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कामिनी की कामुक गाथा (भाग 47)

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पिछली कड़ियों में आपलोगों ने पढ़ा कि मेरे बेटे क्षितिज और मेरे बीच, मां बेटे के रिश्ते से दोस्ती, फिर प्रगाढ़ता, फिर अंतरंग अनैतिक शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका था जो मुख मैथुन से शुरू कर योनि मैथुन से होते हुए गुदा मैथुन तक पहुंच चुका था। गुदा मैथुन से वह सर्वाधिक प्रभावित हुआ। मेरे गुदा मार्ग की उस संकरी गुफा में उसके लिंग का प्रवेश न सिर्फ उसके लिए बल्कि खुद मेरे लिए भी बेहद आनंददायक था। बेहद खुश हुआ वह और मुझ छिनाल मां को भी विस्मयकारी चोदन क्षमता से कायल कर दिया। अद्भुत खुशी प्रदान किया मुझे।

उसे वासना के दलदल में धकेलने की चिंता बिल्कुल नहीं थी मुझे। मुझे तो सिर्फ इस बात की चिंता खाए जा रही थी कि कब तक यह मेरे पल्लू से बंध कर रहेगा। उसकी मुझ पर आसक्ति की चिंता थी। कहीं वह सिर्फ मेरा होकर न रह जाए। इस तरह तो मैं भी बंध कर रह जाऊंगी, जबकि मुझ जैसी चुदक्कड़ औरत के लिए एक मर्द से बंध कर रहना निहायत ही कष्टकर था। मुक्त होना चाहती थी उसके बंधन से। इसके लिए मैं बेहद शातिराना तरीके से उसका ब्रेनवॉश कर रही थी। उसके मन में अन्य स्त्रियों के प्रति आकर्षण पैदा करना चाहती थी। एक बार उसे अन्य स्त्रियों में रुचि जाग जाए, अन्य स्त्रियों की देह का स्वाद चख ले, भिन्न भिन्न स्त्रियों की नग्न देह से संभोग के मजे से परिचित हो जाए तो निश्चित तौर पर ऐसी स्त्रियों से पटी पड़ी दुनिया में अपना शिकार तलाश कर शिकार करने लगेगा और मुझे भी अपने बेटे के बंधन से मुक्ति मिल जाएगी। स्वतंत्र हो जाऊंगी पुरुषों की भीड़ में घुस कर विभिन्न मर्दों से अपनी हवस की आग बुझाने के लिए।

इस वक्त तक एक दूसरे की नग्न देह से चिपके, मैं उसे काफी हद तक अपनी बातों से प्रभावित कर चुकी थी लेकिन मेरे हाथ की हरकतों से पुनः वह उत्तेजित हो चुका था। बेकरार हो चुका था पुनः मुझे चोदने के लिए और बेकरारी के आलम में बोला “ओह मॉम बहुत लेक्चर हो गया, मेरा पपलू रो रहा है। पहले इस हरामी लौड़े की चिंता कर, फिर से सर उठा कर छेद खोज रहा है मादरचोद घुसने के लिए।”

“हां रे हां मेरे बच्चे, चोद ले अपनी रंडी मां की चूत मां के लौड़े।” अब हम बिंदास हो गये थे। इतना सुनना था कि तत्काल पोजीशन लेने लगा, लेकिन इस वक्त मैं कुतिया बनना चाहती थी, अपने बेटे की कुतिया, कुतिया की पोजिशन में अपनी चूत प्रस्तुत करना चाहती थी। अपने बेटे को कुत्ता बनाना चाहती थी। “नहीं ऐसे नहीं, फिर से मुझे कुतिया बना और खुद कुत्ता बन जा। कुत्ते की तरह मुझे चोद मेरे बेटे। कुत्ते की तरह मुझ कुतिया मां की चूत चोद मेरे कुत्ते बेटे, शाबाश, हां ऐसे ही, मेरे पीछे से मुझ पर सवारी गांठ मादरचोद बेटे।” मैं पूरी बेशरम रांड बन गयी थी इस वक्त। खुश हो रही थी कि अंततः मना ही लिया अपने बेटे को अन्य स्त्रियों की ओर भी ध्यान देने के लिए। एक बार उसे अन्य स्त्रियों का स्वाद चखने की देर थी कि वह स्वछंद तौर पर अपना शिकार ढूंढ़ ढूंढ़ कर चोदता फिरेगा, ऐसा मेरा मानना था और मैं भी स्वतंत्रता पूर्वक पूर्ववत अपने मनपसंद, भिन्न भिन्न मर्दों से चुदवाती फिरूंगी।

आनन फानन कुतिया बन गयी और वह कुत्ते की तरह मुझ पर पीछे से सवारी गांठने आ पहुंचा। “उफ्फ्फ मॉम, इस पोजीशन में तो मुझे सिर्फ आपकी खूबसूरत गांड़ ही आकर्षित कर ही है। क्या खूबसूरत गांड़ है आपकी।”

“अरे बेवकूफ़, मां के लौड़े मादरचोद, तुझे मेरी गांड़ ही दिखाई दे रही है गधे। गांड़ से नीचे की चूत नहीं दिख रही है शैतान? अबतक मेरी गांड़ के पीछे पड़ा है। हाय रे मेरी मुनिया को भूल ही गया क्या तेरा पपलू? अब और न तरसा मेरी मुनिया को। चल चोद कर निहाल कर दे, उद्धार कर मेरी मुनिया का, बेचारी न जाने कब से आंसू बहा रही है।” मैंने अपनी गांड़ और उठा दी, ताकि मेरी चूत अपने पूरे जलाल के साथ नुमाया हो जाय।

“वाह मॉम, ये हुई न बात। अब तेरी चूत सचमुच स्वर्ग का द्वार लग रही है”

“बकवास मत कर मां के लौड़े। शुरू कर चोदना बदमाश।”

“लो मेरी मां, यह गया मेरा लौड़ा, संभल जा बुरचोदी मॉम” कहते कहते अपने टनटनाए लंड के सुपाड़े को मेरी फकफकाती चूत के द्वार पर रखा और मेरी कमर को पकड़ कर एक करारे प्रहार से सरसराते हुए उतार दिया पूरा का पूरा लौड़ा मेरी चुदासी चूत के अंदर।

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“आह आह्ह् आह्ह्ह् ओह ओह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह हाय।” इस्स्स्स्स मां न जाने कितनी देर से तड़पती मेरी चूत ने खुशी खुशी उसके लंड को ग्रहण कर लिया। निहाल हो गयी मेरी चूत।

“क्या हुआ मां की चूत, साली कुतिया, आह ओह मत कर मेरी रंडी्ई्ई्ई्ई्ई मॉम, उफ्फ्फ इतनी गरम है भट्ठी की तरह, आह मेरे लौड़े को चूस रही है तेरी चूत, ओह्ह्ह्ह्ह्ह हां, चूस अपनी चूत से अहा ओहो” अब मेरा बेटा खुश हुआ। मेरा अनुभव काम आया अपनी चूत से लंड चूसने का। मैंने अपनी चूत को संकुचित कर उसके लिंग को जकड़ लिया।

“उफ्फ्फ मेरे चोदू बेटे, बड़ा शैतान है, बड़ा जालिम है तेरा लौड़ा, पहले रुलाता है फिर स्वर्ग का मजा देता है। ओह्ह्ह्ह्ह्ह चोद हरामी, मेरे प्यारे लौड़े के ढक्कन।”

“आह ओह मॉम गजब है तेरी चूत। जी करता है चोदता रहूं चोदता रहूं, उह अह उह अह।” शुरू हो गया कुत्ते की तरह दनादन, फचाफच, भच्च भच्च चोदने का अंतहीन सिलसिला। मेरी कमर छोड़ कर पीछे से मेरी चूचियों को पकड़ कर बेदर्दी से मसलता हुआ चोदने में मशगूल हो गया। उफ मां इतनी मस्ती, इतना सुखद। चूचियों के उस बेरहम मर्दन की पीड़ा आश्चर्यजनक रूप से मुझे आकंठ आनंद में डुबो रहा था। मैं अपनी चूतड़ उछाल उछाल कर उसके भीषण आघात का उत्तर दिए जा रही थी। चूत में बखूबी लंड खाने की कला तो कोई मुझसे सीखे। न जाने अबतक किस किस तरह का लंड खा चुकी थी अपनी चूत में। निराश नहीं हुआ कोई मुझे चोदकर आज तक। बड़े से बड़ा लंड सफलता पूर्वक खा चुकी थी और इसी कारण मेरा आत्मविश्वास बढ़ा था साथ ही अनुभव भी। चूत में लंड खाने की कला में मैं काफी कुशल हो गयी थी। छोटा लंड, लंबा लंड, मोटा लंड, पतला लंड, टेढ़ा लंड, सीधा लंड, न जाने कैसे कैसे लंड से पाला पड़ा था, जिससे मेरी चुदने की कला में निखार आता चला गया था। जो भी चोदा, दीवाना हो गया था मेरी चूत का। हो सकता है आपको यह मेरी आत्मप्रशंसा लगे, किंतु यह सच है। उसी अनुभव और कला का प्रदर्शन कर रही थी इस वक्त।

“आह्ह्ह् कमीने चोद अपनी मां को उफ्फ्फ मेरे बच्चे, हाय मेरे बेटे, निकाल ले अपनी पूरी कसर हाय मेरे चोदू, मेरे चुदक्कड़ बालक” मेरी बातों से और उत्साहित और उत्तेजित होकर जो धुआंधार ठोकने लगा, उफ्फ्फ, फचाफच, चटाचट, की आवाज और हमारी उह आह्ह्, हाय, ओह्ह्ह्ह्ह्ह, उफ्फ्फ, इस्स्स्स्स की सम्मिलित तार और उद्गारों से सारा कमरा गूंजने लगा, बड़ा ही कामुक दृश्य था।

“हां हां ओह मेरी रंडी मां, कुत्ती मां, बुरचोदी मां, लंडरानी मां, ले, और ले, और ले मेरा डंडा, मेरा खूंटा, मेरा मूसल, मेरा लौड़ा्आ्आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह” उत्तेजना के उत्कर्ष पर था, चोदने में महारत हासिल करता मेरा बेटा। चोदने की रफ्तार तूफानी हो गई थी और अंततः स्खलन के कागार पर पहुंच गया था वह, करीब पैंतीस मिनट की धींगामुश्ती, गुत्थमगुत्थी, एक दूसरे में समा जाने की जद्दोजहद के पश्चात।

“आ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह््आआ््आआ््हह्ह्” मैं भी झड़ने की कागार पर पहुंच चुकी थी। पहले मैं ही झड़ी, ओह्ह्ह्ह्ह्ह अंतहीन था वह अकथनीय स्खलन का अद्भुत सुख। इधर मेरी ढीली पड़ती काया को दबोचे, वह भी फचफचा कर झड़ने लगा, गरमागरम लावा उगलने लगा उसका लिंग।

“्आ्आ्आ्आ्आ्आ्आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह््ह््ह््हह्््हह्हह” अपनी दानवी शक्ति से मेरी चूचियों को दबोचे झड़ने लगा वह। कोई और होती तो पीड़ा के मारे चीख पड़ती शायद, मगर मैं ठहरी एक नंबर की रांड, इस प्रकार की नोच खसोट से तो मुझे अलग ही लुत्फ मिलता था। निहाल कर दिया मुझे पगले ने। निढाल, थक कर चूर, पसीने से लतपत, लुढ़क गये हम दोनों एक दुसरे से चिपके हुए और लंबी लंबी सांसें लेने लगे मानो मीलों दूर दौड़ कर आज हों। बिस्तर के खूबसूरत कपड़ों का तो कबाड़ करके रख दिया था। मां बेटे के बीच के घिनौने कृत्य के मूकदर्शक समर्थक कपड़े, खुद भी अस्त व्यस्त होते, हमारी धींगामुश्ती के साथ नृत्य करते, मानो हमारी नग्न देह की कामुक हरकतों पर तालियां बजाते हुए ठहाके लगा रहे हों। पलंग भी कंपन के साथ नृत्य करता रहा। कमरे की एक एक निर्जीव वस्तु मानो जागृत हो कर उस अनैतिक रिश्ते में अपनी मोहर लगा दी हो।

“खुश कर दिया मेरे बेटे” मैं अपने सूखे होठों पर जीभ फिराते हुए बोली। गला भी खुश्क हो गया था। भयानक तौर पर रगड़ रगड़ कर चोदा था कमीने ने। पानी पी कर अपने गले की खुश्की दूर की और पुनः चिपक गयी उस कामदेव के अवतार मादरचोद बेटे की नग्न देह से।

“तूने भी तो कम खुशी नहीं दी मेरी प्यारी मॉम। आई लव यू मॉम। सच में मॉम मजा आ गया।” मुझे बांहों में लेकर चूम लिया।

“भूलना मत अब जो तुमने मुझसे कहा है। दूसरी स्त्रियों में भी रुचि लेने की।” मैंने उसे याद दिलाया।

“हां मेरी प्यारी बुरचोदी मां, तू पहली बार कोई ढंग की मैच्योर लेडी तो दिला फिर देख मेरा जलवा।” आत्मविश्वास से परिपूर्ण था उसका कथन। आश्वस्त हो गयी मैं। अंततः मैंने उसे राजी कर ही लिया था, अन्य स्त्रियों का शिकार करने के लिए। फिर उसी तरह नंग धड़ंग एक दूसरे से लिपटे चिपटे कब निद्रा की आगोश में चले गये पता ही नहीं चला।

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