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सेक्सी मनीषा दीदी

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हेलो दोस्तों मेरा नाम अजय है.. मैं २३ का नौजवान लौंडा हूँ. आपको तो पता है इस उम्र में सिर्फ लड़को को चोदना होता है चाहे वो लड़की कोई भी हो. मेरी नजर अपनी बहन मनीषा पर थी. मनीषा दीदी मुझसे बहुत प्यार करती थी और मैं भी उन्हें. पर जैसे जैसे जवान हुआ मनीषा दीदी मुझे बहन कम चोदनीय माल ज्यादा लगने लगी. मनीषा दीदी की उम्र २८ साल है. दीदी देखने में बिलकुल हेरोइन मनीषा की तरह लगती है. दीदी का गोरा बदन, लम्बी हाइट और चौड़ा बदन देखने लायक है. फिगर ३८-३०-४० है. दीदी की बड़ी बड़ी दूध से भरी हुई चूचियां, पतली सेक्सी कमर और कसी हुई चौड़ी गांड मेरे बदन में आग लगा देती है. मैं दीदी को चोदने के लिए मरा जा रहा था पर कोई मौका नहीं मिला.
एक दिन दीदी के लिए एक अमीर घर से रिश्ता आया. सभी लोग रेडी हो गए और दीदी भी बहुत खुश थी. मैंने लड़के करण के बारे में थोड़ी पूछताछ की तो पता चला की वो गे है. मैं उससे मिलने उसके घर गया..

मैं: करण ये क्या नाटक है.. तो गे है फिर भी मेरी बहन से शादी कर रहा है
करण: अरे भाई मैं शादी सिर्फ समाज को दिखने के लिए कर रहा हूँ… तेरी बहन यहाँ राज करेगी..
मैं: पर करण मेरी दीदी की जिंदगी तो बर्बाद हो जाएगी.. उसको पति का सुख कौन देगा
करण: देख अजय.. ये सारी दौलत पर तेरी बहन राज करेगी .. इससे ज्यादा और क्या चाहिए..
मैं: करण देख मैं तेरा ये राज किसी को नहीं बताऊंगा.. पर तुम्हे मेरा एक काम करना पड़ेगा..
करण: बोल भाई मैं सब कुछ करने को तैयार हूँ
मैं: ठीक है शादी के बाद तुम्हे मनीषा दीदी को मुझसे चुदवाना होगा
करण: अजय तू अपनी ही बहन को चोदना चाहता है
मैं: हां करण वैसे भी तू उसे चोद पायेगा नहीं.. बेचारी वो तड़पती रहेगी… मैं अपनी बहन का दुःख दूर करना चाहता हूँ..
करण: ठीक है मुझे मंजूर है.. बाहर वालो के लिए वो मेरी बीवी होगी.. पर घर पर वो तेरी बीवी
मैं: ठीक है ये डील रहा.. शादी के बाद तुझे दीदी को राजी करना होगा मुझसे चुदवाने के लिए..
करण: ठीक है भाई

मैंने ये बात किसीको नहीं बताया और मनीषा दीदी की शादी हो गयी. प्लान के मुताबिक करण दीदी को डेली एक्साइट करता था पर चोदता नहीं था.. ऐसे ही काफी दिन निकल गए…अब दीदी चुदाई के लिए तड़पने लगी..

मनीषा : करण तू मुझे डेली एक्साइट करके छोड़ देता है कुछ करता क्यू नहीं है
करण: मनीषा दरअसल बात ये है की मैं गे हूँ और मैं तुमको शारीरिक सुख नहीं दे पाऊँगा
मनीषा: क्या करण तुम गे हो और ये बात तुम अभी बता रही हो.. तुमने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी

दीदी रोने लगी. करण ने दीदी को शांत करवाया और बोला

करण: मनीषा मुझे पता है तुम जैसी जवान लड़की को एक मर्द की जरूरत होती है.. इसलिए मेरी तरफ से तुम आजाद हो किसी के साथ भी सोने के लिए..
मनीषा: करण तुम ये कैसी बात कर रहे हो.. मैं किसीके साथ कोई चक्कर भी नहीं है
करण: मनीषा मेरी नजर में एक बंदा है जो हमारे काम आ सकता है
मनीषा: कौन है
करण: बुरा मत मानना मैं अजय की बात कर रहा हूँ
मनीषा: करण तुम्हारा दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया है.. वो मेरा छोटा भाई है
करण: मनीषा जरा ठन्डे दिमाग से सोचो किसी और से चुदोगी तो बड़ी बदनामी होगी. और तेरा भाई पर किसीको भी शक नहीं होगा.. और तुमदोनो एक दूसरे को प्यार करते हो
मनीषा: पर करण वो मानेगा
करण: अरे मनीषा मेरी जान.. तेरा ये गदराया बदन पाने के लिए नामर्द भी रेडी हो जायेगा… बस अजय जब आये तो उसे अपना बदन खूब दिखाना …

फिर करण ने मुझे फ़ोन किया और अपने घर बुला लिया.. मैं समझ गया की बात बन गयी है. मैं करण के घर गया.. दीदी ने आज ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी. साड़ी बहुत ही ट्रांसपेरेंट थी.. दीदी का गोरा बदन ब्लैक साड़ी में बहुत ही सेक्सी लग रहा था. . दीदी ने बहुत ही टाइट डीप कट ब्लाउज पहना था.. आधी से ज्यादा चूचियां नंगी मुझे दिख रही थी..दीदी की छाती में पहाड़ जैसा उभार निकला हुआ था, चूचियां बाहर आने के लिए बेताब थी.ब्लाउज का बैक पुरा ओपन था.. जिससे दीदी की गोरी चिकनी पीठ दिख रही थी और सिर्फ एक डोर से ब्लाउज बंधी थी..दीदी की पतली गोरी कमर कयामत ढा रही थी. दीदी ने साड़ी नाभि से काफी निचे बाँधी थी एक दम चुत से थोड़ा ऊपर.. साड़ी में कसी हुई चौड़ी गांड जानलेवा थी.. दीदी जब मटक मटक कर चल रही थी तो उसके चुत्तड़ थिरक रहे थे.

दीदी ने मुझे चाय दिया और जब वो झुकी तो उनका पल्लू गिर गया.. दीदी की नंगी चूचियां मेरे आखों के सामने थी.. दीदी ने भी कोई जल्दी नहीं की.. मैं काफी देर तक उनकी चूचियों को ताड़ता रहा..

करण: देखा मनीषा.. अजय को तेरी चूचियां पसंद आ गयी
मैं: अरे नहीं जीजाजी.. वो तो ऐसी ही
करण: अच्छा फिर तेरा ये लंड क्यू खड़ा हो गया
मैं: सॉरी
करण: सॉरी की कोई बात नहीं अजय … तेरी बहन है ही इतनी सेक्सी माल की किसी का भी मन डोल जाये
मैं: ये क्या बोल रहे हो जीजाजी

मैं और जीजाजी नाटक कर रहे थे.

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करण: अजय मेरी बात सुन … मैं गे हूँ
मैं: ये क्या बोल रहे हो जीजाजी
दीदी: हाँ भाई ये बात मुझे भी अभी पता चली
मैं: जीजाजी आपने मेरी दीदी की जिंदगी बर्बाद कर दी
करण: अजय किसी की जिंदगी बर्बाद नहीं होगी….. इसलिए तो तुम्हे यहाँ बुलाया है
मैं: मैं क्या कर सकता हूँ
करण: अजय तेरी दीदी को एक मर्द की जरूरत है… और मैं चाहता हूँ की ये काम तुम करो
मैं: क्या बक रहे हो जीजाजी.. मैं अपनी दीदी के साथ कैसे कर सकता हूँ
करण: देख अजय तेरी दीदी बाहर में चुदेगी तो बहुत बदनामी होगी .. मैं चाहता हूँ की तुम अपनी दीदी को चोदो और उसकी जरूरतों को पूरा करो
मैं: पर मैं कैसे कर सकता हूँ
करण: घबरा मत तेरी दीदी भी रेडी है… देख इसके सेक्सी बदन को तेरा भी मन तो ऐसी माल को चोदने का करता होगा
मैं: सच दीदी.. तुम्हे कोई ऐतराज़ नहीं है
दीदी: नहीं भाई अब बदन की आग बर्दास्त नहीं होती..
करण: ठीक है तो तुम दोनों भाई बहन चुदाई करो मैं चलता हूँ..

फिर जीजाजी घर से चले गए … मैं दीदी के बदन को ऊपर से निचे तक देख रहा था..

दीदी: ऐसे क्या देख रहा है अजय
मैं: दीदी आज आप इस ब्लैक साड़ी में कयामत लग रही हो.. दीदी अपना पल्लू गिरा दो प्लीज
दीदी: ठीक है भाई..
दीदी ने अपना पल्लू गिरा दिया .. उनकी गोरी गोरी विशाल चूचियां ब्लाउज से झांक रही थी और बाहर आने को तड़प रही थी..५०% से ज्यादा चूचियां नंगी दिख रही थी… उसपर पतली गोरी कमर.. मैं दीदी के पास गया और उसकी नैक पर किश करने लगा…और एक हाथ से चूचियों को दबाने लगा.. बहुत ही बड़ी बड़ी चूचियां थी मेरे हाथो में नहीं आ रही थी.. मैं काफी जोर जोर से चूचियों को मसल रहा था.. दीदी के मुंह से आह निकल आयी..

दीदी: आअह्हह्ह्ह्ह अजय मेरे भाई … मेरी प्यास बुझा दे.. कब से तड़प रही है तेरी बहन
मैं: उफ्फ्फ्फ़ दीदी आपकी इस गदरायी जवानी को भोगने का सपना तो मैं कब से देख रहा हूँ
दीदी: ओह्ह्ह्हह्ह भाई.. फिर मिटा ले अपनी हवस .. दबा मेरी चूचियों को और खूब चूस…

मैंने दीदी को पीछे किया और उसकी नंगी पीठ को किश करने लगा…गोरी और चिकनी पीठ को चुम चुम कर लाल कर दिया… दीदी अह्हह्ह्ह्ह उईईईईई आवाजे निकाल रही थी.. फिर मैंने दीदी की ब्लाउज की डोर खोल दी.. और ब्लाउज उतार दिया.. दीदी की पपीते जैसी बड़ी बड़ी चूचियां हवा में उछलने लगी.. दीदी की चूचियां काफी भरी और कसी हुई थी.. मैं चूचियों को दबा दबा कर चूस रहा था…..

दीदी: अह्हह्ह्ह्ह भाई… और चूस इन्हे.. आज पहली बार किसी मर्द से छुया है इन्हे…
मैं: उफ्फ्फ दीदी बहुत ही बड़े बड़े दूध है आपके …बहुत मजा आ रहा है इनको दबाने और चूसने में..

मैंने दीदी की दोनों चूचियों को खूब चूसा और दबाया…. फिर मैं दीदी की कमर को चूमने लगा… गोरी, पतली और मस्त चिकनी कमर थी.. मैं निचे बैठकर दीदी की कमर को चुम रहा था और आपने दोनों हाथो से उनकी भारी चुत्तड़ो को दबा रहा था…. आआअह्ह्ह्ह उईईईईई की आवाजे निकल रही थी दीदी के मुंह से.. मैंने दीदी की सॉफ्ट और भारी गांड को बहुत मसला..फिर मैंने दीदी की साड़ी उतार दी अब वो सिर्फ चड्डी में थी.. मैं उनकी सेक्सी मोटी जांघो को चुम रहा था.. बहुत ही गोरी और चिकनी टाँगे थी.. मैंने देखा दीदी की चड्डी गीली हो गयी थी.. दीदी बहुत ज्यादा एक्ससाइटेड हो गयी थी… मैंने दीदी की चड्डी उतार दी और बूर चाटने लगा…

दीदी: उईईईईई भाई… मत कर बहुत गीली हो रखी हो मैं निचे
मैं: उफ्फ्फ दीदी बहुत ही मस्त चिकनी और सुन्दर बूर है..

मैं दीदी की बूर की फांको को फैलाया और उसकी बूर चूसने लगा… दीदी काफी उत्तेजित हो गयी थी…. फिर मैं दीदी को उनके बेड पर ले गया… मैंने अपनी पैंट उतारी, मेरा ९” का लौड़ा देख दीदी की आँखे फट आयी..
दीदी: भाई बहुत ही मोटा और तगड़ा लंड है तेरा
मैं: उफ्फ्फ दीदी इसी लंड से मैं आपकी सील तोडूंगा
दीदी: आआह्ह्ह्ह भाई चल जल्दी कर.. घुसा अपना मुसल लंड मेरे बूर में और चोद अपनी बहन को

मैंने अपना लंड दीदी की बूर में सेट किया और एक तगड़ा शॉट मरा.. लंड का सुपाड़ा २” बूर में घुस गया… दीदी की चीखे निकल आयी.. उईईईईई माँ मार डाला रे… मैं दीदी को किश करते हुए और एक शॉट मारा. लंड दीदी की बूर को चीरता हुआ आधा घुस गया.. मैंने और २-३ शॉट्स में पूरा लंड दीदी की बूर में डाल.. दीदी की बूर अब फट चुकी थी और थोड़ा सा खून भी निकला..

दीदी: उईईईईई ओह्ह्ह्हह्हह भाई फाट दिया रे तूने मेरी चुत
मैं: उफ्फ्फफ्फ्फ़ दीदी बहुत टाइट बूर थी.. आपकी सील तोड़ने में मजा आ गया ..
दीदी: आअह्हह्ह्ह्ह कितना नसीबवाला है तू जो अपनी ही दीदी के बूर का उद्घाटन कर रहा है…
मैं: आह्ह्ह्हह्ह दीदी… देखो आपका भाई कैसे आपकी चुदाई करता है…
दीदी: उफ्फफ्फ्फ़ भाई .. चल अब धीरे धीरे चोद …और लूट ले मेरे जवान बदन का मजा

मैं धीरे धीरे दीदी को चोदने लगा… अब दीदी की आहे निकल रही थी.. उनकी बड़ी बड़ी चूचियोंको मैं दबा दबा कर चोद रहा था.. दनादन मैं दीदी की चुत मार रहा था…

दीदी: अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह भाई और चोदो अपनी दीदी को
मैं: कैसा लगा मेरा लंड दीदी..
दीदी: बहुत जी जालिम लंड है भाई.. पर बहुत मजे दे रहा है… उउउउउउ ईईईई
मैं: देख दीदी कैसे मेरा लंड तेरी बूर में अंदर बाहर हो रहा है.. ऐसी टाइट बूर चोदने में बहुत मजा आ रहा है…
दीदी: उफ्फफ्फ्फ़ मेरे बहनचोद भाई… और तेज मार मेरी बूर और झाड़ दे मुझे

मैं तेजी से दीदी को चोदने लगा… दीदी की तरबूज के जैसी हिलती चूचियां हवा में उछल रही थी.. जिसे मैं दबा दबा कर चूस रहा था… और मेरा लंड दीदी के बूर की चुदाई कर रहा था.. बड़ी बड़ी चूचियों को दबा कर बूर चोदने का अलग ही मजा है.. १ घंटे की दमदार चुदाई के बाद मैं और दीदी झड गए.. मैंने पूरा मूठ दीदी के बूर में ही डाल दिया..
दीदी: अह्ह्ह्हह भाई थैंक्यू अपनी दीदी की जवानी बचाने के लिए
मैं: ओह्ह्ह्हह दीदी थैंक्यू तो मुझे आपको बोलना चाहिए ऐसा सेक्सी गदराया बदन जो चोदने दिया आपने मुझे… मैं तो कब से आपको चोदना चाहता है
दीदी: अब चोद लिया ना… बुझा ली अपनी हवस ..अब तुझे ही चोदना है मुझे…
मैं: यू आर सो सेक्सी दीदी…मैं तो दिन भर आपको चोदूँगा

फिर मैं दीदी के पुरे बदन को किश किया और उनके नंगे बदन को अपनी आगोश में ले लिया …. दीदी भी मुझसे चिपक कर सो गयी..

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