Erotic Stories
Free Desi Indian Hindi Sex stories, Tamil sex stories

भैया के हवस की शिकार हुई

⏰ 1 min read

फ्रेंड्स
मैं रिमझिम, उम्र २४ वर्ष, कद ५’५ इंच, गोरा बदन तो शरीर शेप में, चूचियां आकार में जिसे ३४ सी साईज की ब्रा में कैद रखती हूं तो कमर पतली और जांघें मोटी तो बीच में ब्रेड पकोड़ा की तरह फूली हुई चूत, चूतड गोल और गद्देदार, मैं तो शादीशुदा महिला हूं और एक बच्चे की मां भी, लेकिन ये बात चार साल पहले की है जब मैं कुंवारी थी और गांव में बाबू जी और मां के साथ रहती थी और मेरी बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी, मैं तो १०+२ क्लास पढ़कर पढ़ाई छोड़ चुकी थी कारण की मुझे अपनी सहेलियों के साथ गांव में ही घूमने फिरने में मजा आता था साथ ही अपने शादी के इंतजार में थी कारण की कई लड़के वाले देखकर मुझे गए थे और फिर एक दिन मेरे छोटे अंकल का लड़का निलेश आया जोकि दिल्ली में रहकर मैनेजमेंट कोर्स कर रहे थे, देखने में राजकुमार की तरह, गोरा चेहरा तो लंबाई ६’० फीट और उम्र में २ साल मुझसे बड़े होंगे। निलेश भैया आए तो मैं उन्हें बरामदे पर ही एक ग्लास पानी दी फिर पैर छूकर आशीर्वाद ली तो वो बोले ” एक कड़क चाय बनाओ रिमझिम ” और मैं किचन की ओर गई तभी मां और बाबू जी कुछ काम से घर से बाहर निकले थे तो मैं घर में अकेली थी, भैया को ३-४ साल बाद देख रही थी और पता नहीं क्यों मैं उन्हें देख भावनाओं को समझ नहीं पा रही थी, मुझे वो भाई के रूप में दिख ही नहीं रहे थे और मैं २० साल की लौंडिया जिसकी चूत पर बाल तक नहीं हुए थे बल्कि रोएं उगे थे हमेशा चूत की खुजली से परेशान रहती थी, चाय बनाई फिर दोनों हाथ में प्याला लिए भैया के पास गई तो भैया अपने जींस और शर्ट उतार कुर्सी पर रख दिए थे और एक टॉवल कमर से लपेट रखे थे, मुझे देख पूछे ” चाचा चाची दिख नहीं रहे हैं कहां गए हैं
( मैं उन्हें चाय का प्याला थोड़ा झुककर दी तो उनकी नजरें मेरी चूची पर टिकी हुई थी ) वो दोनों कुछ काम से शहर गए हैं दोपहर तक आएंगे ” और मैं भी निलेश भैया के बगल के कुर्सी पर बैठ गई, मैं तो स्कर्ट और टॉप्स पहन रखी थी और भैया चाय पीते हुए मुझे घूर रहे थे तो मैं असहज महसूस कर रही थी फिर भैया खाली प्याला मुझे हाथ में दिए और कुर्सी से उठकर खड़े हुए की उनका टॉवल खुलकर फर्श पर गिर गया, उनके ब्लू रंग के जांघिया पर से लन्ड का उभार दिख रहा था और मैं उनके लन्ड के उभार को तब तक देखती रही जब तक वो टॉवेल कमर से लपेट नहीं लिए फिर पूछे ” बाथरूम में पानी है की नहीं
( मैं बोली ) अब तो नल लगा हुआ है ” उनके मुंह से शराब की बदबू आ रही थी और वो अपने बैग से एक शॉर्ट्स निकाले फिर पूछे ” नाश्ता कुछ बनाई हो
( मैं ) जी बोलिए क्या बना दूं
( वो मेरे कंधे पर हाथ रख दिए ) ब्रेड और जैम खाऊंगा ” वो बाथरूम की ओर गए और उनके स्पर्श ने मुझे तड़पा दिया, अभी तो सुबह के ०९:०० बजे थे और बाबू जी के साथ मां दोपहर तक आते और इस बीच भैया मेरे साथ क्या करेंगे, ये सोच घबरा गई थी।
निलेश भैया स्नान करके आए फिर रूम के अंदर चले गए और मैं बाहर बरामदे पर बैठी थी तो आवाज दिए ” रिमझिम जरा इधर सुनो
( मैं बोली ) अभी आई ” और मैं रूम में घुसी तो भैया बेड पर लेटे हुए थे, मुझे देखते हुए बोले ” जरा मेरे पांव को दबा दे बहुत थकान महसूस कर रहा हूं ” मैं उनके पैर के पास बैठकर उनके जांघ के मांसल हिस्से को पकड़ दबाने लगी तो निलेश चित लेटा हुआ था और मैं उनके जांघ के ऊपरी हिस्से की ओर बढ़ रही थी तो वो बोले ” रिमझिम थोड़ा ठीक से बैठो
( मैं अब बेड पर उनके कमर के पास बैठ गई और जांघो को दबाने लगी साथ ही चेहरा झुकाई हुई थी ) भैया आप नाश्ता नहीं करेंगे ” वो कुछ नहीं बोले और अचानक से हाथ बढ़ाए मेरे एक बूब्स को पकड़ दबा दिए तो मैं ” आह ये क्या ” फिर क्या था, भैया का मंशा समझ गई और वो हटाथ बैठकर मुझे बाहों में भर लिए जबकि मैं उनसे हटने की कोशिश करने लगी ” भैया प्लीज़ मुझे छोड़िए ” लेकिन निलेश मुझे बाहों में लिए चेहरा और गर्दन चूमने लगा तो मेरे मन में भी काम की ज्वाला प्रस्फुटित होने लगी फिर भी उनको पीछे धकेल रही थी लेकिन आखिरकार वो मुझे बेड पर लिटाकर मेरे ऊपर सवार हुए चेहरा को चूमते हुए मेरे चूची पर छाती रगड़ने लगे ” बहुत नखड़ा कर रही है
( मैं उनके चेहरे को चूम ली ) तो क्या मैं आपकी दुल्हन हूं की ” और फिर निलेश मेरे चेहरे को चूमने लगा तो मैं उसके गाल सहित गर्दन पर ओंठ रख चुम्बन देने लगी, जीवन में पहली बार किसी लड़के का स्पर्श मिला था तो मैं भी निलेश भैया के सामने घुटने टेक दी और भैया मेरे रसीले ओंठ को चूमते हुए मुंह मे भर चूसने लगे तो मैं उनके पीठ से लेकर चूतड तक को सहलाने लगी, आज काम क्रिया करने का मौका मिला था लेकिन अफसोस की वो मेरे चचेरे भाई थे। निलेश अब मुझे अपने काबू में कर चुका था और वो मेरे ऊपर से उतरकर मेरे टॉप्स को पकड़ गर्दन तक किए, घर में तो मैं ब्रा नहीं पहनती थी इसलिए उन्हें गोल गोल टेनिस बॉल की तरह की चूचियां खेलने को मिली और वो टॉप्स मेरे गर्दन से निकाल दिए तो मेरा ऊपरी हिस्सा नग्न था, मैं शर्म के मारे दोनों हाथों से छाती को ढकने लगी तो नीलेश मुझे देख हंस दिया फिर मेरे हाथों को पकड़ हटाया, मैं चेहरा फेर ली तो भैया मेरे चूची पर मुंह लगाए और मेरा पूरा स्तन उनके मुंह में था जिसे वो चूसने लगे, इतना ही नहीं भैया दूसरे चूची को पकड़ दबाने लगे और मैं तो काम क्रिया की पहली सीढ़ी आज चढ़ रही थी ” आआअह उह धीरे धीरे चूसो ना मेरी जान ” निलेश मेरे बाईं चूची को मुंह से निकाल उसको दबाने लगा तो मैं उन्हें देख बोली ” भैया अब चलिए नाश्ता करने
( निलेश मेरे दूसरे स्तन को पकड़ चेहरा झुकाया ) पहले तुझे खाऊंगा फिर नाश्ता करूंगा ” और मैं भी समझ गई की आज निलेश कहीं मेरी चूत की सील ना तोड़ दे, वो मेरी चूची मुंह में भरकर चूसने लगा तो मेरी चूत में खुजली हो रही थी और मैं भैया के बाल सहलाते हुए चूची चुसवा रही थी, मुझे तो बहुत मजा आ रहा था और मैं ” आह ओह उह उई मेरी चू में खुजली हो रही है यार ” निलेश मेरे चूची को चूस रहा था तो मैं कामाग्नि की गिरफ्त में थी और मेरे जिस्म पर किसी का हाथ आज तक नहीं लगा था, मैं अब भैया के बाल को पकड़ उनके चेहरे को पीछे कर दी तो मेरा स्तन चूस चूसकर वो गोरा से लाल कर दिया, मेरी सांसें तेज हो चुकी थी तो बदन में सिहरन सी हो रही थी और मैं अब उठकर बैठ गई लेकिन निलेश तो मेरे छाती को चूमने में लगा हुआ था और मैं ” प्लीज भैया अब छोड़ो मुझे ये सब हम दोनों के बीच गलत है
( निलेश मेरे स्कर्ट को पकड़ कमर से नीचे करने लगा और उसको थोड़ा नोचे किया की मैं उसके हाथ पकड़ ली ) प्लीज ऐसा मत कीजिए क्यों मेरी इज्जत और आबरू लूटने पर लगे हैं ” तो निलेश मेरे गर्दन में हाथ डाल गाल चूम लिया ” तुम बेवकूफ हो क्या, जल्द ही तेरी शादी होगी फिर तो ये सब करोगी की नहीं
( मैं सर झुका ली और भैया मेरे चूची पकड़ दबाने लगे ) वो तो ठीक हैं निलेश लेकिन जो करना है वो सिर्फ ऊपर की ओर नीचे कुछ मत करो
( निलेश मेरे स्कर्ट को पैर से बाहर कर दिया और मैं सिर्फ पैंटी पहने बैठी थी तो भैया मेरे ओंठ चूमने लगे, ना चाहते हुए भी मेरा हाथ उनके लन्ड के उभार पर चला गया जिसे मैं सहलाने लगी ) क्यों तुम्हें भी तो मजा आ रहा है जान ” और फिर भैया के सामने मैं आत्मसमर्पण कर दी तो निलेश खुद अपना शॉर्ट्स उतार नंगा हो गया, जीवन में पहली बार किसी लड़के का लन्ड देख रही थी वो भी गेहुंआ रंग का, लंबा और मोटा लन्ड को देख सहम गई तो भैया मेरा हाथ पकड़ अपने लन्ड पर लगा दिए तो मैं हाथ हटा ली लेकिन निलेश रुकने वाला नहीं था और वो मेरे पेंटी को भी कमर से नीचे करने लगा, आज तो चुदाई कर के ही ये मानता लेकिन मैं चूत की सील तुड़वाने को तैयार नहीं थी।
मैं तो अब पूर्णतः नग्न थी और बेड पर दोनों पैर को सटाए साथ ही बाहों से चुचियों को ढक बैठी हुई थी की निलेश मेरे गाल चूमने लगा फिर मेरी बाहों को हटाया और मेरे हाथ पकड़ अपने लन्ड पर रख दिया ” धीरे धीरे सहलाओ ना बहुत मजा आएगा
( मैं तो दुविधा में थी फिर भी निलेश के लन्ड पकड़ सहलाने लगी ) लेकिन निलेश वो मत करना बाकी जो चाहो ” निलेश चुप रहा और मुझे बेड पर धकेल लिटा दिया फिर मेरी जांघो को फैलाया, उसकी गिद्ध दृष्टि चूत पर थी और वो उसपर उंगली घुमाने लगा ” वाह तेरी चूत तो मुरब्बे की तरह फूली हुई है, इतने में वो बूर की फांकों को उंगली में दबाए मींजने लगे और मै तो आहें भरने लगी ” आह ओह भैया प्लीज उसको इस कदर मत मसलो
( निलेश चूत को छोड़ दिया फिर जांघो पर हाथ फेरने लगा ) बेबी तुम बोली वो मत करना, क्या नहीं करना है
( मैं तो शर्म से पानी पानी हो चुकी थी ) वही जो हर पति अपनी पत्नी के साथ शादी के बाद करता है ” भैया मेरे जांघ को चूमने लगे और चूत के फांकों के बीच उंगली रगड़ने लगे तो कसम से मेरी चूत में करेंट प्रवाहित होने लगी, झूठ क्या बोलूं यारों अपनी चूत को उंगली से चोदती थी और उसको एक बार तो मोमबत्ती से तृप्त की थी, तभी निलेश मेरे चूतड के नीचे तकिया लगाया फिर मेरी जांघो को फैलाया और मुंह को चूत पर लगाया, बूर पर चुम्बन देते हुए मेरे कमर से लेकर छाती तक को सहला रहा था और मैं तो निलेश के ओंठ का प्यार चूत पर पाकर कामुक हो गई ” उई आह ओह उई उफ आआआह्हह प्लीज मत चूमो ” लेकिन निलेश तो मेरी चूत के फांकों को उंगली से फैलाया फिर जीभ से चाटना शुरू किया और मैं तड़प उठी ” आह ओह उह छोड़ो ” , मैं अपने कमर को ऊपर करने लगी तो जांघो को आपस में सटाने लगी तो भैया चेहरा ऊपर कर बोले ” बेबी पहली बार मजा ले रही हो ना थोड़ा अधिक सिहरन होगा लेकिन इस कदर जांघो और कमर को करोगी तो पैर में रस्सी बांध बूर चाटूंगा ” तो मैं चेहरा फेर ली और बेड पर लेटी रही, तभी निलेश मेरी चूत में दुबारा जीभ घुसाया और चाटने लगा तो मैं उसके प्यार को पाकर मस्त थी और मुझे चूत में रस निकलने का एहसास हुआ तो निलेश चेहरा ऊपर कर बोला ” बहुत जल्दी तेरी रानी के आंसू निकल पड़े जा धोकर आ जा ” और मैं उठकर बूर को तौलिया से पोंछी फिर स्कर्ट टॉप्स पहन बाथरूम चली गई, पेंटी जानबूझकर नहीं पहनी थी ताकि बेड पर आते ही दुबारा वो मेरी चूत चाटे और मैं वापस आई तो भैया चादर ओढ़े लेटे हुए थे, मैं उनको बिना कुछ बोले रूम से बाहर आई फिर किचन में कुछ काम निपटाने लगी इतने में भैया आवाज दिए ” रिमझिम कहां गई इधर सुनो ” मैं रूम में आई फिर दरवाजा बंद कर खुद अपने टॉप्स और स्कर्ट उतार नंगी हो गई, बेड पर आई और उनके चादर को तन पर से हटा दी तो उनका टाईट लन्ड देख मेरा मन डोल गया था और मैं उसे पकड़ पूछी ” निलेश इसे चूसूं क्या
( निलेश हाथ बढ़ाए चूची दबाने लगा ) हां जानू वैसे तुझे और चटवाने का मन है क्या ” मैं सर हिलाकर हामी भर दी फिर उन्होने मुझे अपने तन पर ही लेटने को बोला और मैं उनके बदन पर लेटी लेकिन मेरा चेहरा उनके लन्ड की ओर था तो मेरी फैली जांघो के बीच और चूतड के नीचे उनका चेहरा था, मैं मोबाइल में कुछेक पोर्न मूवी देखी थी और उसी अंदाज में भैया मेरे साथ योनि चुम्बन करने लगे…. अगले भाग में पढ़िए की उन्होने मेरे साथ क्या क्या किया।

This content appeared first on new sex story .com

Also Read: Mama Ke Ladke Ne Choda – Hindi Sex Kahani

This story भैया के हवस की शिकार हुई appeared first on erosstories.com