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शीला की जवानी : भाग २

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फ्रेंड्स
पिछले भाग ” शीला की जवानी ” में आपने पढ़ा की मेरे देवर जी घर आए फिर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बना, उससे आगे… दोपहर में दोनों साथ में खाना खाए तो मैं उनसे नजर नही मिला पा रही थी, थोड़ी आत्मग्लानि महसूस कर रही थी और जीवन में पहली बार कुकर्म की थी तो मन में अपराधबोध हो रहा था और खाना खाते वक्त प्रेम बोला ” भाभी आप क्यों अफसोस कर रही हैं, इसमें आपका क्या कसूर
( मैं उनकी ओर देखी ) कोई अफसोस नहीं है देवर जी मुझे तो अच्छा लगा
( प्रेम मुझे देख हंस दिया ) ठीक है भाभी तो आज रात फिर से ” मैं कुछ नहीं बोली फिर खाना खाकर आराम करने चली गई, दोपहर के २:०० बजे रवि स्कूल से वापस आया फिर उसे खाना खिलाई और रोज की तरह शाम तक बेड पर आराम करती रही लेकिन आज मेरे बदन को सुखद अहसास मिला था, एक तो पति की रुचि मुझमें नहीं रही तो दूसरी ओर कम उम्र के लड़के के साथ हमबिस्तर हुई फिर शाम को पति घर आए तो तीनों साथ में चाय पीने लगे और विवेक बोला ” मैं तो ऑफिस में रहता हूं इसलिए कुछ जरूरत हो तो भाभी से बोल देना
( प्रेम बोला ) हां भैया ” और फिर मैं खाना बनाने लगी तो विवेक टी वी देख रहे थे, प्रेम अपने रूम में जाकर पढ़ाई करने लगा तो मुझे आज रात उसके साथ दुबारा हमबिस्तर होने की इच्छा थी लेकिन उसकी ओर से पहल हो तभी मैं ऐसा कर सकती थी, रात को सब साथ में खाना खाए फिर मैं अपने बेडरूम चली गई, विवेक और रवि बेड पर आते ही नींद की आगोश में चले गए तो मैं बेड पर लेट प्रेम के बारे में सोच रही थी और मुझे भी कुछ देर में नींद आ गई, मैं आज साड़ी और ब्लाऊज़ के जगह नाईटी पहन रखी थी और मेरी नींद देर रात खुली वो भी पीसाब लगी थी तो मैं उठकर वाशरूम गई फिर फ्रेश होकर वापस आई तो हॉल से ही देखी की प्रेम के कमरे की बत्ती बंद है और मैं उसके रूम की ओर गई, संयोगवश दरवाजा खुला था तो प्रेम गहरी निंद्रा में थे और नाईट बल्ब की रोशनी में मैं उनके बेड के किनारे बैठी फिर उनके पैर पर हाथ फेरते हुए लन्ड के उभार पर हाथ लगाई लेकिन प्रेम गहरी निंद्रा में था और मैं उसके पैजामे की डोरी खोल धीरे से उसे कमर से नीचे कर दी तो उसका गेहूंवा रंग का लन्ड दिखा जोकि अर्ध रूप से टाईट था और मैं उसे पकड़ दबाने लगी फिर भी देवर जी नींद से नहीं जागे तो भी मैं उनके लन्ड को पकड़ हिलाना शुरु की, लन्ड के चारों ओर काली झांट थी जिसमें उंगली डाल घुमाने लगी और उनका लन्ड खड़ा हो गया तो मैं अब सोची की लन्ड को मुंह में लेकर चूसा जाए की प्रेम की आंखें खुल गई और वो मुस्कुराया ” ओह भाभी आप जगी हुई हैं ” तो मैं उसके लन्ड को छोड़ उठ खड़ी हुई लेकिन प्रेम मेरे हाथ पकड़ मुझे अपनी ओर खींच लिया और मैं उसके गोद में बैठ गई, देवर जी मेरे बूब्स को नाईटी पर से ही पकड़ दबाने लगे साथ ही उनका ओंठ मेरी सुराहिनुमा गर्दन को चूमने लगा तो उसका टाईट लन्ड मेरी गांड़ में चुभ रहा था ” ओह आह उई देवर जी प्लीज मुझे जाने दीजिए कहीं भैया जाग गए तो
( वो मेरे चेहरे को चूमते हुए बूब्स दबाने लगा ) आप अपनी मर्जी से आए हैं भाभी जान आराम से रहिए ” और वो मुझे बेड पर लिटा दिया तो मेरी नाईटी की डोरी पर हाथ रख वो खोल दिया और फिर नाईटी को दोनों कंधे की ओर कर मुझे नंगा कर दिया तो मैं आंख बंद किए उसके चुम्बन का एहसास चेहरे पर पा रही थी, वो मेरे जिस्म पर चेहरा झुकाए ओंठ को चूमने लगा तो मैं जीभ निकाल उसके मुंह में घुसाई जिसे वो चूसने लगा और मैं उसके पैजामा की डोरी को खोल लन्ड को बाहर की जोकि पूरी तरह से टाईट था, उसे हिलाने लगी तो प्रेम मेरे जीभ चूसते हुए एक बूब्स को दबाने लगा तो मैं कामुकता वश अपने पैर बिस्तर पर रगड़ने लगी, उसके चेहरे को पीछे कर जीभ मुंह से निकाली तो मेरी सांसें तेज हो चुकी थी साथ ही चूचियां उफान लेने लगी और प्रेम मेरे छाती पर सर रख बोला ” कितनी सेक्सी लग रही हैं आप
( मैं चेहरा फेर ली ) प्रेम जल्दी में जो करना है करो मुझे डर लग रहा है ” और वो मेरे कमर के पास बैठ एक तकिया चूतड के नीचे लगाया, मेरी जांघो को फैलाकर चूत पर हाथ फेरने लगा फिर झुका और बूर पर चुम्बन देने लगा तो मैं खुद अपने बूब्स पकड़ दबाने लगी, प्रेम मेरी चूत की फांकों को फैलाया फिर उसमें जीभ घुसाए चाटना शुरू किया तो मैं आहें भर रही थी ” उफ आह उई बूर मत चाटिए देवर जी बदबू आती होगी
( वो चेहरा ऊपर कर बोला ) क्या भाभी आपकी बूर तो साफ है मानो आप पूरी तैयारी करके मेरे पास आई ” और वो बूर में जीभ घुसाए चाटने लगा, एक हाथ मेरे चूची पर लगाया फिर दबाते हुए मुझे कामुक कर रहा था तो मैं ” आह उह ओह इस चूत में अपना औजार घुसाइए ना ” लेकिन प्रेम बूर चट्टा की तरह जीभ से चूत चाटते रहा और मैं अब चुदाई को आतुर थी फिर भी प्रेम मेरी बातों को नजरंदाज करते हुए चूत चाटने में लगा हुआ था और आखिर में जीभ निकाल लिया।
देवर जी बेड पर लेट गए तो उनका लन्ड जोकि लंबवत था साथ ही फुंफकार रहा था को मैं देखते हुए तड़प उठी फिर उठकर लन्ड पकड़ ली, उसके सुपाड़ा को नाक से लगाए सुंगध लेने लगी तो प्रेम मेरे चूची को पकड़ पुचकार रहा था, मैं अब सुपाड़ा को चेहरे पर रगड़ते हुए ओंठ पर रख रगड़ने लगी तो प्रेम ” आह ओह जान तुम तो बेड पर उस्ताद हो लिपस्टिक की जगह मेरे लन्ड को ही रगड़ रहे हो ” बोला लेकिन मैं झट से मुंह खोल लन्ड अंदर ली फिर चूसते हुए झांट में उंगली घुमा रही थी तो प्रेम मेरे काम कला से प्रसन्न था, अब मैं उसके लन्ड मुंह से निकाल जीभ से चाटने लगी फिर बोली ” आप आराम कीजिए मैं जरा आई ” तो मैं अपने बेडरूम गई, विवेक तो खराटे भर रहा था और रवि भी गहरी निंद्रा में था और मैं वापस देवर जी के पास आई फिर दरवाजा बंद कर लेट गई तो प्रेम मेरे नाईटी को खोल नंगा कर पूछा ” भाभी आगे से डालूं या पीछे से
( मैं बोली ) फिलहाल आगे से अगली बार तेल डालकर उसकी चुदाई करना ” और प्रेम मेरे बूर पर सुपाड़ा रगड़ते हुए अंदर घुसाया और लन्ड पेलने लगा ” ओह तुम्हारी चूत तो रो रही है
( मैं हंस दी ) हां तुम्हारे लोलीपॉप के लिए ही तो रो रही थी अब आराम से उसे चुप कराओ ” इतने में प्रेम जोर से धक्का मारा और चोदने लगा तो मैं दिन में भी चुदाई थी, इसलिए चूत आराम से लन्ड हजम कर चुदवा रही थी और मैं ” आह ओह उह उई आआआह्ह और तेज चोद साले मेरी बूर को लन्ड की भूख लगी है
( प्रेम मेरे जिस्म पर लेट चोदने लगा तो मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने लगी ) वाह जानेमन तू तो मेरे लन्ड से चुदवाकर मस्त है ” मैं चुप रही और वो चोदता हुआ मेरे चेहरे को चूमने लगा तो मैं चूतड स्थिर किए चुदाने लगी, मैं तो प्रेम के बदन के नीचे लेटी हुई थी और दो जिस्म आपस में घर्षण क्रिया कर एक दूसरे को तृप्त कर रहें थे और प्रेम का १४-१५ सेंटीमीटर लंबा लन्ड मेरी चूत को मस्त कर रहा था। मैं अब दुबारा चूतड उछालना शुरू की तो प्रेम मध्यम गति से धक्का देता हुआ मेरे ओंठ चूम लिया ” शिला और तेज चूतड उछाल साली रण्डी तू तो एक नंबर की रण्डी है
( मैं मुस्कुरा दी ) हां साले रण्डी तो तूने मुझे बनाया बाकी मैं तो कभी गैरों की ओर नजर भी नही डाली, ओह आह बूर में आग लगी है ” फिर भी प्रेम धकाधक चुदाई करता रहा और मैं चुदवा रही थी, मैं अब चूतड उछालना बंद कर दी कारण की दिन में भी चुदाई हुई थी सो कमर में दर्द होने लगा था तो प्रेम मेरे ओंठ चूम पूछा ” डार्लिंग थोड़ी देर का ब्रेक ” मैं सर हिलाकर हामी भर दी फिर वो मेरे बदन पर से हटा और कमर से टॉवल लपेट वाशरूम चला गया, मैं सोची की देखा जाए की विवेक और रवि सो रहे हैं या नहीं तो बदन पर नाईटी डाल रूम से निकली फिर अपने बेडरूम घुसी तो दोनों नींद में थे और मैं वापस प्रेम के कमरे में आई, वो बेड पर बैठा हुआ था तो मैं दरवाजा बंद कर बोली ” अब कमर में दर्द हो रहा है
( वो टॉवेल हटा लन्ड पकड़े बोला ), तो फिर दीवार के सहारे घोड़ी बन जाईए ” मैं वहीं पर दीवार की ओर मुंह किए खड़ी हुई तो प्रेम मेरे कमर में हाथ डाल मेरी चूतड को पीछे किया और मुझे बिल्कुल ही चौपाया जानवर की तरह खड़ा कर मेरे गांड़ के सामने खड़ा हुआ तो मैं पीछे मुड़कर बोली ” अब इंजन स्टार्ट कीजिए देवर जी
( वो लन्ड पकड़े चूत में घुसाने लगा ) आह ओह तेरा लन्ड तो आयरन रॉड की तरह है आराम से चोद साले ” इतने में देवर जी धक्का देकर चोदने लगे तो मेरी छाती से चुचियों लटक रहीं थी जिसे पकड़ वो दबाने लगे, अब मैं भी अपने चूतड हिलाने लगी तो दोनों सम्भोग सुख में मस्त थे और प्रेम का लन्ड चूत की गर्मी को बढ़ा रहा था तो मैं आज दूसरी बार चुदाई कराके थकान महसूस कर रही थी ” आह ओह आहहाह प्रेम तेरा लन्ड रस छोड़ेगा की नहीं बूर तो लहर रही है
( वो पूरे गति से चोदता हुआ हांफने लगा ) शिला तेरी चूत में तो अब लन्ड दम तोड ही देगा लेकिन कल तेरी गांड़ का स्वाद भी लेना है
( मैं चूतड हिलाते हुए पीछे मुड़कर बोली ) अभी क्यों नहीं तेल डालकर चोद मेरी गांड़ क्यों अब तेरा खड़ा नहीं होगा ” प्रेम कुछ नहीं बोला बस चोदता रहा फिर उसके लन्ड से वीर्य स्खलित होकर मेरी चूत को शांत कर दिया, मैं उससे अलग हुई और बूर को टॉवल से साफ की फिर नाईटी पहन फ्रेश हुई, वापस अपने बेड पर जाकर सो गई।

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