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चचेरी बहन ने बदला जीवन भाग 17

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मैं अपने कमरे गया और सो गया डेढ़ बजे के आसपास बबिता ने मुझे जगाया और बोली भैया खाना खा लो फिर मैं आंगन में आ गया हमने खाना खाया औए फिर मैं वापस सो गया 5 बजे चाची ने मुझे जगाया बोली आज कही जाना नही क्या मैंने घड़ी देखते हुए कहा अच्छा किया चाची जो जगा दिया और कपड़े पहन कर हाथ मुह धो कर साइट पर जाने के लिए तैयार हो गया तभी पिताजी की कॉल आयी उन्होंने एक नंबर नोट करवा कर कहा इस पर बात कर लेना मैंने 11 लड़के भेजे हैं यहां से और कल 8 लड़के और भेज रहा हूँ मैंने उनकी कॉल काट कर उस नंबर पर बात की किसी रमेश नाम के लड़के से मेरी बात हुई मैंने उसे अपना नाम बताया तो उसने नमस्ते की और बताया कि सारे लड़कों के साथ कानपुर पहुंच चुका है बस उस पते पर पहुंचना बाकी है मैंने उसे एड्रेस ठीक से समझाया और बाइक उठा कर निकल लिया अपनी साइट पर आधे घण्टे में मैं वहां पहुंच गया 5:45 हो रहे थे मैंने केबिन खोल कर पेमेंट बांटने वाला काम शुरू कर दिया तभी गॉर्ड ने आ कर बताया कि भैया जी कुछ लड़के आये हैं मैंने कहा उन्हें अंदर बुला कर केबिन के बाहर ही बिठाओ मैं आता हूँ साढ़े 6 तक चाचा अभय गोपाल और संतोष भी गए उनके भी पैसे दे कर मैंने गोपाल को बताया कि गांव से और लड़के आये हैं बाहर बैठे हैं जा कर उनसे बात चीत करो मैं आता हूँ तो गोपाल ने बताया भैया वो जो और लड़के आने वाले थे वो भी आ चुके हैं उन्हें भी बुला लेता हूँ आप सब से एक साथ ही मिल लो मैंने कहा ठीक है बुलाओ उन्हें चाचा बोले हम तो चलते हैं तू अपना काम कर भाई और वो निकल गए अभय के साथ मैं बैठ कर हिसाब लगाने लगा 19 पहले के 11 और आ गए पता नही राजू कितने लाया होगा….. फिर मैंने कैश वगैरह अंदर रख कर सब लॉक किया और बाहर आ गया सामने से 10 लड़के चले आ रहे थे वो भी आ गए सारे 21 लड़के इकट्ठे हो गए केबिन के सामने मैंने सबसे दुवा सलाम की फिर बोला देखो भाइयों गांव में तुम लोग अपनी जिंदगी यूँ ही घूम फिर के ताश खेल कर इधर उधर में बर्बाद कर रहे थे महीने में 8-10 300 की दिहाड़ी में काम कर लेते थे यहां रोज के 500 रुपये और खाना कंपनी की तरफ से मिलेगा लेकिन एक शर्त है काम पूरी मेहनत और लगन से करना पड़ेगा हरामखोरी नही चलेगी उनमें से ज्यादातर लड़के बोले जी भैया हम एकदम मन लगा के काम करेंगे आप निश्चिंत रहो मैंने कहा ठीक है तुम लोग खाना खा कर आराम करो कल से तुम्हे काम करना है वो सब वापस अपने कमरों में चले गये तभी गॉर्ड आया बोला भैया इन सब के खाने का प्रबंध भी करना होगा क्या मैंने कहा हां आज का तो कर ही दो कल तो चले जायेंगे दूसरी साइट पर वो सर हिलाता हुआ चला गया, फिर मैंने सक्सेना सर को कॉल की उसने काल रिसीव की मैंने कहा प्रणाम सर 21 लड़के कल सवेरे काम करने के लिए तैयार हैं वो बोला बहोत बढ़िया संजय उन सबको यहाँ भेज दो कल सुबह मैंने कहा वो पहुंच जाएंगे सर फिर मैं बोला सर एक बात बोलूं वो बोला बोल भाई मैंने कहा सर कल सारा दिन नए लड़को से काम करवाने के बाद शाम को जब सब को पैसे देने उसी टाइम अपने पुराने लेबर में से दो तीन निकम्मे और कामचोर मजदूरों को हटा देना ये कह कर की मेरे पास सिर्फ मेहनती और ईमानदार लोगों को ही काम मिलेगा बैठ कर खाने वालों की यहां कोई जरूरत नही है वो बोला अच्छा पर इससे क्या होगा मैंने कहा परसों से नए और पुराने सारे लेबर के काम मे फर्क महसूस होगा आपको हां जो एक दो लड़के ज्यादा मेहनती और अच्छे लगें आपको उन्हें 25-50 रुपये एक्स्ट्रा भी दे देना वो थोड़ा सोचते हुए बोला यार बात तो तूने बहोत अच्छी बताई होशियार इंसान है तू वैसे भी मुझे भरोसा है तेरे भेजे हुए लड़कों पर वो डेढ़ दिन का काम एक दिन में करने की क्षमता रखते हैं फिर उसने कहते हुए बात खत्म की, की मैं सुबह अभय के साथ उन सभी लड़को को यहां भेज दूँ।
फ़ोन काट कर मैंने घड़ी देखी 6:45 हो रहे थे मैंने केबिन लॉक किया और बाइक स्टार्ट की तभी बबिता की कॉल आ गयी बोली कहाँ हो यार मैंने कहा आ रहा बस 5 मिनट में और बाइक बाधा दी 5 मिनट बाद मैंने सोनम के घर के पास बाइक रोकी और उसके घर की घंटी बजा दी आज बबिता ही दरवाजा खोलने आयी हां उसके पीछे से फौरन ही सोनम भी आई आज सोनम में ढीली सी नाइटी पहनी थी पर हल्का मेकअप उसने आज भी किया हुआ था बबिता बाहर आ गयी मैंने गेट के अंदर खड़ी हुई सोनम को देखा गहरी नजर से वो भी मेरी ओर देखती रही कुछ सेकेंड्स तक हम एक दूसरे की आंखों में देखते रहे फिर मैंने कहा सोनम जी कोई दिक्कत तो नही पानी तो टपक रहा अब, उसे मेरी बात समझ नही आई वो हैरानी से मुझे देखने लगी मैंने कहा वो किचन का tap अब सही चल रहा न फिर वो मुस्कुरा कर बोली हां वो एकदम ठीक है अब, फिर मैंने ok हम चलते हैं और मैंने बाइक स्टार्ट कर दी बबिता मेरे पीछे बैठ गयी क्रॉस लेग करके और मेरी पीठ से चिपक गयी मैंने बाइक बढ़ा दी और साइड मिरर से देखा सोनम अब भी गेट पर खड़ी हमे जाते हुए देख रही थी……..
रास्ते मे हमने चाउमीन खाई और फिर हम घर आ गए बाइक अंदर कर के मैं अंदर आया और नहा कर हाफ पैंट और बनियान पहन कर आंगन में आ गया…. चाचा और अभय भी वहीं बैठे थे मैंने अभय को 500 रुपये दिए और बोला सुबह जल्दी पहुंच जाना साइट पर वहां 21 लड़के हैं गोपाल से पूछ लेना वो बता देगा उन्हें दूसरी साइट पर पहुंचा देना वो खुश हो गया 500 के नोट में आधे तो बच ही जाने थे उसे तभी चाची ने घर के समान की लिस्ट अभय को दी और बोली ये सामान ले कर आ बाजार से मैंने जेब से हजार रुपये निकाल कर चाची को दिए और कहा लो चाची घर का सामान मंजवा लो चाचा ने कहा मैं देता हूँ ना पैसे मैंने कहा चाचा एक ही बात है मेरा भी घर है परिवार है फिर चाची ने अभय को पैसे दिए और बोली लौट लार हिसाब देना भैया को बचे हुए रख मत लेना वो मुह बना कर पैसे और पर्चा ले कर बाजार चला गया फिर मैं अपने कमरे में आ गया और लेट कर फ़ोन पर पोर्न देखने लगा मेरे ख्यालों में बारबार सोनम आ रही थी मुझे वो बहुत पसंद आई, सुनीता और पिंकी मेरे लिए बस लंड को ठंडा करने वाली चुतें थीं बबिता मेरी चचेरी बहन थी उसके साथ timepass और मस्ती ही कि जा सकती थी चाची के साथ भी मैं अवैध संबंध बना कर उन्हें चोद सकता था पर सोनम 40 साल की भरपूर जवान औरत जो घरपर एकदम अकेली रहती है ज्यादातर और पैसे वाली भी है वो मुझे हर तरह से सुख और संतुष्टि दे सकती थी मैं पोर्न देखते हुए सोनम के नंगे बदन की कल्पना करने लगा…….
तभी मेरे फोन की घंटी बजी स्क्रीन पर रण्डी नंबर 3 लिखा हुआ आ रहा था मैं फोन को देखता रहा जब घंटी बजनी बन्द हुई तो सबसे पहले मैंने कांटेक्ट में जा कर उसका नंबर उसके नाम पर सेव किया सोनम नाम से फिर मैं फोन लिए हुए छत पर आ गया और मैंने सोनम को कॉल की…..
पूरी घंटी गयी लेकिन कॉल नही रिसीव हुई मैंने दोबारा कॉल की इस बार झट से कॉल रिसीव हुई मैंने कहा हेलो सोनम जी नमस्ते…. वो बोली हेलो संजय क्या कर रहे हो मैंने कहा कुछ नही फिलहाल तो बस आपसे बात कर रहा हूँ वो बोली मेरा मतलब है अभी मैंने कॉल की थी तो तुमने पिक नही कि मैंने झूठ बोलते हुए कहा मैं बाहर बैठा था फोन अंदर चार्ज पर था अंदर आते आते कट गया फिर मैंने छत पर आ कर आपको कॉल की, वो बोली छत पर क्यों आ गए मैंने कहा यूँ ही वहां सब लो थे बात करने में डिस्टर्ब होता उसने पूछा खाना हो गया क्या मैंने कहा नही अभी तो बस नहा कर फ्री हुआ हूँ थोड़ी देर में खाउंगा आपने खाया…. वो बोली नही मैं भी अभी खा लूंगा अकेली कुछ करने का मन ही नही होता मैंने कहा अरे खाना तो खाना ही पड़ेगा उसके बिना काम कैसे चलेगा वो बोली खा लुंगी चिंता ना करो मैंने हंसते हुए कहा अगर आपका अकेले खाने का मन ना हो तो मैं आ जाऊं आपको कंपनी देने वो कुछ बोली नही चुप रही मुझे लगा उसे मेरी बात बुरी लगी हो शायद मैंने कहा मैं मज़ाक कर रहा था वैसे आपने कॉल क्यों कि कोई खास वजह वो थोड़ा रुक कर बोली नही बस ऐसे ही बोर हो रही थी तो सोचा तुमसे ही बात कर लूं वैसे आज तुम बाहर से ही चले गए अंदर भी नही आये, मैंने कहा अंदर आने की वजह ही नही थी इसलिए नही आया और फिर रोज रोज अंदर आऊंगा तो आपके पड़ोसी क्या सोचेंगे वो फिर से चुप हो गयी उसकी सांसों की आवाज़ आ रही थी फिर वो बोली पड़ोसी मुझसे ज्यादा मतलब नही रखते और ना ही मैं उनसे मैंने कहा फिर तो लोग और भी बातें बनाएंगे आपके और मेरे बारे में वो बोली संजय वो सब मैं नही जानती जिसे जो कहना है कहने दो पर कई कल तुम मेरे साथ डिनर कर सकते हो प्लीज….. अब मेरी बोलती बंद हो गयी कहां मुझे लगा था वो मेरी बात से नाराज हुई है और कहां अभी वो मुझे अपने साथ डिनर के लिए इनवाइट कर रही थी….. मेरे मन मे फिर से लड्डू फूटा पर मैंने साधारण तरीके से उसे रिप्लाई दिया अरे सोनम जी कहाँ मैं लेबर क्लास इंसान आपकी मेड का चचेरा भाई क्यों मुझे झाड़ पे चढ़ा रही हो….. मेरी बात का उसने कोई जवाब नही दिया बस उसकी सांसे मुझे सुनाई देती रहीं वो बोली यानी कि तुम नही आओगे मैंने कहा सोनम जी मेरा मतलब है कि मैं आ सकता हूँ वो कोई बड़ी बात नही है पर मेरे जैसे छोटे इंसान से आपको थोड़ी दूरी बना कर ही रखनी चाहिए आप बड़े लोग हैं और हम साधारण गरीब लोग हमारी ज्यादा नजदीकी लोगों को बुरी लग सकती है वो इस बार थोड़े सख्त लहजे में बोली तुम आओगे या नही बस हां या ना बोलो मैंने कहा सोनम जी मैंने तो आपसे वादा किया है आप रात के वो मेरी बात काटते हुए बोली हां हां पता है रात के दो बजे भी आ जाओगे पर उस टाइम बुलाने का मेरा कोई इरादा नही है वरना सच मे पड़ोसियों क्या अच्छा नही लगेगा पर डिनर टाइम 8 बजे से 9 बजे तक होता है इस टाइम आ सकते हो तुम बाकी भाड़ में जाएं पड़ोसी मैंने हंसते हुए कहा ठीक है तो मैं आ जाऊंगा कल आपकी खिदमत में वो खुश हो गयी फिर बोली तुम वेजिटेरियन हो या नॉनवेज खाते हो मैंने कहा सोनम जी मीट नही खाता बाकी अंडे खा लेता हूँ वो बोली ह्म्म्म मेरा भी ऐसा ही है फिर थोड़ी देर हमारी और बातें होती रहीं…..
फिर बबिता आवाज़ें देने लगी और मैंने कहा सोनम खाना खाने जाना है मैंने इस बार उसके नाम के साथ जी नही लगाया जानबूझ कर उसने भी इस पर खास ध्यान ना देते हुए कहा ok जाओ डिनर करो फिर उसने कहा व्हाट्सएप्प नही चलाते क्या मैंने कहा नही वो बोली इनस्टॉल कर लो मुझे आराम हो जाएगा मैंने कहा ठीक है करता हूँ…. ok bye सोनम जी उसने कहा bye संजय और मैने कॉल काट कर अपने व्हाट्सएप्प डाउनलोड किया फिर नीचे आ गया और खाना खाते खाते व्हाट्सएप्प पर एकाउंट बना कर सोनम को मैसेज किया hi और उसकी dp ओपन की इस तस्वीर में वो बड़ी खूबसूरत लग रही थी ब्लू सूट में कही रोड साइड पर ली हुई सेल्फी थी ये फिर मैं फोन साइड में रख कर खाना खाने लगा….. खाना खाते हुए 3 फ़ोन की मैसेज टोन 3 बार बजी पर मैंने खाना खत्म कर के हाथ धो कर ही फोन उठाया….. देखा तो सोनम के 3 रिप्लाई थे hi…. देखो संजय कल तुम मेरे यहाँ डिनर पर आ रहे हो ये बात बबिता को मत बताना…..
फ्री हो तो मैसेज करना…. मैने रिप्लाई किया ok सोनम जी मैं बबिता को कुछ नही बताऊंगा अभी मैं फ्री हूँ थोड़ी देर खाना खा लिया मैंने….
मैसेज जाते ही वो ऑनलाइन हुई और बोली ठीक है फिर उसने अगला मैसेज किया और बोली संजय देखो मुझे अमीर गरीब ऊंचा नीचा ये सब बातें समझ नही आती तुम अच्छे इंसान हो समझदार हो मैं बस थोड़ा सा टाइम तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूं प्लीज मुझे गलत मत समझना मैंने रिप्लाई किया अरे नही सोनम जी आप गलत ना हो ना मैं आपको गलत समझ रहा हूँ ना आपको गलत कह रहा हूँ मैं तो बस आपको दुनियदारी क़े बारे में बता रहा था उसने रिप्लाई किया और लिखा दुनिया बहोत कमीनी है संजय ये दुनिया कभी आ कर मुझसे ये नही पूछती की इतना बड़ा दिन अकेले कैसे गुजारती हूँ मैं मैंने कहा सोनम दुनिया किसी का दुख देखने नही आती पर किसी को सुखी देख कर लोगों को जलन जरूर होने लगती है वो बोली भाड़ में जाये ऐसी दुनिया मुझे क्या करना है मैंने भी स्माइली सेंड कर दी और कहा सही है भाड़ में जाए दुनिया फिर मैंने पूछा आपने खाना खाया वो बोली अभी नही मैंने कहा पहले खाना खाओ फिर बात करेंगे वो बोली ठीक है और फिर वो offline हो गयी, तभी बबिता काम खत्म कर के आ गयी और बोली चलें भैया मैंने कहा हाँ चलो फिर हम पार्क की ओर चल दिये बातें करते हुए वो बताने लगी कि आज मैडम के यहां वो पहुंची तो मैडम उस से बार बार मेरे बारे में पूछ रही थी जैसे परिवार में कौन कौन है शादी हुई या नही अभी फिक्स हुई कि नही और कई सारी बातें फिर वो मेरा हाथ पकड़ते हुए बोली भैया लगता है जल्दी ही तुम्हारा जुगाड़ बन जायेगा मैंने कहा क्यों ऐसा क्या हुआ वो मुस्कुराते हुए बोली पहले हम मज़े करते थे तो मुझे कम से कम आधा घंटा मैडम को गरम करने में लगता था उन्हें चूम चाट सहला के मूड में लाती थी पर आज तो बस 15 मिनट में ही वो गरम भी हो गईं और ठण्डी भी और आज बहोत जोश में थीं हम बातें करते हुए पार्क में आ गए थे और अपनी रोज वाली बेंच पर बैठ गए मैंने बबिता की टांगो पर हाथ रख कर सहलाते हुए पूछा बबिता सोनम की बुर कैसी है नंगी कैसी लगती है वो बबिता भी मेरे लंड पर हाथ फ़िराते हुए बोली भैया मैडम की बुर भी मेरे जैसी ही है बस उनकी क्लिट नही है मतलब जरा सी है बाकी उनकी चुचियाँ एकदम मस्त है मैं तो जी भर के चूसती हूँ उनके निप्पल मैंने कहा मुझे भी चुसनी हैं उसकी चुचियाँ वो तुनक कर बोली आपने ही तो मना किया हुआ है वरना मेरा मन तो कहता है मैं उनसे बता दूँ हम दोनो आपस मे मज़े लेते हैं और वो चाहें तो मैं उनका भी जुगाड़ करवा दूँ मैंने कहा मैं ये चाहता हूँ की ये बात वो तुमसे कहें वो सर हिलाते हुए बोली वो तो शायद नही कहेंगी मैडम बहुत शांत और संकोची हैं वो जल्दी कुछ कहती नही किसी से मेरे भी उनके यहां 7 महीने काम करने के बाद वो थोड़ा खुल कर बात करना शुरू की मुझसे मैंने कहा चलो देखते हैं क्या होता है फिलहाल तो मेरा मन कर रहा है अपनी बबिता रानी की नंगी गांड़ देखने का एक बार दिखा दे ना वो मेरी बात सुन कर मुस्कुराने लगी फिर बोली यहाँ पार्क में ये सब करने का मन क्यों होता है आपका घर चलो आराम से मेरी गांड़ देखो चाटो जो मन हो सो करो मैंने कहा यार ऐसे पब्लिक प्लेस में नंगापन करने में अलग ही exitment होता है समझा कर वो आंखे नचाती हुई बोली हां समझ रही हूं मैं किसी दिन ये ना कहना पब्लिक प्लेस में चोदने का मन कर रहा है और फिर वो उठ खड़ी हुई एक बार चारो ओर देख कर तसल्ली करने के बाद उसने झटके से कुर्ती उठा कर लेगिंग और पैंटी खिसका दी चूतड़ों से और अपने नंगे चूतड़ों का दर्शन कराने लगी मैं उसकी गांड़ सहलाने लगा और फिर एक थप्पड़ मार दिया उसके चूतड़ पर वो सिसक उठी मैंने कहा हां रानी मन तो करता है कि तुझे बीच सड़क कर नंगी कर के चोदू वो सिसकते हुए बोली हाय भैया अपनी बहन को कोई सड़क पर थोड़े चोदता है चोदना है तो घर मे चोदो फिर मैं उसके पीछे घुटनो पर बैठ गया और उसके चूतड़ फैला कर मुह बबिता की गांड़ में घुसा दिया और उसकी गांड़ अच्छे से चाटने लगा वो आहें भरने लगी पर वो चौकन्नी भी थी और चारो ओर देख रही थी जी भर कर डेढ़ दो मिनट उसकी गांड़ चाटने के बाद मैं खड़ा हुआ और उसे अपनी ओर घुमा कर खड़ी कर दिया उसने अपने कपड़े सही किये और बिना मेरे कुछ बोले मेरे लोअर में हाथ डाल कर लंड को बाहर निकाल कर झुक कर सुपाड़े को चाटने लगी 5-7 बार जीभ फिरा कर उसने लंड मुह में भर लिया और गर्दन हिला हिला कर चुसने लगी……
फिर खड़ी हो कर बोली बस बाकी घर चल कर फिर हम घर की ओर चल पड़े चाची दरवाज़े पर ही खड़ी थीं हम सब अंदर आ गये चाची ने गेट लॉक किया बबिता कमरे में चली गईं चाची मेरे पास आ कर बोली संजय कल मेरा एक समान ला देना मैंने कहा चाची अभय गया तो था बाजार उसी से मंजवा लेती वो धीरे से बोली हर चीज उस से नही मंजवा सकती ना मेरे कान खड़े हो गए लंड तो पहले ही खड़ा था मैंने भी धीरे से कहा क्या लाना है चाची वो बोली बाल साफ करने वाली क्रीम मैंने कहा ओह ठीक है ला दूंगा फिर वो मेरे हाथ मे कुछ पैसे देते हुए बोली ये पैसे बचे थे सामान में अभय ने वापस किये हैं मैंने कहा अब इन्हें तुम ही रखो चाची और फिर मैं कमरे में आ गया मैंने अंदर आकर जल्दी से दरवाजा बंद कर के कुंडी लगाई और लाइट्स ऑन कर दी कमरे में तेज रोशनी फैल गयी फिर मैं अपने कपड़े उतारने लगा लोअर बनियान उतार कर फेंक दी मैंने सिर्फ अंडरवियर था मेरे बदन पर और फिर मैं बबिता के पास आ गया वो अलमारी के पास खड़ी अपने बाल संवार रही थी मैंने उसे पीछे से बाहों में भर लिया और उसकी नरम भारी में गांड़ में लंड फंसा कर उसके जिस्म को सहलाते हुए उसकी गर्दन को चाटने लगा उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख कर आंखे बंद कर ली मैंने कुछ देर उसकी गर्दन गालों और कानों को चूमा चाटा फिर उसका कुर्ता पकड़ कर ऊपर उठाते हुए निकाल कर फेंक दिया उसके बदन पर मेरी लायी हुई ब्रा थी नई वाली जिसमे उसकी चुचियाँ बाहर लटकी आ रही थीं मैंने उसके हाथ ऊपर उठाए और उसकी नंगी पीठ पर जीभ फिराने लगा वो सिसकने लगी फिर धीरे से बोली थोड़ी देर रुक जाओ ना अभी बाहर सब जाग रहे होंगे मैंने कहा जागने दो ना उन्हें हम जल्दी से निपट कर सोते हैं और जीभ फ़िराते हुए उसकी आर्मपिट के बालों को चाटने लगा वो एकदम से गनगना गयी मेरे बाल मुठ्ठी में पकड़ कर मुझे खींच कर अपनी एक चुंची ब्रा से निकाल कर मेरे होंठो पर निप्पल रगड़ते हुए बोली चुंची पियो ना संजू वहां क्या चाट रहे हो मैंने उसका निप्पल चाट कर मुह में भर लिया और जोर से चुसने लगा फिर चुंची मुह से निकाल के चुंची पर से जीभ फ़िराते हुए मैं फिर से उसकी आर्मपिट तक पहुंच गया और वो सिसकने लगी जोर जोर से काफी देर तक मैं उसके बदन के एक एक अंग को चूसता चाटता रहा….. और फिर वो चुदने के लिए तड़पने सी लगी….. औरबोली भैया अब चोद दो ना कितना तरसाओगे…..
continued…

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