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अनैतिक संबंध : भाग २०

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फ्रेंड्स
मैं आकांक्षा अग्रवाल, उम्र १८ वर्ष तो लंबाई ५’६ इंच, शरीर सुडौल तो दोनों चूचियां टाईट और शेप में, जांघें चिकनी और उसके बीच चूत उसे देख तो बूढ़े का लन्ड भी खड़ा हो जाए, पिछले सप्ताह भैया के साथ सेक्स की फिर सम्भोग क्रिया कर चूत की सील तुड़वा ली तो भैया के साथ मुझे दुबारा संभोग सुख लेना था हालांकि मॉम भी हम दोनों के संबंध से वाकिफ हो चुकीं थी तो घर के अंदर डैड के अलावा किसी से भी कोई डर नहीं था और मैं उस शाम भैया के रूम गई तो वो बेड पर आराम कर रहे थे, मुझे देख पूछे ” और क्लास की थी या बंक करके बॉयफ्रेंड के साथ घूम फिर रही थी
( मैं भैया के पास बैठी ) तुम ही तो मेरे बॉयफ्रेंड हो क्यों साथ चलोगे घूमने फिरने
( विशाल बोला ) क्यों नहीं आज रात कही पार्टी है क्या
( मैं झुककर विशाल के गाल चूम ली ) हां मेरे साथ मेरे बेड पर
( विशाल उठकर बैठा ) मैं चला मार्केट और रात तो डैड भी आने वाले हैं
( मैं हंस दी ) ओह तो मॉम उनको संभालेगी तुमको तो सिर्फ मॉम की पड़ी है ” फिर विशाल उठकर वाशरूम चला गया तो मैं उठकर अपने रूम गई और मिनी स्कर्ट साथ ही टॉप्स पहन ली ताकि विशाल के साथ घूमने जाऊं और पार्क में बैठकर थोड़ी देर तक रोमांस करूं, मैं डाइनिंग हॉल आई तो मॉम मुझे देख पूछी ” किधर जा रही हो
( मैं सोफा पर बैठकर सैंडल पहनने लगी ) थोड़ी देर पार्क में घुमुंगी फिर वापस
( मॉम हंस दी ) अच्छा तो विशाल के साथ चली जाओ, इतने में भैया रूम से निकले फिर दोनों साथ में घूमने निकल पड़े तो सड़क पर आते ही मैं विशाल का हाथ पकड़ ली और वो मुझे देखता हुआ पूछा ” क्या बात है तुम तो इतनी हॉट और सेक्सी लग रही हो की..
( मैं बोली ) तो क्या करोगे बोलो तो सही
( विशाल मेरे बूब्स पर कोहनी मार बोला ) कुछ खास नहीं आज पार्क में बियर पीकर तुम्हें मजा देंगे
( मैं बोली ) क्यों घर में क्या प्रोब्लम पार्क में ये सब करते कोई देख लिया तो फिर ” भैया कुछ नही बोले और दोनों शॉपिंग मॉल पहुंचे जहां की वो मुझे एक जगह पर छोड़कर वाईन शॉप की ओर चला गया तो मैं चुपचाप खड़ी थी लेकिन नजरें इधर उधर दी तो देखी की दो लड़के तुझे घूर रहे हैं, स्कर्ट तो घुटनों से ऊपर था तो जांघो का कुछ हिस्सा उन्हें दिख रहा था और मैं भी बोल्ड लड़की की तरह उसकी ओर देखने लगी, मेरे गोल मुलायम बूब्स को वो देखते हुए अपने ओंठ पर जीभ फेर रहे थे तो मैं उन्हें देख रही थी और तभी विशाल आया, उसके हाथ में एक पोलिबेग था और अब मैं जानबूझकर विशाल के हाथ पकड़ ली फिर उसके साथ चलने लगी लेकिन मुड़कर उन्हें भी ठेंगा दिखा दी ताकि उन्हें लगे की ये मेरा बॉयफ्रेंड है। दोनों साथ चलते हुए कानपुर नगर निगम के पार्क में घुसे जिसमें पेड़ पौधे तो थे लेकिन उसकी देखभाल अच्छे से नहीं होती थी और फिर विशाल के साथ मैं पार्क के एक कोने में गई जिधर शायद किसी के आने की संभावना नही थी।
पार्क के झाड़ियों के बीच में समतल भूमि जिस पर छोटे छोटे घांस थे और दोनों वहीं पर बैठे, फिलहाल तो पार्क की एक भेपुर लाइट से रोशनी थी और विशाल पोलिबेग से बियर की बोतल निकाला जबकि मैं अपने दोनों पैर सीधे कर बैठ गई, मेरी स्कर्ट जांघो को अर्ध रूप से ढक रही थी तो विशाल डेस्पोजिबल ग्लास रख बियर की बोतल खोला और ग्लास में डालने लगा फिर सिगरेट जलाया, दोनों ग्लास उठाएं तो विशाल ड्रिंक्स लेता हुआ सिगरेट फूंकने लगा ” क्यों आकांक्षा मार्केट में तो तुम दोनों छोकरों को बहुत लाइन दे रही थी
( मैं बियर पीते हुए उसके हाथ से सिगरेट ले ली ) ओह यार क्या है की वो मुझे घूर रहे थे तो मैं सोची की थोड़ा मजा लिया जाए ” विशाल ग्लास में दुबारा बियर डालने लगा और मेरे जांघो को सहलाता हुआ हाथ को जांघो के बीच लगाया और पेंटी के ऊपर से ही मेरी चूत के मांसल हिस्से को पकड़ मिंजने लगा तो मैं छटपटा गई ” आह आउच ये क्या कर रहे हो जान
( विशाल बुर को छोड़ मेरे बूब्स पर हाथ लगाया फिर दबाने लगा ) तू तो उन दोनों को घूर रही थी क्या उसे फांस कर मुझे…
( मैं बोली ) चल ग्लास में बियर डाल और फिर मजे कर ” तो विशाल मेरे बूब्स पर से हाथ हटाया फिर ग्लास में बियर डालकर सिगरेट जलाया तो मैं बियर पीने लगी लेकिन उसकी ओर खिसक कर उसके पेंट के बटन को खोलने लगी, विशाल भी पैर सीधा कर बैठा हुआ था तो उसके चढ्ढी से लन्ड बाहर की जोकि सुस्त पड़ा हुआ था और उसे हाथ में लिए हिलाना शुरू की तो विशाल अब ग्लास रखकर मेरे टॉप्स में हाथ घुसाया और चूची को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, मैं बियर पीकर मस्त थी तो विशाल मेरे बूब्स दबाते हुए सिगरेट फूंक रहा था। मैं अब उसके लन्ड को छोड़ दी तो वो सिगरेट फेंक कर मुझे अपने जांघो पर बिठाया, बिल्कुल टांगो को उसके कमर में लपेटे बैठ गई फिर उसके गाल चूमने लगी तो भैया भी मुझे चूम रहे थे और दोनों एक दूसरे से लिपटे चुम्मा चाटी में मस्त थे, फिर विशाल मेरे गर्दन में हाथ डाल चेहरा को सामने किया और मेरे रसीले ओंठ को मुंह में लेकर चूसने लगा तो मैं विशाल के पीठ सहलाने लगी और कुछ देर मेरे ओंठ को चूसा होगा की मेरी चूत खुजलाने लगी लेकिन पार्क में सम्भोग क्रिया कर पाना मुश्किल था, मैं उसके मुंह से ओंठ निकाल उसके मुंह में जीभ घुसाई फिर वो मेरी जीभ चूसने लगा और मैं उसके छाती से बूब्स रगड़ रही थी, मेरी बंद आंखें तो मुंह में जीभ घुसाए मुझे कामुकता की ओर ले जा रहा था और तभी विशाल जीभ निकाल दिया ” अब तू इसे चूस साली ” मैं भैया के गोद से उतर गई फिर उनके सामने खड़ी हुई, इधर उधर देखी ताकि दोनों के हरकत को कोई देख तो नहीं रहा फिर पेंटी उतार कर रखी और अब विशाल के लन्ड के सामने कोहनी के बल हुई और उसके लन्ड पकड़ चूमने लगी तो भैया मेरे टॉप्स को थोड़ा ऊपर कर चूची को दबाने लगे और मैं उनके लन्ड मुंह में लेकर चूसने लगी, विशाल का हाथ चूची पर था साथ ही वो मेरे स्कर्ट को कमर तक किए चूतड सहलाने लगा और मैं अब मुंह में लन्ड लिए मुखमैथुन करने लगी तो विशाल आहें भर रहा था ” आह उह उई अभी तुझे यहीं चोदूंगा ” लेकिन मैं लन्ड चूसती रही और विशाल मेरी चूत में चूतड की ओर से उंगली घुसाया और कुरेदने लगा।
मैं तो विशाल के लन्ड मुंह में लिए चेहरा का झटका देते हुए मुखमैथुन कर रही थी और वो मेरी चूत में उंगली करता हुआ मेरे चूची को दबाए जा रहा था, मेरी मुंह से लार टपकने लगा फिर लन्ड को मुंह से निकाल जीभ से चाटने लगी और विशाल बोला ” अब तू मेरे सामने खड़ी हो जा ” मैं खड़ी हुई फिर पार्क में लगे बेंच की ओर उसको इशारा की तो विशाल और मैं उस बेंच पर आकर बैठे लेकिन मैं बेंच पर बैठे टांगें चिहारे थी तो विशाल मेरे पैर के सामने बैठा हुआ मेरी बुर को चाटने लगा जोकि पूर्णतः गर्म हो चुकी थी और विशाल उसकी फांकों को अलग किए जीभ घुसाए चाटे जा रहा था तो मैं चुदाई को आतुर थी लेकिन इतने में मैं बोल पड़ी ” आह आआआह्हह उई अब रस निकल जाएगी ” तो विशाल मेरी बुर को चाटता रहा, रस निकल गया फिर भी जीभ से बुर को चाटने मे मस्त था, मैं थोड़ी ढीली पड़ गई और बोली ” विशाल बियर बची हुई है पी ली जाए फिर तेरा लन्ड चूसकर उसको शांत कर देती हूं ” विशाल मेरे बगल में बैठा हुआ ग्लास में बियर डाला और दोनों पीने लगे तो विशाल की पेंट उसके घुटने तक आ चुकी थी लेकिन मेरी जिस्म कपड़ों से ढकी हुई थी और बुर नग्न थी तो स्कर्ट के अंदर, विशाल सिगरेट जलाया तो मैं बियर पीकर उसके सामने घुटनो के बल बैठ गई, अब उसके लन्ड को मुंह में लिए चूसना शुरू की तो विशाल मेरे सर पर हाथ रखकर चूतड ऊपर नीचे करते हुए मेरे मुंह में लन्ड का धक्का देने लगा तो मैं उनके लन्ड को चूसते हुए मस्त थी, अब शाम के ०७:३० बजे थे तो निर्जन पार्क में मैं चुदवा लेती यदि साथ में गर्भनिरोधक दवाई लेकर आई होती तभी विशाल आहें भरने लगा ” आह ओह उह और तेज चूस आआआआह्हह्ह मजा आ गया साली तू अठारह साल की होकर इतनी मस्त चुस्ती है की तेरी मॉम तुझे देख शरमा जाए ” और फिर मैं भैया के लन्ड को मुंह से निकाल चाटने लगी तो विशाल बोला ” क्यों यहां चुदाई में क्या प्रोब्लम
( मैं उसके लन्ड पकड़ हिलाने लगी ) क्यों मुझे पेट से करने का इरादा है ” फिर मैं भैया के लन्ड को हिलाते हुए मुंह में ली और चूसते हुए मस्त थी तो विशाल मेरे मुंह में लन्ड का धक्का देते हुए मस्त था और मैं मुखमैथुन करते हुए, विशाल अब आहें भरने लगा ” आह उह उई आआआह्हह मेरा निकला ” तो मैं लन्ड तेजी से चूसते रही और कुछ देर में उनके लन्ड से वीर्य स्खलित होकर मेरे मुंह में गिरने लगा जिसका स्वाद पाकर मैं मस्त हो गई, झट से पानी पीकर मुंह का स्वाद बदल ली तो विशाल लन्ड को धोकर पेंट पहना और मैं पेंटी पहन ली फिर दोनों कुछ देर बाद घर की ओर निकल पड़े।

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