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कामिनी की कामुक गाथा (भाग 8)

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पिछली कड़ी में आप लोगों ने पढ़ा कि हरिया चाचा, याने मेरे बॉयोलॉजिकल, वास्तविक पिता नेंं मेरे शरीर से अपनी कामाग्नि ठंढी की और मुझे अपने लिंग और संभोग क्षमता से बेहद खुशी प्रदान की। स्खलन के बाद पूर्ण संतुष्टि की मुस्कान के साथ मुझे अपनी बाहों में कस कर भींचे पूछ बैठे, “ई बताओ बिटिया तुझे इसके पहले किसने चोदा है? सच बताना, शरमाओ मत। हम कौनो को नहीं बताएंगे।”

मैं थोड़ी झिझकी, फिर बोली, “सच बताऊं? बुरा तो नहीं मानेंगे ना?”

“अरे काहे का बुरा मानना। औरत मरद में तो ई सब होते ही रहता है। मगर तुम तो इतना कम उमर में पूरा औरत के जैसी मजा ले कर चुदवा रही थी। इसका मतलब पहले से तुझे चुदाई का मजा मिल चुका है। है ना?” वे बोले।

फिर मैंने एक एक करके शुरू से लेकर अब तक की सारी घटनाएं बताती चली गई। चाचाजी विस्मय से आंखें फाड़कर सुनते जा रहे थे। “तो इसका मतलब तेरे नानाजी, दादाजी और बड़े दादाजी नें चोद चोद कर इतनी कम उमर में ही रंडी बना दिया, साले नतनी और पोती को भी नहीं छोड़ा। अबतक तू हमको मिला कर सात लोगों से चुदवा चुकी हैं। खूब सीख गई है रे तू मेरी बुर चोदी। खूब मजा आया तुझे चोद कर बिटिया।” वे बोले।

“हां राजा, मुझे भी बड़ा मजा आया, ऐसी चुदाई, वाह चाचा जी, आपने तो मुझे अपनी ग़ुलाम बना लिया। आज से पहले ऐसा लंड नहीं मिला था चाचाजी। आप तो बहुत मस्त चदक्कड़ हो मेरे बलमा। आज से मैं आप की भी कुत्ती बन गई मेरे प्यारे बूढ़े कुत्ते। आई लव यू,” कहते हुए मैं फिर उसे बेसाख्ता चूम उठी। मेरी इस अदा पर चाचा जी तो निहाल हो उठे। उन्होंने भी मेरे चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी।

“अच्छा मैं तो अपनी कहानी बता चुकी हूं, अब आप अपनी बताईए, कितनों को चोद चुके हैं अबतक?” अब हम आपस में पूरी तरह खुल चुके थे। चाचाजी ने बताया, ” हम शादी नहीं किये हैं मगर अब तक 10 औरतों को चोद चुके हैं।”

“हाय राम 10 औरतों को? कहां कहां की औरतें थीं?” मैं ने पूछा।

“अरे अब हमरा मुंह ज्यादा मत खुलवा रे मेरी बुर चोदी बिटिया” वे बोल पड़े।

“नहीं ऐसा नहीं चलेगा। मैं सब कुछ बताई ना। आपको भी बताना होगा, आपके लौड़े की कसम है।” मैं बेहया नंगी उनके नंगे जिस्म से चिपकी ठुनकते हुए पूछी।

“तू सुन न पाएगी, जिद ना कर लड़की।” वे बोले।

संभोग सुख से तृप्त, नंग धड़ंग, बेहद बेशर्मी से उनके बनमानुषि नंगे बदन से चिपकी मचलते हुए जिद करने लगी “चाहे कुछ भी हो जाए मैं तो सुन कर रहूंगी।”

“ठीक है तो सुन। आज से 22 साल पहृले सबसे पहले एक लड़की को चोदा और ऊ भी इसी घर में। पता है ऊ लड़की कौन थी?” उन्होंने कहा।

“कौन थी? बताओ ना”, मैंने बेसब्री से पूछा।

“तोहरी मां।” वे बोले।

सुन कर भौंचक्की रह गई। “हाय राम मेरी मां को चोदे हैं चाचा जी?” मेरी आंखें फटी की फटी रह गई।

“हां रे हां, तुम्हारी मां उस समय 18 साल की थी और हम 38 साल के। हम तो बचपन से ई घर में काम कर रहे हैं ना। तोहरे नानाजी ऐसा अल्बम और फिल्म शुरू से ही देखते आ रहे हैं। एक दिन तोहरी मां के हाथ ऐसा ही एक कैसेट लगा। उस समय वीसीआर और कैसेट का जमाना था। वह कॉलेज से आकर वीसीआर में कैसेट डाल कर चालू की तो ऐसा ही फिल्म चलने लगा। उस समय घर में और कोई नहीं था हमरे सिवा। तोहरे नानाजी और नानी किसी रिश्तेदार के यहां गए हुए थे। ऐसा ही चुदाई का खेल टीवी पर चल रहा था और देखते देखते ऊ भी मस्ती में आ गयी। पहिले कुर्ता के ऊपर से ही चूची दबाना और सलवार के ऊपर से ही चूत रगड़ना चालू किया। हम जब वहां आए तब तक अपना पूरा कपड़ा उतार के चूची और चूत रगड़े जा रही थी। हम कब कमरे में आए उसको पता ही नहीं चला। ऐसा गजब का नजारा देख कर मेरा पूरा बदन गनगना उठा और लंड एकदम टनटना गया। घर में उस वक्त सिर्फ हम दोनों अकेले थे। शाम तक तेरे नानाजी और नानी घर लौटने वाले नहीं थे। हमसे और बर्दाश्त नहीं हुआ और हम उसके सामने आ गये। ऊ बिना कपड़ों के नंगी हड़बड़ा कर खड़ी हो गई और हमने जब उसकी गोल गोल चिकनी चूंचियों को और पनियायी चिकनी बुर को देखा तो पागल हो गया। हमने बिना कुछ कहे उसको वहीं धर के सोफा पर पटक दिया और उसकी चूचियों को मसलना और चूसना शुरू कर दिया।

वह नहीं नहीं करती रही, ” नहीं नहीं नहीं, मेरे साथ ऐसा मत करो ना। छोड़ो मुझे। छोड़ो हरामी।” मगर हमने उसको छोड़ने के बदले उसकी पनियायी चूत में अपनी उंगली भच्च से घुसा कर अन्दर बाहर करने लगा। वह मना करती रही, रोती रही मगर मैं लगातार चूची दबाता रहा और उंगली से चूत की चुदाई करता रहा। धीरे धीरे उसका मना करना और रोना बंद हो गया और मस्ती में आकर आह उह करने लगी। मैं समझ गया कि अब मैं आराम से चोद लूंगा। जब पजामा उतार कर अपना लंड निकाला तो वह मेरा लंड देख कर घबरा गई। फिर से ना ना करने लगी।

“नहीं हरी, हाय मर जाऊंगी, नहीं भैया, नहीं” बोलती रही, गिड़गिड़ाती रही मगर मुझ पर तो उसकी नंगी जवानी का नशा सवार हो गया था, ऐसी मस्त लौंडिया नंगी सामने हो तो कौन बेेवकूफ चोदे बिना छोड़ देगा भला। वह चिििल्ललाती रही, छटपटाती रही मगर अब मैं कहां मानने वाला था, दोनों पैर फैला कर अलग किया और उसकी जांघों के बीच आ कर चिकनी नयी नकोर चूत के मुहाने पर फनफनाया लंड रख कर रगड़ना शुरू कर दिया। अब उसका मना करना फिर धीरे धीरे बंद होता गया और सी सी कर सिसियाने लगी। “इस्स्स इस्स्स” करने लगी।

“बस फिर क्या था हमने एक जोरदार धक्का लगा कर आधा लंड उसकी चूत में उतार दिया।

वह चीख पड़ी, “हाय राम मर गई, छोड़ दो भैया, नहीं, मत करो ना, अम्मा ऊऊऊऊऊऊऊऊ”।

उसकी चूत फट गई थी, झिल्ली फट गई। खून निकल पड़ा मगर मैं रुका नहीं और एक जोरदार धक्का लगा कर पूरा लंड पेल दिया।

वह चिचिया रही थी, रो रही थी, “हाय मां मर गई, मेरी चूत फट गई, आह हरामी हट,” मगर हमें उसके रोने कलपने से क्या लेना देना था, दे दनादन जो चोदना चालू किया तो धीरे-धीरे उसका रोना गाना बंद हुआ और चुदाई की मस्ती में सिसियाने लगी।

“आह ओह हाय आह मजा आ रहा है राजा आह ओह चोद राजा” उसकी आवाज सुनकर मैं पूरा जंगली बन गया और जोर जोर से चोदने लगा, “अब मजा आ रहा है ना, आह ओह ओह, इसी के लिए इतना नाटक कर रही थी, ले मेरा लौड़ा, ले मेरी रानी, आह आह” बोलता हुआ मजेे में चोदता रहा। टाईट चूचियों को दबा दबा कर खूब चोदा। एक घंटे के अंदर उसी जगह उसको दो बार जमकर चोदा। इतना टाईट चूत को चोदने में जो मजा आया कि पूछो मत। वह भी खूब मजा ले ले कर चुदवाती रही। चुदवाने को तो चुदवा लिया उसने, मगर दो दिन तक ठीक से चल नहीं पा रही थी। तेरी नानी ने पूछा तो बोली पैर में चोट लगी है।

उस दिन के बाद तो हमको चोदने का फ्री लाइसेंस मिल गया था। उसको भी मेरा लौड़ा का चस्का लग गया था। तब से जब भी मौका मिलता हम चोदा चोदी कर लेते थे। कभी ड्राइंग रूम में, कभी उसी के रूम में, कभी बगीचे में, कभी पास वाले जंगल में। उसका गांड़ भी बहुत मस्त था। क्ई बार हम उसका गांड़ चोदे हैं, वाह कितना गोल गोल और टाइट गांड़ था उसका। वह भी गांड़ मरवा के बहुत खुश होती थी। जब माहवारी चलता था तो हम उसका गांड़ चोदते थे। वह मेरे लंड की दीवानी हो गई थी और मैं उसकी जवान चूत का रसिया हो गया था। फिर चार साल बाद उसकी शादी हो गई।

सुनते सुनते मैं गनगना उठी। “हाय राम आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले हरी चाचा। शादी के पहले ही मेरी मां की चूत और गांड़ का उद्घाटन कर डाले। खूब मज़ा लूटे मेरी मां से। शादी के बाद फिर मां को कभी चोदने का मौका मिला कि नहीं?” मैं उसके बदन से चिपकते हुए पूछी।

“चोदा ना, कई बार चोदा। जब भी यहां आती थी तो खूब चोदता था। एक बात बताऊं? बुरा मत मानना। ई बात हम इस लिए बता रहा हूं काहे कि तू अपने नाना और दादाजी लोग से चुद चुकी हो, नाता रिश्ता भूल कर।” वह बोल रहा था कि मैं उत्सुकता में बीच में ही बोल पड़ी, “बोलिए ना मैं भला बुरा क्यों मानुंगी। नाता रिश्ता गया मेरी चूत और गांड़ में।” मैं किसी छिनाल की तरह उनके लंड से खेलती हुई ठुनकी।

“ठीक है तो सुन, असल में तेरा बाप नाम का बाप है। शादी के 4 साल बाद भी तेरी मां को बच्चा नहीं हुआ तो तेरी मां ने अपना जांच कराया और पता चला कि तेरी मां के अंदर कोई दोष नहीं है। उसको समझ में आ गया कि उसके पति में ही कमी है। फिर जब वह ननिहाल आई तो हमको पता चला और हमने कहा कि हम तुझे मां बनाएंगे। फिर एक हफ्ते तक वह यहां रही और इस बीच में हमने उसको हर रोज धुआंधार चोदा, एक एक दिन में तीन तीन चार चार बार। फिर जब वह ससुराल गयी तो दूसरे महीने माहवारी नहीं हुआ। समझ गई कि गर्भ ठहर गया है। तीसरे महीने पक्का हो गया कि वह मां बनने वाली है। जानती हो 9 महीने बाद कौन पैदा हुआ?”

मैं समझ रही थी फिर भी अनजान बनते हुए पूछी, “कौन?”

“तू रे हरामजादी, तू। हम हैं तेरा बाप और तू मेरी बुर चोदी बेटी।” बड़ी ही बेशर्मी से बोले।

“हाय राम अपनी बेटी को चोदते हुए लाज नहीं आई, हरामी पापा। मुझे तो पता नहीं था, मगर आपको तो पता था, फिर भी छोड़े नहीं, चोद ही लिए।” मैं नकली गुस्से में बोली।

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“अरे लंड ना चीन्हें बेटी। वैसे भी तू कौन सी सती सावित्री हैं। नानाजी, दादाजी, ड्राईवर, सरदारजी, कंडक्टर, सबका लौड़ा खा खा के रंडी तो बन ही गई हो। हम भी चोद लिए तो का ग़लत किया।” बेशरम पापा या हरी चाचा ने कहा।

“इसी लंड से मेरी मां की चूत चोदे और मुझे पैदा किया और अब उसी मां की चूत से निकली बेटी की चूत भी चोद डाला मादरचोद पापा। वाह चोदू पापा आपने तो अधर्म की अति कर डाली। इसी दिन के लिए मैं बेटी पैदा हुई थी क्या? खैर, अब जो होना था वो तो हो गया। जो भी होता है अच्छे के लिए होता है। ऐसा नहीं हुआ होता तो मुझे इतना मस्त लंड से चुदने का सौभाग्य कैसे मिलता। सच में, मैं तो तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई हूं मेरे जंगली चोदू पापा।” कहकर उनके लंड को पकड़े पकड़े उनके चेहरे पर चुम्बनों की बौछार कर बैठी। वे मुस्कुरा उठे।

“अब आगे सुन बिटिया।” वे बोले, मगर मैं बीच में ही बोल उठी, “अब आगे बाद में, देखिए आप की कहानी सुनकर मैं फिर से गरम हो गई पापाजी, आपका लौड़ा भी तो बमक उठा है, एक बार फिर से चोद लीजिए ना प्लीज।” मैं चुदने को पसर गई। “ठीक है मेरी चूत मरानी, ले अभिए चोदते हैं,” कहते हुए मेरी टांगों को फैला कर उठाया और अपने कंधे पर रख कर सीधे अपना लौड़ा मेरी पनियायी बुर में उतार दिया। फिर जो घमासान चुदाई हुई कि पूछो ही मत। अब तो मैं सब कुछ जानते बूझते अपने सगे बाप के लंड से एक बेशरम छिनाल की तरह अपनी बुर चुदवा रही थी। इसका भी एक अलग ही रोमांच था। आधे घंटे तक चुदाई का धुआंधार खेल चलता रहा फिर हम दोनों बाप बेटी झड़ कर हांफते कांपते शान्त हो गये। अब जब थोड़ी देर बाद हमने होश संभाला तो मैं ने कहा, “हां अब बताईए आगे की कहानी”।

अब उसने आगे की कहानी शुरू की। “शादी के बाद तेरी मां की तो बिदाई हो गयी और मैं बुर चोदने को तड़प रहा था। कोई मिल ही नहीं रही थी जिसे चोद कर अपनी प्यास बुझाएं। मगर एक दिन हमारे किस्मत का ताला खुल गया। एक दिन हम नहा कर तौलिया लपेटे बाहर सूख रहा अंडरवियर लेने बाहर आया तो अचानक मेरा गमछा खुल कर गिर पड़ा, ठीक उसी समय तेरी नानी पिछवाड़े में कचरा फेंकने आ रही थी, उसने ने मेरा मूसल जैसा लंड देख लिया। मैं ने उसे नहीं देखा था पर उसने मेरा मस्त लौड़ा देख लिया था। उसी दिन दोपहर को खाना खाने के बाद मुझे कमर दर्द के बहाने से कमरे में बुलाया और कमरा बंद कर के कमर में तेल लगाने बोली। वह गोल मटोल 40 साल की सुंदर औरत थी। वह बिस्तर पर उल्टा लेट गई और हम उसके कमर में तेल लगाने लगे तो बोली, “और थोड़ा नीचे” हम और नीचे तेल लगाने लगे, फिर बोली, “और थोड़ा नीचे” हम ऐसा ही करते गये।, मैं जब कमर से नीचे तेल लगाने लगा तो तेल साड़ी में नहीं लगे सोचकर थोड़ा नीचे खिसकाने लगा तो पता चला कि उसने पेटीकोट तो क्या, कुछ भी नहीं पहना था और साड़ी इतना ढीला था कि मेरा हाथ फिसलकर सीधा उसकी गांड़ पर जा पहुंचा। मैं हड़बड़ा कर साथ हटाने लगा तो बोली, “हाथ मत हटाओ हरी के बच्चे, बहुत अच्छा लग रहा है।” अब हमारे समझ में सब कुछ आ गया। वह तो हमसे चुदने के लिए तैयार बैठी थी। तेरी नानी का बड़ा सा गांड़ वैसे भी बहुत मस्त था। मेरा लंड फनफना उठा। तेरी नानी ने देखा कि मेरा लंड फनफना उठा है तो एक हाथ से मेरा लंड पैजामे के ऊपर से ही पकड़ लिया और मुठियाने लगी। मैं भी तेरी नानी का गांड़ जोर जोर से दबाने लगा। वह आह उह करने लगी थी। हमने धीरे धीरे तेरी नानी का गांड़ के छेद में तेल से भीगा उंगली डाल कर अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। फिर गांड़ से नीचे बड़ी सी फूली हुई झांटों से भरी भैंस जैसी बुर पर उंगली रगड़ना शुरू किया। वह मस्ती में “उस्स इस्स्स आह उह” कर रही थी।

“अब देखता क्या है मादरचोद, अब भी बोलना पड़ेगा क्या। चोद डाल हरामखोर” तेरी नानी बोली। पूरा गांड़ और बूर तेल और चूत का रस से छपछपा गया था। हमको अब और का चाहिए था, इतना खुला निमंत्रण मिल रहा था सो झट से पैजामे को खोल फेंका और, झटके से तेरी नानी का साड़ी ब्लाउज खोल फेंका। गजब का बदन था तेरी नानी का। बड़ी बड़ी थल थल करती चूचियां, चर्बीदार पेट, मोटे मोटे चूतड़ और घने झांटों से भरा भैंस जैसा बड़ा सा फूला हुआ भोंसड़ा। हमने थलथलाती चूचियों को मसलना चूसना शुरू कर दिया। झांट से भरी फूली हुई बुर में उंगली डाल कर अंदर-बाहर करने लगा। जब वह सिसकारियां निकालने लगी “अब उंगली से ही चोदेगा क्या हरामी, अपना लंड दिखाने के लिए रखा है क्या, जिसे देख कर मैं ने तुझे यहां बुलाया है।” वह बड़ी बेताबी से बोली।

मैंने आव देखा न ताव अपना लंड एक ही झटके में उसकी भैंस जैसी बुर में उतार दिया। वह चीख पड़ी, “हाय मर गई रे मादरचोद, एक ही बार में ठोक दिया इतना मोटा लौड़ा, मेरी चूत फ़ाड़ देगा क्या हरामी, बाप रे बाप।” उतना बड़ा भोंसड़ा में भी बहुत टाईट घुसा था। अंदर तेरी नानी की चूत किसी भट्ठी की तरह गरम था। मैं अब ताव में आ चुका था, डर भय खतम, जंगली जानवर की तरह भंभोड़ लेने को तैयार “चुप्प बुर चोदी, अब हमरा लौड़ा ले हुम, चिल्ला मत कुतिया। अभी कह रही थी लौड़ा से चोद, ई है हमरा लौड़ा, अब लौड़ा पेला तो चिचियाने लगी साली रंडी।” कहते हुए उसकी कमर को पकड़ कर थोड़ा और उठाया, गांड़ ऊपर उठ गया, भैंस जैसा बुर एकदम बढ़िया से चोदने के लिए सामने हो गया, उसे कस कर पकड़ा और कुतिया की तरह ही पीछे से जो भकाभक चोदना चालू किया कि वह “आह फाड़ दिया रे मादरचोद, मार डाला हरामी कुत्ते, मेरी बुर का भुर्ता बना डाला कमीने, हाय मैं क्यों इस गधे को चोदने बुलाई, आआ्आ्आह।” चीखने चिल्लाने लगी। हम अब कहां रुकने वाले थे, धकाधक कुत्ते की तरह चोदे जा रहे थे। “साली रंडी, हमसे चूत मरवाने को मरी जा रही थी, ले ले मेरा लौड़ा अपनी चूत में, हम हु, मस्त चूत है रे रानी, खूब मज़ा आ रहा है, और ले मेरा लौड़ा अपना भोंसड़ा में, आज हम तुमको अपना लौड़ा से स्वर्ग दिखा देंगे।” कहता जा रहा था।

फिर जब धीरे धीरे दर्द कम हुआ तो वही बुर चोदी बोलने लगी, “आह राजा, ओह राजा, चोद साले और जोर से चोद सैंया, हाय मेरे राजा, ओ्ओ्ओ्ओह मेरे चोदू बलमा ््आ््आ्््आ््आ्आ।” पीछे से धक्का भी लगाने लगी। बहुत मजा आ रहा था। लगभग आधा घंटा लगातार चोदता रहा और इस बीच वह दो बार झड़ चुकी थी। फिर जब हम अपना माल उसकी बुर में गिराने लगे तो तीसरी बार छरछरा कर झड़ी, “हाय््य्य्य स्स्स झड़ी रे मैं झड़ी” कहते हुए थरथरा कर बिस्तर पर ही गिर पड़ी और मैं उसके ऊपर ही गिर कर चिपक गया और जबतक पूरा खलास नहीं हुआ वैसा ही चिपक कर पड़ा रहा। तेरी नानी की चूत मेरे लंड से गिरते एक एक बूंद रस को चूसती रही। मजा आ गया तेरी नानी को चोद कर। तेरी नानी पसीने से लथपथ हांफती कांपती हुई बोली, “बड़ा मजा आया हरिया। लक्ष्मी के पापा तो खाली कुत्ते जैसे चोद कर अपने लंड में फंसा लेता है और बहुत रुलाता है। मगर तू मस्त चुदक्कड़ है। अब से मैं तेरी औरत हुई और तू मेरा मरद।” फिर नंगी भैंस मुझसे लिपट कर चूमने लगी। हम बोले, “हां रानी, अब से हम तेरा मरद हुआ और तू हमारी लंड रानी औरत।” उस दिन हमने उसको और एक बार चोदा। उस दिन के बाद हमको जब मौका मिलता चोद लेते थे। कभी बाथरूम में, कभी किचन में साड़ी उठा कर खड़े खड़े, कभी स्टोर रूम में, कभी बगीचे की झाड़ी के अंदर और कभी सामने वाले जंगल में। फिर वह बीमार हुई और आज से 10 साल पहले मर गई।

उसके मरने के बाद हम फिर चोदने के लिए तड़पने लगा।। मगर हमारा किस्मत अच्छा था कि हमको ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा और एक मस्त औरत जल्दी ही मिल गई चोदने के लिए। वह थी हमारी कामवाली बाई, काली कलूटी, मोटी ताज़ी, मगर एकदम सेक्सी, जिसकी उमर उस समय करीब 35 साल रही होगी।उसका पति हमेशा बीमार रहता था। उसको कई दिनों से चोदने के फिराक में था और एक दिन सुनहरा मौका मिल गया। उसका बीमार और कमजोर मर्द उसको चुदाई का पूरा सुख क्या दे पाता होगा। उस दिन पहली बार जब उसको चोदा, हमारे सिवा घर में और कोई नहीं था। वह घुटने के बल झुकी हुई फर्श का पोछा लगा रही थी। हम ने देखा कि उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाऊज़ से आधी बाहर की ओर झांक रही थी और बाहर निकलने को तरस रही थी। बड़ी बड़ी गांड़ पीछे से बड़े ही मस्त ढंग से उठी हुई हिल रही थी। हमने जब उसको उस हालत में देखा तो मेरा लौड़ा फनफना उठा। मौका अच्छा था। हमने सोच लिया कि आज इसको चोद कर रहेंगे। चुपचाप अपना कपड़ा उतार कर नंगा हो गया और पीछे से जाकर उसका साड़ी उठा दिया। साड़ी के अंदर वह कुछ नहीं पहनी थी। पूरा काला काला चूत और गांड़ खुल के मेरे सामने था। वह हकबका गयी और उठने वाली थी कि हमने उसको वहीं पटक दिया। उसने जब हमको बिना कपड़ों के नंगा देखा और मेरा टनटनाया लौड़ा देखा तो घबराकर बोली “नहीं हरिया नहीं, हमको छोड़ दो, खराब मत करो।” वह रोने लगी।

“चुप साली हरामजादी, बहुत दिन बाद तो तुमको चोदने का मौका मिला है। देख कितना मस्त बदन है तेरा। क्या मस्त चूची है, क्या मस्त गांड़ है, क्या मस्त चूत है। देख मेरा लौड़ा तुमको चोदने के लिए कैसे उछल रहा है। तू आज खुश हो जाएगी। तू अपने बीमार कमजोर मरद को भूल जाएगी।” हम बोले।

“नहीं हरिया, इतना मोटा और लम्बा लंड से मैं मर जाऊंगी, हमको छोड़ दो ना” फिर रोने लगी।

“साली तू ऐसे नहीं मानेगी।” हमनें कहा और जबरदस्ती उसका सारा कपड़ा उतार के नंगी कर दिया। उसका मस्त गठा हुआ शरीर, बड़े बड़े चूचियां, गोल गोल बड़ी बड़ी काली चिकनी गांड़, झांटों से भरी काली दपदप करती चूत, देख कर मैं तो पागल हो उठा। वह और जोर से रोने लगी। हमने गुस्से से उसको वहीं पटक दिया और दोनों पैर फैला कर अपना लौड़ा एक ही झटके में उसकी चूत में ठोक दिया।

“आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह मर गई ई रे्ए्ए्” चीख पड़ी। हमनें जोर से उसका मुंह बंद किया और डांटा, “चोप्प्प हर्र्र्र्र्रामजादी कुत्ती। थोड़ा शांत रहो फिर देख कितना मज़ा आता है।” मेरा लौड़ा पूरा जड़ तक उसकी चूत में फंसाकर उसके दोनों पैर फैला कर उठाया और वहीं जमीन पर धकाधक चोदने लगा,”आह रानी क्या मस्त चूत है रे हरामजादी,”।

थोड़ा देर तो वह दर्द के मारे रोती कलपती छटपटाती रही, “हे राम, हे बप्पा, हे माई, मार दिया रे, फाड़ दिया रे, हाय हाय आ्आ्आह”। मगर थोड़ा ही देर में ऊ भी मस्ती में भर के सिसियाने लगी। “आह ओह हरिया, हाय राजा, बहुत मजा आ रहा है राजा, आह चोद हरामी”। करीब आधे घंटे चोद चोद के हम अपना माल झाड़ दिया और वह तो मेरा लौड़ा से चुद कर खुशी से पागल हो गई। हम दोनों वहीं लस्त पस्त पड़ गये। “खूब मज़ा दिया राजा, अब तुम्हीं मेरे बलमा हो। अब से जब मर्जी, जैसा मर्जी, हमको चोदना राजा।”

“हां रानी आज से हम तेरा मरद और तू हमरी औरत हुई।” थोड़ा ही देर में फिर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया और उसी समय फिर से उसको कुतिया बना के खूब जम के चोदा। इतना मजा बहुत दिन बाद मिला था। उसके के बाद तो रोज ही उसको चोदने लगे। चार महीने बाद पता चला कि उसको गर्भ ठहर गया।

ऊ बोली कि “ई हमारे प्यार की निशानी है।” शादी के 10 साल बाद ऊ गर्भवती हुई थी, बहुत खुश थी, उसका मरद भी बहुत खुश था, उसको का पता था कि ई बच्चा मेरे लौड़े का फल है। 6 महीने बाद ऊ बोली कि “अब मत चोदो नहीं तो बच्चा खराब हो जाएगा। बच्चा होने के बाद फिर चोदते रहना।”

हम परेशान हो गए। चोदने का चस्का जो लग गया था। कुछ दिन बाद जब बर्दाश्त से बाहर हो गया तो हमने एक सब्जी बेचने वाली औरत को चोदने का प्लान बनाया। वह रोज सवेरे 9 बजे सब्जी ले कर आती थी। 8:30 बजे तुम्हारे नानाजी नाश्ता करके बाहर निकल जाते थे और सीधे 12 बजे घर आते थे। सब्जी बेचने वाली औरत करीब 45 साल की सांवली मोटी और नाटी करीब साढ़े चार फुट की थी। गोल मटोल चेहरा, बड़े बड़े थलथल करते चूचे, बड़े बड़े गोल गोल चूतड़। उस दिन हम सिर्फ लुंगी पहन कर रेडी थे। जब वह गेट पर आई तो हमने उसको गेट के अंदर बुलाया। वह अन्दर आ कर सब्जी की टोकरी नीचे रखकर बैठ गई। उस समय हमारे अलावा घर में और कोई नहीं था, गेट के बाहर रास्ते पर कोई नहीं था। हम सब्जी चुनने के बहाने ऐसे बैठे कि सामने से लुंगी थोड़ा हट गया और मेरा टनटनाया लंड दिखने लगा। हम अनजान बने आराम से सब्जी हाथ में उठा उठा कर देखने लगे। उस औरत की नजर जैसे ही हमारे लंड पर पड़ी, देखती ही रह गई। जैसे ही उसने हमारा चेहरा देखा झट से दूसरी ओर देखने लगी, फिर भी तिरछी नजर से बार बार देखती रही। उसके चेहरे से पता चल गया कि मेरा लौड़ा उसको ललचा रहा है। उसकी सांसें तेज तेज चलने लगी थी।

हमने बोला, “हमको सब्जी ताजा नहीं लग रहा है, हम ई सब्जी नहीं लेंगे”।

ऊ सब्जी वाली अनजान बनते हुए थोड़ा झुक गई जिसके कारण उसकी किलो किलो भर की चूचियां ब्लाउज से बाहर आधा निकल गई, साड़ी थोड़ा सा ऊपर चढ़ाई और थोड़ा पैर फैला कर कर बोली, “ठीक से देखिए ना, अच्छा तो है।”

हमने देखा इतना बड़ा बड़ा मस्त चूची ब्लाउज से आधा बाहर निकल आया था और साड़ी के अंदर उसकी चूत साफ़ साफ़ दिख रही थी। अंदर उसने कुछ नहीं पहना था। वह अनजान बनने का नाटक करती हुई अपना बुर और चूची दिखा रही थी। वह ललचाई नज़रों से तिरछी नजर से मेरा लौड़ा भी देख रही थी और हम उसका चूची और बुर देख रहे थे। हम समझ गए कि मामला फिट हो गया। हम बोले, “हां ठीक तो दिख रहा है मगर खाने में कैसा लगेगा, कैसे पता लगेगा?”

“तो खा के देख लीजिए ना”, वह हमें खुला निमंत्रण दे रही थी।

अब तक मेरा धीरज जवाब दे चुका था। “ठीक है तो चलो टेस्ट करके देखते हैं” हमने उसको घर के अंदर आने को कहा और उसके अंदर आते ही तुरंत दरवाजा बंद कर दिया और उस सब्जी वाली औरत पर झपट पड़ा। फटाफट उसका साड़ी ब्लाउज खोल दिया और उसका नंगा बदन देख कर पागल हो गया। बड़ी बड़ी चूचियां, भारी भारी गांड़, फूला हुआ बूर, झांटों से भरा हुआ। झट से अपना कपड़ा खोल कर वहीं जमीन पर उसको दबोच लिया और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाना और मसलना शुरू कर दिया। मेरा लौड़ा का पूरा साईज देख कर तो उसका होश ही उड़ गया।

“हाय राम, आपका लौड़ा तो बहुत बड़ा है। मेरा बुर फाड़ दीजियेगा। मर जाऊंगी मैं। मत खाइए (चोदिए) हमको।” घबराकर बोली।

“अरे चखने तो दे, तू खुद बोलेगी पूरा खा (चोद) लीजिए हमको।” हम बोले और उसकी फूली हुई बुर किसी कुत्ते की तरह चपड़ चपड़ चाटने लगा। उसकी चूत से पेशाब का गंदा महक आ रहा था मगर हमको उस महक से और ज्यादा जोश चढ़ गया। जोश में आ कर और जोर जोर से सड़प सड़प चाट चाट कर उसको पागल कर दिया।

“आआ्आ्आह राजा, इस्स्स, हाय हाय ओ्ओ्ओ्ओह, अब चोद डालो जी, और मत तड़पाओ राजा” वह गरमा के पागल की तरह बोलने लगी। लोहा गरम था, हमने फटाक से उसके पैर फैला कर उठा लिया, दोनों पैर को अपने कंधे पर चढ़ा लिया और अपना लौड़ा उसकी चूत पर टिका कर एक जोर का धक्का लगा दिया। मेरा लौड़ा उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा जड़ तक घुस गया।

“आ्आ्आह मां मर गई, ओ्ओ्ओ्ओह मेरी बुर फट गई रे बप्पा,” रोने चीखने लगी।

“चुप साली रंडी, एकदम चुप। देख पूरा लंड घुस गया है, थोड़ी देर में ही तू बोलेगी और चोद और चोद।” मैं बोला। इसके बाद उसकी चूतड़ को नीचे से पकड़ कर जम कर चुदाई चालू कर दिया। उसकी चूचियों को चूसने लगा। अब वह भी मस्त हो गई थी और मजे से चूतड़ उछाल उछाल कर हमारे हर धक्के का जवाब देने लगी। “आह राजा, ओह चोदू, इस्स्स इस्स्स उह्ह्ह उह्ह्ह, चोद डालो जी, फाड़ दो मेरी बुर, खा जाओ हमको” बोलती जा रही थी। हम भी दुगुने जोश में भर के भकाभक चोदने लगे। चुदक्कड़ औरत की तरह वह भी इस्स्स इस्स्स करके चुदवाती रही। रुक रुक कर एक घंटे तक चोदता रहा और फिर खलास हो कर वहीं जमीन पर लुढ़क गया। सब्जी वाली तो कितनी बार खलास हूई पता नहीं मगर जब हम उसे चोद कर छोड़ा तो वह एक दम थक कर चूर हो गई थी, पसीने से लथपथ हो गई थी और कुतिया की तरह हांफ रही थी। जब थोड़ी सांस में सांस आई तो “राज्ज्ज्जआ्आ्आ, हम अब तेरी हो गई बलमा, बहुत मस्त चुदक्कड़ हो जी।” बड़ी खुशी से झूम कर बोली।

हम भी बोले, “अब तू रोज सबेरे जब सब्जी लाएगी, हम पहले तुझको चोदेंगे फिर सब्जी खरीदेंगे। तू बड़ी मस्त माल है रानी।” फिर क्या था, सब्जी वाली को रोज़ चोदने लगा। उस सब्जी वाली का नाम पार्वती था मगर हम उसको पारो बोलते थे। हम उसको जैसा मर्जी वैसा चोदता था। चोद चोद के बुर का तो भोंसड़ा बना दिया, गांड़ चोद चोद के और बड़ा कर दिया, चूची एक एक किलो से डेढ़ डेढ़ किलो का बना दिया। वह हमारी गुलाम बन गई थी।

एक दिन हम पारो को चोद रहे थे उसी समय तेरे नानाजी का ड्राइवर करीम आ गया। हम दरवाजा अंदर से बंद नहीं किए थे, वह सीधा अंदर आ कर हम दोनों को नंगे चुदाई करते हुए देख लिया।

“अरे साला हरामी हरिया, अकेले अकेले माल चोद रहे हो? हमारा जरा भी ख्याल नहीं आया मादरचोद? मुझको भी चोदने दे नहीं तो मालिक को बता दूंगा।”

हम घबड़ा गये और बोले, “अरे करीम भाई, मालिक को काहे बताओगे, तुम भी चोद लेना, पहले हम को चोद लेने दे।”

्यह सुनकर पारो बोली, “नहीं नहीं, दो दो लोगों हम नहीं चोदावेंगे।”

“साली हरामजादी, हमको चोदने नहीं देगी तो मालिक को बता दूंगा। सोच लो”। करीम बोला।

“हे भगवान ये हम कहां फंस गए। ठीक है ठीक है, चोद लीजिएगा, मगर मालिक को मत बताइएगा।” घबड़ाई हुई पारो बोली।

“ठीक है हरिया तेरे बाद मैं चोदुंगा। मैं चोदने के लिए तैयार हो रहा हूं।” कहते हुए फटाफट अपना कपड़ा खोल कर रेडी हो गया। उसका लंड भी कम नहीं था। सामने का चमड़ा कटा हुआ था, इसलिए बड़ा सा फूला हुआ सुपाड़ा पूरा दिख रहा था, लंड पूरा 9 इंच लम्बा और तीन इंच मोटा था।

हम जैसे ही चोद कर उठे, तुरंत करीम पारो पर सवार हो गया और चुदी हुई बुर में एक ही बार में भक्क से अपना लंड ठोक दिया। पारो चीख पड़ी क्योंकि उसका सुपाड़ा बहुत बड़ा था। करीम को उसकी चीख चिल्लाहट से क्या मतलब था, वह तो भूखा भेड़िए की तरह टूट पड़ा और दनादन चोदने लगा।

“हाय मार डाला रे, आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह, मैया रे, बप्पा रे,” कहते हुए रो रही थी, चीख रही थी, छटपटा रही थी मगर करीम हरामी कई दिन से चूत का भूखा, कुत्ते की तरह चोदे जा रहा था। वह भी हट्टा-कट्टा पठान था, रगड़ रगड़ के चोद रहा था।

“साली रंडी, अभी हरिया चोद रहा था तो खूब मज़ा आ रहा था और अभी हम चोदने लगे तो लगी मैया बप्पा करने।” बोलते हुए आधा घंटा तक भकाभक चोदा। पारो शुरू में तो कुछ देर रोती रही फिर उसको मजा मिलने लगा और अब बड़बड़ाने लगी थी, “आह राजा ््ज््ज्््ज््ज्ज््ज््ज्््ज््ज्जा आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह ओ्ओ्ओ्ओह, चोद डाल, मार डाल, रंडी बना लें, कुत्ती बना ले, खूब मज़ा आ रहा है रे हरामी, बुर चोद।”

हम उनकेे चुदाई को देख कर और उनका बकबकाना सुन कर हंस रहे थे। उनका चुदाई देख कर खूब मज़ा आया। जब दोनों खलास हो गये तो पारो बोली, “तुम दोनों बहुत बड़े चुदक्कड़ हो जी। बहुत मजा दिया तुम दोनों ने। अब तुम दोनो ही हमको चोदना, आज से तुम दोनो ही हमारे मरद हो।” उसका बुर फ़ूल कर पावरोटी हो गया था मगर वह बहुत खुश थी।

फिर तो हम-दोनों का चांदी हो गया। खूब मज़ा किए हम दोनो मिल कर।

इतना सुनते सुनते मैं फिर उत्तेजित हो गई और पापा के ऊपर चढ़ कर बोली, “बस करो पापा, बाकी बाद में बता देना, अभी तो फिर एक बार चुदने का मन हो गया है। आप वैसे ही लेटे रहिए, मैं ऊपर से आपके लंड पर बैठ कर चुदवा लूंगी।” कहते हुए मैं उसके खड़े लंड पर भच्च से बैठ गई और ऊपर नीचे उछल उछल कर चुदने लगी। फिर पूरी तरह खल्लास हो कर उन्हीं के ऊपर पड़ गई।

“बहुत बड़ी रंडी हो गई है रे तू। बहुत सीख गई है। ख़ूब मजा करेंगे हम।” वे बोले और मझे चूम लिए। “हां पापा यह सब आप लोगों की कृपा है जिसके कारण आज मैं ऐसी हो गई हूं।” मैं बोली। हमने घड़ी देखा तो 8 बज चुका था। हम थके हुए थे मगर उठे और कपड़े पहन कर तैयार हो गए और नानाजी, दादा जी और बड़े दादाजी का इंतजार करने लगे।

इसके आगे का किस्सा अगली कड़ियों में।

अपना बहुमूल्य विचार और सुझाव देते रहिएगा।

आपकी रजनी।

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