीदी के पॅंटी मे डाल दिया और दीदी कि चुत और चुत के बाल रगड कर खुशबू लेणे लगा..

अब दीदी नदीम के चांगुल से अचानक छुट गई और अपना पैजमा पेहेन् लिया.. और बोली प्लिज अभि मुझ पर रेहेम् किजीये मेरा भाई आ जायेगा जो चाहिये वो किसी और वक्त ले लिजिए…

नदीम बोला साली रंडी कहिकि आज तुझे छोड रहा हू पर कल तेरे घर मे तेरे साथ सुहागरात मनानी है तो दोपहर को 1 बजे से लेकरं 5 बजे तक कही मत जाणा और तेरे भाई को बाहर भेज देना

नदीम : चल आ अब बैठ मेरे बाजू मे

दीदी : ठीक है

दीदी नदीम के बाजू मे जाकर बैठ जाती है.. नदीम कभी दीदी के गाल पर किस करता है.. तो कभी गर्दन चाटता है.. दीदी के ओठ पर काट देता है और दीदी का हात उठाकर अपने लंड पर रखता है और दीदी को सहलाने को बोलता है.. जैसे नदीम बोलता है वैसे हि दीदी करती है..

मुझे लगा मेरी एन्ट्री का समय आ गया है..

मै झोपडपट्टी के पीछे से गया और आगे वाले हिस्से म् आ गया और आवाज लगाइ

तो नदीम ने दरवाजा खोला और दीदी बाहर आ गई

मै : नदीम अंकल वो कामं वाली बाई तो नही मिली

नदीम : बेटा कल ढुंढ लेना वो शायद कल मिल भी जाये

मै : चलो दीदी घर पे चलते है..

मै नदीम से : अंकल आईये घर पे कभी चाई पिते है

नदीम : जरूर अब तो रोज आणा जाणं चालू रहेगा.. है ना पूजा

दीदी : जि.. फुरसत से आईये कल

मै : दीदी अरे कल से तो मेरा क्रिकेट टूर्नामेंट है.. तो मै दिनभर से बाहर हू

नदीम : कोई बात नही बेटा पूजा से अच्छी मुलाखत हो जायेगी वो जिंदगीभर् याद रखेगि..

दीदी : जि

और हम वापस घर चले आये..

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