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Aunty Ke Sath Jabardasti Part-2

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कृपया कर पहले पार्ट देख लें, वरना आपको इस पार्ट को समझने में परेशानी होगी – Aunty Ke Sath Jabardasti

जैसे कि अपने पहले अध्याय में पढ़ा, की कैसे मैंने मेरे मौहल्ले की आंटी के साथ जबदस्ती हम बिस्तर होने कामना को पूरा किया। और अपने शरीर और लिंग की हवस को पूरा उनकी लिंग पर छोड़ दिया। जैसे कि अपने पहले अध्याय में पढ़ा, की उन्होंने कुछ दिन के पश्चात् अपना घर छोड़ कर कहीं और चली गईं। पर तड़प तो तड़प ठैरी, कामना को एक बार पूरा किया, परन्तु शरीर और लिंग चीख चीख के दूसरी लड़की की वासना की कामना कर रहें हैं।

ये कहानी उसके 2 महीने बाद की हैं, ठंड शुरू हो चुकी थी। धूप के बिना तो शरीर और मेरा तम्बू दोनों अकड़ जाते थे, और शरीर तो ठीक है, पर अगर लिंग अकड़ तो वासना कैसे पूरी होगी। तो एक दिन मै छत में आराम से बैठ कर पढ़ाई कर रहा था, पर 2 महीने से किसी कली की कली चूसने का मौका ना मिलने के कारण में बैठे – बैठे सिर्फ अपनी पड़ोस की लड़कियों और आंटियों को निर्वस्त्र होते हुए मन में उनके सित्रा सोच रहा था। पर उसके साथ साथ मुझे अपने लिंग रूपी हथियार को थोड़ा संभाल ना पड़ रहा था। पता नहीं एक ठुकाई के बाद लिंग में ऐसे बदलाव की, अब वो बढ़ता था तो 10 या 11 inch नहीं सीधे 14 इंच बढ़ जाता था। और पड़ोसियों के घर की छत पर डाले लड़कियों के अंग वस्त्र ( bra और panty ) ko देख कर तो मन रुकता नहीं था।

वैसे जिस आंटी के साथ मैं पहले बिस्तर साजा किया था मैंने उसके अंग वस्त्र ( bra & panty ) वापिस नहीं की। और में अपनी सारी हवस उसपे ही निकलता था। पर मेरी हवस इतनी ज़्यादा थी कि वो पैंटी और ब्रा मेरे वीर्य से सफेद हो गए थे। और मैं अब अनपे बार बार अपना लिंग हिला हिला कर ऊब गया था। पर मुझे अपने पड़ोस में घर के बाजू, एक आंटी की पैंटी सूखते हुए मिली। में अपने होस खो बैठे मैंने दीवार लांगी और फटा फट से इधर उधर नजर रख और मैंने वो पैंटी आखिर में उठा कर ले आया।

मुझे उसे लाकर बहुत सुकून मिला, मैंने उस पैंटी को लाकर पता नहीं क्या क्या किया। मैंने उसे मुंह में डालकर चाय, उसपे हिलाया, उसपे अपना वीर्य टपकाया और पता नहीं क्या क्या किया। फिर मैंने उसकी ब्रा देखी जो की काफी बड़ी थी। में देख कर और लालची हो गया पर क्या करता। आंटी को कैसे चोदता, मम्मी भी घर पर थी। और मुझे दर था कि कहीं ये चिल्ला मा दें। क्यूंकि उनका बेटा जो की मुझसे 6 महीने चिता था वो भी घर पर था।

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मैंने अपने लिंग का रस टपकाकर ही संतुष्टि की और उनके अंग वस्त्र वापस रख दिए, जो कि मेरे गढ़े और सफ़ेद वीर्य से भरी थी। जब मेरी हवस थोड़ी शांत हुई तब मैंने पढ़ना शुरू किया। पर तब भी मेरा मन उस आंटी के कामुक और बड़े बड़े स्तनों के बारे में ही सोच रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे प्यास लगी और में नीचे जल पीने चला गया। जब 2 मिनट बाद मैं वापस ऊपर आया तो देखा कि वोही आंटी जिनके अंग वस्त्रों पर में अपना लिंग का रस गिराया था वहीं मेरे तरफ पीठ कर बैठी हैं।

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उनके सलवार से दिख रही उनकी गोरी गोरी रस जैसी पीठ पे में फिदा हो गया। मेरी अंदर गर्मी उत्पन्न हो गई। मैंने पता नहीं क्या सोचा और वहीं पर अपना पैंट उतार दिया और साथ में अपनी चड्डी भी उतार दी। अब मैं नीचे से पूरा नंगा था और कोई भी मुझे ऐसे देख सकता था। वैसे ज़्यादा, लोग थे नहीं छत पी। और मुझे तो कुछ फर्क भी नहीं पड़ रहा था। मैंने पैंट और चड्डी उतार कर अपने लिंग को हिलाना चालू कर दिया। सिर्फ को आंटी की पीठ देख कर मेरा लन्ड 14 इंच बिल्कुल सीधा खड़ा हो गया था, और में पूरी दुनिया से परे अपने मन में आंटी को चोदने का सपना देख रहा हूं। और मेरे सामने वाले घर की एक आंटी मुझे ऐसे देख रही थी, पर को मेरे लिए वरदान था वो इसके next part में।

मैंने आंख बंद कर ली थी और बस हिला रहा था। पता नहीं उतने में वो आंटी पीछे पलटी और उन्होंने मुझे इस हालत में देख लिया। मैंने आंखें खोल कर देखा तो मैं भी शर्मा गया और वो भी शर्मा कर नीचे जाने लगीं। में थोड़ा दार गया, और पता नहीं मैंने ऐसा क्यूं किया। में नंगा ही उनके छत पर कूड़ा, मेरे लन्ड नीचे झूल रहा था। में उनकी सीढ़ियों के रास्ते पे गया और आंटी की एक जगह सुन्न खड़ा हुआ पाया। मैंने उनके हाथ से मिर्ची की थाली फेकी उन्हें अपनी तरफ मु करवाया उनका सलवार का नीचे का हिस्सा उतारा, उनकी पैंटी भी उतार उनकी साफ बिना बाल के गोरी चूत को देख कर बेहेक गया।

मैंने उनको उनकी ग्रिल में झुकाया, उनकी चूत थोड़ा फैलाया, वो अभी भी शांत थी। और अपना 16 इंच का लौड़ा उनके चूत में डाल दिया वो चिलाने लगीं, “aaaaaaaah! मुझे दर्द हो रहा है। AAAAAAAh। मुझे क्यों चोद रहे हो? पर मजा आआ रहा। तुम्हारा इतना बड़ा। अंकल का तो 4 इंच भी खड़ा नहीं होता। 16 इंच का लेकर मजा आ गया।”

“कृपया इसे दिल पर ना लें यह कहानी काल्पनिक है। कोई भी लड़की या औरत भी एक इंसान होती है समान नहीं।।”

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