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लंड चूँस, मेरा लंड चूँस; बेटी, लंड चूँस!

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नेपाल की तराई में मैंने जिन तीन पुष्ट मर्दाना टाइप औरतों को भेजा था उन्होने काम साधा। उन्होंने तीन कमसिन छोकरियाँ मेरे लिए खोजी। तीनों 14-15 साल की थीं। दो तो शुद्ध 14 की थीं। इनका मुखड़ा बड़ा प्यारा और मासूम था। कद छोटा था, यही 4 फीट 10 इंच या फिर 4 फीट 9 इंच। छाती थोड़ी सी ही उभरी हुई थी पर दूर से सपाट लगती थी। तीनों के नितंब भी लघु अर्थात छोटे-छोटे थे। ठीक लब्जों में कहें तो तीनों की ” गांड ” नन्ही पर मजेदार थी। तीन में से दो छोरियों की चूत पान के कोमल पत्ते जैसी थी और एक की नीम के पत्ते जैसी। सबसे अच्छी बात ये थी कि तीनों की माँ व बहिनें भी उनके साथ आ गई थीं। वैसे इनकी मांएं व बहिनें भी मस्त-चुस्त मदमस्त सेक्सी थीं। ये मां-बहिनें समझदार थीं व कामकला के क्षेत्र में पहुँच रखती थी। धन-दौलत कमाने में इनकी रुचि व लगन थी; ये जानती थीं कि व्यभिचारी मर्द के मौज मज़े के लिए इनकी छोकरी में क्या हुनर होना चाहिए।

तीनों छोकरियों के लिए ठहरने वगैरह का खास प्रबंध किया गया। एक छोरी का नाम रमा ( 14 साल ), दूसरी का सीता ( 14 ), व तीसरी का चंचु ( 15 वर्ष ) था। तीनों अपने से तीन वर्ष बड़ी बहनों के संग पधारीं। इनकी तीन मांएं अंदाजन 33-35 वर्ष के बीच की थी। पहले तीन दिन माइनें इन छोटी छोकरियों की मां को रगड़-पटक-मचक के चोदा जिससे बाकी छोकरियाँ समझ जाएँ कि इनको मेरे साथ कैसे पेश आना है। पहली खेप इनकी मां को चोदने की ली; फिर इनकी बहिनों को चोदा। मैं 59 वर्ष का मोटा ताज़ा हट्टाकट्टा बलशाली मर्द था, इसलिए इनकी तीनों मांएं मेरे लंड से सेक्स का मज़ा ले तृप्त हो गईं। बहिनें 17-18 की थीं, तीनों बहिनों की फुद्दी पेली व उनकी गांड में लंड घुसेड़ा।

मेरा खास मकसद तो रमा ( 14 वर्ष ), सीता ( 14 ), व चंचु ( 15 ) के संग कुत्सित मज़ा लेना था। इन छोटी छोरियों की नंगी फिल्म भी बन जाए इसलिए मैंने इनको अपने प्राइवेट स्टुडियो में बुला भेजा। मेरे अगल रमा बैठी व बगल में सीता; और चंचु ( 15 साल ) को मैंने अपनी गोद में सरकाया। चंचु की गांड छोटी होने पर भी रमा व सीता से कुछ बड़ी व चौड़ी थी। मैंने पहले सीता की कस्स के चुम्मी मारी फिर रमा के ओठों से ओठ भिड़ाए। दोनों के फूले हुए गाल चाटे, ठुड्डी उठा के। मेरे दोनों हाथों की अंगुलियाँ सीता-रमा की फुद्दी व गांड में घुसने लगी। उधर चंचु मेरी गोद में हिचकोले भर रही थी सो मेरा लंड ठीक उसकी गांड के छेद में कपड़ों के ऊपर से सट गया था। ठीक इसी वक्त सीता-रमा की गांड में मेरी दो अगुलियाँ घुस चुकी थीं। अच्छा ये था कि ये तीनों कमसिन छोरियाँ मज़े ले-ले चहचहा रही थीं। यही इनकी ट्रेनिंग थी।

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मैं अच्छी और भली लड़की या छोरी उसे मानता हूँ जो पॉर्न स्टार अमाई लियु की तरह नखरे से मेरा लंड चूँसे। मुझे यह कहते हुए अच्छा लग रहा है कि इन तीनों ने बाकायदा अमाई लियु से सीख लेकर निर्लज्जता पूर्वक मेरे साथ चुहल की। इसके लिए सीता ने पहल कि; वह बोली– ” दादा, अपनी प्यारी गुड़िया जैसी पोती के गालों पर अपना लौड़ा चिपकाओ ना!! ” फिर रमा भी बोली– ” हाँ-हाँ नानाजी, अपनी दोहिती को आप अपने मोटे लौड़े का स्वाद चखाओ ना ” । अब मेरे लिए इन तीनों के साथ मुंह -चुदाई ज्यादा जरूरी हो गया।

तीनों– सीता, रमा, चंचु को मैंने समझाया कि क्या करना है। चंचु को मेरी गांड का छेद चाटना था, और सीता व रमा को मेरा लंड अगल-बगल से चाटते हुए मुझे तृप्त करना था। यह गुप्त काम कम से कम 15 मिनट करने के बाद ही इन छोकरियों को मेरा लंड इस तरह से चूँसना था जैसे लोल्लिपॉप चूँसा जाता है। तब बारी-बारी सीता, रामा, व चंचु ने मेरा लौड़ा अपनी हलक तक ले चूँसा। आह, आह, शाबाश बेटी ” कहते हुए मैं तड़फ उठा; और बोला, बोलता ही गया– ” लंड चूँस, मेरा लंड चूँस; बेटी, लंड चूँस ” ।

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