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दीपा की हसीन रातें : भाग २

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पिछले भाग में आपने पढ़ा की मैं दीपा अपने पति विवेक और उसके जूनियर निखिल के साथ मजे ले रही थी, उससे आगे… मेरे बदन की कामाग्नि चरम पर थी जिसे दोनों ने भड़काया था, मेरी योनि को प्यार कर मुझसे लन्ड भी चुसवाए थे तो मेरी चुचियों को चूस चूसकर लाल कर दिए थे और अब संभोग सुख पाने की घड़ी थी लेकिन अफसोस मेरा बेटा नींद से जाग गया और मैं झट से साड़ी सहित पेटीकोट और ब्लाऊज़ पहन उस रूम में गई तो विवेक और निखिल गेस्ट रूम चले गए फिर मैं बेटा को लेकर डाइनिंग हॉल आई तो उसे भूख लगी थी, मैं जल्दी से उसके लिए ब्रेड और जेम लाई फिर खिलाने लगी तो मेरी योनि मार्ग खुजली से मुझे तंग कर रही थी साथ ही मुझे फिलहाल कुछ करने का मन नहीं था लेकिन बेटा तो अभी दो ढाई घंटे तक जागता तो मैं सोची की क्यों ना पति को बाबू के साथ घूमने भेज दूं और निखिल के संग चुदाई का मजा ले लूं, फिर पति के साथ देर रात संभोग क्रिया करूंगी और उसको खिलाने के बाद मैं उसे वहीं छोड़ कर गेस्ट रूम के दरवाजे तक गई फिर पति को इशारे से बुलाई, वो शॉर्ट्स पहनकर बैठे हुए थे। मैं वापस डाइनिंग हॉल आई तो वो टी शर्ट पहने आए ” चलो बाबू थोड़ा पार्क घुमा लाता हूं
( मैं उनको एक नजर देखी ) मोबाइल फोन साथ ले लीजिएगा ” और दोनों फ्लैट से निकले तो मैं दरवाजा बंद की फिर इत्मीनान से डाइनिंग हॉल में ही सारा कपड़ा उतार नंगी हो गई, अब मैं निखिल जोकि गेस्ट रूम में था की ओर बढ़ने लगी और ज्योंहि कमरे के अंदर कदम रखी वो मुझे देख देखता ही रह गया, मैं बेड के किनारे पर खड़ी हुई तो निखिल मेरे सामने आकर बैठा ” भाभी आप बहुत सेक्सी और हॉट हैं
( मैं एक पैर बेड के किनारे पर रखी और बुर सहलाने लगी ) हां बेटा तेरी मां जो हूं अब किस स्टाईल में घुसाएगा ” तो वो मेरे कमर पकड़ बेड पर लाया और मैं डॉगी स्टाइल में हो गई, बुर में तो कॉपर टी लगवा ली थी इसलिए चुदाने में कोई रिस्क नहीं था और फिर निखिल मेरे चूतड को सहलाने लगा तो उसके सुपाड़ा का एहसास बुर को मिला, लन्ड घुसाता हुआ मेरे कमर को पकड़े हुए था और फिर एक ही सांस में पूरा लन्ड घुसाया और चोदने लगा तो मैं निखिल के लन्ड से मजा लेते हुए मस्त थी, पीछे मुड़कर बोली ” तेरी मां हूं गति बढ़ाओ और चोदो
( निखिल मेरे चूतड को सहलाने लगा ) हां मेरी मां तेरी बुर तो भोंसड़ा हो चुकी है, गधे का लन्ड ही बुर को ठंड पहुंचा सकती है ” मैं चुप रही फिर अपने चूतड को हिलाते हुए चुदवाने का आनंद लेने लगी दूसरी ओर मेरे पति बेटा को लेकर पार्क घुमाने गए थे और दोनों को मौका दिए थे ताकि काम क्रिया का आनंद ले सकें, मेरी रसीली बुर गर्म होने लगी तो मैं चूतड को स्प्रिंग की तरह हिलाते हुए मस्त थी साथ ही मेरे सीने से लगे चूची को पकड़ निखिल दबा भी देता। मैं अब बुर की गर्मी से निजात पाना चाहती थी तो निखिल बुर से लन्ड निकाल मुझे छोड़ा और मैं वाशरूम चली गई फिर मूतने के बाद छाती से बाथ टॉवल लपेट वापस आई और निखिल तो नंगे लेटा था साथ ही उसका ७-८ इंच लम्बा लन्ड फुंफकार रहा था जिसे देख मैं ओंठ पर जीभ फेरने लगी और अब अलमिरे से एक क्रीम निकाल बेड पर आई तो निखिल लेटा हुआ था और मैं उसके लन्ड को पकड़ चूमना शुरु की तो वो बोला ” लन्ड पर बैठकर चुदाओगी जान
( मैं सुपाड़ा को जीभ पर रगड़ने लगी ) क्यों नहीं, तेरी बीबी वाइफ स्वैपिंग में हिस्सा नहीं लेना चाहती है ना, एक बार मुझसे मिलवा देना फिर देखना वो तुझे निराश नही करेगी ” और मैं उसके लन्ड मुंह में लिए चूसने लगी तो निखिल लेटा हुआ था, फिर मैं लन्ड को मुंह से निकाली और बेड पर टांगों के बल बैठ बुर में क्रीम लगाने लगी तो निखिल पूछा ” ये क्या है भाभी
( मैं बोली ) बुर लहर रही है थोड़ा लुब्रिकेंट्स लगा ली ” और मैं अब उसके लन्ड के ऊपर टांगे फैलाई बैठी तो मेरी चूत लन्ड के सामने था और चूतड थोड़ी ऊपर तो यकीनन मैं खुद को पैरों के बल रखी थी, निखिल मेरे कमर को पकड़ा फिर मैं संतुलित अवस्था में लन्ड को पकड़ बुर में घुसाने लगी, सुपाड़ा सहित आधा लन्ड बुर में घुसा तो मैं चूतड को नीचे करते हुए उसके लन्ड निगलने लगी और तभी निखिल नीचे से जोर का धक्का देकर चुदाई करने लगा, मैं चूतड उछालना शुरू की तो वो मेरे कमर को पकड़े चोद रहा था और इस पोजीशन में लन्ड पूरी तरह से बुर को रगड़ा मारता और मुझे तो मर्दों के लन्ड पर बैठकर चुदाना अच्छा ही लगता था और दोनों संभोग क्रिया में लीन थे की मेरा मोबाइल बजने लगा फिर भी मैं चुदाई करवाती रही और वो नीचे से धक्का देता हुआ मेरी बुर को चोद रहा था, अब बुर फिर से गर्म होने लगी तो अंदर रस निकलने की उम्मीद थी। कुछ देर बाद मैं निखिल के बदन पर डॉगी स्टाइल में हो गई तो बदन को आगे पीछे करने से उसका लन्ड मेरी बुर के अंदर बाहर हो रहा था और मैं उसके ओंठ चूमते हुए बोली ” आज रात भर तेरा औजार टाईट ही रहेगा क्या
( वो नीचे से धक्का देता हुआ बोला ) उहुंं ऐसा संभव नहीं ” और मेरी बुर रसीली हो गई तो मैं उसके बदन पर से उठी फिर वाशरूम जाकर फ्रेश हुई और वापस आकर मोबाइल देखी तो मेरी मां का कॉल था, सोची की थोड़ी देर बाद ही बातें करूंगी और फिर मुझे निखिल बोला ” अब तुझे घोड़ी बनाकर चोदूंगा
( मैं मुस्कुराते हुए डाइनिंग हॉल आई ) तो आजा बेटा मां चुदाई को तड़प रही है ” और मैं डाइनिंग टेबल के सहारे घोड़ी बन गई तो निखिल मेरी गांड़ के सामने खड़ा था, उसका लन्ड तो मेरे हब्बी के लौड़े से भी लंबा था और मुझे तो लंबा लन्ड बेहद पसंद है और वो मेरी रसीली बुर में सुपाड़ा सहित लन्ड घुसाने लगा तो मैं दोनों जांघें फैलाई खड़ी थी और पीछे मुड़कर देखी तो निखिल धीरे धीरे चोदने लगा, दीपा तो झट से चूतड को हिलाने लगी और बोली ” ओ आह अबे साले बहन के लौड़े बुर चोद रहा है या हत्थू मार रहा है, थोड़ा तेज चोद
( निखिल तीव्र गति से चोदता हुआ मेरे बूब्स पकड़ा ) हां मेरी अम्मा मजा तो तू दे ही रही है लेकिन तेरे जैसे को एक साथ तीन चार मर्द चाहिए
( मैं हंस दी ) अपनी मां की पहचान तुझे है, अंबाला में मेरी दोस्त लोग थी तो हमलोग वीकेंड में क्लब में प्लेबॉय के साथ सेक्स करते थे
( निखिल अब हांफने लगा ) आह ओह भाभी मेरा लन्ड तो खल्लास होने पर है
( मैं तेजी से चूतड हिलाने लगी ) हां बेटा मां की बुर में वीर्य गिराकर पेट से कर दे ” और उसका गर्म चिपचिपा वीर्य बुर को गीला कर दिया, कुछ देर स्थिर रही फिर लन्ड मुंह में लेकर वीर्य का स्वाद चख ली, वाशरूम जाकर फ्रेश हुई फिर थोड़ी देर आराम कर साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज पहन ली तो निखिल बेड पर लेटा हुआ था ” तुम यहां से बाहर मत निकलना समझे, दो ड्रिंक्स बनाती हूं फिर विवेक को बुलाती हूं और अब दस बजे के बाद ही…. ” तो मैं विवेक को कॉल की और फिर वो बेटा के साथ घर आया, आगे अगले भाग में।

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