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सुहागरात की यादें

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दोस्तों
रेणु की शादी महज २० वर्ष में हो गई तो मेरे हब्बी मुझसे बहुत प्यार करने लगे और मैं भी उनके साथ पूरी तरह खुल गई, शादी के पहले ना तो कोई बॉय फ्रेंड था और ना ही किसी लड़के के साथ शारीरिक संबंध बनाई थी, सुहागसेज़ पर नई नवेली दुल्हन की तरह सहमी हुई बैठी हुई थी तो उस पलंग पर फूल और उसकी पत्तियां बिखरी हुई थी तो मुझे मेरी मौसी और चचेरी बहन ने बिस्तर तक पहुंचाया और वहां मैं चेहरे को घूंघट से ढकी हुई बैठी रही, शादी की सारी रस्में पूरी होते होते रात के ०१:०० बज चुके थे और मेरे दिल की धड़कनें तेज हो चुकी थी तो मन में कई तरह की बातें चल रही थी। मैं लाल रंग की साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट पहन बैठी हुई थी तो अंदर ब्रेसीयर और पैंटी तक पहन रखी थी, कुछ देर बाद कमरे में उनके आने की आहट हुई और मैं घूंघट में ही रहते हुए उन्हें एक नजर देखी तो वो धोती और कुर्ता पहने हुए थे, शादी नवंबर के महीने में हुई थी तो ठंड का मौसम था और मैं ब्लाउज के ऊपर वूलन ब्लाउज पहन रखी थी और ज्योंहि मेरे हब्बी रूम का दरवाजा बंद कर मेरी ओर आए, मैं बेड पर से उतरकर खड़ी हुई फिर उनके पांव छू ली तो वो मेरे घूंघट पर से ही बाल पर हाथ फेरे और मैं सीधे खड़ी हुई की वो मेरे घूंघट को चेहरा से नीचे कर मुझे देखने लगे तो मैं चेहरा झुकाए खड़ी रही और मेरे हब्बी मोहन ने मेरे चेहरे को थोड़ा ऊपर किया ” बहुत ही सुन्दर हो लेकिन इतनी शर्म मॉडर्न लड़कियों में नही होती
( मैं बोली ) मैं तो पुराने विचारधारा की हूं ” और दोनो साथ ही बिस्तर पर बैठ गए तो मोहन मेरे सामने ही कुर्ता उतारकर बिछावन पर ही रहने दिया साथ ही मेरे हाथ पकड़कर बोले ” तुम बेड के बीचों बीच बैठ जाओ ” मैं बिस्तर पर बीचों बीच हो गई फिर वो मेरे कंधे पर हाथ रख मुझे धीरे से पीछे की ओर धकेल दिए तो मैं तकिया पर लेटी हुई थी और मेरे सीने पर से साड़ी इधर उधर हो चुका था, मैं कमरे के बल्ब ऑन रहने से थोड़ी अचंभित थी की आखिर मेरा हब्बी क्या रोशनी में ही मेरे साथ मस्ती करेगा लेकिन वो मेरे बगल में लेट गया फिर मेरे कंधे पर हाथ रख मुझे करवट कर दिया तो मैं थोड़ा शरमा गई लेकिन उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लेकर गाल चूम लिया ” रेणु
( मैं ) हूं
( उनका हाथ मेरे गोल गद्देदार नितम्ब पर फिसलने लगा ) कॉलेज में पढ़ाई करती हो तो कोई बॉय फ्रेंड
( मैं उसके छाती से बूब्स रगड़ने लगी ) उहूं, कभी कोई लड़का मेरी ओर देखा ही नहीं
( वो मेरे साड़ी को सीने पर से हटाए और मैं तो शर्मिंदीगी महसूस करते हुए आंखें बंद कर ली ) ये बात है तब तो तुम्हें हर काम सिखाना होगा
( मेरे ब्लाउज के हुक जोकि आगे की ओर थे को वो खोलने लगा ) घरेलू काम में निपुण हूं, बर्तन मांजने से लेकर खाना पकाने तक आता है फिर क्या सिखाएंगे
( हब्बी मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिया फिर तो उसे बाहों से निकालने लगा ) तुम्हें मैं काम क्रिया करने सिखाऊंगा, काम का अर्थ होता है सेक्स यानी शारीरिक संबंध ” और मेरे कमर से साड़ी खोल मुझे सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में छोड़ दिए तो मैं अपने दोनो हाथो से बूब्स ढकने लगी लेकिन वो मेरे ऊपर लेटकर मेरे चेहरे को चूमने लगा, मेरा हाथ उनके पीठ पर था तो मैं उनके पीठ को सहलाने लगी फिर धीमे स्वर में बोली ” बत्ती तो बंद कर दीजिए
( वो मेरे ऊपर से हटा और रूम का सिर्फ नाईट बल्ब ऑन रहने दिया ) इस रोशनी में ही तो बीबी की खूबसूरती देखी जाती है ” और वो आते ही मेरे पास बैठे फिर अपने धोती को खोल दिए तो मैं उन्हें चढ्ढी और बनियान में देख शरमा गई, चेहरा फेर ली तो मोहन मेरे रसीले ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन दिए और पहली बार किसी मर्द के संग सेक्स कर रही थी, मर्द क्या कहिए मोहन भी २५ साल का होगा तो फिर मैं उनके गर्दन में हाथ डाल उनके ओंठ चूम ली साथ ही उनका एक हाथ मेरे बूब्स की गोलाई को पकड़ दबाने लगा।
रेणु का चेहरा गोरा तो बदन छरहरा था साथ ही लंबाई ५ फीट ४ इंच होगी तो चूचियां मानो संतरे का जोड़ा, इतना ही नही सपाट पेट से लेकर पतली कमर तो चूतड गद्देदार और मैं पल भर में ही अपने चेहरे को दूसरी दिशा में कर ली और मोहन मेरे गर्दन चूमने लगे लेकिन उनका हाथ मेरे चूची को मसल रहा था, विचित्र सी अनुभूति शरीर को मिल रही थी, तभी मोहन मेरे चुचियों के ऊपरी हिस्से को चूमने लगे तो मैं सोची की अब शर्मिंदिगी छोड़कर मजे लेना चाहिए और मैं खुद से ब्रा हटाई फिर मोहन तो मेरी एक चूची को पकड़ चूमने लगे जिसके निप्पल पर जीभ फेर रहे थे ” उह ओह आह चूसो ना प्लीज पूरे बदन में तो मानो सिहरन सी हो रही है और फिर मोहन मुंह में चूची लेकर चूसना शुरु किया तो दाहिने बूब्स को दबाए जा रहा था, मैं कामुकता के आगोश में आकर अपने जांघों को सटाए रगड़ने लगी और मोहन तो चूची को पूरी तरह से मुंह में भर चूसने लगा, मैं उसको छाती से लगाए स्तन पान करा रही थी तो मेरा हाथ उसके जांघिया पर था ” उह ओह अब चूसना छोड़ ना ” मेरी चूची मुंह से निकाल कर मेरे एक स्तन दबाते हुए छाती से पेट तक को चूमने लगा और मैं तो उसके चुम्बन से ही गर्म हो चुकी थी, बुर कब रसीली हो जाए पता नही, वैसे भी एक साल पहले मामा और मामी को सेक्स करते देख ली थी फिर अपने बुर में उंगली कर उसे कुरेदी थी और कमर तक चूमकर मोहन मेरे पेंटी को कमर से नीचे करने लगा तो मैं दिखावटी प्रतिरोध करते हुए उसका हाथ पकड़ ली, फिर भी वो मेरे पेंटी को उतार दिया और मैं तो पूर्णत नग्न अवस्था में लेटी हुई थी, अब जांघों को सटाए बुर को छुपा रही थी लेकिन मोहन तो काम क्रिया में निपुण लग रहा था, वो मेरे चिकने जांघ को चूमना शुरू किया और मेरी जांघें खुद ढीली पड़ गई तो मोहन जांघों को चूमने लगा साथ ही जांघों के बीच हाथ लगाए बुर को सहलाने लगा जिसके ऊपर हल्के रोएं थे। मोहन अब मेरे जांघों को चूम चूमकर मुझे पूरी तरह से कामग्नि के गिरफ्त में कर चुका था, मैं चूतड को उपर उठाने लगी थी ” उह उफ उई अंदर तो कीड़े रेंग रहे हैं मोहन
( वो झट से एक तकिया लिया और मेरे चूतड के नीचे डालकर ) डार्लिंग आराम से लेट ना देख अब असली मजा ” फिर मेरे जांघों के बीच चेहरा किए बुर को चूमने लगा तो मैं पूरी तरह से तड़पने लगी ” उई मां उसको भी कोई चूमता है क्या ” लेकिन मेरे टाईट बुर पर ओंठ सटाए चुम्बन देने लगा तो मेरी बुर की खुजलाहट बढ़ने लगी, लेकिन मेरे हब्बी तो इससे भी आगे बढ़े, उंगलियों से बुर फैलाकर उसमें जीभ घुसाए चाटने लगे ” ओह उफ उसमें जीभ मत घुसाओ ना रस निकल जाएगी ” और इतने में बुर पनिया गया तो भी मोहन जीभ से बुर चाटता रहा,…. आगे क्या हुआ! to be continued.

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