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जिस्म की गर्मी : भाग ११

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हैलो फ्रेंड्स
अंबाला छावनी के गेस्ट हाउस में मैं शाम ०७:०० बजे पहुंची तो कल तक यहीं रुकना था फिर नई जगह दानापुर, वैसे भी मेरा ससुराल वहां से नजदीक पड़ता साथ ही मायके भी तो दिन भर दो लड़कों के साथ शारीरिक संबंध बनाकर थकावट महुसूस कर रही थी, पता नही गेस्ट हाउस में विवेक कुछ हरकत करने वाला था ये भी मालूम नहीं और वहां मैं रूम मे आई फिर एक स्टाफ से सारा बैग एक कोने में रखवाकर बोली ” दो बोतल पानी का ला दो ” वो औरत चली गई, मैं जींस और टॉप्स में थी तो सोची कपड़ा बदल लिया जाए और रूम मे ही बैग से नाईट ड्रेस निकाल जींस और टॉप्स उतारने लगी, मुझे ध्यान तक नहीं था की रूम का दरवाजा अंदर से बंद तक नहीं है बल्कि सिर्फ सटा हुआ है और ज्योंहि ब्रेसियर और पेंटी उतार नाईट ड्रेस को पहनने के लिए उठाई मुझे दरवाजा खुलने का एहसास हुआ और मैं हड़बड़ा कर ड्रेस से छाती को ढके दरवाजे की ओर मुड़ी तो एक २७ – २८ साल का लड़का खड़ा था, मुझे देख वो हतप्रभ था तो मैं थोड़ी सी घबड़ाई हुई ” सॉरी मैडम
( मैं ) दरवाजा नॉक किए बिना अंदर कैसे आए यू इडियट ” और वो जाने लगा तो मैं बोली ” नॉक करके अंदर आना ” वो पलट कर मुझे देखा फिर रूम से बाहर निकल गया तो मैं सोची की बेड पर नंगे ही लेटा जाए, देखूं वो जो भी था कितने देर में आता है और बेड पर नंगे लेटी साथ ही अपने खूबसूरत जिस्म पर एक चादर ढक ली इतने में विवेक का कॉल आया ” बोलो जी तुम कब आ रहे हो
( वो हंस दिए ) अभी घंटा दो घंटा लगेगा, निखिल नाम का एक लड़का जोकि मेरा जूनियर है मिलने गया है, तो सोचा तुमको कॉल कर दूं ” मैं क्या बोलती लेकिन मोबाइल रखते ही दरवाजा नॉक हुआ तो मैं बोली ” यस कम इन ” तो वो लड़का अंदर आया, तकरीबन छह फुट लंबा, सांवला रंग तो तंदुरुस्त बदन, मैं उसकी ओर देख बोली ” जी बैठिए लेकिन दरवाजा लॉक करके, आप निखिल हैं
( वो सामने के सोफा पर बैठा हुआ मुझे देख रहा था ) जी मैडम, माफी चाहता हूं की दरवाजा नॉक किए बिना अंदर आया, आपको जरूर बुरा लगा होगा
( मैं खिलखिलाकर हंस दी ) तुम कितने साल से यहां पोस्टेड हो
( वो बोला ) तकरीबन छह महीने से
( मेरे गर्दन तक चादर थी जिसे मैं धीरे धीरे नीचे खिसका रही थी ) इसलिए दीपा मैडम को नहीं जानते हो ” और इतने में चादर को अपने बूब्स के नीचे सरकाकर बोली ” हड़बड़ी में कुछ नही पहन पाई निखिल तुम प्लीज इधर आओ तो ” वो मेरे बड़े बड़े बूब्स को देखता हुआ पहले तो अपना जूता खोला फिर मेरी ओर बढ़ने लगा और वो मेरे करीब तक आता इसके पहले ही मैं चादर को तन से हटाकर नंगी हो गई और वो मेरे करीब आकर मुझे देखता हुआ बोला ” ओह सेक्सी यू आर सो हॉट
( मैं जांघ पर जांघ चढ़ाए चूत छुपाई हुई थी और वो मेरे कमर के पास बैठा ) दीपा मैडम आप तो मुझे पल भर में ही गुलाम बना ली
( मैं हंस दी ) ऐसे ही वक्त बर्बाद करोगे या आगे कुछ विचार है ” तो वो अपना शर्ट उतार दिया और मैं उठकर बैठी फिर वो भी सिर्फ बनियान और चढ्ढी में मेरे सामने बैठा था, उसके कंधे पर हाथ रख बोली ” व्हिस्की या वाईन फिर करूंगी साइन ” वो मेरे गाल चूम लिया और बोला ” तो अभी किसी स्टाफ से मंगवाता हूं और वो किसी को कॉल किया तो मैं उसके गाल चूमते हुए लन्ड को चढ्ढी पर से ही पकड़ दबाने लगी ” तुम तो आखिरी पल में मुझसे मिलने आए पहले मिलते तो, खैर शादी हुई की नही
( वो मेरे बूब्स पकड़ दबाने लगा ) अभी बैचलर हूं ” और इतने में वो मुझे गोद में बिठाए ओंठो को चूमने लगा तो मैं उसके पीठ सहलाते हुए सोचने लगी कि आखिर दिन भर चुदवाने के बाद भी कामाग्नि की गिरफ्त में हूं बहुत बड़ी चुद्दक्कड़ हूं और वो मेरे संगमरमर से जिस्म को सहलाता हुआ ओंठ को ही मुंह में लिए चूसने लगा तो मैं उसके जांघो पर बैठकर चिपकी हुई छाती से चूचियां रगड़ने लगी, निखिल मेरे रसीले ओंठ चूसता हुआ अब चेहरा चूमने लगा तो मैं उससे लिपटकर उसके गर्दन चूम रही थी लेकिन अभी तो व्हिस्की का इंतजार था क्योंकि बिना नशे के सेक्स वो भी गैर मर्दों के साथ मुझे अच्छा नहीं लगता, वैसे कोई आत्मग्लानि भी महसूस नहीं होती। निखिल अब फिर से ओंठ चूमने लगा तो मैं उसके ओंठ को अपने जीभ से चाटने लगी और वो मुंह खोलकर मेरा जीभ अंदर लिए चूसने लगा, मैं काम की देवी की तरह उसकी गोद में टांगे चिहारे बैठी थी और जीभ चुसवाते हुए उसके छाती से बूब्स दबाए जा रही थी तो निखिल मेरे चूतड के नीचे हाथ लगाए बुर के अंदर उंगली घुसाने लगा, अब उंगली घुसाए या अपना लौड़ा मुझे तो मस्ती चाहिए और मुंह में लार का मिश्रण तो दो जिस्मों का मिलन आनंद दे रहा था, मेरी आंखें बंद थी तो उसकी उंगली चूत को कुरेदते हुए मेरे अंदर आग लगा रही थी और इतने मे निखिल का मोबाइल बजने लगा तो वो मेरे जीभ निकाल मुझे छोड़ा फिर मोबाइल पर बात करने लगा ” गेस्ट हाउस में रूम नंबर १०८ है ” और वो झट से मेरा एक टॉवेल लेकर कमर से लपेट लिया तो दीपा नंगे ही वाशरूम चली गई ताकि एक अनजान मर्द मुझे इस हाल में न देख ले, मैं अंदर घुसी फिर फ्रेश हुई और वाशरूम से ही निखिल की बातें किसी के साथ सुन रही थी और कुछ पल बाद निखिल धीमे स्वर में बोला ” दीपा बेबी आईए बाहर ” और मैं नंगे ही उसके सामने खड़ी हो गई, वो सोफा पर बैठा हुआ ड्रिंक्स बनाने जा रहा था की मैं अपने एक पैर उठाकर उसके जांघ पर रखी फिर बुर को सहलाने लगी ” तुमको विवेक ने यहां क्यों भेजा
( वो ग्लास में व्हिडकी डालने लगा और बुर को देख रहा था ) जो आप कर रही हैं वही देखने के लिए क्यों सर से परमिशन ले लूं
( मैं उसके जांघ को पैर से रगड़ते हुए अपनी एक बूब्स दबाने लगी ) ले लो वैसे भी उसकी बीबी हूं कोई गुलाम नहीं जिसके साथ हमबिस्तर होने की इच्छा होगी उसके साथ ही, समझे ” और फिर उसके बगल में बैठकर उसके चढ्ढी को खोलने लगी तो वो मेरी एक बूब्स पकड़े दबाने लगा ” जरा अपना पेनिस दिखा फिर ड्रिंक्स होगा ” तो उसका चढ्ढी और बनियान तन से गायब था और उसका लन्ड टाईट खड़ा था जिसे पकड़ बोली ” अभी से फुंफकार रहा है लगता है तुम्हारा देर तक नहीं टिकने वाला है
( वो ग्लास उठाया ) अब जरा ड्रिंक्स लीजिए फिर देखिएगा की कौन टिकता है ” दोनो ड्रिंक्स लेते हुए सिगरेट फूंकने लगे तो मेरा एक हाथ उसके लन्ड सहला रहा था…. to be continued.

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