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कामिनी की कामुक गाथा (भाग 13)

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मेरे प्रिय पाठकों,

पिछली कड़ी में आप लोगों ने पढ़ा कि दादाजी के जन्मदिन पर पांच पांच बूढ़े मेरे द्वारा रचे गए कामुकता पूर्ण माहौल में वासना के भूखे भेड़ियों में परिवर्तित हो कर वहशी दरिंदों की तरह बेहद घिनौने और निर्ममता पूर्वक मनमाने तरीके से मेरे तन से अपनी अपनी हवस मिटाई और इस दौरान मेरे पूरे बदन को निचोड़ कर रख दिया। वासना का वह भीषण तूफान जो मुझ पर गुजरा, उसका उन नशे में चूर कामुक बूढ़ों को रत्ति भर भी अंदाजा नहीं था और न ही परवाह थी। वे तो अपने अपने ढंग से अपनी हवस मिटा कर मेरे चारों ओर नंग धड़ंग अवस्था में पड़े हुए थे। मैं उनके बीच नुची चुदी दोनों पैर फैलाए छत की ओर चेहरा उठाए आंखें बंद किए पड़ी हुई थी। मेरे उरोजों का उभार उनके दरिंदगी भरे नोच खसोट और मर्दन से सूज कर लाल हो गये थे। मेरे उभारों और सीने पर कई जगह दांतों के काटे जाने के लाल लाल निशान पड़ गये थे। उन भेड़ियों की जानवरों जैसी चुदाई से मेरी योनि सूज कर बड़े से कचौरी की तरह उभर आई थी। मेरी गुदा को सिर्फ करीम चाचा ने अपने लिंग से कूटा मगर अपने विशाल लिंग से ऐसी बेरहमी से कूटा कि मेरी गुदा का द्वार लाल हो कर सूज गया था। इतनी दरिंदगी को मैं कैसे झेल पाई यह सोच कर चकित थी। मुझे अभी भी हल्का हल्का नशा सा अनुभव हो रहा था। मुझे संदेह होने लगा कि कहीं इन दरिंदो ने मेरे शीतल पेय में कोई नशीला पदार्थ तो नहीं मिलाया था।

संदेह निवारण हेतु मैं ने उनसे सीधे पूछा, “किस ने मेरे कोल्डड्रिंक में दारू मिलाया था?”

“हमने” नानाजी ने बेहयाई से उत्तर दिया।

“साले हरामी मादरचोद, मुझे बेवकूफ बना कर शराब पिलाया और चोद चोद कर रंडी बना दिया, साले कुत्ते। मगर अच्छा ही हुआ। अगर मैं नशे में नहीं होती तो इतने मनमाने ढंग से मुझे चोद नहीं पाते तुम लोग। नशे में थी इसलिए मैं भी खूब मज़ा ले सकी। थैंक्स नानाजी। अब चूंकि आप पांच लोगों ने आपसी साझेदारी में मुझे सामूहिक रूप से चोद लिया तो मैं आप पांच लोगों की एकलौती भोग्या हुई, याने एक तरह से आप पांच पांडवों की एकलौती औरत द्रौपदी।” मैं बोली।

“बिल्कुल ठीक बोली हो मेरी रानी। तू हमारी द्रौपदी और हम पांच पांडव तेरे पति” दादाजी खुश हो कर बोले।

हमारे वार्तालाप के बीच ही अचानक नानाजी ने दादाजी की ओर मुखातिब हो कर पूछा, “लेकिन तू पहले ये बता कि कामिनी को चोदते समय इसे रंडी की औलाद क्यों कहा?”

दादाजी बोले, “देखो भाई, सच यही है कि कामिनी की मां रंडी से कम नहीं है। पूरी बात बताऊं?” प्रश्नवाचक दृष्टि से हमें देखा।

“बता भी दो भाई, अब हम सब इस एक ही हमाम में नंगे हैं।” नानाजी बोले।

“ठीक है बताऊंगा, लेकिन तू बुरा मत मानना, क्योंकि वह तेरी बेटी है, कहीं तुझे बुरा न लगे, लेकिन मैं जो बताऊंगा सच बताऊंगा।” दादाजी बोले।

“अरे बेटी वेटी कुछ नहीं। सच है तो सच है। अपनी नतनी को कुतिया बना कर चोदा तो क्या बेटी और क्या बहु। सब के सब पहले औरत हैं, जिनकी चूत है चुदने के लिए। आखिर चूत चाहे लौड़ा। लौड़ा चाहे किसी का भी हो। तू पूरी बात बता मादरचोद” बड़ी बेशर्मी से नानाजी बोले।

“तो ठीक है सुनो। यह सच है। इसकी मां सच में छिनाल ही थी। चाहे या अनचाहे वह रंडी बन गई। मेरा बेटा बच्चा पैदा करने के काबिल नहीं है यह बात मैं जान गया था, उस डॉक्टर से जिसने उसकी जांच की थी। उसका वीर्य बहुत पतला था। उसके वीर्य में शुक्राणु नहीं के बराबर थे या बहुत कमजोर थे जो लाइलाज था। फिर भी मेरी बहु गर्भवती हुई।

मैं चकित था और एक दिन मैं ने अकेले में, जब वह हमारे बेडरूम में सवेरे सवेरे चाय लेकर आई तो उससे पूछ ही लिया, “बहुत सच बताओ बहु, किसका बच्चा तेरे पेट में पल रहा है?” वह सन्न रह गई।

मैं बोला, “देखो मुझे पता है कि मेरा बेटा बाप नहीं बन सकता है। तूने किसके साथ मुंह काला किया है? मुझे सच बताओ तो मैं कुछ नहीं बोलुंगा, क्योंकि यह हमारे परिवार की इज्जत का सवाल है। तू गर्भवती हैं, सभी खुश हैं, हमारे खानदान का चिराग आने वाला है इस ख्याल से। मैं भी खुश हूं। अब बता कौन है वह आदमी?”

डरते डरते और रोते रोते उसने कहा, ” वह आदमी हरिया है बाबूजी”। मैं ने उसे कहा कि यह बात और किसी को पता नहीं चलना चाहिए। फिर उसने इस लौंडिया को जन्म दिया। हम थोड़े निराश जरूर हुए लेकिन एक संतान होने की खुशी परिवार में थी। मुझे इस बात की तसल्ली थी कि मेरी बहु मां बन सकती है।

मैं ने कामिनी के पैदा होने के एक साल बाद बहु से कहा, “अब हमें खानदान चलाने के लिए एक बेटे की जरूरत है। मैं नहीं चाहता कि तुम फिर से बाहर के किसी मर्द के बच्चे को जन्म दो, जब घर में ही मेरे जैसा मर्द उपलब्ध है तो क्यों नहीं मुझसे ही संभोग करके गर्भधारण करती हो?”

मेरे इस खुले प्रस्ताव से वह हत्प्रभ रह गई फिर बोली, “हाय राम, ससुरजी आप के साथ?”

“हां मेरे साथ। क्यों, मुझमें क्या खराबी है? चुपचाप मेरी बात मान लो वरना ठीक नहीं होगा।” मैं बोला। असल में जब से मुझे पता चला कि बहु लक्ष्मी बाहर के मर्द से चुद चुकी है, मैं उसे अलग ही नजर से देखने लगा था। उसके मस्त जवान नंगे बदन को अपनी बाहों में भर कर चोदने का ख्याल बार बार मेरे दिमाग में घूमता रहता था। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां देख कर मेरे मुंह में पानी आ जाता था। जब वह चलती थी तो उसकी मोटी मोटी गांड़ थिरकते हुए मानो मुझे निमंत्रण दे रही हो। मेरा लौड़ा फनफना उठता था। मैं बड़ी मुश्किल से अपने को काबू में रख रहा था। उसको चोदने की बड़ी इच्छा होती थी लेकिन एक तो रिश्ते का ख्याल, समाज का डर और बहु द्वारा इनकार और उसके घृणा का पात्र बनने का भय, इन्हीं कारणों से मेरी हिम्मत नहीं होती थी। लेकिन मुझे अब यह सुनहरा मौका हाथ लग गया था। सौभाग्य से अशोक की मां भी दो हफ्तों के लिए मायके गई हुई थी। मैं तो मौके की ताक में था ही, बहु की कमजोर नस मेरी पकड़ में थी, जिसकी बदौलत मैं बड़ी आसानी से उसे चोद सकता था। मेरी बातों को सुनकर वह नजरें नीचे कर के बड़ी मुश्किल से कहा, “प्लीज बाबूजी मुझे खराब मत कीजिए, मैं आपके सामने हाथ जोड़ती हूं। मुझे माफ़ कर दीजिए।”

अब मेरा धीरज जवाब दे गया और सीधे सीधे शब्दों में उसे बोला, “साली हरामजादी कुतिया, जब तू बाहर के मर्द हरिया से चुदवा रही थी तो खराब नहीं हुई बोल? अब मैं घर का आदमी तुझे चोदना चाहता हूं तो खराब हो जाएगी?”

मेरे बात करना के लहजे से वह सहम गई और मरे हुए आवाज में बोली, “ठीक है बाबूजी, लेकिन प्लीज यह बात मेरे पति या घर के और किसी को पता नहीं लगने दीजियेगा।”

उसकी सहमति से मेरी बांछे खिल गईं और उसी समय मेरा लौड़ा फनफना उठा, मगर किसी तरह अपने को काबू में रखा और बोला, “बहुत बढ़िया, आज जब अशोक (मेरा बेटा) ऑफिस चला जाएगा तो दोपहर को खाना खिला कर कामिनी को सुला देना और मेरे कमरे में आ जाना।”

“ठीक है बाबूजी,” कहकर धीरे धीरे मेरे कमरे से बाहर निकली। पीछे से उसकी थरथराती गांड़ को देखते हुए मेरा लौड़ा पैजामा को तंबू बना दिया था। मैं बड़ी बेताबी से दोपहर का इंतजार करने लगा। खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेटे बहु का इंतजार करने लगा। मैं सिर्फ पैजामे में था। ठीक एक बजे मेरे कमरे के दरवाज़े पर दस्तक हुई।

मैं समझ गया कि बहु आ गई है, “आ जाओ दरवाजा खुला है” मैं बोला। वह झिझकते हुए कमरे में दाखिल हुई तो मैंने कहा, “दरवाजा भीतर से बंद कर दो बहु और आ जाओ बेड पर।” वह धीरे-धीरे चल कर बिस्तर के पास आई तो मैं बेसब्री से उसे बाहों में भर कर एक झटके में बिस्तर पर गिरा दिया और चूमने लगा। मेरे बेसब्रेपन से वह सहम गई और धीरे से बोली, “प्लीज बाबूजी, मुझ पर रहम कीजिए।”

“अब तू चुप रह बहु। रहम ही तो कर रहा हूं तुझ पर। अब मैं जो करने जा रहा हूं उसमें तू सहयोग कर, मुझे जबरदस्ती करने को मजबूर न कर।” मैं उसे चूमते हुए बोला। वह समझ गई कि मैं उसे चोदे बिना छोड़ने वाला नहीं हूं। चुपचाप आंसू बहाती हुई अपने आप को मेरे हवाले कर दिया। मुझे उसकी आंसुओं की कोई फिक्र नहीं थी। मैं ने उसकी साड़ी का पल्लू हटा कर उसके ब्लाऊज को खोल दिया और यह देख कर और उत्तेजित हो गया कि उसका ब्रा बहुत मुश्किल से उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को ढंका हुआ था। आधी चूचियां तो ब्लाऊज के बाहर ही थीं। मैं ने एक झटके से उसका ब्रा भी उतार फेंका। गजब की चूचियां थीं उसकी। बड़ी बड़ी चूचियां देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया। जैसे ही उसकी चूचियों को हाथ लगाया, दंग रह गया, एक बच्ची की मां बनने के बाद भी एकदम टाइट थीं। मैं ने उसकी चूचियों को पहले सहलाया और उत्तेजना में आ कर कस के दबाना शुरू कर दिया।

जोश में आ कर इतनी जोर से दबा दिया कि वह आह आकर बैठी और बोली, ” आह बाबूजी, धीरे दबाईए ना, दर्द कर रहा है।”

“अभी देख तेरा दर्द कैसे गायब हो जाएगा,” बोलते हुए उसकी चूचियों को मुंह लगा कर चूसना शुरु कर दिया। कुछ ही देर में वह शरमाती हुई भी मस्ती में भर कर बेसाख्ता सिसकारियां निकालने लगी। मैं समझ गया कि अब मामला थोड़ा थोड़ा सलटने लगा है। फिर मैंने उसकी साड़ी को पेटीकोट समेत ऊपर उठा दिया। मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। वह अब मस्ती में भरती जा रही थी। वह इस्स्स् इस्स्स् करने लगी थी। कुछ ही देर में मैं ने महसूस किया कि उसकी पैन्टी गीली हो गयी है। मैं ने धीरे धीरे उसकी पैन्टी उतार दी। उसकी चिकनी चूत पर हाथ फेरा तो वह गनगना उठी।

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“ओ््ओ्ओ्ओह्ह्ह, आ्आ्आ्आह” उसके मुंह से निकलने लगी। अब मैं भी बहुत गरम हो चुका था। बर्दाश्त से बाहर। मैं उसकी साड़ी पेटीकोट खोल कर पूरी नंगी कर दिया। आह, क्या नजारा था। मस्त मक्खन जैसी चूत के ऊपर हलकी हलकी झांट। गांड़ तो पूछो ही मत। बड़ी बड़ी फूली हुई चिकनी गांड़।

मैं ने झट से पैजामा खोल दिया और उसके ऊपर आ गया, मगर उसने जब टनटनाया हुआ मेरा लौड़ा देखा तो डर गई और बोली, “हाय बाबूजी मर जाऊंगी, प्लीज मुझे छोड़ दीजिए, आपका लौड़ा बहुत बड़ा है।”

मगर अब मैं कहां मानने वाला था, इतना मस्त माल चोदने को मिला था कि पूछो ही मत, “चुप साली रंडी, नखरा मत कर, चुपचाप पैर फैला और चोदने दे,” मैं बोला, मगर वह डर के मारे अपनी जांघों को सटाकर रखी थी। मुझे गुस्सा आ गया और मैं ने जबरदस्ती उसकी चिकनी जांघों को फैला दिया और अपने लौड़े को उसकी चूत पर टिका दिया। वह नहीं नहीं करती मेरे नीचे छटपटाती रही मगर मैं ने उसकी किसी बात पर ध्यान नहीं दिया और सीधे एक जोरदार धक्का लगाया, वह किसी हलाल होती बकरी की तरह चीखने के लिए मुंह खोला ही था कि मैं उसके मुंह को कस कर दबा दिया। उसकी आंखें फटी की फटी रह गई, मेरा लौड़ा एक ही झटके में उसकी टाईट चूत को चीरता हुआ आधा घुस गया। मैं ने दुबारा एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा लंड उसकी चूत के अंदर ठेल दिया। वह छटपटा कर रह गई। कुछ देर तक उसी तरह उसे दबा कर रखा, जब उसका छटपटाना बंद हुआ तब उसके मुंह से हाथ हटाया। उसकी आंखों से आंसू बह रहा था। उसकी आंसुओं की परवाह किए बगैर मैं ने उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चूमना चालू किया और धीरे धीरे लंड बाहर निकाला और दुबारा ठोंका, इसी तरह आठ दस बार लंड अंदर बाहर करने के बाद लक्ष्मी का रोना बंद हुआ और फिर वह मस्ती में भर गई और शरमाते हुए नीचे से धीरे धीरे अपनी चूतड़ उछालने लगी।

“अब आ रहा है ना मज़ा साली हरामजादी, इसी के लिए इतना रोना गाना कर रही थी बुर चोदी। अब देख कितना मज़ा आ रहा है।” मैं चोदते हुए बोला।

अब वह अपने दोनों पैरों को उठा कर मेरे कमर पर चढ़ा दी और अपनी चूत को खोल कर परोस दी और शरमाते हुए वह अब मस्ती में डूब कर बोल रही थी, “आह ओह ओह ओ्ओ्ओ्ओह, हां बाबूजी, अब बहुत मजा आ रहा है, आह आह ओह ओह, ससुरजी आप बड़े बदमाश हो। बड़े माहिर हो औरत फंसाने में। मुझे आखिर फंसा ही लिया अपने जाल में। आह ओह ओह ओ्ओ्ओ्ओह, आपका लौड़ा बहुत बड़ा है मगर आपका चोदना बड़ा अच्छा लग रहा है राजा। हाय राम मैं यह क्या बोल रही हूं।” शरमा कर आंखें बंद कर ली उसने। मुझे उसकी यह अदा बहुत पसंद आई।

मैं दुगुने उत्साह और जोश से दनादन चोदने लगा, “मेरी प्यारी बहु, साली कुतिया, आज के बाद तू मेरे लंड की रानी बन गई, तेरी मस्त चूची, मस्त टाईट चूत, मस्त चिकनी गांड़, मेरी तो किस्मत खुल गई।” मैं बोला।

अब वह पूरी खुल चुकी थी, शर्म हया कहां छू मंतर हो गया था पता नहीं, मस्ती में भर कर एकदम रंडी की तरह गन्दी गन्दी गालियां निकालने लगी थी, “मादरचोद बुढ़ऊ, मेरी बुर के रसिया, बहुचोद हरामी, लौड़े को तेरी बहु की चूत में डाल, चोद राजा चोद अपनी बहु को रंडी बना दे, लंड की रानी बना दे आह आह आह आह ओह।”

“हां रे कुतिया तुझे अपनी लंड की रानी बना लूंगा चूतमरानी, मेरे बच्चों की मां बना दूंगा, आज से तू मेरा ही लौड़ा खोजेगी रंडी, मजा आ रहा है।” बोलता हुआ उसे रगड़ रगड़ कर चोदा और करीब आधे घंटे बाद मेरा लंड पानी छोड़ने लगा, “आ्आ्आ्आ्आ स्स्स्स्साली्ई्ई्ई्ई कुत्त्त्त्त्ती” “हांआआआआ ओ्ओ्ओ्ओ्ओ ह राज्ज्ज्ज्ज्जाआ” कहती हुई वह भी छिपकली की तरह मुझ से चिपक कर झड़ने लगी। पूरा खल्लास होने के बाद वहीं बिस्तर पर हम पसर गये।

मैं बोला, “कैसा लगा बहु?”

“बहुत अच्छा लगा बाबूजी। आप बहुत मस्त चुदक्कड़ मर्द हैं। आपका लौड़ा भी बहुत जानदार है। अशोक का लंड तो सिर्फ साढ़े चार इंच लम्बा है और पतला है। मैं आपकी दीवानी हो गई राजा” कहते हुए मेरे सीने पर अपना सिर रख दी। उसी समय करीब दस मिनट बाद मैंने उसे फिर एक बार चोदा, इस बार उसे कुतिया की तरह पीछे से। वह बड़े मजे ले कर चुदवाई। उस दिन के बाद तो जब भी जहां कहीं मौका मिलता था मैं उसको पकड़ के चोद लेता था, कभी बाथरूम में, कभी किचन में खड़े खड़े और कभी दिनदहाड़े ड्राइंगरुम में। लक्ष्मी भी बहुत खुश थी। यह सिलसिला बिंदास चल रहा था कि एक दिन ऐसे ही ड्राइंगरुम में मैं चोदने में मशगूल था तभी यह केशव आ धमका, हम अबतक एक हफ्ते के अंदर बिल्कुल निर्भय होकर खुल्लमखुल्ला चुदाई करने लगे थे और तनिक लापरवाह भी हो गये थे, उस दिन करीब दो बजे दिन में सामने का दरवाजा सिर्फ उढ़का हुआ था, बिना खटखटाए सीधा अंदर आ गया और हमें इस हाल में देख लिया। कभी दरवाजा खटखटाना या कॉलबेल बजाना शुरू से उसकी आदत नहीं थी।

“रघु के बच्चे मादरचोद, यह क्या हो रहा है?” वह आंखें फाड़कर देखते हुए बोला। हम रंगे हाथ पकड़े गए थे। लक्ष्मी की हालत खस्ता हो गई थी। हम तो ठहरे एक ही थैली के चट्टे बट्टे, लक्ष्मी को अपने नीचे दबाए हुए उसी नंग धड़ंग अवस्था में मैं लापरवाही से बोल उठा, “देख नहीं रहे हो क्या हो रहा है? अपनी बहु को चोद रहा हूं साले।”

“हाय दैया, छोड़िए मुझे बेशरम, इनके सामने तो छोड़िए,” लक्ष्मी घबराकर बोली।

“तू चिंता मत कर बहु, बिना पूरा चोदे मैं तुझे छोड़ुंगा नहीं। इसके सामने शरमाओ मत। यह मादरचोद भी कम नहीं है। केशू, तू चुपचाप सोफे पर बैठ कर देख।” कह कर मैं धकाधक चोदने लगा और पांच मिनट बाद खल्लास हो गया, बहु भी समझ गयी थी कि ये दोनों एक नंबर के हरामी हैं, चुदती हुई मेरे ही साथ झड़ गई।

जैसे ही हमारी चुदाई खत्म हूई, बहु अपने कपड़ों की तरफ भागी, मगर यह क्या, इतनी देर में केशव भाई भी कपड़े उतार कर नंगे हो गए थे और बहु को दबोच लिया, “भागती कहां है बहु, अभी मेहमान की खातिरदारी नहीं करोगी क्या?”

लक्ष्मी का बुरा हाल था। छः फुट लंबे, काले कलूटे, बदसूरत, तोंदियल, पान खा खा कर काले दांतों को निपोरते हुए अजनबी की बांहों में छटपटा कर रह गई। “मुझे छोड़ दीजिए प्लीज़।” वह बोल उठी।

“छोड़ कैसे दें रानी। आज तक हम दोनों मिल बांट कर खाते आए हैं। आज कैसे छोड़ दूं। इतना मस्त माल साले रघु अकेले अकेले कैसे खा रहा था चूतिए? एक बार भी मेरा ख्याल नहीं आया?” केशव बोला।

“देख मैं तुझे बताने ही वाला था। पर पहले इसे राजी करना जरूरी था ना। अब यह राजी खुशी मुझसे चुदने को तैयार हो गई है। अब ठीक मौके पर तू आ ही गया है, अब बताने की क्या जरूरत। चल तू भी चोद ले। बहु, केशव को मना मत करो। अपना ही भाई है, जैसा मैं, वैसा ही यह है।” मैं लक्ष्मी को बोला।

“आपलोग बड़े जंगली हो। बाबूजी पहले अपने मुझे फंसाया और अब इनसे भी चुदने को बोल रहे हैं। आपको शर्म नहीं आती है।” लक्ष्मी केशव की बांहों में छटपटाती बोली।

“हम लोगों को शरम आती है लेकिन जब कोई औरत को चोदने का मौका मिलता है तो शर्म चली जाती है। अब भाषण मत दे। मेहमान की आवभगत कर।” मैं बेशर्मी से बोला।

केशव काफी दूर से आया था, इसलिए पसीने से लथपथ था। नंगा जानवर लग रहा था। शरीर से पसीने की बदबू आ रही थी इसलिए लक्ष्मी घिना भी रही थी। वह जंगली जानवर की तरह जबरदस्ती लक्ष्मी को फर्श पर गिरा कर उसके ऊपर चढ़ गया और अपने गन्दे होंठों से चूमने लगा। लक्ष्मी तब और ज्यादा छटपटाने लगी जब उसने अपने हाथ की एक उंगली उसकी गांड़ में घुसा दी।

“अहा कितना मस्त गांड़ है रानी तेरा। मुझे तेरी गांड़ बहुत पसंद है। मैं तो तेरी गांड़ चोदुंगा। तेरी शादी के समय से ही तेरी गांड़ देख कर मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था। आज मौका मिला है।” वह उसकी गांड़ में उंगली घुसा कर अन्दर बाहर करते हुए बोला।

“आह ओह नहीं नहीं प्लीज मेरी गांड़ में नहीं” वह रोती हुई बोली।

मैं जानता था कि केशव गांड़ का रसिया है। जहां मस्त गांड़ देखा कि उसके मुंह में पानी आ जाता था। इसने तो चिकने लड़कों को भी नहीं छोड़ा। बहला फुसलाकर लड़कों की गांड़ भी चोद लेता था। जहां कोई चिकना लड़का दिखा कि इसका लौड़ा फनफना उठता था। यहां तो इतना अद्भुत गांड़ फोकट में मिल गया था, कैसे छोड़ता भला।

“चुप रंडी कहीं की, चुपचाप अपनी गांड़ चोदने दे।” वह गुर्राया। लक्ष्मी समझ गई कि उसके बचने का कोई रास्ता नहीं है, अतः शांत हो कर अपनी गांड़ में होने वाले हमले के लिए सांस रोक कर तैयार हो गई। केशव ने उसे कुतिया की तरह झुका कर अपने लंड में थूक लगाया और उसकी गांड़ में एक ही झटके में सटाक से पूरा लंड पेल दिया जिसे वह अपनी उंगली से चोद कर ढीला कर चुका था।

“आ्आ्आ्आ्आ मर गई मेरी अम्म्म्म्आ्आ्आ्आह्ह्ह् ््म्म्््म््म्््म््म्म््म््म्््म््म्म्म्मा, फट गई मेरी गांड़,” वह चीख पड़ी।

मैं घबरा गया कि कहीं कामिनी उठ न जाय। लेकिन किस्मत से वह उठी नहीं, सोती रही।

“चुप बुर चोदी, अभी देख कितना मज़ा आएगा” कहते हुए उसने उसकी चूचियों को पीछे से पकड़ कर दबाना शुरू किया और दनादन अपना लौड़ा उसकी गांड़ में ठोंकना चालू किया। थोड़ी ही देर में लक्ष्मी मस्ती में भर कर गांड़ उठा उठा कर चुदवाने लगी।

“आह राजा ओह रसिया, चोद मेरी गांड़, आह हरामी के पिल्ले बेटी चोद,” उसी तरह बड़बड़ाती हुई मस्ती में डूब कर अपनी गांड़ चुदवाने लगी।

“आह रानी ओह रंडी कुतिया साली हरामजादी गांड़ मरानी, अब आ रहा है ना मज़ा, ओह मस्त गांड है रे तेरा।” बोलता जा रहा था।

“हां साले कुत्ते, मुझे कुतिया बना कर खूब मज़ा दे रहे हो ओह ओह आह आह” वह भी बोले जा रही थी।

करीब पच्चीस मिनट बाद केशव ने अपना लौड़ा रस उसकी गांड़ में भरना चालू किया। पूरा खल्लास हो कर दोनों वहीं लस्त पस्त फर्श पर लुढ़क गए। उस दिन के बाद तो हम दोनों की चांदी हो गई। दोनों ने उसे खूब चोदा। केशव दो दिन के लिए आया था लेकिन एक हफ्ता तक रुका। फिर लक्ष्मी की सास आ गयी तो हम थोड़ा सावधान हो गये और बड़ी होशियारी से मौका खोज कर चोदने लगे। मैं चाहता था कि लक्ष्मी फिर से मां बने और बेटे को जन्म दे। भगवान ने हमारी प्रार्थना सुन ली और उसने एक बेटे को जन्म दिया। (बेटा तो हुआ मगर बेहद घटिया, जलील और कमीना। उसके कमीने पन की कथा मैं बाद में बताऊंगी)

“ओह दादाजी आप तो बहुत बड़े हरामी निकले। मेरी मां को भी रंडी बना दिया।” मैं बोली।

नानाजी भी बेसाख्ता बोल उठे, “साले मादरचोद मेरी बेटी को इस हरामी हरिया के साथ साथ तुम दोनों भी चोद लिए? बड़े कमीने हो साले हरामियों। कोई बात नहीं साले मादरचोद, सब चलेगा, हम सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। अब इसी कामिनी को देख लो। कौन है यह? जो भी थी पहले थी, मगर अब तो हमारी चूत मरानी रानी है ना। मेरी तो कुतिया है, बाकी सब की क्या है नहीं मालूम।”

“मैं आप सबकी द्रौपदी हूं साले कुत्ते। द्रौपदी तो एक एक करके चुदवाती थी। आप सभी ने तो एक साथ चोद कर मुझे द्रौपदी से भी महान बना दिया। आप सभी लोग आज से मेरे पांडव पति हो।” मैं उन नंगे भुजंगे वासना के पुजारियों के बीच नंगी ही लेटे लेटे बोल पड़ी।

“हां हां, तू हमारी पत्नी द्रौपदी और हम आज से तेरे पांच पति, पांडव हैं,” मेरे नंगे जिस्म पर हाथ फेरते हुए सब एक स्वर में बोल उठे।

इसके बाद की घटनाएं मैं अगले भागों में बताऊंगी। अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत कराते रहिएगा।

आपकी कामुक लेखिका

रजनी

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