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प्यासी औरत और पड़ोस का लड़का : भाग ४

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फ्रेंड्स
दीपा दानापुर छावनी में नई थी और अभी तक किसी भी महिला के साथ मित्रता नहीं हुई थी, सामने के फ्लैट में रहनेवाली औरत मेरी मां की उम्र की थी लेकिन उसका लड़का रितेश मेरे करीब आकर मेरे साथ बिस्तर गर्म किया, मेरे हब्बी विवेक ऑफिस के काम से दिल्ली जाने वाले थे तो मैं साथ जाना चाहती थी लेकिन साथ में दो साल का बेटा भी इसलिए मुझे तीन चार दिन अकेले ही रहना था और मैं सोच रखी थी की रितेश के साथ मजे करूंगी। दीपा, उम्र २६ वर्ष गोरा रंग और ५ फीट ५ इंच की लंबाई भले ही एक बच्चे की मां बन चुकी है फिर भी गैर मर्दों के साथ सेक्स करना उसकी आदत सी हो गई है, जिस सुबह विवेक को निकलना था, उनके लिए बैग पैक कर उनके लिए नाश्ता तैयार कर दी फिर उनके जाते ही कामवाली बाई शीला से बातें करने लगी, दोनो साथ में चाय पी रहे थे बोली ” देखो शीला दो तीन रात की बात है यदि तुम रात को यहां रुक जाती
( वो सोच में पड़ गई ) लेकिन मैडम मेरे दो बच्चे हैं दिन भर रुकना मुश्किल नहीं है लेकिन रात को
( मैं ) ठीक है कोई बात नहीं ” तभी ऋषि फर्श पर बिछे गद्दे पर खेल रहा था तो मैं चाय पीकर स्नान करने की सोच रही थी फिर लगा की थोड़ी देर बाद ही स्नान करूंगी, इतने में मेरी मोबाइल बजने लगी, कॉल रितेश का था तो मैं रिसिभ की ” हां बोलो
( रितेश ) जी आपसे मिलना था
( मैं ) ठीक है लेकिन एक डेढ़ घंटे बाद कॉल करूंगी फिर आना ” मैं कामवाली को ऋषि का ध्यान रखने बोली फिर स्नान करने चली गई, सुबह के १०:०० बजे होंगे और मैं स्नान करके नाश्ता की फिर शीला अपने काम को निपटा कर चली गई तो मैं रितेश को कॉल की ” हां रितेश तुमको मुझसे मिलना है कोई खास बात
( वो कुछ नही बोला ) हेलो क्या सोच रहें हो, आ जाओ लेकिन कुछ सामान लेकर आना उसे मैं तुम्हारे व्हाट्सएप पर लिखकर भेज देती हूं ” फिर मैं उसके व्हाट्सएप पर वैनिला फ्लेवर आइस क्रीम साथ ही व्हिस्की की एक बोतल तो सिगरेट की पैकेट लिखकर भेज दी, मैं पीले रंग की टॉप्स साथ ही उजले रंग की लेगिंग्स पहन रखी थी तो मुझे मालूम था कि बेटा एक डेढ़ घंटे में सो जायेगा चूंकि आज वो जल्दी सोकर उठा था और फिर रितेश के साथ सेक्स, जी कर रहा था की उसे किसी को साथ लाने को बोलूं ताकि ग्रुप सेक्स का आनंद ले सकूं लेकिन फिर सोची की उसके साथ ही एंजॉय किया जाए। मैं ऋषि को स्नान कराई फिर उसे दूध पिलाकर थोड़ी निश्चिंत हुई की कुछ देर में ये सो जायेगा फिर दो घंटे तक रितेश के साथ मस्ती करूंगी, कुछ देर बाद डोर बेल बजने लगा तो मैं ऋषि को गोद में लिए दरवाजा खोलने गई, सामने रितेश खड़ा था ” अंदर आओ ” संयोग था की उसके फ्लैट का दरवाजा बंद था और उसे इशारे से बैठने को बोली, फिर वो बैठ गया और मैं उसे देख मुस्कुराई ” आराम से बैठो ये सो जाए फिर… अभी आई ” मैं उसके सामने से कमर बलखाते हुए रूम चली गई फिर ऋषि को बिस्तर पर लिटाई और उसको सुलाने लगी, कुछ देर बाद वो सो गया तो मैं उठकर डाइनिंग हॉल आई ” रितेश तुम तो बेबकुफ ही रह गए, ड्रिंक्स बनाओ ” वहीं रखे ग्लास में वो व्हिस्की डालने लगा फिर कोल्ड ड्रिंक्स तो मैं बालकनी का दरवाजा खोल दी फिर एक सिगरेट सुलगाई, फूंकते हुए बालकनी की ओर गई जोकि फ्लैट के पिछले भाग में खुलता था तो सामने खेल कूद के लिए मैदान था, रितेश वहीं आया जिसके दोनो हाथ में ग्लास था और मैं एक ग्लास लेकर पीना शुरू की ” तो रितेश, किस काम से मुझसे मिलना था
( वो मेरी ओर देखते हुए बोला ) दरअसल मैं मार्केट से लौट रहा था की आपके हब्बी टैक्सी से कहीं जाते हुए दिखे तो…..
( मैं हंस दी ) तो क्या रितेश, यही जानना है ना की कहां गए
( वो शरमाने लगा ) जी बिलकुल ” मैं अंदर आई तो वो भी पीछे से आया और मैं खाली ग्लास टेबल पर रखकर बेडरूम गई और फिर अपने वार्डरोब से एक ब्लू रंग की बेबी डॉल ड्रेस निकाली जिसे पहनकर सेक्स करना बेहद आराम दायक होता है, मैं झट से टॉप्स और लेगिंग्स को उतारी तो ब्रेसियर और पेंटी पहनी हुई नही थी, अब उस ड्रेस को पहनी जिसके दोनो स्ट्रैप मेरे कंधे पर थे, उसे लगाई फिर आईने के सामने खड़ी होकर अपने आपको देखने लगी, इस ड्रेस का ऊपरी हिस्सा तो ट्रांसपेरेंट था लेकिन उससे एटेच्ड ब्रा भी थी, नंगी बाहें तो नंगी पीठ साथ ही मेरे दोनो मोटी चिकनी जांघें भी नंगी तो सिर्फ चूतड और चूत ढकी हुई लेकिन उसके सामने तो सब कुछ खोलना ही था आखिर जिस्मों का मिलन निर्वस्त्र ही होता है। मैं अब रूम से निकली तो रितेश की नजरें मेरी नग्न जिस्मों पर टिकी हुई थी और मैं उसके सामने खड़ी हुई फिर अपने नग्न पैर उसके लन्ड के उभार पर रख तलवा को उस पर रगड़ने लगी तो उसका चेहरा देखने लायक था, मेरे जांघों पर हाथ फेरता हुआ उसने बूर को पेंटी पर से ही टटोला, वो पेंटी भी ड्रेस से अटेचेड थी लेकिन किसी काम की नही, मैं लन्ड के उभार का एहसास पा रही थी और फिर बोली ” एक पटियाला पैक तो बनाओ रितेश फिर तुम्हें आज मैं डांस दिखाऊंगी ” ज्योंहि उसके बगल में बैठकर उसके गाल चूमते हुए शर्ट के बटन को खोलने लगी, वो दोनो ग्लास में व्हिस्की डालते हुए पैक तैयार कर रहा था और मैं उसके बदन पर से जींस और शर्ट उतार अब उसके बनियान को गले से बाहर की तो वो मेरे गाल को चूमने लगा ” तुम बहुत ही हॉट और सेक्सी हो, पहले ड्रिंक्स तो ले लो उसके बाद ” मैं ग्लास लेकर व्हिस्की पीने लगी तो मेरा एक हाथ उसके जांघिया पर था, उसके लन्ड कि उभार को समझते हुए थोड़ा जांघिया नीचे की फिर तो उसका लन्ड नंगा मेरे हाथ में था, जिसे दबाते हुए ड्रिंक्स ले रही थी तो रितेश मेरी बूब्स को पकड़ दबाने लगा और ज्योंहि दोनो का ड्रिंक्स खत्म हुआ मैं उसके जांघ पर चूतड रख उसके गले में बाहें डाली और ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन देने लगी, उसका हाथ मेरे पीठ पर था और रितेश तुरंत ही मेरे रसीले ओंठ अपने मुंह में लेकर चूसने लगा, दोनो एक दूसरे की बाहों में सिमटे हुए थे तो पति के ऑफिशियल टूर का कुछ तो मजा मुझे लेना था और वो मेरे ओंठ को मुंह से निकाला की मैं अपनी जीभ मुंह से निकाल उसके ओंठ को चाटने लगी फिर तो मेरी जीभ अपने मुंह में लिए हुए रितेश चूसने लगा और उसका हाथ मेरी कमर पर था, मैं अब चूतड को थोड़ा ऊपर की तो वो अपनी उंगली से बूर को कुरेदने लगा, पेंटी के किनारे से उंगली घुसाए बूर में उंगली करने लगा और दोनो चुम्बन क्रिया में मस्त थे, तभी मुझे मुंह से लार टपकने का एहसास हुआ और मैं जीभ बाहर कर उसके कंधे पर सर रख दी ” रितेश तुझे तीन चार दिन मेरे साथ रहना है ”
( वो मेरे ड्रेस के स्ट्रैप को बाहों से नीचे करता हुआ गर्दन चूमने लगा ) क्यों नहीं जानू, लेकिन घर में क्या बताऊंगा
( मैं चेहरा सीधा किए उसके ओंठ पर उंगली फेरने लगी ) चिंता मत करो जान मेरी जैसी सेक्सी लेडी को कई मिल जायेंगे लेकिन मुझे स्वादिष्ट भोजन पसंद है, चल जमीन पर बैठ और चाट ” मैं दो पैक पीने के बाद मस्त हो गई थी और रितेश अपना जांघिया नीचे कर नंगा हो गया फिर फर्श पर घुटनो के बल होकर मेरे जांघ पकड़ फेलाने लगा, दीपा चूतड को थोड़ा आगे की फिर जांघें फैलाई सोफा के बैक पर सर रखे रानी की तरह पड़ी रही ” बूर में वो आइस क्रीम लगाकर चाटना ” तो वो उठकर सामने पड़े रेफ्रिजरेटर से आइस क्रीम निकाला और मै बैठी हुई उसके नग्न शरीर देख रही थी, उसका लन्ड तो किसी सांप की तरह फुंफकार रहा था और वो आकर ज्योंहि बैठता मैं बोली ” रुको पहले मैं तेरा लन्ड चूसूंगी ” और रितेश मेरे सामने खड़ा हुआ एक पैर सोफा पर रखा तो मैं उसका लन्ड पकड़ चूमने लगी, सुपाड़ा को ओंठ पर रगड़ते हुए मुंह खोली और उसका लन्ड निगल गई, लेकिन अभी भी आधा बाहर ही था, उसका लन्ड मुंह में लिए चूसने में लीन थी की मेरी मोबाइल बजने लगी, नजर फेर देखी तो विवेक का कॉल था लेकिन घंटी बजने दी और रितेश मेरे सर पर हाथ लगाए जुल्फों को पकड़ा और मुंह में लन्ड का धक्का देने लगा। दीपा तो व्हिस्की और सेक्स के नशे में चूर थी और मेरी बंद आंखें साथ ही बदन में गर्मी और बूर की खुजली मुझे मजा दे रही थी, कुछ देर में ही रितेश मुंह से लन्ड निकाल दिया तो मैं उठते हुए बोली ” आ रही हूं, मेरी नन्ही सी जान रो दी ” और मैं नंगे ही अपने रूम गई तो बाबू सो रहा था फिर मैं वाशरूम जाकर छर छर मूतने लगी और बाथ टॉवेल को छाती से बांधकर आई तो रितेश सोफा पर बैठा हुआ मुझे देख रहा था, आगे की बातें अगले भाग में।

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