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पति और उसका दोस्त : दीपा की रातें (भाग २)

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फ्रेंड्स
पिछले भाग के आगे… मैं तो कुछ देर अपने पति विवेक से चुदाई साथ ही निखिल का लन्ड चूसते हुए मुंह का प्यास बुझाई, चूत रसीली हो गई तो फ्रेश होने गई और वापस आई तो विवेक सोफ़ा पर बैठा हुआ था जबकि निखिल उसके सामने बैठकर उसके लन्ड को मुंह में लिए चूस रहा था, मैं विवेक के बगल में बैठ गई फिर उसके चेहरे को चूमने लगी तो वो मेरे गाल चूमता हुआ चूची दबाने लगा। मेरा चेहरा उसकी ओर था तो वो मेरे रसीले ओंठ मुंह में भर चूसने लगा, निखिल तो पति का लन्ड मुंह से निकाल जीभ से चाटने लगा तो मैं बोली ” अब बेड पर चला जाए क्यों निखिल ” और तीनों गेस्ट रूम आ गए, मैं लेट गई तो मेरे चेहरे के पास विवेक बैठ गया जबकि निखिल मेरी जांघों को फैलाकर बूर चूमना शुरु किया, मेरे चिकने चूत पर ओंठ रख चुम्बन दे रहा था तो विवेक मेरे मुंह में अपना लन्ड घुसाने लगा और मैं कोहनी के बल चेहरा को ऊपर की और पूरा मुंह खोले विवेक का लन्ड अन्दर लिए चूसने लगी, निखिल मेरी चूत को उंगली से फैलाया फिर जीभ से चाटने लगा और मैं विवेक के कमर में हाथ डालकर चेहरा आगे पीछे करते हुए मुखमैथुन करने लगी, एक ओर बूर में जीभ था तो दूसरी ओर मुंह में लन्ड और क्या चाहिए था मुझे। मैं अब लन्ड मुंह से निकाल जीभ से चाटने लगी तो निखिल मेरी बूर में उंगली घुसाया और कुरेदने लगा इतना ही नहीं बूर के दरार में जीभ भी डाले हुआ था और मैं आहें भर रही थी ” आह ओह उह आआआह्हह अब अंदर घुसाओ निखिल ” तो निखिल चेहरा ऊपर किया फिर लन्ड पकड़े बूर में घुसाने लगा और उसका आधा लन्ड घुसते ही मैं मस्त हो गई तो मेरा पति विवेक मेरे बूब्स को मुंह में लिया और चूसने लगा, निखिल जोर से धक्का देकर चुदाई करने लगा तो मैं विवेक को छाती से लगाए स्तनपान करा रही थी साथ ही चूतड को थोड़ा ऊपर नीचे कर रही थी जबकि निखिल का लन्ड चूत को धकाधक चोदे जा रहा था, विवेक चूची मुंह से निकाल मेरे दूसरे स्तन को मुंह में लिया फिर चूसते हुए मेरे बदन को गर्म कर रहा था तो निखिल के लन्ड से बूर को काफी मजा मिलने लगा ” आह ओह उह और जोर तेजी से चोद साले ” तो विवेक मेरी चूची मुंह से निकाल दिया और निखिल मेरे बदन पर लेटकर चोदने लगा तो मैं उसके गाल चूमते हुए कमर पर हाथ लगाई फिर चूतड उछालना शुरू की और दोनों सम्भोग क्रिया में मस्त हो गए, मेरी रसीली चूत लन्ड का धक्का सहते हुए गर्म हो चुकी थी तो मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में मस्त थी ” और तेज चोद ना फाड़ दे मेरी बूर को
( निखिल मेरे ओंठ चूम बदन पर से हटा ) क्या साली फटे हुए को क्या फाड़ना ” और मैं बेड पर लेटी रही तो निखिल उठकर फ्रेश होने चला गया, विवेक वापस आया और लेट गया तो मैं बोली ” क्या कॉउ गर्ल पोजिशन में चुदाऊं
( वो हंस दिया ) तुम्हारी मर्जी ” और फिर मैं उठकर बैठ गई।
विवेक लेटा हुआ था तो मैं उसके कमर के ऊपर जांघें फैलाई बैठ गई, मेरी चूत विवेक के लन्ड के सामने था और वो मेरे कमर को पकड़ा तो मैं उसके लन्ड पकड़ चूत में घुसाई फिर चूतड को नीचे की ओर करते हुए लन्ड घुसेड़ने लगी तभी विवेक मेरे चूत में नीचे से धक्का दिया और चोदने लगा तो मैं चूतड को ऊपर नीचे करते हुए चुदाने लगी, मेरी बूर फैली हुई थी और अनगिनत लन्ड को इसमें एंट्री मिली थी। मैं पिछले ७-८ मिनट से चूत चुदाई का मजा ले रही थी और अब विवेक धक्का देना छोड़ दिया तो मैं उसके ऊपर से हटी फिर लेट गई तो निखिल मेरी चूतड के नीचे तकिया लगाया और चूत को चूमना शुरु किया, मेरी चूत तो आग की भट्टी बन चुकी थी जिसमें निखिल अपना जीभ डाल चाटने लगा और मैं आहें भरने लगी ” आह ओह उह उई लन्ड से चोद ना मादरजात क्या कुत्ते की तरह चाट रहा है ” तो निखिल जीभ निकाल घुटने के बल बैठा फिर लन्ड को बूर में घुसाने लगा, आधा लन्ड घुसते ही धक्का देकर चुदाई करने लगा तो मैं लेटकर चुदवाने में मस्त थी और निखिल मेरे ऊपर सवार हुए धकाधक चुदाई करता हुआ मेरे गाल चूमने लगा तो मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने लगी ” आह ओह आआआअह्ह उई बस मेरा दुबारा निकलेगा ” और मेरी चूत रस छोड़ दी लेकिन निखिल का लन्ड भी बूर में वीर्य स्खलित कर शांत पड़ गया तो मैं उसके गाल चूम ली ” क्यों निखिल बहुत जल्दी झड़ गया
( निखिल बूर से लन्ड निकाल लिया ) क्या करूं डार्लिंग ” और मैं उठकर फ्रेश होने गई फिर बूर को साफ कर वापस बेड पर आई, बेड पर लेट गई तो विवेक मेरे चूची दबाने लगा ” अब तेरी गांड़ चोदूंगा
( मैं हंस दी ) पहले मेरी चूत की खुजली शांत करो फिर गांड़ चोदना ”
मैं नंगे लेटी हुई थी तो विवेक मेरे जांघों को फैलाकर बूर सहलाने लगा और इतने में निखिल वाशरूम से निकला तो साले का लन्ड अब भी टाईट लग रहा था, मैं उसे देख पूछी ” क्यों देवर जी अभी तो आपका औजार झड़ा था फिर इतनी जल्दी खड़ा हो गया
( निखिल बेड पर आकर लेटा ) इतनी हॉट और सेक्सी भाभी यदि सामने नंगी पड़ी हो तो फिर लन्ड कैसे आराम से रहेगा ” और विवेक मेरे चूत में लन्ड घुसाया फिर धीरे से आधा लन्ड घुसाकर जोर का धक्का दे मारा तो मैं चिहुंक उठी ” उई फट जायेगी जरा आराम से
( विवेक दे दनादन धक्का देता हुआ चूची दबाने लगा ) हां साली गैरों से चुदाते समय तो नहीं फटती
( मैं हंस दी ) आखिर आदत भी तो तुम ही लगाए, नहीं तो सिर्फ तेरे लन्ड का ही स्वाद चख पाती ” और विवेक मेरे ऊपर सवार होकर चोदने लगा तो मैं उसके कमर में हाथ डाले चूतड उछालना शुरू की, तभी निखिल लेटा हुआ मेरी ओर देख रहा था तो मेरी चूत दो दो लन्ड का मजा ले रही थी लेकिन अभी तो विवेक से चुदाई कराते हुए अपना कर्तव्य निर्वहन कर रही थी, मेरी चूत अब दुबारा से गर्म हो गई तो मैं चूतड स्थिर किए उसके चेहरे को चूमने लगी और विवेक अब चोदता हुआ हांफने लगा तो मैं उसके पीठ सहलाते हुए पूछी ” लगता है तेरा लन्ड जल्द ही दम तोड़ देगा
( विवेक बोला ) हां डार्लिंग ये लो मेरा रस निकला ” और मेरी चूत वीर्य से लबालब हो गई फिर विवेक मेरे ऊपर से हटा, मैं नंगे लेटी रही और मेरा बदन तो दो मर्दों के साथ घंटे भर तक सेक्स करके थकान महसूस कर रहा था, आगे क्या हुआ, इंतजार कीजिए।

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