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Haaye Garmi

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हैल्लो

मैं हूँ आपकी मिनाक्षी, आपको मेरी ज़िन्दगी कि एक वास्तविक कहानी बताने जा रही हूँ, मेरी पिछली कहानियों को आपका बहुत प्यार मिला, बहुत लोगों ने मेरी कहानी पढ़ी है, आशा करती हूँ कि इसे भी आप पढ़ें और अपना फीडबैक दें कि आपको ये कहानी कैसी लगी…

मैं जहाँ जॉब करती हूँ वहां पर मेरी छोटी बहन भी जॉब करती है, बहन का ससुराल हमारे ऑफिस से कुछ ही दुरी पर है, तो वो वहीँ से ऑफिस जाती है..

मेरे घर से मेरा ऑफिस 25 किलोमीटर दूर है और मैं रोज़ाना बस से आती जाती हूँ…

एक दिन कि बात है…

मेरी ऑफिस से छुट्टी हो गई थी, तो मैं जाने के लिए रवाना होने लगी..

मेरी बहन के डिपार्टमेंट कि ऑफिस मीटिंग थी तो उसने मुझसे कहा – मीना दीदी प्लीज आप मेरे घर चले जाओ ना, मुझे मीटिंग में टाइम लग जाएगा और मैं घर पर खाना भी नहीं बना कर आई हूँ..

मेरे हस्बैंड घर आ गए होंगे, तो आप प्लीज उनके लिए खाना बना लेना..

मैंने कहा – चल ठीक है, तु फ़िक्र मत कर, में बना लुंगी खाना, तु जल्दी आ जाना..

वो बोली – ठीक है, मैं 2 घंटे के अंदर अंदर आ जाउंगी..

फिर मैं उसके घर चली गई..

दरवाजा खटखटाया तो उसके पति ने दरवाजा खोला..

वो बोले – अरे दीदी आप? आपकी बहन नहीं आई?

मैंने कहा – आज वो मीटिंग मैं है तो उसको टाइम लग जाएगा, तो उसने कहा है कि आपके लिए खाना बना दूँ..

वो बोले – अरे दीदी, आप क्यों परेशान हो रहे हो, मैं बाजार से कुछ नाश्ता मंगवा लूंगा ओर खा लूंगा,..

मैंने कहा – कोई बात नहीं, बना दूंगी मैं, वैसे भी 4-5 रोटी बनाने मैं टाइम ही क्या लगता है..

फिर मैं वाशरूम चली गई और हाथ मुँह धो कर वापस आई, और फिर खाना बनाने किचन में चली गई.. और वो टीवी देखने लग गए..

कुछ ही देर मैं रोटी बनाकर बाहर आ गई और कुर्सी पर बैठ गई..

उस समय वहां लाइट चली गई थी और मौसम भी गर्मी का था, मैं रोटी बनाकर आई थी इसलिए मुझे बहुत पसीना हो रहा था..

जीजाजी बोले – क्या हुआ दीदी? गर्मी लग रही है?

मैंने कहा – हाँ, लाइट भी बंद है..

वो बोले – हाँ दीदी, यहाँ गाँव मैं तो यही हाल है, लाइट का आना जाना दिन भर लगा रहता है.. आप यहाँ पलंग पर आकर बैठ जाओ, पास मैं खिड़की से हवा आती रहेगी..

मैं भी उठी और पलंग पर बैठ गई..

मुझे बहुत गर्मी लग रही थी, तो मैंने साड़ी का पल्लू निकाल कर उससे हवा करने लग गई..

पल्लू के हटते ही मेरा क्लीवेज दिखने लग गया और जीजाजी कि नज़र मेरे क्लीवेज पर पड़ गई..

मैंने मेरे क्लीवेज मैं ऊँगली डाली और ब्लाउज को खींच कर क्लीवेज पर फूँक मारने लग गई..

जीजाजी मुझे देख कर थोड़ा शर्माने लगे और फिर मुझसे मजाक करते हुए बोले – दीदी ज्यादा गर्मी लग रही है तो खोल ही दो ना ब्लाउज..

मैंने मुस्कुराते हुए ब्लाउज के 2 हुक खोल दिए.. जिससे मेरा क्लीवेज थोड़ा ज्यादा दिखने लगा.. फिर मैं रुक गई और बोली – ऐसे कैसे खोल दूँ?

फिर मेरी नज़र जीजाजी के पैंट पर पड़ी, उनका लंड धीरे धीरे करवट बदल रहा था मेरे क्लीवेज को देखके..

जीजाजी बोले – हाँ सही है दीदी, हिम्मत चाहिए ऐसा करने के लिए..

मैं मन ही मन सोचने लगी – हिम्मत कि बात तो ना ही करो तो अच्छा, हिम्मत करके मासी के लड़के से चुदवा लिया, हिम्मत करके अपने ससुर से चुदवा लिया, कुछ तो बात होगी मीना मैं..

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फिर मैंने कहा – हिम्मत तो बहुत है जीजाजी..

जीजाजी – नहीं है आपमें हिम्मत..

मैंने कहा – ठीक है, नहीं है हिम्मत, अब खुश?

मैं फिर से क्लीवेज पर फूँक मारने लग गई..

जीजाजी बोले – अरे दीदी, क्यों परेशान हो रहे हो? खोल दो ना गर्मी लग रही है तो..

मुझे लगा कि वो मजाक कर रहे है.. तो मैंने भी उनसे मजाक मैं कहा – सच में खोल दूँ?

वो बोले – हाँ, गर्मी लग रही है तो खोल सकते हो..

मैंने एक-एक करके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए, और मेरे बोबे ब्लाउज से बाहर आ गए जो ब्रा के अंदर कैद थे..

मुझे ब्रा मैं देखकर जीजाजी हैरान हो गए, उन्हें लगा था कि मैं मजाक कर रही हूँ, लेकिन……

मैंने अपनी साड़ी पूरी निकाल दी, और एक अख़बार लेकर मेरे बूब्स पर और पेट पर हवा करने लग गई..

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जीजाजी मुझे आँखे फाड़ फाड़ कर देखने लग गए..

फिर बोले – अभी भी गर्मी लग रही है क्या मीना दीदी?

मैंने कहा – हाँ..

फिर उन्होंने मेरी ब्रा कि तरफ देखा और फिर चुप हो गए…

मैं समझ गई के अब वो मजाक के मूड मैं बिलकुल नहीं है, और मैं भी मजाक के मूड मैं नहीं..

मैंने मेरा ब्लाउज पूरा निकाल दिया और ब्रा को ऊपर कर के अपने बोबे ब्रा से बाहर निकाल कर उन पर हवा करने लगी…

जीजाजी से रहा नहीं गया…

और उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया और बोले – मीना दीदी, आप सच में बहुत गर्म हो इसलिए आपको ज्यादा गर्मी लग रही है.,

और ये बोलकर वो मेरी जांघ को सहलाने लगे…..

उनका हाथ धीरे धीरे ऊपर कि ओर बढ़ रहा था और मेरी साँसे भी तेज होने लग गई…

उनका हाथ मेरी दोनों जाँघों के बीच आ गया और मेरी चुत के पास हरकत करने लगा…

मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपनी चुत पर दबा दिया और अपनी आँखे बंद कर दी..

जीजाजी मेरी चुत को सहलाने लगे और में मजे से सिसकारने लग गई… आह्ह्ह्ह मम्मम्म

फिर मैंने जीजाजी के पैंट कि ज़िप खोल दी और उनका लंड बाहर निकाल कर सहलाने लगी….

उन्होंने मेरा सिर पकड़ा और अपने लंड पर दबाने लगे.. ताकि मैं उनका लंड अपने मुँह में ले लूँ..

मैं वहां से उठी और ज़मीन पर उनके पैरो के बीच आकर अपने घुटनो पर बैठ गई.. और फिर उनकी पैंट के हुक खोल कर पैंट और अंडर वियर निचे खिसकाई और उनका लंड पकड़ कर चूसने लग गई….

उनका लंड काफी बड़ा था, लम्बा भी था और चौड़ा भी, मेरी छोटी बहन के तो मजे होंगे रोज ही इस मोटे लंड से जो चुदती है…

मैंने उनका लंड अपने गले तक ले लिया, उनके लंड का स्वाद भी अच्छा था….

उसके बाद मैं उठ कर खड़ी हुई, पेटीकोट ऊपर करके पैंटी खोल दी और उनकी तरफ पीठ करके उनके लंड पर बैठ गई, उनका लंड फिसलता हुआ मेरी चुत के फांकों को चिरता हुआ मेरी चुत मैं घुस गया..

अब मैं मेरी गांड उछाल उछाल कर जीजाजी से चुदवाने लग गई..

बहुत देर तक जीजाजी मुझे रगड़ते रहे, फिर मैं उठ गई और पलंग पर लेट गई…

जीजाजी ने मेरा पेटीकोट ऊपर किया और मेरी चुत को सहलाने लग गए..

मैंने कहा – जल्दी करो, बहन का आने का टाइम हो गया है…

जीजाजी झट से मेरे ऊपर चढ़ गए और अपना लौड़ा मेरी चुत मैं ठूंस दिया और झटके मार मार कर मेरी चुत मारने लगे..

ओर बोले – दीदी, आप आपकी बहन से ज्यादा मजा दे रही हो, आपकी चुत एक दम कमाल है, मैं खुशनसीब हूँ कि आपकी चुत मिली है मुझे, वर्ना मेरी किस्मत में तो आपकी बहन ही थी,

एक ही चुत को चोद चोद कर बोर हो गया था…

मैंने कहा – जीजाजी, अब मेरी चुत आपकी ही अमानत है, आपको जब भी मौका मिले आप मुझे बुला सकते हो..

और वो लगातार मुझे चोदते रहे..

कुछ ही देर मैं जब उनको लगा कि उनका छूटने वाला है तो उन्होंने लंड को बाहर निकाल दिया, वो नहीं चाहते थे कि मुझे प्रग्नेंट कर दे..

फिर मैंने उनका लंड पकड़ कर हिलाया और उनके लंड से गर्म गर्म माल निकल गया…. और वो वहीँ पर लेट गए…

थोड़ी देर बाद मैंने बहन को कॉल किया तो उसने बताया कि उसको आधा घंटा और लगेगा…

तो जीजाजी ने अब मेरे बोबे दबाने शुरू कर दिए,,, दबा दबा के पुरे लाल कर दिए,, और फिर निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगे,,, आधे घंटे तक उन्होंने मेरे बोबे कि जान निकाली और तभी दरवाजे पर आवाज हुई और मैंने जल्दी जल्दी अपने कपडे ठीक कर लिए और दरवाजा खोल दिया..

उसके बाद हम तीनो ने कुछ देर बातें कि और फिर मैं मेरे घर के लिए रवाना हो गई….

The end

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