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शीला की जवानी : भाग ५

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फ्रेंड्स
मैं शीला यादव, उम्र ३२ वर्ष तो रंग गोरा, लंबी काली जुल्फें साथ ही चौड़ी छाती और दोनों बूब्स तो दूध से लबालब भरी दिखेगी जोकि साईज में बड़ी बड़ी है, चूतड भी काफी मांसल हो गई है जोकि गोल और गुंबदाकार है और उसकी फांकें खरबूजे की तरह है, जांघें मोटी और चिकनी तो चूत लालिमा लिए लेकिन १०-१२ साल से लन्ड का मजा लेते हुए ढीली पड़ चुकी है और कुछ महीने पहले जीवन में पहली बार गैर मर्द के साथ हमबिस्तर हुई वो भी अपने देवर जी के साथ, दोनों कुछ दिनों तक खूब मजा लिए फिर खबर मिला की सासु मां बीमार हो गई हैं तो देवर जी के साथ मुझे गांव जाना पड़ा और मेरा बेटा आरा में ही अपने मामा जी के पास रहता, मेरा ससुराल समस्तीपुर के पास है तो एक ट्रेन के स्लीपर क्लास में दोनों का टिकट बना फिर मैं और देवर जी साथ ही समस्तीपुर के लिए निकले और शाम के ०६:०० बजे गांव पहुंचे, सासु मां की तबियत काफी खराब थी और उन्हें डॉक्टर ने कुछ दवाई के अलावा स्लाईन चढ़ाने को बोला था, मैं पहुंची तो सासु मां को स्लाइन चढ़ रहा था और मैं हाथ पैर धोकर उनके पास गई और चरण स्पर्श की तो मेरी ननद श्वेता हम दोनों के लिए चाय बनाईं फिर मैं, देवर जी, ननद सब साथ में बैठकर चाय पीने लगे और सासु मां के स्वास्थ्य पर बातें होने लगी, तभी घर का नौकर रामू आया और मुझे देख मुस्कुराया फिर मेरी ओर आकर मेरे पैर छुआ तो मैं उसे आशीर्वाद दी, रामू २१-२२ साल का छोकरा होगा जोकि कई साल से हम लोगों के घर में ही रहता है और घर के कई तरह के काम काज को निपटाता है। मैं तो थोड़ी थकान महसूस कर रही थी तभी श्वेता खुद बोली ” भाभी आप यात्रा से आई हैं जाकर आराम कीजिए
( मैं बोली ) ठीक है ” फिर मैं उठकर नीचे के ही रूम में गई और पर्दा खींच अपने साड़ी उतारने लगी, पेटीकोट और ब्लाऊज़ पहन बैग खोल रही थी ताकि नाईटी निकाल पहन सकूं इतने में रामू मेरे रूम में आया और मैं तो झुकी हुई कपड़ा निकाल रही थी तभी मेरी नजर उस पर पड़ी तो उसकी नजर मेरे बूब्स जोकि ब्लाउज से बाहर की ओर झांक रही थी पर थी और मैं झट से सीधे खड़ी हुई फिर नाईटी को पकड़े छाती पर रख चुचियों को ढकने लगी ” रामू बिना दरवाजा नॉक किए अंदर घुस आए और क्या देख रहा था
( वो डर से सहमा हुआ था ) कुछ नहीं दीदी बस सोचा की पूछ लूं यदि कोई काम मुझसे हो ” मैं हंस दी फिर नाईटी को छाती पर से हटाकर बेड पर रख दी ” श्वेता और सासु मां किधर हैं
( वो बोला ) दीदी बदन मालिश कराने की सोच रही हैं क्या
( मैं बोली ) हां रामू लेकिन अभी नही रात को तू इस रूम में आ जाना फिर मालिश कराऊंगी ” और फिर रामू चला गया तो मैं रामू को आज रात नंगा कर मजा लेना चाहती थी वैसे भी मुझे बाहरी खाने का स्वाद मिल चुका था, तभी मैं ब्लाउज और पेटीकोट उतार नाईटी पहन ली फिर बेड पर लेट गई, गांव का माहौल तो रात ०९:३० बजे तक सब लोग खाना खाए फिर अपने अपने बेड पर चले गए, मुझे या तो श्वेता के साथ बेड पर सोना पड़ता या फिर बरामदे पर क्योंकि फर्स्ट फ्लोर पर तो देवर जी का कमरा था और बरामदे के एक ओर रामू का बेड था, मैं अब श्वेता के रूम में घुसी तो वो पूछी ” भाभी क्या आप यहीं सोएंगी
( मैं बोली ) बरामदे पर भी अच्छी नींद आयेगी क्या वहां कोई दिक्कत
( श्वेता हंस दी ) क्या है की मां को स्लाइन चढ़ना भी बंद हो गया फिर भी उन्हें कुछ जरूरत होगी तो आप की नींद खराब हो जायेगी, आप यहीं आराम से सोइए ” फिर मैं दरवाजा सटाकर बेड पर लेट गई, कमरे में एक नाईट बल्ब थी लेकिन बत्ती गुल होने के कारण रूम मे अंधेरा था और बरामदे पर एक लैंप जल रही थी, मैं बेड पर लेटी फिर थोड़ी देर में ही मुझे नींद आ गई।
शीला गहरी निंद्रा में सो रही थी और अचानक मेरी आंखें खुली जब मुझे किसी के हाथ का एहसास अपने बूब्स पर महसूस हुआ, मैं उसके हाथ पकड़ ली फिर उठकर बैठी तो बेड पर रामू था और मैं नाईट बल्ब की रोशनी मे उसे देखते हुए पूछी ” क्या क्या किया रामू
( वो बोला ) दीदी अभी तो श्वेता दीदी को खर्राटे भरते सुना तब हिम्मत करके रूम में घुस पाया ” मैं उठी और रूम से बाहर निकल गई फिर बाथरूम जाकर फ्रेश हुई, सब लोग नींद मे थे और मैं रूम आई फिर दरवाजा बंद कर बेड के पास खड़ी रही तो रामू बेड पर से उठकर खड़ा हुआ और मैं उसको देखते हुए नाईटी की डोरी को खोल दी फिर उसे इशारे से करीब आने बोली तो वो मेरे सामने आकर खड़ा हो गया, मैं उसके हाथ पकड़ अपने नाईटी में घुसाई ” रामू जिधर मालिश करने की इच्छा हो करो लेकिन
( वो मेरे नाईटी को बदन से निकाल दिया ) क्या दीदी
( मैं उसके पैजामा की डोरी पकड़ उसके गाल चूम ली ) दीदी बोलता है, फिलहाल तो बीबी बोल ” और उसके पैजामा को खोल मैं उसके लन्ड पकड़ ली तो रामू मेरे बदन पर हाथ फेरने लगा ” एक चुम्मी ले लूं क्या
( मैं उसे बाहों में भर चूमने लगी ) जो करना है कर लेकिन बातें कम क्या समझे। ”
मैं रामू के चेहरे को चूमने लगी और वो भी मेरे गर्दन से लेकर चेहरे तक को चूम रहा था साथ ही उसका हाथ मेरे चूतड के मांसल हिस्से को पकड़ दबा रहा था, तभी मैं रामू के गर्दन में हाथ डाल बोली ” देख रामू तू इस काम में बच्चा है इसलिए जैसा बोलती हूं वैसा कर, मैं अपना जीभ तेरे मुंह में घुसाऊंगी और तू उसे चूसना ” और फिर मैं रामू के ओंठ को जीभ से चाटने लगी तो वो मुंह खोल मेरे जीभ अंदर लिया और चूसने लगा, मैं तो उसके बदन से लिपट कर अपने बूब्स उसकी छाती से रगड़ रही थी, उसका लन्ड ज्यादा लंबा नहीं था लेकिन मोटा था और मुझे तो अब गैर के साथ हमबिस्तर होने का चस्का लग चुका था तो मैं रामू को ही गांव में मजे के लिए सही समझी, कुछ देर तक जीभ चूसा लेकिन मेरे गांड़ के दरार में उंगली रगड़ते हुए छेद में घुसाया तो मैं जीभ उसके मुंह से निकाल दी फिर दोनों बेड पर आ गए, मैं बेड पर लेटकर उसे इशारे से चूची चूसने को बोली तो वो भी नंगा था, मेरे बगल में बैठ छाती पर चेहरा झुकाए मुंह खोला तो मैं खुद चूची पकड़ उसके मुंह में घुसाई, मैं तो ३६ डी साईज की ब्रा लगाती थी तो इतनी बड़ी चूची उसके मुंह में पूरी तरह से नहीं समा पाती और रामू १/३ चूची मुंह में लिए चूसने लगा तो मैं उसके जांघो के बीच लटके लन्ड पकड़ सहलाने लगी ” आह ओह उह उई रामू चूस चूस साले आआआह्हह बहुत मजा आ रहा है ” और रामू चूची मुंह से निकाल पूछा ” शिला क्या सच में शहर के लोग चूत पर मुंह लगाते हैं
( मैं उसके सर सहला दी ) हां चूत चाटना हो या लन्ड चूसना ये सब होता है, मैं भी तेरा लन्ड चूसूंगी ” फिर रामू मेरे जिस्म को चूमने लगा और चूची को तो ऐसे पकड़ मसल रहा था मानो आटा गूंथ रहा हो तो मैं बूर में हो रही खुजली से मस्त थी और वो कमर तक चूमा फिर मेरी ओर देखने लगा ” मेरी चूतड के नीचे तकिया लगाकर देख तो सही मेरी चूत रानी को कितने सफाई से रखती हूं ” और रामू मेरे चूतड के नीचे तकिया लगाया और मैं जांघो को फैलाकर चूत पर हाथ फेरने लगी… आगे क्या हुआ अगले भाग में।

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